रविवार, 22 जून 2014

क्या है स्टिंग ऑपरेशन ?






लेखक--बिनित भारती





स्टिंग शब्द 1930 के अमेरिकन स्लेंग से निकला है जिसका अर्थ है, चोरी या धोखेबाजी की क्रिया, जिसकी योजना पहले से ही तैयार कर ली गई हो।1970 के आस-पास यह शब्द अमेरिकन उपयोग में आने लगा जिसका अर्थ था, पुलिस के द्वारा डिजाइन गुप्त आपरेशन जो किसी अपराधी को फंसाने के लिए जाते थे।
धीरे-धीरे स्टिंग किसी अपराधी को पकड़ने के लिए जाल बिछाने का पर्याय बन गया है। अपराधियों को धोखे में रखकर की जाने वाली इससे क्रिया में कई प्रकार से काम किया जा सकता है। किसी ड्रग सप्लायर को पकडने के लिए अवैध दवा खरीदना, रिश्वतखोर को खास तरह की पेशकश या किसी वेश्या अथवा दलाल को पकड़ने के लिए ग्राहक बनाकर भेजना जैसे काम जो खुफिया पुलिस अपने मिशन के लिए करती थी , वह पत्रकारिता ने अपना लिया है।
भारत में स्टिंग परंपरा के बीज पिछले पांच सालों में पडे़ है और बडी़ राजी से यह अपनी जड़े जमा रहा है। विदेशों से उधार ली गई यह परंपरा आज भारतंीय बाजार पर भी अच्छा खासा असर डाल रही है। पश्चिमी देशों से उधार लिए गए पत्रकारिता मंत्र ”स्टिंग आपरेशन” का इस्तेमाल न्यूज चैनल अपनी टी आर  पी बढ़ाने के लिए बखूबी कर रहे है। इतना ही नहीं बाजार में खड़े दर्शकों व विज्ञापनों को खींचने में एक स्टिंग के लाखों बोली लग रहे है। विभिन्न चैनलों पर धड़ाधड़ दिखाए जा रहे स्टिंग आपरेशन कई तरह के होते है, जिनमें पहले  से गैरकानूनी या असामाजिक कार्य करने वालों को लगाया जाता है फिर बड़े तरीके से पुख्ता सबूतों के साथ फंसा लिया जाता है। इसके और बहुत से पहलू है जिन पर हम  आने वाले अध्यायों में चर्चा करेंगे।

विदेशी स्टिंग आपरेशन
एबस्केमः  एबस्केम 1980 का यू एस स्कैंडल है। एफ बी आई द्वारा चलाया  गया स्टिंग आपरेशन जिसे कांग्रेस की सदस्यों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ने के लिए किया गया था। एफ बी आई ने 1980 में अब्दुल एंटरप्राइजेज लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई। अधिकारियों को एक काल्पनिक शेक के राजनीति समर्थन के लिए पैसा दिये जाने का प्रस्ताव रखा। एबस्केम एस बी आई द्वारा  किया जाने वाला बड़ा आपरेशन था जिसमें हैरीसन ए विलियम्स , जॉन जेनरेट , रिचर्ड कैली, रेमंड़, लेडरर, जैसे अनेक वरिष्ठ पकड़े गए। एफ बी आई पर भी एनटेªपमेंट का आरोप लगा। इस केस का रोचक पहलू था। जहां एक-एक करके बड़े नेताओं की पोल खुल रही थी , वही इसमें यू एस सीनेटर लैरी प्रेसलर साफ बच निकले। ऑपरेशन के दौरान उन्हें भी रिश्वत लेने से इंकार कर दिया। इस एबस्केम माॅडल से पूरे यूरोप में 1980 के दौरान कई तरह के इन्वेस्टीगेशन हुए।
कॉप्स इन शॉप्सः यह अमेरिका में एल्कोहल कानून प्रवर्तन प्रोग्राम है,जिसका उद्देश्य 21 साल से कम उम्र के लोगों में शराब की प्रवृत्ति को कम करना है। साधारण वेशभूषा में पुलिस अधिकारी शराब की दुकानों पर तैनात होते हैं ताकि धोखे से युवाओं को पकड़ा जा सके।
आपरेशन पिन: आपरेशन पिन एफ बी आई, इंटरपोल, रॉयल कैनेडियन पुलिस और आस्ट्रेलिया हाइटेक क्राइम सेंटर द्वारा तैयार किया गया है जिसका उद्देश्य चाईल्ड पोर्नोग्राफी में लिप्त लोगों के काले कारनामों को उजागर करना था।इस आपरेशन में ऐसी वेवसाइटों की रचना और संचालन शामिल था जो अवैध तसविरों का बहकावा देती थी। वेवसाइटों के इस नेटवर्क को हनीपॉट कहा जाता था।
बेटकार: बेट कार का उपयोग वाहन चोरों के लिए किया जाता है। इस आपरेशन में उपयोग होने वाली कार को बेट कार कहा जाता है। इस वाहन की  विशेषता होती है कि उसमें बुलेट प्रूफ ग्लास, विडियो कैमरा जिनमें ऑडियो, टाइम और तारीख रिकार्ड हो जाती है और इंजन को खराब करने व दरवाजों को रिमोड के साथ लॉक करने की क्षमता होती है।
एजेंट प्रोवोकेटर: एजेंट प्रॉवोकेटर एक ऐसा व्यक्ति होता है जो हिंसा, वाद-विवाद बहस या अराजक माहौल बनाने का काम करता है। दरअसल वह व्यक्ति खूफिया विभाग या पुलिस का आदमी होता है जो अपराध में लिप्त होकर अपराधियों की जड़ों तक पहुंचाने का काम करता है। इस प्रोवोकेटरों का काम स्टिंग आपरेशन के तहत आता हैं।

भारत में स्टिंग ऑपरेशन

कास्टिंग काऊच

2005 में इंडिया टी वी द्वारा बालीवुड में चलाया गया शक्ति कपूर का चर्चित आपरेशन था- कास्टिंग काऊच। कास्टिंग काऊच में यूरोपीयन खुफिया विभाग के हनी ट्रेप स्टिंग आपरेशन की तकनीक का इस्तेमाल हुआ था।हनी टेªप में अपराधिक और अनैतिक काम करने वालों को धोखे से स्वंय को पुलिस, संगठन के हवाले करने का प्रलोभन दिया जाता है। जहां पर स्टिंग आपरेशन का लक्ष्य कोई संदिग्ध व्यक्ति होता है उसे  किसी विशिष्ट अपराध की स्वीकृति करते हुए पकड़ने के लिए जाल बिछाया जाता है। जासूसी भाषा में हनी टेप का इस्तेमाल सोवियत और इस्टर्न यूरोपियन इंटेलिजेंस सर्विसेज के द्वारा किया जाता रहा है। जिसमें महिलाएं , व्यापारियों और अधिकारियों के अवैध संबंधों को  उजागर करने में मदद करती थी।
एक मशहूर अभिनेता पर कास्टिंग काऊच में अभिनेता को एक लड़की के साथ जबरदत्ती करते हुए दिखाया गया था। यह आपरेशन एक पूर्व तैयार की गई योजना के तहत संपंन हुआ। इसमें कास्टिंग काऊच करने वाली टीम में शामि एक महिला उक्त अभिनेता से मिलने एक होटल के कमरे में जाती है और उससे फिल्मों में रोल दिलवाने के लिए आग्रह करती है और अपने आग्रह को अलंकरित करते हुए मोहक अदाओं के साथ सुरा पान भी कराती है। वह उक्त अभिनेता में उत्तेजना का संचार करती है और जब वह उत्तेजित हो जाता है तो यह बात के साथ रिकार्ड कर ली जाती है। पूरी टीम लड़की का साथ देने पहुंच जाती है और हो गया कॉस्टिंग काऊच।

इस तरह के प्रयोगों का एक उद्धेश्य समाज मंे व्याप्त उन बुराइयों को सामने लाना है जिनके बारे में सिर्फ सुना जाता है, देखा बहुत कम जाता हैं इन छुपी हुई सच्चाइयों से पदा्र उठाने का कार्य कास्टिंग काऊच कर रहा है।

ऑपरेशन दुर्योधन:  एक नजर

धन लेकर संसद में प्रश्न पूछना और क्षेत्र विकास योजना निधि में कमीशन खाने की बिमारी भारत के संसदीय लोकतंत्र में मुद्दत से मिली हुई थी। पैसे लेकर प्रश्न लगाने का रोग तो प्रथम लोकसभा को ही लग गया था। लेकिन तब इक्का दुक्का सांसद ही उसकी गिरफ्त में थे। अब वह महामारी का रुप ग्रहण कर चुका  है। 12 दिसम्बर के स्टिंग आपरेशन दुर्योधन से तो यही संकेत मिलता है। आपरेशन दुर्योधन की चपेट में आए 11 सांसदों के लोकसभा से निष्कासन की आशंका बलवती हो गई है। पवन बंसल की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की सिफारिश का सदन में  विरोध करना  कठिन हो गया था। मीडिया का आपरेशन शंकास्पद हो सकता है, परंतु दुर्भाग्यवश राजनीतिज्ञों की जो छवि बन चुकी है उनके समर्थन में खुलकर खड़े होने का साहस शायद ही कोइ्र जुटा सके। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सर्वोच्च पंचायत , संसद को अपनों ने ही शर्मशार किया । यह सच है कि आजादी के बाद से ही देश में राजनीति और राजनेताओं की प्रतिष्ठा लगातार गिरी है। आजकल काम कम और हंगामा ज्यादा होने के चलते सवालों के घेरे में तो संसद भी कई बार आई है, पर उसकी साख पर ऐसी चोट कभी नहीं हुई, जैसी 12 दिसम्बर को हुई। चार वर्ष पहले 13 दिसम्बर को पांच फंसाए जाने की शिकायत कर रहे है पर  आपरेशन दुर्योधन में दिखाए गए विडियो- ऑडियो टेपों पर विश्वास करें तो इन लोगों ने 15 हजार रुपये से लेकर एक लाख 10 हजार रुपये तक की रिश्वत ली। सबसे कम 15 हजार भाजपा के छत्रपाल सिंह लोधी को मिले, तो सबसे ज्यादा एक लाख 10 हजार मनोज कुमार को। तहलका प्रकरण से चर्चित हुए अनिरूद्ध बहल की कोबरापोस्ट डॉट कॉम आठ महीने की मेहनत और लगन के बाद किया गया यह खुलासा कितना सनसनीखेज था, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि संसद पहुंचने से पहले ही स्पीकर सोमनाथ चटर्जी खुद पहल कर सदन के नेता प्रणव मुखर्जी और विपक्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी से फोन पर बात कर चुके थे।
जिन 11 सांसदों को ”आपरेशन दुर्योधन” में नकद रिश्वत लेते हुए दिखाया गया है, उनमें से भाजपा के छत्रसाल ही केवल राज्य सभा सदस्य है, शेष सभी 10 लोकसभा के सदस्य है। 11आरोपी सांसदों में से  सर्वाधिक छह भजपा के है। जाहिर है कि, साफ-सुथरी राजनीति की हामी भाजपा के लिए अपने रजत वर्ष में यह प्रकरण किसी बड़े हादसे से कम नहीं है।

सो, भाजपा नेतृत्व ने सभी छह आरोपी सदस्यों को संसदीय दल से निलंबित कर कारण बताओ नोटिस जारी करने और बाल आप्टे की अध्यक्षता  में जांच समिति बनाने में देर नहीं लगाई। आरोपी सांसदों में दूसरी बड़ी संख्या बसपा के सांसदों की रही। उसके तीन सांसद रिश्वत लेते दिखाए गए। बसपा प्रमुख मायावती ने हालांकि इसके पीछे अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी की साजिश होने का आरोप लगाया पर आरोपी सांसदों को निलंबित कर दिया। अकेले राजद प्रमुख लालू यादव अपने दल  के आरोपी सांसद मनोज कुमार के विरू़द्ध सख्त कार्रवाई करने शुरू में हीला हवाला करते रहे।
प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु के कार्यकाल में महाराष्ट्र के लोकसभा सदस्य एच जी मुदगल को ऐसे ही आरोप में सदस्यता गंवानी पड़ी थी। छह जून 1951 को मुदगल पर आरोप लगा था कि उन्होंने प्रश्न पूछने के लिए एक हजार रुपए लिए थे। खुलासा होने पर स्वंय प्रधानमंत्री नेहरु ने  उनकी सदस्यता समाप्ति का प्रस्ताव रखा। लोकसभा अध्यक्ष ने टी टी कृष्णामाचारी की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की। इस समिति ने मुदगल की बर्खास्तगी की सिफारिश की, पर सदन के फैसले से पहले ही खुद मुदगल ने इस्तीफा दे दिया।

सब कुछ कैमरे और टेप पर होने के बावजूद न जांच इतनी आसान है, आर न ही सजा, पर इस प्रकरण के परिणाम पर राजनीति ही नहीं, संसद की साख भी निर्भर करेगी।
राजनीति के गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि कुछ और खोजी कैमरों ने अनेक और सांसदों को रिश्वत तथा कमीशन खाने के साक्ष्यों में जकड़ रखा है। अनेक सांसद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की नियोजित ढ़ंग से डंक मारने की इस प्रवृत्ति को संसदीय लोकतंत्र से लोक विश्वास को डगमगाने के षडयंत्र के रुप में देखा जा रहे है। जहां तक सांसदों द्वारा क्षेत्र विकास योजना निधि के तहत होने चाले कार्यों में कमीशन खाने की बात है वह एक बहुज्ञात तथ्य है। प्रायः सभी पार्टियों के अनेक सांसद ऐसा करते है। इस लिए लोकसभा में इस निधि को समाप्त करने की सहमति बन सकती है। फिलहाल तो वातावरण इसके पक्ष में दिखाई दे रहा है। दरअसल न केवल सांसदों बल्कि विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा भी इस निधि में कमीशान खाने की प्रवृत्ति चर्चा में रही है।क्षेत्र विकास योजना निधि के तहत प्रत्येक सांसद को प्रतिवर्ष 2  करोड़ रुपए मिलते है। दिल्ली का प्रत्येक विधायक प्रति वर्ष 2 करा़ेड़ तक क्षेत्र विकास योजना में खर्च कर सकता है। लंबे समय से शिकायतें मिलती रही हैं कि सांसद और विधायक इस निधि से कराए जाने वाले कार्यों में कमीशन खाते है कही-कही तो यह कमीशन 40 प्रतिशत होने की शिकायतें मिलती रही है। इस आधार पर इसे समाप्त करने की मेंग उठती रही है।

अक्सर कहा जाता है कि सांसद और विधायक धन कमाने के अवैध तरीकें इसलिए अपनाते है कि उन्हें चुनाव लड़ना होता है। चुनाव में दिनों-दिन इस कदर खर्चीले होते जा रहे है कि निष्ठावान सांसद या विधायक अपने साधनों के बूते खर्च की स्पर्धा में टिक नहीं सकते।इसलिए पिले अनेक वर्षों से मांग उठ रही है कि चुनावी खर्च सरकार द्वारा उठाया जाए।
क्षेत्र विकास योजना की निधि में कमीशन की सौदेबाजी के आरोप में जिन पांच सांसदों को आपरेशन चक्रव्यू हके कैमरे में दर्ज किया है, उस पर लोकसभा में चचा्र के दौरान प्रतिपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने एक व्यवहारिक सुझाव दिया। उनका कहना था कि सांसद निधि समाप्त कर दी जाए।उस निधि में जो 7,500 करोड़ रुपए चुनाव व्यय दिए जाते है उनका उपयोेग चुनावों  पर खर्च के लिए सरकार एक निधि बना सकती है। बहुत संभव है लोकसभा इस प्रस्ताव को स्वीकार कर ले। इस सुझाव का विरोध करने का साहस कुछ धन-पिशाच ही कर सकेंगे। यह व्यवस्था यथाशीघ्र लागू हो सकती है। यदि सांसद निधि समाप्त करने का निर्णय होता है तो राजनीति के शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसका विसतार विधानसभाओं तक किया जाना चाहिए।……जारी………….

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट को ब्लॉग बुलेटिन की आज कि बुलेटिन अमरीश पुरी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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