रविवार, 6 जुलाई 2014

पत्राचार पाठ्यक्रम







दृश्य-श्रव्य
हिंदी ऑडियो कैसेट्स
हिंदी वीडियो कैसेट्स
सी.डी.


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पत्राचार पाठ्यक्रम

दृश्य-श्रव्य सामग्री का विवरण

ऑडियो कैसेट्स

            पत्राचार पाठ्यक्रम विभाग ने अंग्रेज़ी एवं 8 भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में विवरण सहित ऑडियो कैसेट्स तैयार किए हैं  । ये कैसेट्स दो भागों में वाचन पुस्तिका के साथ उपलब्ध हैं ।
हिंदी ऑडियो कैसेट्स का विवरण
i
अंग्रेज़ी-हिंदी ऑडियो कैसेट (अंग्रेज़ी वाचन पुस्तिका के साथ) भाग -1 एवं 2
ii
असमिया-हिंदी ऑडियो कैसेट (असमिया वाचन पुस्तिका के साथ) भाग -1 एवं 2
iii
बंगला-हिंदी ऑडियो कैसेट (बंगला वाचन पुस्तिका के साथ) भाग -1 एवं 2
iv
कन्‍नड़-हिंदी ऑडियो कैसेट (कन्‍नड़ वाचन पुस्तिका के साथ) भाग -1 एवं 2
v
कोंकणी-हिंदी ऑडियो कैसेट (कोंकणी वाचन पुस्तिका के साथ) भाग -1 एवं 2
vi
मलयालम-हिंदी ऑडियो कैसेट (मलयालम वाचन पुस्तिका के साथ) भाग -1 एवं 2
vii
ओड़िया-हिंदी ऑडियो कैसेट (ओड़िया वाचन पुस्तिका के साथ) भाग -1 एवं 2
viii
तमिल-हिंदी ऑडियो कैसेट (तमिल वाचन पुस्तिका के साथ)
भाग -1 एवं 2
ix
तेलुगु-हिंदी ऑडियो कैसेट (तेलुगु वाचन पुस्तिका के साथ) भाग -1 एवं 2
मूल्य : रुपए 60/- प्रति सेट (दो कैसेट्स, भाग-1 एवं 2 पैकिंग तथा डाक शुल्क सहित)
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वीडियो कैसेट्स

            पत्राचार पाठ्यक्रम विभाग ने विभिन्‍न्‍न विषयों पर वीडियो कैसेट्स तैयार किए हैं । इन कैसेटों में लगभग आधे घंटे की अवधि की फिल्म होती है जिसमें भारतीय संस्कृति का समुचित पुट देते हुए हिंदी की कपितय आधारभूत और प्रारंभिक वाक्य संरचनाओं, तथा व्याकरणिक बिंदुओं पर ज़ोर दिया गया है । इनमें फिल्म के कथानक का ताना-बाना बड़े रोचक ढ़ंग से बुना गया है । फ़िल्म में इसकी प्रस्तुति बड़ी ही प्रभावपूर्ण बन पड़ी है जो दर्शक को वास्तव में आनंदित करती है । ये वीडियो फ़िल्में अहिंदी भाषियों के लिए उतनी ही रुचिकर होंगी जितनी कि विदेशियों के लिए ।
वीडियो कैसेटों का संक्षिप्‍त विवरण इस प्रकार है :-
i
वेलकम टू इंडिया - हिंदी सीखें
            इस कैसेट में विभिन्‍न्‍न परिस्थितियों में वार्तालाप के लिए आवश्यक हिंदी वाक्यों को रोचक ढ़ंग से प्रस्तुत किया गया है । होटल, बैंक या रेस्तराँ में किसी अपरिचित से मिलते समय किए जाने वाले हिंदी के प्रयोग को सामान्य वार्तालाप के रूप में प्रस्तुत किया गया है ।
ii
बात करें शुरू : 'आप', 'तुम' और 'तू' (सर्वनामों का प्रयोग)
            इस कैसेट में मध्यम पुरुष सर्वनाम 'तुम' के विविध प्रयोगों को दर्शाया गया है । हिंदी में मध्यम पुरुष के लिए तीन सर्वनाम प्रयोग में लाए जाते हैं, 'तू', 'तुम' और 'आप' । अपनी आयु से छोटे , साधारण तथा प्रियजनों के लिए 'तू' सर्वनाम का प्रयोग किया जाता है ।कभी-कभी भगवान के लिए भी 'तू' का प्रयोग किया जाता है । 'तुम' का प्रयोग अपने से छोटे अथवा अपने बराबर से या बहुत आत्मीय के लिए होता है । 'आप' संबोधन विनम्रता तथा आदर का भाव दर्शाता है । इस कैसेट में इन सर्वनामों के प्रयोग के बारे में बताया गया है ।
iii
कर्ता और क्रिया का मेल : बीच-बीच में “ने” का खेल
            हिंदी वाक्य संरचना के तीन महत्वपूर्ण अंग हैं - कर्ता, कर्म और क्रिया । इस कैसेट में कर्ता और क्रिया की अन्विति को तथा 'ने' परसर्ग क्रिया के रूप-परिवर्तन को समझाया गया है । भूतकालिक वाक्य बनाते समय कर्ता और क्रिया के तालमेल के लिए - 'आ / ए / ई' नमूने का ध्यान रखा जाता है । क्रियाएँ सकर्मक तथा अकर्मक होती हैं । भूतकाल में उनमें क्या अंतर आता है, इसके बारे में इस कैसेट में रोचक ढ़ंग से बताया गया है ।
iv
वाक्य में “को” का योग : प्रकट करें विविध प्रयोग
           इस कैसेट में हिंदी वाक्य में 'को' के प्रयोग को सरल एवं रोचक ढ़ंग से प्रस्तुत किया गया है । 'को' का प्रयोग हिंदी वाक्यों में चेतन कर्म के साथ तथा विभिन्‍न्‍न स्थितियों में चेतन कर्ता के साथ होता है । जैसे - शारीरिक कष्‍ट या रोग बताने में, पसंद, रुचि आदि दर्शाने में, जानना, मालूम होना आदि के अर्थो में तथा जरूरत, आभार, विवशता आदि बताने में । इस कैसेट से इन सभी प्रयोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है ।
v
हिंदी में लिंग का आधार : थोड़ा व्याकरण, थोड़ा व्यवहार
            इस कैसेट में हिंदी संज्ञाओं के लिंग पहचानने संबंधी को स्‍पष्‍ट किया गया है हिंदी लिखने के लिए लिंग का ज्ञान अनिवार्य है । वाक्य में संज्ञा का लिंग उसके साथ प्रयुक्‍त कारक जैसे - 'का', 'की', सर्वनामों जैसे - 'मेरा', 'मेरी' तथा विशेषणों जैसे - 'बड़ा', 'बड़ी' के प्रयोग पहचाना जा सकता है । सामान्यत: - अ,आ, से अंत होने वाले अधिकांश शब्द पुल्लिंग होते हैं - इ,ई से अंत होने वाले शब्द स्त्रीलिंग होते हैं । भाववाचक संज्ञा, जिसके अंत में - पा, पन, आव आदि प्रत्यय हो, प्राय: पुल्लिंग होती हैं । इस कैसेट से लिंग के बारे में सही जानकारी प्राप्‍त की जा सकती है
vi
हिंदी में “तो” “भी” और “ही” : प्रयोग कीजिए सही-सही
            इस कैसेट में 'तो', 'भी' और 'ही' निपातों / अव्ययों के प्रयोग को समझाया गया है । इन अव्ययों के प्रयोग से वाक्य के अर्थ और भाव तो बदल जाते हैं किंतु इनका अपना रूप नहीं बदलता । 'तो' अव्यय किसी बात पर ज़ोर देने अथवा निश्‍चय और आग्रह का भाव देने के लिए प्रयुक्‍त किया जाता है । 'भी' का प्रयोग तुलना व समानता के लिए तथा वाक्य में बल देने के लिए किया जाता है । कभी-कभी आश्‍चर्य व संदेहसूचक वाक्यों में 'भी' का प्रयोग होता है ।  'ही' निश्‍चयात्मक भाव का अव्यय है । यहाँ भी 'तो' व 'भी' के समान विशेष भाव को प्रकट करता है । कभी-कभी 'ही' किसी कार्य के तुरंत होने या घटित होने का भाव देता है ।
vii
मुख्य क्रिया के साथ रंजक क्रिया : मिलकर बनाए संयुक्‍त क्रिया
            हिंदी वाक्य रचना में संयुक्‍त क्रिया का महत्वपूर्ण स्थान है । संयुक्‍त क्रिया दो क्रियाओं के मेल से बनती है । इमें पहली है - 'मुख्य क्रिया' और दूसरी है 'रंजक क्रिया' । वाक्य में पहली क्रिया का अर्थ मुख्य होता है और दूसरी क्रिया, अर्थात रंजक क्रिया, मुख्य क्रिया के अर्थ को प्रभावित करती है । इस प्रक्रिया में रंजक क्रिया अपना मूल अर्थ खो देती है । 'आना', 'जाना', 'लेना', 'देना', 'उठना', 'बैठना' आदि रंजक क्रिया के उदाहरण हैं । इस कैसेट में संयुक्‍त क्रिया के रूपों को समझाया गया है ।
viii
अन्विति से बनता वाक्य अन्यथा बन जाता वाक्य
            वाक्य में लिंग, वचन, पुरुष, काल आदि के अनुसार किया गया शब्दों का प्रयोग 'अन्विति' कहलाता है । हिंदी में क्रिया के अनुसार वाक्य के तीन प्रकार होते हैं  : कर्तावाचक, कर्मवाचक और भाववाचक । कर्तावाचक वाक्य में क्रिया का रूप कर्ता के पुरुष, वचन और लिंग के अनुसार होता है । कर्मवाचक वाक्यों में कर्ता के साथ 'ने' परसर्ग का प्रयोग होता है तथा क्रिया का रूप कर्म के पुरुष, वचन और लिंग के अनुसार होता है । भाववाचक वाक्यों में प्राय: कर्ता के साथ 'ने' और कर्म के साथ 'को' परसर्ग का प्रयोग होता है । इसमें क्रिया-रूप पुल्लिंग एकवचन में होता है, अर्थात क्रिया अपरिवर्तित रहती है । इस कैसेट में कर्ता-क्रिया अन्विति के प्रयोगों को समझाया गया है ।
ix
यदि हो सही वर्तनी का ज्ञान, हिंदी सीखना बेहद आसान
            हिंदी 'देवनागरी' लिपि में लिखी जाती है । देवनागरी लिपि वैज्ञानिक लिपि है । उसमें एकरूपता की से मानकीकरण के कई नियम निर्धारित किए गए हैं । इस कैसेट में उन्हीं नियमों की जानकारी दी गई है । इस जानकारी से वर्तनी की गलतियों को कम किया जा सकेगा और हिंदी सीखने वालों को मानक वर्तनी से परिचित कराया जा सकेगा ।
x
हिंदी में मुहावरों का सही प्रयोग
इस कैसेट में हिंदी में मुहावरों के प्रयोग के बारे में बताया गया है ।
मूल्य : रूपए 125/- प्रति वीडियो कैसेट (पैकिंग एवं डाक शुल्क सहित)
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वीडियो सी. डी.

पत्राचार पाठ्यक्रम विभाग ने विभिन्‍न्‍न व्याकरणिक बिंदुओं पर वीडियो सी.डी / वीसीडीज तैयार की हैं । सभी सी.डी./वीसीडीज अत्यंत रोचक एवं सरल ढ़ंग से तैयार की गई हैं कुछ सी.डी में दो भिन्‍न व्याकरणिक बिंदु समाहित हैं
वीडियो सी.डी. का विवरण इस प्रकार है :-
सी.डी. 1 : इस सी.डी. में निम्‍नलिखित दो व्याकरणिक बिंदुओं को दर्शाया गया है
i
वैलकम टू इंडिया - अहिंदी भाषियों और विदेशियों के लिए होटल, बाज़ार, रेस्तराँ जैसे स्थानों पर हिंदी में किए जा सकने वाले सामान्य वार्तालाप को इस भाग में प्रस्तुत किया गया है ।
ii
'आप', 'तुम' और 'तू' का प्रयोग - इसमें 'आप', 'तुम' और 'तू' सर्वनामों के विविध प्रयोगों को समझाया गया है
सी.डी. 2 : इस सी.डी. में निम्‍नलिखित दो व्याकरणिक बिंदुओं को दर्शाया गया है
i
कर्ता + 'ने' संरचना - हिंदी वाक्य संरचना के तीन महत्वपूर्ण अंगों - कर्ता, कर्म और क्रिया की अन्विति को इस सी.डी. में समझाया गया है
ii
'तो', 'भी' और 'ही' का प्रयोग - 'तो', 'भी' और 'ही' अव्ययों / निपातों के प्रयोग से वाक्य के अर्थ और भाव बदल जाते हैं किंतु उनका अपना रूप नहीं बदलता इसकी जानकारी सी.डी. के इस भाग में है
सी.डी. 3 : इस सी.डी. में जिन दो बिंदुओं पर विचार हुआ है, वे इस प्रकार हैं
i
कर्ता + 'को' का योग - इसमें हिंदी वाक्य में 'को' के प्रयोग को सरल एवं रोचक ढ़ंग से प्रस्तुत किया गया है 'को' का प्रयोग हिंदी वाक्यों में चेतन कर्म के साथ तथा विभिन्‍न्‍न स्थितियों में चेतन कर्ता के साथ होता है जैसे - शारीरिक कष्‍ट या रोग बताने में, पसंद, रुचि आदि दर्शाने में, जानना, मालूम होना आदि के अर्थो में तथा जरूरत, आभार, विवशता आदि बताने में । इस सी.डी. में इन सभी प्रयोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है ।
ii
मुहावरों का प्रयोग - यह बिंदु हिंदी में मुहावरों के प्रयोग तथा उनके अर्थ से संबंधित है । मुहावरे विशिष्‍ट अर्थ की करते हैं । मुहावरों के प्रयोग से भाषा में प्रभावोत्पादकता एवं रोचकता आ जाती है । यह सी.डी. मुहावरों की इन्हीं विशेषताओं को दर्शाती है ।
सी.डी. 4 : लिंग की पहचान

इस सी.डी. में लिंग की पहचान संबंधी सिद्धांतों को स्पष्‍ट किया गया है । संज्ञा या क्रिया के रूप का लिंग वाक्यों में प्रयुक्‍त 'मेरा-मेरी' जैसे सर्वनामों और 'बड़ा-बड़ी' जैसे विशेषणों से पहचाना जाता है । इस सी.डी. से लिंग निर्धारण के बारे में सही जानकारी प्राप्‍त की जा सकती है ।
सी.डी. 5 : इस सी.डी. में जिन दो व्याकरणिक बिंदुओं पर विचार हुआ है, वे इस प्रकार हैं
i
संयुक्‍त क्रिया - संयुक्‍त क्रिया दो क्रियाओं के मेल से बनती है । इमें पहली है - 'मुख्य क्रिया' और दूसरी है 'रंजक क्रिया' । संयुक्‍त क्रिया के विभिन्‍न्‍न रूपों को इस सी.डी. में समझाया गया है ।
ii
कर्ता - क्रिया अन्विति - हिंदी में क्रिया के रूपों के अनुसार वाक्य के तीन प्रकार होते हैं - कर्तावाचक, कर्मवाचक और भाववाचक । इस सी.डी में कर्ता-क्रिया अन्विति को विशेष रूप से समझाया गया है ।
सी.डी. 6 : इस सी.डी. में निम्‍नलिखित व्याकरणिक बिंदुओं पर विचार हुआ है
i
कर्ता - क्रिया अन्विति - हिंदी में कर्ता के लिंग, वचन, पुरुष आदि के अनुसार क्रिया का प्रयोग करना 'अन्विति' कहलाता है । कर्तावाचक वाक्य में क्रिया कर्ता के पुरुष, वचन और लिंग के अनुसार और कर्मवाचक वाक्य में कर्म के पुरुष, वचन और लिंग के अनुसार होती है । इस सी.डी. में कर्ता-क्रिया अन्विति के प्रयोगों को समझाया गया है ।
ii
वर्तनी का मानकीकरण - हिंदी की देवनागरी लिपि वैज्ञानिक लिपि है फिर भी एकरूपता की से उसमें मानकीकरण के कई नियम निर्धारित किए गए हैं । इस सी.डी में उन्हीं नियमों की जानकारी दी गई है ।
सी.डी. 7 : लर्न हिंदी -

यह सी.डी. उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्होंने हिंदी सीखना शुरु किया है और जो अपने दिन प्रतिदिन के व्यवहार के लिए हिंदी में बोलचाल और वार्तालाप का रूप सीखना चाहते हैं यहाँ उन पर्यटकों और यात्रियों के लिए भी समान रूप से उपयोगी है जो हिंदी के वार्तालाप के विभिन्‍न्‍न रूपों से परिचित होना चाहते हैं और भारत में अपनी यात्रा के दौरान उनका उपयोग वहाँ करना चाहते हैं जहाँ हिंदी आम लोगों की भाषा है
सी.डी. 8 : इस सी.डी. में बांगला माध्यम से निम्‍नलिखित बिंदुओं पर विचार हुआ है
i
हिंदी में लिंग निर्धारण
ii
कर्ता - क्रिया अन्विति
सी.डी. 9 : इस सी.डी. में मलयालम माध्यम से निम्‍नलिखित बिंदुओं पर विचार हुआ है
i
हिंदी में लिंग निर्धारण
ii
कर्ता - क्रिया अन्विति
सी.डी. 10 : इस सी.डी. में तमिल माध्यम से निम्‍नलिखित बिंदुओं पर विचार हुआ है
i
हिंदी में लिंग निर्धारण
ii
कर्ता - क्रिया अन्विति
सी.डी. 11 : संज्ञाओं एवं विशेषणों के बहुवचन रूप

इस सी.डी. में संज्ञाओं एवं विशेषणों के बहुवचन बनाने के नियमों तथा परसर्ग के प्रयोग से संज्ञाओं और विशेषणों में होने वाले परिवर्तनों को रोचक एवं प्रभावी ढ़ंग से प्रस्तुत किया गया है
सी.डी. 12 : आज्ञार्थक वाक्य संरचना

यह सी.डी. आज्ञार्थक वाक्य संरचना से संबंधित है अपने से छोटे, बड़े और हम उम्र को संबोधित करते समय क्रिया के उचित रूपों के प्रयोग की जानकारी इस सी.डी. में रोचक ढ़ंग से प्रस्तुत की गई है
सी.डी. 13 : हिंदी में कृदंत

इस सी.डी. में हिंदी के कृदंत रूपों के बारे में चर्चा की गई है इसके माध्यम से कृदंत के विभिन्‍न्‍न प्रकार तथा वाक्य में उनके सही प्रयोगों के बारे में रोचक जानकारी हासिल की जा सकती है
सी.डी. 14 : हिंदी में काल

इसमें हिंदी 'काल' के बारे में चर्चा की गई है इसके माध्यम से हिंदी के विभिन्‍न्‍न कालों तथा वाक्य में उनके सही प्रयोगों के बारे में रोचक जानकारी हासिल की जा सकती है
सी.डी. 15 : अंग्रेज़ी - हिंदी वार्तालाप पुस्तिका

यह सी.डी. अंग्रेज़ी-हिंदी वार्तालाप पुस्तिका का सी.डी. रूपांतरण है इस सी.डी. के माध्यम से विभिन्‍न्‍न स्थितियों/ परिस्थितियों में अंग्रेज़ी एवं हिंदी की सामान्य वाक्य - संरचनाएँ वार्तालाप के रूप में समझाई गई हैं
सी.डी. 16 : हिंदी का अखिल भारतीय स्वरूप भाग - 1
सी.डी. 17 : हिंदी का अखिल भारतीय स्वरूप भाग - 2

इन दो सी.डी. में हिंदी के अखिल भारतीय स्वरूप पर व्यापक प्रकाश डाला गया है यह कार्यक्रम प्रमुखत: समाज भाषाविज्ञान के के आधार पर विकसित किया गया है 
सी.डी. 18 : लोकगीत

इस सी.डी. के माध्यम से भारतीय जनमानस के विभिन्‍न्‍न संस्कारों, रीति-रिवाजों संबंधी लोकगीतों के माध्यम से विभिन्‍न्‍न राज्यों की सामासिक भारतीय संस्कृति के सामंजस्य को दर्शाया गया है
सी.डी. 19 : हिंदी में कारक चिह्न

यह कार्यक्रम हिंदी के 'कारक चिह्नों' पर आधारित है इसमें विभिन्‍न्‍न परिस्थितियों में प्रयुक्‍त होने वाले कारक के सही प्रयोग को समझाया गया है
सी.डी. 20 : उपसर्ग और प्रत्यय का तुलनात्मक अध्ययन

किसी भी शब्द विशेष के बारे में जानकारी प्राप्‍त करने के लिए 'उपसर्ग' और 'प्रत्ययों' की जानकारी आवश्यक है इसी को ध्यान में रखकर उक्‍त विषयक एक घंटे की वीडियो सी.डी. तैयार की गई है इसके माध्यम से जिज्ञासु शब्द - संरचना तथा नव शब्द - निर्माण संबंधी आवश्यक जानकारी प्राप्‍त कर सकता है
सी.डी. 21 : हिंदी की विकास यात्रा भाग - 1
सी.डी. 22 : हिंदी की विकास यात्रा भाग - 2

ये सी.डी. हिंदी की विकास यात्रा से संबंधित हैं वस्तुत: हम लोग हिंदी बोलते तो जरूर हैं परंतु उसके बारे में जानते बहुत कम हैं इस कारण हम लोग हिंदी की परंपरा से अवगत होने से वंचित रह जाते हैं जैसा कि शीर्षक से ही स्‍पष्‍ट है कि ये दोनों सी.डी. हिंदी की विकास-यात्रा को रेखांकित करती हैं ये न केवल हिंदी भाषा एवं साहित्य के छात्रों के लिए अपितु अनुसंधानकर्ताओं, सामान्य प्रयोक्‍ताओं के लिए भी समान रूप से लाभकारी होंगी
सी.डी. 23 : हिंदी में अलंकार

इस सी.डी. के माध्यम से हिंदी के विभिन्‍न्‍न अलंकारों के बारे में बोधगम्य तरीके से बताया गया है
सी.डी. 24 : हिंदी में समास

यह सी.डी. वस्तुत: एक विद्यालयीन व्याकरणिक विषय से संबंधित है इसके माध्यम से समास के विविध पक्षों को रोचक तरीके से बताने का प्रयास किया गया है
सी.डी. 25 : प्रयोजन मूलक हिंदी भाग - 1
सी.डी. 26 : प्रयोजन मूलक हिंदी भाग - 2

इन दोनों सी.डी. के माध्यम से दैनंदिन हिंदी वाक्यों के प्रयोग को समझाया गया है इनमें कार्यालय, पत्रकारिता, कानून, विज्ञापन आदि में प्रयुक्‍त होने वाली हिंदी की प्रयोजनमूलकता को दर्शाया गया है
सी.डी. 27 : संज्ञा

यह सी.डी. व्याकरणिक बिंदु 'संज्ञा' पर आधारित है इस सी.डी. में 'संज्ञा' की परिभाषा तथा उसके विभिन्‍न्‍न भेद-उपभेदों की विस्तृत चर्चा की गई है
सी.डी. 28 : सर्वनाम

यह सी.डी. व्याकरणिक बिंदु 'सर्वनाम' पर आधारित है इस सी.डी. में 'सर्वनाम' की परिभाषा तथा उसके विभिन्‍न्‍न भेद-उपभेदों की विस्तृत चर्चा की गई है
सी.डी. 29 : विशेषण

यह सी.डी. व्याकरणिक बिंदु 'विशेषण' पर आधारित है इस सी.डी. में 'विशेषण' की परिभाषा तथा उसके विभिन्‍न्‍न भेद-उपभेदों की चर्चा की गई है
सी.डी. 30 : साहित्य की धारा भाग - 1
सी.डी. 31 : साहित्य की धारा भाग - 2

दो भागों में विभक्‍त यह सी.डी. हिंदी साहित्य के 'काल' खंड को लेकर बनाई गई है 'काल' की हमारी यह सुरमयी धारा निस्संदेह गौरवशाली है दर्शक इस कार्यक्रम के माध्यम से अपनी उदात्त परंपरा / संस्कृति को पहचान सकेंगे
सी.डी. 32 : कहावतें-लोकोक्तियाँ भाग - 1
सी.डी. 33 : कहावतें-लोकोक्तियाँ भाग - 2
दो भागों में विभक्‍त यह सी.डी. हिंदी की कहावतों-लोकोक्तियों को लेकर बनाई गई है यह पूरा कार्यक्रम प्रश्नोत्तरी शैली में रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है 
सी. डी. संख्या 34 से 35 शब्द विचार (दो भागों में)
किसी भी हिंदी शिक्षार्थी के लिए हिंदी के शब्दों की संरचना एवं उसकी , प्रकृति आदि के बारे में जानना रोचक हो सकता है। इस क्रम में कार्यक्रम विशेष में हिंदी के शब्दों के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है।
सी. डी.संख्या 36 क्रिया विशेषण -
वाक्य में क्रिया - विशेषण का अपना एक अलग ही महत्व है। हम जानते हैं कि क्रिया विशेषण क्रिया की विशेषता बताता है। कार्यक्रम विशेष को -षा शिक्षण के के आधार पर विकसित किया गया है। निस्संदेह यह कार्यक्रम हिंदी भाषा शिक्षकों एवं छात्रों के लिए उपयोगी हो सकता है।
सी.डी.संख्या 37 से 38
हिंदी साहित्य के सांस्कृतिक स्रोत दो भागों में इस कार्यक्रम में हिंदी साहित्य के उन सांस्कृतिक स्रोतों को रेखांकित किया गया है, जिससे हमारा हिंदी साहित्य अनवरत पुष्पित और पल्लवित होता रहा है। यह कार्यक्रम निस्संदेह सुधि जनों के लिए संग्रहणीय है।
सी. डी. संख्या 39 से 40
अनुवाद है आगर ज्ञान का सागर (दो भागों में) विभिन्‍न भाषा भाषियों के मध्य अनुवाद एक सेतु का कार्य करता है। यह हमारे जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बन गया है अत: अनुवाद के - और व्यावहारिक पक्षों के बारे में जानना काफी लाभप्रद है। कार्यक्रम विशेष को देखकर अनुवाद - प्रविधि पर अपना अधिकार बना सकते हैं।
सी. डी. संख्या 41-42-43 वर्ण विचार (तीन भागों में )
तीन भागों में कार्यक्रम-विशेष हिंदी वर्णमाला के सभी पक्षों को सरलता से प्रस्तुत करता है। इस कार्यक्रम में वर्ण, अक्षर, वर्ण गुच्छ आदि संबंधी संकल्पनाओं को सरलतापूर्वक समझाया गया है। यह कार्यक्रम हिंदी व्याकरण के पाठकों के लिए उपयोगी हो सकता है।
सी . डी . संख्या 44-45-46 क्रिया (तीन भागों में )
किसी भी वाक्य में क्रिया का अपना एक अलग ही महत्व है। क्रिया की संकल्पना को जाने-समझे बिना हम हिंदी वाक्य संरचना पर अपना अधिकार नहीं कर सकते। कार्यक्रम - विशेष क्रिया के सभी पक्षों को सरल शब्दों में करता हैं।
सी . डी . संख्या 47-48-49 हिंदी में साहित्य की प्रमुख (तीन भागों में )
तीन भागों में - इस कार्यक्रम में हिंदी साहित्य की प्रमुख को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया गया है। हिंदी - साहित्य के प्रमुख निर्माताओं के बारे में सारगर्भित जानकारी इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हैं।
सी . डी . संख्या 50-51-52 शब्दकोश एक परिचय (तीन भागों में )
हिंदी शिक्षार्थी, अनुवादको, पत्रकारों एवं सामान्य ओं के लिए शब्द्कोश की - से इंकार नहीं किया जा सकता। तीनों भागों में इस कार्यक्रम में कोश की परिभाषा, कोश का इतिहास एवं कोश निर्माण की विभिन्‍न प्रविधियों के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है। यह कार्यक्रम भाषा-विज्ञान के विभिन्‍न को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
सी . डी . संख्या 53-54-55 संधि (तीन भागों में )
हिंदी व्याकरण एवं भाषा-शिक्षण में संधि का अपना एक अलग ही महत्व है। यह कार्यक्रम व्याकरणिक बिंदु 'संधि' के सभी पक्षों को समेकित रूप में प्रस्तुत करता है, अतएव हिंदी के छात्रों के लिए संग्रहणीय है।
सी . डी . संख्या 55-57-58 हिंदी के बढ़ते कदम (तीन भागों में )
तीन भागों में यह कार्यक्रम हिंदी की गौरवशाली यात्रा की कहानी कहता है। यह कार्यक्रम हिंदी के विकास को दो स्तरों यथा - एवं स्तर पर बखूबी - करता है। कार्यक्रम - विशेष प्रकृति में अत्यंत सूचनाप्रद एवं शिक्षाप्रद है।
सी . डी . संख्या 59
पारिभाषिक शब्दावली: मूलभूत संकल्पनाएँ इस कार्यक्रम में पारिभाषिक शब्दावली की मूलभूत संकल्पनाओं के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है।
सी . डी . संख्या 60
पारिभाषिक शब्दावली: निर्माण प्रक्रिया पारिभाषिक शब्दों का निर्माण कैसे होता है। ये अपनी अर्थगत स्थिरता कैसे करते है? हिंदी ओं के लिए यह जानना न केवल रोचक है अपितु ज्ञानवर्धक भी इस कार्यक्रम-विशेष में पारिभाषिक शब्दावली की निर्माण-प्रक्रिया को विस्तारपूर्वक बताया गया है ।

सी . डी . संख्या 61
पारिभाषिक शब्दावली: - एवं संस्थागत - पारिभाषिक शब्दावली को जन-जन में लोकप्रिय बनाने के लिए सरकारी एवं गैरसरकारी स्तर पर अनेक भागीरथ प्रयत्न किए जा रहे है। कार्यक्रम- विशेष में पारिभाषिक शब्दावली के क्षेत्र में कार्यरत कतिपय -एवं संस्थागत - का लेख-जोखा प्रस्तुत है।
सी . डी . संख्या 62 वाक्य विचार: मूलभूत संकल्पनाएँ
हिंदी के वाक्यों की कतिपय गूढ़ संकल्पनाओं को सरल एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। हिंदी शिक्षार्थी के लिए कार्यक्रम-विशेष की उपयोगिता स्वयं - है।
सी . डी . संख्या 63 वाक्य विचार: वाक्य निर्माण प्रक्रिया
इसमें कोई दो राय नहीं कि सटीक वाक्यों का प्रयोग हमारी में चार चाँद लगा देता है। इस क्रम में हिंदी भाषा शिक्षार्थी के लिए वाक्य निर्माण की प्रक्रियाओं को जानना आवश्यक है। कार्यक्रम-विशेष में वाक्य-निर्माण की विविध प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है।
सी . डी . संख्या 64
वाक्य विचार: वाक्य वर्गीकरण वाक्य वर्गीकरण के बारे में जानना हम सबके लिए उपयोगी है। इस कार्यक्रम में वाक्य वर्गीकरण के विभिन्‍न आधारों को सरल तरीके से समझाया गया है।
सी . डी . संख्या 65 आधुनिक हिंदी साहित्य की प्रमुख : भारतेंदु एवं युग
कार्यक्रम विशेष में भारतेंदु एवं युगीन हिंदी साहित्य की प्रमुख को - शैली में बताया गया है। हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए यह कार्यक्रम एक संदर्भ मानी जा सकती है।
सी . डी . संख्या 66 आधुनिक हिंदी साहित्य की प्रमुख : छायावादी काव्य
यह कार्यक्रम आधुनिक हिंदी - साहित्य के छायावादी काल की प्रमुख के बारे में बताता है।छायावादी साहित्यकारों के प्रमुख अवदानों के बारे में जानना हिंदी साहित्य के छात्रों के लिए उपयोगी हो सकता है। अत: संग्रहणीय है।
सी . डी . संख्या 67 आधुनिक हिंदी साहित्य की प्रमुख
प्रगतिवाद एवं प्रयोगवाद यह कार्यक्रम प्रगतिवाद एवं प्रयोगवाद तथा नई कविता पर्यंत विभिन्‍न काव्यांदोलनों तथा उनके प्रमुख रचनाकारों और कृतियों के परिप्रेक्ष्य में काव्य की प्रमुख एवं उनकी शिल्पगत विशेषताओं पर प्रकाश डालता है।
सी . डी . संख्या 68 राजभाषा हिंदी : संविधानिक व्यवस्था
हम जानते हैं कि हिंदी भारत के राजकाज की भाषा है। कार्यक्रम विशेष में भाषा - संबंधी कतिपय मूलभूत पर प्रकाश डाला गया है। इसके भारतीय संविधान में हिंदी संबंधी विभिन्‍न प्रावधानों के विषय में विस्तार से चर्चा की गई है।
सी . डी . संख्या 69 राजभाषा हिंदी
भारतीय संविधान के परिप्रेक्ष्य में व्यावहारिक स्तर पर हिंदी संबंधी नीतियों के कार्यान्वयन पर यह कार्यक्रम केंद्रित है। यह कार्यक्रम हिंदी के प्रचार-प्रसार में लगे विभिन्‍न कार्यकर्ताओं एवं अधिकारियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
सी . डी . संख्या 70 राजभाषा हिंदी : - एवं संस्थागत -
हिंदी को लोकप्रिय बनाने की दिशा में अनेक -एवं संस्थागत - किए जा रहे हैं । इस कार्यक्रम के माध्यम से इन्हीं भगीरथ - को समेकित रूप से प्रस्तुत करने का एक प्रयास है। यह कार्यक्रम हिंदी के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में रत हिंदी सेवकों को प्रेरणा प्रदान करता है।
सी . डी . संख्या 71 केंद्रीय हिंदी निदेशालय : एक परिचय
यह सी . डी . हमें निदेशालय की विभिन्‍न योजनाओं से अवगत करवाती है। यह सी . डी . नि:शुल्क उपलब्ध है।
डी. वी. डी. संख्या 72 : हिंदी में विराम - (प्रथम भाग)
हिंदी में विराम - (प्रथम भाग) में पूर्णविराम, -, विस्मयसूचक -, उपविराम और अर्धविराम की चर्चा है। साथ ही साथ भाषा के मौखिक स्तर पर - होने वाले स्वराघात,बलाघात एवं अनुतान आदि की चर्चा भी की गई है ।
डी. वी. डी. संख्या 73 : हिंदी में विराम - (- भाग)
हिंदी में विराम - (- भाग) में अल्पविराम ऊहर्व-विराम, निर्देशक -, विवरण -, उद्हरण -, हंसपद और योजक - की चर्चा है।
डी. वी. डी. संख्या 74 : हिंदी के भागीरथ साहित्यकार: जयशंकर प्रसाद (प्रथम भाग )
हिंदी के भागीरथ साहित्यकार: जयशंकर प्रसाद (प्रथम भाग ) विषयक कार्यक्रम में जयशंकर प्रसाद के सृजन के विषय आयामों यथाकाव्य उपन्यास एवं निबंध आदि की चर्चा की गई है। कार्यक्रम में जयशंकर प्रसाद के आरंभिक जीवन के बारे में भी चर्चा है।
डी. वी. डी. संख्या 75 : हिंदी के भागीरथ साहित्यकार: जयशंकर प्रसाद (- भाग )
हिंदी के भागीरथ साहित्यकार: जयशंकर प्रसाद (- भाग ) विषयक कार्यक्रम में नाटककार एवं कहानीकार जयशंकर प्रसाद के बारे में चर्चा है।
प्रतिपुष्टि प्रपत्र

प्रिय शिक्षार्थी
अपने शैक्षिक कार्यक्रमों को अपेक्षाकृत बेहतर बनाने के लिए हमें आपके सुझावों की अपेक्षा है। आपके गुणात्मक सुझावों से यक़ीनन हमारे ये कार्यक्रम अधिक उपयोगी और प्रासंगिक बन सकते हैं।
सधन्यवाद,
स्टूडियो एकक
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 वार्तालाप पुस्तक / स्वयं शिक्षक

केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा 1968 से पत्राचार हिंदीतरभाषी भारतीयों एवं विदेशी छात्रों को भारत में और भारत से बाहर हिंदी सिखाने का कार्य किया जा रहा है। इस सिखाने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के क्रम में संविधान की अनुसूची में वर्णित 22 क्षेत्रीय भाषाओँ एवं हिंदी को लेकर वार्तालाप पुस्तकों और स्वयंशिक्षकों (पुस्तकें ) को तैयार करके प्रकाशित करने का क्रम आज तक जारी है।
वार्तालाप पुस्तकों का निर्माण उन लोगों को ध्यान में रखकर किया गया है जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं है तथा जो अपने दैनिक जीवन में प्रयोग में आने वाले हिंदी भाषा के वार्तालाप के रूप को सीखना चाहते हैं।
यह उन पर्यटकों और भ्रमण करने वाले लोगों के लिए भी बहुमूल्य है जो हिंदी भाषा की उन आधार भूत संरचनाओं से परिचित होना चाहते है जो उन्हें हिंदी क्षेत्रों में पर्यटन के दौरान उपयोगी हों।
वार्तालाप पुस्तक को दो भागों में बाँटा गया है। भाग-एक में याँ और वार्तालाप के वाक्य हैं। भाग-दो में दैनिक प्रयोग में आने वाली व्यावहारिक शब्दावली है।
स्वयं शिक्षक उन अध्येताओं के लिए उपयोगी है जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं है और जो हिंदी भाषा को अपनी सुविधानुसार स्वाध्याय दवारा सीखना चाहते हैं।
विभाग दवारा समय-समय समितियों विभिन्‍न भाषाविदों एवं विभागीय विशेषज्ञों ने विभिन्‍न वार्तालाप पुस्तकों / स्वयंशिक्षकों की पाठ्य सामग्री का संशोधन और पुनरीक्षण किया है।
प्रकाशित वार्तालाप पुस्तकें/स्वयं शिक्षक
1.
अंग्रेजी हिंदी वार्तालाप पुस्तक संशोधित संस्करण
2002
2.
- हिंदी स्वयं शिक्षक संशोधित संस्करण
2003
3.
मलयालम-हिंदी स्वयं शिक्षक प्रथम संस्करण
2003
4.
बांग्ला - हिंदी स्वयं शिक्षक प्रथम संस्करण
2004
5.
हिंदी - तेलुगु वार्तालाप पुस्तक संशोधित संस्करण
2005
6.
हिंदी अंग्रेजी वार्तालाप पुस्तक संशोधित संस्करण
2005
7.
ओड़िया - हिंदी स्वयं शिक्षक प्रथम संस्करण
2007
8.
तमिल - हिंदी वार्तालाप पुस्तक संशोधित संस्करण
2006
9.
असमिया- हिंदी वार्तालाप पुस्तक प्रथम संस्करण
2008
10.
हिंदी - बांग्ला वार्तालाप पुस्तक संशोधित संस्करण
2008
11.
हिंदी तेलुगु स्वयं शिक्षक प्रथम संस्करण
2009
12.
हिंदी-कोंकणी स्वयं शिक्षक प्रथम संस्करण
2009
13.
देवनागरी लिपि अभ्यास पुस्तक
2002
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 विभिन्‍न वार्तालाप पुस्तकों से सी डी निर्माण

1.
अंग्रेजी - हिंदी वार्तालाप
-------------
2.
असमिया - हिंदी वार्तालाप
2006-2007
3.
तमिल - हिंदी वार्तालाप
2006-2007
4.
हिंदी -तेलुगु वार्तालाप
2007-2008
5.
मिजो-हिंदी-मिजो-वार्तालाप
2007-2008
6.
मलयालम-हिंदी - मलयालम वार्तालाप
2008-2009
7.
ओड़िया -हिंदी-ओड़िया वार्तालाप
2008-2009
8.
- - हिंदी - - वार्तालाप
2008-2009
9.
बांग्ला-हिंदी- बांग्ला वार्तालाप
2008-2009
10.
कोंकणी - हिंदी - कोंकणी वार्तालाप
2009-2010
11.
गुजराती - हिंदी - गुजराती वार्तालाप
2009-2010
12.
मराठी - हिंदी - मराठी वार्तालाप
2009-2010
13.
पंजाबी -हिंदी-पंजाबी वार्तालाप
2009-2010
14.
हिंदी - कश्मीरी -हिंदी वार्तालाप
2010-2011
15.
अंग्रेजी-हिंदी वार्तालाप
2010-2011
16.
मैथिली -हिंदी -मैथिली वार्तालाप
2010-2011
17.
उर्दू - हिंदी - उर्दू वार्तालाप
2010-2011
18.
मणिपुरी-हिंदी - मणिपुरी वार्तालाप
19.
संताली-हिंदी - संताली वार्तालाप
20.
हिंदी-संस्कृत वार्तालाप
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अनुसंधान अधिकारी (बिक्री एकक)
केंद्रीय हिंदी निदेशालय
खंड - 7, आर.के. पुरम
नई दिल्ली - 110066
फोन नं. :- 011-26105211, 26178454, 26105214, 26105245
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देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण
हिंदी भाषा के निरंतर बढ़ते महत्व को ध्यान में रखते हुए, टाइपराइटर/ कंप्यूटर आदि आधुनिक यंत्रों के उपयोग में और विभि‍न्‍न भाषा-भाषियों की हिंदी भाषा सीखने से संबंधित कठिनाईयों को दूर करने की दिशा में 'देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण' नामक पुस्तक प्रकाशित की गई है इसमें भारत सरकार अपनाए गए मानक ध्वनि-चिह्नों, उनकी लेखन-विधि, अंकों, संख्यावाचक शब्दों का तथा हिंदी वर्तनी की एकरूपता को बनाए रखने के प्रयास में कतिपय व्याकरणिक नियमों का सोदाहरण उल्लेख किया गया है

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