बुधवार, 19 मार्च 2014

किधर जाएंगे इस बार बनारस के मुसलमान





अतुल चंद्रा/
 बुधवार, 19 मार्च, 2014 को 07:57 IST तक के समाचार
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 25 मार्च को वाराणसी में एक जनसभा करेंगे और उसके बाद जनमत के आधार पर तय करेंगे कि वो नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे या नहीं. उनके निर्णय पर निर्भर करेगा कि शिव की इस नगरी का मतदाता साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के आधार पर वोट देगा या विकास के नाम पर.
काशीनगरी में लगभग तीन लाख मुस्लिम मतदाता हैं. ध्रुवीकरण की राजनीति में वे किसे वोट देंगे कहना आसान है. मुश्किल तब होगी जब कोई मुसलमान प्रत्याशी भी यहाँ से मैदान में उतरे. ऐसे में मुस्लिम वोट का बंटना और मोदी को उसका सीधा लाभ मिलना निश्चित है.
क्लिक करें नरेंद्र मोदी का नाम ही साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को प्रेरित करता है. वाराणसी के अंजुमन इंतेज़ामिआ मस्जिद के संयुक्त सचिव मोहम्मद यासीन कहते हैं, "हम मोदी को सिर्फ़ गुजरात के नाते जानते हैं. वहाँ विकास कितना हुआ हमें नहीं मालूम. लेकिन हम यह जानते हैं कि वहाँ दंगा हुआ था."

रोज़गार पर ज़ोर

मोदी के दो स्थानों से चुनाव लड़ने पर यासीन का कहना है कि जीतने के बाद कौन सी सीट कोई रखेगा और किसे छोड़ेगा यह किसी एक के साथ विश्वासघात होगा.
पर यासीन की ख़ास मंशा है कि "शांति बनी रहे, विकास हो और नौजवानों को रोज़गार मिले". उनके अनुसार कमलापति त्रिपाठी के बाद किसी ने भी इस क्षेत्र के विकास की ओर ध्यान नहीं दिया.
मुस्लिम समुदाय के बड़े धार्मिक नेता अब्दुल बातीन नोमानी, जो क्लिक करें बनारस के मुफ़्ती हैं, कहते हैं, "वाराणसी अपनी गंगा-जमुनी तहज़ीब के लिया जाना जाता है. हो सकता है कुछ लोग मोदी को वोट दें लेकिन आम यहाँ की आम जनता सेक्युलर है और अमन पसंद है. ऐसे लोग उनका साथ नहीं देंगे."
केजरीवाल के बारे में पूछे जाने पर मुफ़्ती कहते हैं, "शायद उनको लोग क़ुबूल करें."
वाराणसी के अस्सी घाट के निकट एक होटल के मुस्लिम कर्मचारी कहते हैं कि अगर कोई मुसलमान प्रत्याशी नहीं खड़ा होता है तो मुस्लिम वोट कांग्रेस को जाएगा क्योंकि फ़िलहाल समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी काफ़ी कमज़ोर है.

वोट बंटने का ख़तरा

मुख़्तार अंसारी के चुनाव लड़ने और मुस्लिम वोट के बंटने की बात पर वे कहते हैं, "यह हमारा दुर्भाग्य होगा." वे कहते हैं कि उनका नाम न लिखा जाए क्योंकि आने वाले समय में उसका असर उनके कारोबार पर पड़ सकता है.
अस्सी घाट से डेढ़ किलोमीटर दूर एक मोहल्ला है जिसका नाम तो है शिवाला. लेकिन यहाँ मुसलमान बहुतायत में हैं. शिवाला में ज़रदोज़ी के सामान की एक दुकान पर बैठे मोहम्मद एहसान बताते हैं कि किस तरह से वाराणसी में सांप्रदायिकता के आधार पर मतों का ध्रुवीकरण हो चुका है.
उन्होंने बताया, "60 से 70 फ़ीसदी हिन्दू भाई मोदी को वोट देंगे और मुसलमान अपना वोट कांग्रेस या किसी अन्य मज़बूत प्रत्याशी को देंगे."
वह यह भी कहते हैं कि अगर क्लिक करें केजरीवाल यहाँ से लड़े तो लोग पूरी तरह से उनका साथ दें "क्योंकि केजरीवाल धर्म और जाति की राजनीति नहीं करेंगे और बनारस के विकास की बात करेंगे".

बाहरी उम्मीदवार

लेकिन वह एक बात ज़ोर देकर कहते हैं कि इस बार मुख़्तार अंसारी को वोट नहीं दिया जाएगा. उन्होंने कहा, "पिछली बार मुख़्तार अंसारी को वोट सिर्फ़ इसलिए मिले थे क्योंकि कुछ टीवी चैनलों ने भड़काऊ ढंग से यह प्रसारित कर दिया था कि हिन्दू बड़ी संख्या में वोट देने के लिए निकल पड़े हैं."
मोहम्मद एहसान एक और महत्वपूर्ण बात कहते हैं, "चार-पांच हज़ार शिया भाई भी नरेंद्र मोदी को वोट दे सकते हैं."
ज़रदोज़ी कि इस दुकान लगभग सौ मीटर की दूरी पर एक चाय की गुमटी है जो पहले कभी नायाब बेकरी हुआ करती थी. प्लास्टिक के गिलास में चाय निकालते हुए जाफ़र किसी भी बाहरी उम्मीदवार को देने के पक्ष में नहीं हैं. लेकिन मोदी को हराने के उद्देश्य से वह क्लिक करें कांग्रेस को वोट देने को तैयार हैं.
जाफ़र कहते हैं, "मुसलमान को सिर्फ़ इंतज़ार है सभी प्रत्याशियों के नाम तय होने का. जो मोदी को हराने के लायक़ दिखेगा वोट उसी को जाएगा."
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