रविवार, 22 जून 2014

स्टिंग ऑपरेशन को क़ानूनी वैधता नहीं : सुप्रीम कोर्ट


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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फ़ैसले में कहा है कि स्टिंग ऑपरेशन की कोई क़ानूनी वैधता नहीं है. न्यायालय ने साथ ही किसी व्यक्ति को लालच देकर फंसाए जाने पर सवाल भी उठाए.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ प्रधान न्यायाधीश पी. सदाशिवम के नेतृत्व वाली पीठ ने गुरुवार को कहा कि न्यायालय ने आरके आनंद के मामले में जनहित में स्टिंग ऑपरेशन को सही ठहराया था, लेकिन इसे हर मामले में जायज नहीं ठहराया जा सकता.
न्यायालय ने कहा, ''भले ही एक अपराधी को पकड़ने के लिए क्लिक करें स्टिंग ऑपरेशन चलाया जाता हो, लेकिन इससे कुछ नैतिक सवाल खड़े होते हैं. पीड़ित, जो कि अन्यथा बेक़सूर होता है, को स्थितियों के बारे में पूरी गोपनीयता बरतने का वादा कर अपराध करने के लिए प्रेरित दिया जाता है.''
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिलीप सिंह जूदेव के ख़िलाफ़ स्टिंग ऑपरेशन करने वाले दो अभियुक्तों की याचिका को ख़ारिज करते हुए यह आदेश दिया. इस स्टिंग ऑपरेशन में क्लिक करें जूदेव को पैसे लेते हुए दिखाया गया था.

राहत देने से इनकार

अभियुक्तों ने अपनी याचिका में उनके ख़िलाफ़ मामले को बंद किए जाने का आग्रह किया था. उनकी दलील थी कि इस स्टिंग ऑपरेशन के पीछे उनका मकसद भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ करना था.
लेकिन क्लिक करें सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कोई राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि इस स्टिंग ऑपरेशन के पीछे उनकी क्या मंशा थी, यह बात उनके ख़िलाफ़ मुक़दमे से ही साफ हो पाएगी.
अपने फ़ैसले में न्यायालय ने कहा, ''स्टिंग ऑपरेशन से सवाल उठता है कि पीड़ित को कैसे उस अपराध के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिसे बिना प्रलोभन वो अंजाम ही नहीं देता."
"इस तरह के ऑपरेशन से एक और सवाल उठता है कि अपराध को सिद्ध करने के लिए जिन तरीक़ों का इस्तेमाल किया गया वो अपने आप में दंडनीय है.''
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमरीका और कुछ अन्य देशों में न्याय व्यवस्था में स्टिंग ऑपरेशन को एक सीमित दायरे में ही सही, क़ानूनी तरीक़ा माना जाता है लेकिन वैसा भारत में नहीं है.
न्यायालय का कहना था कि सवाल यह उठता है कि ऐसे स्थिति में क्या दृष्टिकोण अपनाया जाए, यदि कोई निज़ी तौर पर एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ स्टिंग करता है और वो ऐसा करते हुए ख़ुद अपने हाथ गंदे करता है.
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