सोमवार, 28 अप्रैल 2014

मीडिया मे पढ़े-लिखे अनपढ़ों की भरमार







प्रस्तुति-- निम्मी नर्गिस , हिमानी सिंह
वर्धा


Him Darshan Samachar
1 min · Shimla
मीडिया मे पढ़े-लिखे अनपढ़ (संवेदनहीन) लोगों की भरमार क्यों है ?
( Please स्टेटस पूरा अवश्य पढ़ें, फिर like or comment करें )
क्या भारत की मीडिया (चाहे इलेक्ट्रॉनिक हो प्रिंट) में पढ़े-लिखे अनपढ़ भरे हुए हैं जो जानते ही नहीं कि देश एक समस्याओं का देश बन गया है और इन सब समस्याओं की जड़ें 4-5 मुख्य नासूर रूपी समस्याएं हैं। इन पर न तो कोई मीडिया बाला बहस करता है, न ही किसी के सामने इंटरव्यू मे उठाता है
1- क्या जनसंख्या वृद्धि पर रोक के बिना सम्पूर्ण विकास संभव है ?
2- विकास मे सबसे बड़ा रोड़ा है जातिगत राजनीति। जब वोट जाति के आधार पर ही पड़ेंगे तो फिर कोई विकास कौन करवाएगा जिसकी जाति भारी पड़ेगी वही जीतेगा और सिर्फ अपनी ही जाति के चुनिन्दा लोगों को फायदा पहुंचायगा , इस जातिगत राजनीति को मिटाने के लिए कोई नेता क्या करेगा और कैसे करेगा इसका कोई प्रश्न नही करता है।
3- तुष्टीकरण भी बहुत अहम हो गई है राजनीति मे उस पर रोक कैसे लगेगी?
4- आज गरीब बच्चों तक शिक्षा नही है अगर है भी तो नाम मात्र की है जिसका अपना कोई औचित्य नहीं है। आज मिड डे मील के नाम पर बच्चों का सिर्फ समय बर्बाद किया जाता है सिर्फ खाने का काम हो रहा है, पढ़ाई का नहीं। ये बच्चे कैसे मुख्य धारा मे जुड़ पायेंगे?
इस प्रकार के कई सवाल हैं पर उनके बारे मे कोई बात नहीं करता है।
अभी कुछ दिन पहले एबीपी न्यूज़ चैनल पर श्री नरेन्द्र मोदी जी का इंटरव्यू था प्रोग्राम था।
इस इंटरव्यू मे 3 लोगों ने मोदी जी का इंटरव्यू लिया जिसमे एक अपराधी की तरह बैठा कर उनसे पूछताछ की गई और बड़ी सरलता से मोदी जी ने उनके सबालों के जबाब दिए। जिस प्रकार से मोदीजी का इंटरव्यू अपराधियों की तरह लिया गया वह गलत था या सही हम कुछ नही कह सकते है उनसे जितने कठिन सबाल पूछे गए हमें उन पर भी कोई आपत्ति नही है, अगर वे इनसे भी कठिन सबाल पूछते तो मोदीजी उनके भी जबाब बड़ी आसानी से दे देते। दुख इस बात का है कि इतने पढ़े-लिखे लोग इंटरव्यू ले रहे थे परन्तु किसी भी महाभयंकर ज्वलंत समस्या पर सबाल नही पूछा। हर सबाल घुमा फिरा कर यही कह रह था कि वे लोग सिर्फ अपने निम्न उद्देश्यों पर काम कर रहे थे।
सेक़्युलरिज और कम्यूनलिजम के बारे मे बात करना और किसी प्रकार से मोदी जी से कुछ ऐसा क़हलवाना ताकि ब्रेकिंग न्यूज़ बना कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जाए। ऐसा लगता है की इन लोगों की नज़रों मे सेक़्युलरिजम का मतलब सिर्फ इतना है कि सिर्फ और सिर्फ मुस्लिमों के हित की बात करना हिन्दुओं को ये लोग सेक़्युलर समझते ही नही हैं। जैसे:
पिंक क्रांति से एक वर्ग के उद्योग पर प्रभाव नही पड़ेगा?
गुजरात दंगों पर माफी क्यों नही मांगते हो?
धारा 370 हटाना क्या उचित होगा?
क्या आप पाकिस्तान से बात करेंगे?
आमिर खान और सलमान की फिल्म में किसकी फिल्म देखना पहले पसंद करेंगे?
ऐसा लग रहा था कि वे पत्रकार कम और अामिर या सलमान के अजेंट ज्यादा हैं। पिछले कई सालों से पूरी मीडिया सलमान, शाहरुख, अामिर के इर्दगिर्द ही घूम रहा है, आखिर क्या करना चाहते हैं आप लोग?
अब जरा इन सवालों का महत्व देखें, इन सवालों का क्या औचित्य है-
आमिर खान और सलमान की फिल्म में किसकी फिल्म देखना पहले पसंद करेंगे ?
गुजरात दंगों पर माफी क्यों नही मांगते हो?
पिंक क्रांति से एक वर्ग के उद्योग पर प्रभाव नही पड़ेगा?
आपके वैवाहिक संबंध के बारे मे लोग बात करते है तो आपको बुरा नहीं लगता?
आप कितना सोते हो?
क्या सवाल है जिन पर जबाब मांग रहे हैं, असली सवाल तो ये हैं-
जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगेगी या नही?
जातिवादी ऊंच-नीच का भेदभाव कैसे मिटेगा? स्वयम् मोदी जी भी इस छूआ छूत के शिकार उत्तरप्रदेश के बनारस मे बीएचयू में हो चुके हैं। कुछ जातिवादी लोगों ने मदन मोहन मालविय की प्रतिमा पर फूल चढ़ाने के वाद उसे गंगाजल से पवित्र किया था, क्या अब भी मोदी जी जातिवाद पर रोक नही लगाने के पक्ष मे हैं?
जातिगत राजनीति पर रोक लगेगी या नही ?
युबा कब तक नौकरी को तरसेगा या बेरोजगारों को कब तक रोजगार मिलेगा?
हर साल कितने लोगों को और कैसे रोजगार दिया जाएगा?
किस प्रकार आधुनिक शिक्षा गरीव बच्चों तक पहुंचेगी?
ऐसे सवाल है जो पूछे जाने चाहिए पर लोग अपने कर्तव्यों को भूल कर लालच मे किस हद तक गिर गए है एह तो हमे इस इंटरव्यू को देख कर ही पता लगा है। हम अपने नवभारत के ब्लॉग एडिटर या संपादक से अनुरोध करते हैं कि हमारा यह संदेश उन न्यूज़ के लोगों तक पहुंचा दें, हम भी उनसे कुछ बात करना चाहते हैं।

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