मंगलवार, 29 जुलाई 2014

वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग




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भारत की स्वतंत्रता के बाद वैज्ञानिक-तकनीकी शब्दावली के लिए शिक्षा मंत्रालय ने सन् १९५० में बोर्ड की स्थापना की। सन् १९५२ में बोर्ड के तत्त्वावधान में शब्दावली निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ। अन्तत: १९६० में केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय की स्थापना हुई। इस प्रकार विभिन्न अवसरों पर तैयार शब्दावली को 'पारिभाषिक शब्द संग्रह' शीर्षक से प्रकाशित किया गया, जिसका उद्देश्य एक ओर वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के समन्वय कार्य के लिए आधार प्रदान करना था और दूसरी ओर अन्तरिम अवधि में लेखकों को नई संकल्पनाओं के लिए सर्वसम्मत पारिभाषिक शब्द प्रदान करना था।

शब्दावली निर्माण-नीति

आयोग द्वारा शब्दावली निर्माण के सिद्धांतों का सार इस प्रकार है:
१) अन्तर्राष्ट्रीय शब्दों को ज्यों का त्यों रचा गया और केवल उनका लिप्यंतरण ही किया गया।
(अ) तत्त्वों तथा यौगिकों के नाम, यथा, हाइड्रोजन, कार्बन आदि
(आ) भार, माप तथा भौतिक परिमाणों की इकाइयाँ यथा, कैलोरी, डाइन, एम्पीयर्स आदि
(इ) ऐसे शब्द, जो व्यक्तियों के नाम पर बनाए गए हैं, यथा फ़ारेनहाइट, एम्पीयर, वोल्टामीटर
(ई) वनस्पति-विज्ञान, जीव-विज्ञान, भूविज्ञान आदि विज्ञानों में द्विपदी नाम पद्धति है।
(उ) स्थिरांक
(ऊ) रेडियो, पेट्रोल, रेडार, इलेक्ट्रोन, प्रोटान, न्यूट्रान आदि
(ए) संख्यांक प्रतीक
२) अखिल भारतीय समानकों का निर्माण संस्कृत के आधार पर किया गया है।
३) क्षेत्रीय प्रकृति के ऐसे हिन्दी शब्दों को, जो हिन्दी में प्रचलित हैं, यथावत् रख लिया गया है। जैसे, जीव, चूना, बिजली आदि शब्द.
विश्लेषण से ज्ञात हुआ कि ७० प्रतिशत समानक संस्कृत मूलक थे, २० प्रतिशत अन्तर्राष्ट्रीय शब्दावली से लिप्यंतरित और १० प्रतिशत से कम क्षेत्रीय हिन्दी शब्द थे। यह स्थिति स्नातक स्तरीय शब्दावली की थी, जबकि स्नातकोत्तर स्तरीय शब्दावली में, अन्तर्राष्ट्रीय शब्दावली का प्रयोग अपेक्षाकृत बहुत अधिक है।
यह विषय इतना विस्तृत है कि पृथक से शोध का विषय है फिर भी इतना कहा जा सकता है कि इस प्रक्रिया में 'हिन्दी के विकासोन्मुख स्वरूप' पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। वाष्पपरिकोष्ठित, चलतुल्यावयवता, वैदयुरौप्यरंजन, वैयुतनिकेलरंजन, आश्लेष्य विवक्रमण बिन्दु आदि शब्दों से बचना ठीक रहेगा। यहाँ भाषिक शब्दावली की समस्याओं पर विचार करना अपेक्षित नहीं है फिर भी एकरूपता तथा मानक रूपों के स्थिरीकरण की ओर अभी विशेष ध्यान देना है।

किये गये कार्य

विभिन्न विज्ञानों, मानविकी तथा सामाजिक विज्ञानों की मूलभूत शब्दावली के निर्माण का कार्य सन् १९७१ में पूरा कर लिया गया। तत्पश्चात् उक्त शब्दावली के समन्वय तथा समेकन का कार्य प्रारंभ हुआ। इन सभी शब्द संग्रहों की स्थिति इस प्रकार है:
नाम ---- शब्द संख्या
१) वृहत् पारिभाषिक शब्द संग्रह (विज्ञान खंड) -- १,३०,०००
२) वृहत् पारिभ आषइक शब्द संग्रह (मानविकी खंड) -- ८०,०००
३) वृहत् पारिभाषिक शब्द संग्रह (आयुर्विज्ञान) -- ५०,०००
४) वृहत् पारिभाषिक शब्द संग्रह (इंजीनियरी) -- ५०,०००
५) वृहत् पारिभाषिक शब्द संग्रह (रक्षा) -- ४०,०००
६) वृहत् पारिभाषिक शब्द संग्रह (कृषि) -- १७,५००
७) समेकित प्रशासन शब्दावली (प्रशासन) -- ८,०००
योग -- २,७५,५०० शब्द

इन्हें भी देखें

बाहरी कड़ियाँ

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