शनिवार, 22 जून 2013

ब्लॉगिंग के विस्तार से ब्लॉगरों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती










वार्षिक ब्लॉग विश्लेषण-२०१०

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१९९९ में आरम्भ हुआ ब्लॉग वर्ष २०१० में ११ साल का सफर पूरा कर चुका है ,वहीं हिंदी ब्लॉग ७ साल का । गौरतलब है कि पीटर मर्होत्ज ने १९९९ में ‘वी ब्लॉग’ नाम की निजी वेबसाइट आरम्भ की थी, जिसमें से कालान्तर में ‘वी’ शब्द हटकर मात्र ‘ब्लॉग’ रह गया। ब्लॉग की शुरुआत में किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक दिन ब्लॉग इतनी बड़ी व्यवस्था बन जायेगा कि दुनिया की नामचीन हस्तियाँ भी अपने दिल की बात इसके माध्यम से कहने लगेंगी। आज पूरी दुनिया में १५ करोड़ से ज्यादा ब्लॉगर्स हैं तो भारत में लगभग ३५ लाख लोग ब्लॉगिंग से जुड़े हुए हैं। इनमें करीब २५ हजार हिन्दी ब्लॉगर हैं, इस संख्या को देखा जाए तो हिंदी में ब्लोगिंग अभी भी संक्रमण के दौर में है ।
हिन्दीभाषी किसी मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करने, भड़ास निकालने, दैनिक डायरी लिखने, खेती-किसानी की बात करने से लेकर तमाम तरह के विषयों पर लिख रहे हैं।आज तो ब्लॉगिंग केवल एक शौक या अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं रहा बल्कि ब्लॉगर अपने ब्लॉग की लोकप्रियता के अनुसार लाखों रुपए हर महीने कमा रहे हैं। कंपनियाँ अपने उत्पादों का प्रचार करने के लिए ब्लॉगरों की मदद लेती हैं और विज्ञापन देने वाली कंपनियाँ विज्ञापन पोस्ट करने के लिएकिन्तु ऐसा हिंदी में अभी संभव नहीं हो पाया इसका एक मात्र कारण है हिंदी में ब्लोगिंग का व्यापक विस्तार न होना ।
हिंदी ब्लॉगिंग वर्ष-२०१० में ७ वर्ष पूर्ण कर चुकी है । यह सुखद पहलू है कि विगत कई वर्षों की तुलना में वर्ष-२०१० में हिंदी ब्लोगिंग समृद्धि की ओर तेज़ी से अग्रसर हुई है । इस वर्ष लगभग ८ से 10 हजार के बीच नए ब्लोगर्स का आगमन हुआ है , किन्तु सक्रियता के मामले में इस वर्ष आये ब्लोगर्स में से केवल ५०० से १००० के बीच ही सक्रिय हैं और सार्थक लेखन के मामले में ३०० के आसपास ।
कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि तपी जमीन को कुछ ठंडक देने का काम हुआ , लेकिन विकासक्रम की द्रष्टि से अन्य भाषाओं की तुलना में बहुत संतोषप्रद नहीं कहा जा सकता । हिंदी ब्लोगिंग की सात वर्षों की इस यात्रा में अमूमन यही देखा गया कि यह ब्लॉगरों के लिए एक ऐसा धोबीघाट रहा ,जहां बैठकर वे अपने घर से लेकर गली-मोहल्ले तक की तमाम मैली चादरों को धोने का काम करते रहे और सुखाते रहे ।
दो अत्यंत दुखद बातें हुई हिंदी ब्लॉगजगत में । पहली यह कि ११ मई को ज्ञानदत्त पाण्डेय जी का विवादास्पद आलेख आया -कौन बेहतर ब्लॉगर है शुक्ल या लाल? फिर तो हिंदी ब्लॉगजगत में ऐसा घमासान मचा कि लगभग एक पखवारे तक हिंदी ब्लॉग जगत को संकटग्रस्त बनाए रखा ……राजीव तनेजा ने पूरी घटना को व्यंग्यात्मक लहजे में कुछ यूँ रखा -मुकद्दर का सिकंदर कौन ? दूसरी अत्यंत दु:ख की बात यह हुई कि इस वर्ष अचानक महावीर शर्मा जी का निधन हो गया । उनकी मृत्यु से हिंदी ब्लॉगजगत की अपूरणीय क्षति हुयी है इसमें कोई संदेह नहीं की हम सभी ने एक प्रेरक मार्गदर्शक को खो दिया ।इस वर्ष चिट्ठा चर्चा के माध्यम से होने वाली खेमेवाजी पर भी प्रश्न खड़े किये गए और अनूप शुक्ल जैसे प्रारंभिक ब्लोगर की कथित विवादास्पद टिप्पणियों पर भी छतीसगढ़ में चर्चा हुयी ब्लोगर मीट के दौरा. उस ब्लोगर मीट में चिट्ठा चर्चा के नाम से डोमेन लेने की भी बात हुयी ….पूरा प्रकरण पर नज़र डालने के लिए संजीत त्रिपाठी का यह पोस्ट देखें- कथन: विनीत, राजकुमार ग्वालानी, अनूप शुक्ल और झा जी के आलोक में यह पोस्ट -आइए कुछ बात करें अब छत्तीसगढ़ ब्लॉगर मीट की रपट पर मिली टिप्पणियों पर। इनमें सबसे खास ध्यान देने लायक हैं विनीत कुमार, राजकुमार ग्वालानी और अनूप शुक्ल जी की। दरअसल ये टिप्पणी ही नहीं बल्कि पोस्टनुमा टिप्पणी हैं इसलिए इनकी चर्चा अलग से आवश्यक है। एकदम मुद्दे पर है। चिट्ठा चर्चा का डोमेन लेने के मुद्दे पर दिए गए ब्लॉग पोस्ट्स के अलावा मिसफ़िट, सारथी, अलबेला खत्री, बिना लाग लपेट के जो कहा जाए वही सच हैं, टिप्पणी चर्चा, ज़िम्दगी के मेले, कुछ भी कभी भी, मसिजीवी आदि पर आई पोस्ट पर भी नज़र डाली जा सकती है !
इस दौरान एक काम और हुआ -डा अरविन्द मिश्र के अनुसार – कुछ रुग्ण और व्यथित मानसिकता के लोगों ने मिलकर डॉ अरविन्द मिश्र की नारी विरोधी ,उद्दंड ,इमेज प्रोजेक्ट की और काफी हद तक सफल भी रहे ।
वर्ष-२०१० का जहां तक सवाल है यह महसूस किया गया कि ब्लोगिंग के तीब्र विस्तार से ब्लोगरों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती पैदा हुई है । इस बार यह भी महसूस किया गया हिंदी ब्लॉगजगत में कि ब्लॉग की विश्वसनीयता का मापदंड बनाया जाए ताकि सार्थक और निरर्थक ब्लॉगों में अंतर किया जा सके, पर ऐसा सोचने वालों के बिपरीत एक वर्ग ऐसा भी उभरा जो पूरी दृढ़ता के साथ यह बताने की बार-बार कोशिश की कि यह कतई संभव नहीं है, क्योंकि ब्लोगिंग दुनिया भर के नव साक्षरों के लिए यह एक अनूठी प्रयोगशाला है। ऐसा भला और कौन सा माध्यम है जहां आदमी बिना कोई बड़ी पूंजी खर्च किए किसी भी बड़ी हस्ती के साथ कंधा जोड़ कर खड़ा हो जाए? इसलिए इसे किसी नियम-क़ानून में नहीं बांधा जा सकता …!
वर्ष-२०१० में हिंदी ब्लोगिंग के प्रति ज्यादा से ज्यादा रुझान पैदा करने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम चलाये गए । १६ वर्गों में सार्थक उपस्थिति दर्ज कराने वाले चर्चित ब्लोगरों के लिए तथा हिंदी ब्लोगिंग में सकारात्मक लेखन को बढ़ावा देने के लिए संवाद डोट कॉम ने संवाद सम्मान की घोषणा की । दो चिट्ठाकारों क्रमश: बसंत आर्य और ललित शर्मा को फगुनाहट सम्मान से नवाजा गया । ताऊ डोट इन के द्वारा बैशाखनंदन सम्मान की घोषणा की गयी । पहली बार इंटरनेट पर लोकसंघर्ष पत्रिका और परिकल्पना के द्वारा प्रायोजित ब्लॉग उत्सव मनाया गया । ब्लोगोत्सव-२०१० में सृजनात्मक उपस्थिति को आधार मानते हुए पहली बार किसी भाषा के ब्लॉग द्वारा ५१ ब्लोगरों के लिए एक साथ सारस्वत सम्मान (लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान -२०१० ) की उद्घोषणा की गयी । शिबना प्रकाशन के द्वारा इस वर्ष माह दिसंबर में ब्लोगर एवं गीतकार राकेश खंडेलवाल को सम्मानित करने की उद्घोषणा की गयी !
ललित शर्मा ने इस वर्ष सकारात्मक चिट्ठों की चर्चा के लिए ब्लॉग4 वार्ता आरंभ किया , वहीं चिट्ठा चर्चा पर अनूप शुक्ल, रवि रतलामी, डा अनुराग,मनोज कुमार, तरुण,मसिजीवी, चर्चा मंच पर डॉ.रुपचन्द्र शास्त्री “मयंक”,मनोज कुमार , संगीता स्वरुप, वन्दना और ब्लोग४वार्ता पर ललित शर्मा,शिवम् मिश्रा, अजय झा, संगीता पुरी चर्चा हिंदी चिट्ठों की पर पंकज मिश्रा , समय चक्र पर महेंद्र मिश्र और झा जी कहीन पर अजय कुमार झा आदि के द्वारा लगातार चिट्ठों को प्रमोट करने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया ।इसी वर्ष लखनऊ ब्लोगर्स असोसिएशन के द्वारा अलवेला खत्री को चिट्ठा हास्य रत्न से अलंकृत करते हुए सम्मानित किया गया , वहीं संजीत त्रिपाठी को हिंदी ब्लोगिंग में उल्लेखनीय योगदान के लिए सृजगाथा ने सम्मानित किया । दो साल पहले चिट्ठाकारी से अस्थायी संन्यास लेकर चले गये ई -पंडित की इस वर्ष फरवरी माह में वापसी हुई । विनीत कुमार ने भी ब्लोगिंग में तीन वर्ष का सफ़र पूरा कर लिया । इस वर्ष हिंदी में एक बेहतर ब्लॉग “जानकी पूल” लेकर आये प्रभात रंजन । १५ जून को डा सुभाष राय ने हिंदी ब्लोगिंग की संभावनाओं और खतरों से आगाह किया ।इस वर्ष तीन महत्वपूर्ण ब्लॉग परिकल्पना के माध्यम से आये, हिंदी ब्लोगिंग के दस्तावेजीकरण हेतु ब्लॉग परिक्रमा , हिंदी जगत की गतिविधियों को प्राणवायु देने के उद्देश्य से शब्द सभागार तथा गीत-ग़ज़ल-कविता-नज़्म के क्षेत्र में सक्रिय नए -पुराने रचनाकारों को एक मंच प्रदान करने हेतु वटवृक्ष, यह ब्लॉग इंटरनेट की मशहूर कवियित्री रश्मि प्रभा के संचालन में सितंबर में शुरू हुआ और लोकप्रियता का नया मुकाम बनाने में सफल भी हुआ ।
साहित्यांजलि के नाम से परिकल्पना की एक और पहल हुई इस वर्ष जिसके अंतर्गत साहित्यिक कृत्यों का प्रकाशन होगा । अभी इसपर रवीन्द्र प्रभात का नया उपन्यास ” ताकि बचा रहे गणतंत्र ” की कड़ियाँ प्रकाशित हो रही है ।अंधविश्वास के प्रति अपनी मुहीम के अंतर्गत जाकिर अली रजनीश इस वर्ष एक नया ब्लॉग लेकर आये जिसका नाम है सर्प संसार । लगभग एक दर्जन ब्लॉग के संचालक अविनाश वाचस्पति लेकर आये मैं आपसे मिलना चाहता हूँ और अजय कुमार झा ब्लॉग बकबक ।इस वर्ष मनोज कुमार का भी एक नया ब्लॉग विचार आया !इसी वर्ष कुअंर कुसुमेश का नया ब्लॉग भी आया, जो सृजनात्मक अभिव्यक्ति की सार्थक प्रस्तुति कही जा सकती है !
इस वर्ष बिभिन्न शहरों में काफी संख्या में ब्लोगर सम्मलेन और गोष्ठियां हुई ,२२ फरवरी को राँची में जमा हुए कलकतिया और झारखण्डी ब्लॉगर,अमिताभ मीत (कोलकाता),शिव कुमार मिश्रा (कोलकाता),बालकिशन (कोलकाता),शम्भू चौधरी (कोलकाता),रंजना सिंह (जमशेदपुर),श्यामल सुमन (जमशेदपुर),पारूल चाँद पुखराज (बोकारो),संगीता पुरी (बोकारो),मनीष कुमार (राँची),नदीम अख्तर (राँची),घनश्याम श्रीवास्तव उर्फ घन्नू झारखंडी (राँची),डॉ॰ भारती कश्यप (राँची),निराला तिवारी (राँची),संध्या गुप्ता (दुमका),सुशील कुमार (चाईंबासा),शैलेश भारतवासी (दिल्ली),लवली कुमारी (धनबाद),अभिषेक मिश्र (वाराणसी) आदि। १२ अप्रैल को लखनऊ में हास्यकवि अलवेला खत्री की उपस्थिति में उपस्थित हुए लखनऊ के ब्लोगर । लखनऊ ब्लोगर असोसिएशन और संवाद डोट कौम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस ब्लोगर संगोष्ठी में श्रीमती अलका मिश्रा, श्रीमती सुशीला पुरी, श्रीमती उषा राय, श्रीमती अनीता श्रीवास्तव, श्री अमित कुमार ओम, श्रीमती मीनू खरे, श्री रवीन्द्र प्रभात, श्री मो० शुएब, श्री हेमंत, श्री विनय प्रजापति, श्री जाकिर अली रजनीश आदि ब्लोगर्स उपस्थित हुए ।२५ अप्रैल को मुम्बई ब्लोगर मीट का आयोजन हुआ, जिसमें विभारानी, बोधिसत्व, आभा मिश्रा, विमल कुमार, अभय तिवारी, राज सिंह, अनिल रघुराज, यूनुस खान, अनीता कुमार, घुघुती बासुती, ममता, जादू, रश्मि रविजा, विवेक रस्तोगी ने शिरकत की । २६ अगस्त को आगरा में अवीनाश वाचस्पति की अध्यक्षता में उपस्थित हुए आगरा और उसके आसपास के ब्लोगर,जयपुर हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन में तकनीक के एक नए पक्ष से परिचय हुआ अर्थात लिंक पर क्लिक करके आप टेलीफोन समाचार सुन भी सकते हैं। जयपुर में आयोजित पहले हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन का समाचार इस नए माध्‍यम से प्रसारित हुआ। ०६ जून को मेरठ में ब्लोगर्स गोष्ठी हुई जिसमें अबिनाश वाचस्पति, सुमित प्रताप सिंह, मिथिलेश दुबे आदि उपस्थित हुए । २२ मई को दिल्ली ब्लोगर मिलन का कार्यक्रम हुआ, जिसमें जय कुमार झा, रतन सिंह शेखावत, एम वर्मा, राजीव तनेजा, संगीता पुरी, विनोद कुमार पाण्डे, बागी चाचा, पी के शर्मा, ललित शर्मा, अमर ज्योति, अविनाश वाचस्पति, संजू तनेजा, मानिक तनेजा, मयंक सक्सेना, नीरज जाट, अंतर साहिल, मयंक, आशुतोष मेहता, शाहनवाज़ सिद्दिकी, राहुल राय, डाँ वेद व्यथित, राजीव रंजन प्रसाद, अजय यादव, अभिषेक सागर, डाँ प्रवीन चोपड़ा, प्रतिभा कुशवाहा, प्रवीण कुमार शुक्ला, खुशदीप सहगल, इरफान खान, योगेश कुमार गुलाटी, उमाशंकर मिश्रा, सुलभ जायसवाल, चंडीदत्त शुक्ल, राम बाबू सिंह, अजय कुमार झा, देवेन्द्र गर्ग, घनश्याम बघेला, सुधीर कुमार आदि उपस्थित हुए । १३ नवंबर को मशहूर ब्लोगर समीर लाल समीर के भारत आगमन पर दिल्ली में नुक्कड़ के संचालक अवीनाश वाचस्पति की अगुआई में उनका शानदार स्वागत हुआ । २१ नवंबर को रोहतक में ब्लोगर मीट हुए , जिसमें राज भाटिया, ललित शर्मा, अजय झा, खुशदीप सहगल, अंतर सोहिल , संगीता पुरी, शहनवाज़, नीरज जाट, संजय भास्कर, योगेन्द्र मौदगिल , राजीव तनेजा आदि उपस्थित हुए और ०१ दिसंबर को संस्कारधानी जबलपुर में जबलपुर ब्लागर्स द्वारा “हिंदी विकास और संभावनाएं” विषय पर संगोष्टी आयोजित की गई जिसमें रायपुर छत्तीसगढ़ से ललित शर्मा ,जी. के अवधिया , हैदराबाद से विजय कुमार सतपति और समीर लाल ( उड़न तश्तरी) उपस्थित हुए ।
किन्तु २७ अगस्त को पांच दिवसीय ‘ब्लॉग लेखन के द्वारा विज्ञान संचार‘ कार्यशाला का आयोजन लखनऊ में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौ्द्यौगिकी संचार परिषद, नई दिल्ली एवं तस्लीम के संयुक्त तत्वाधान में किया,बरकतुल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल एवं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर के पूर्व कुलपति एवं प्रसिद्ध शिक्षाविद श्री महेन्द्र सोढ़ा,साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन के अध्यक्ष डा0 अरविंद मिश्र,जाने पहचाने ब्लॉगर श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी, इंडियन साइंस कम्युनिकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष डा0 वी0 पी0 सिंह,अमित ओम,ब्लॉग तकनीक के महारथी रवि रतलामी और शैलेष भारतवासी,“एक आलसी का चिठ्ठा” फेम के ब्लॉगर श्री गिरिजेश राव,राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद के निदेशक डा0 मनोज पटैरिया,जानी पहचानी ब्लॉगर अल्पना वर्मा,प्रख्यात रचनाकार हेमंत द्विवेदी, लखनऊ ब्लोगर असोसिएशन के अध्यक्ष रवीन्द्र प्रभात, लोकसंघर्ष पत्रिका के रणधीर सिंह, सुमन, मोहम्मद शुएब, जीशान हैदर जैदी,अल्का मिश्रा,समाजसेवी ईं0 राम कृष्ण पाण्डेय और ‘तस्लीम’ के महामंत्री जाकिर अली ‘रजनीश’की उपस्थिति रही। देश में पहली बार सांस ब्लोगिंग पर आधारित इस प्रकार के आयोजन हुए ।
९ -१० अक्तूबर को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के द्वारा ब्लोगिंग की आचार संहिता पर हुई दो दिवसीय संगोष्ठी को इस वर्ष की महत्वपूर्ण गतिविधियाँ कही जा सकती है । ९ अक्टूबर को ‘हिंदी ब्लॉगिंग की आचार-संहिता’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं संगोष्ठी का उद्‍घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति श्री विभूति नारायण राय ने किया।संगोष्ठी में उदयपुर,राजस्थान से पधारीं डॉ.(श्रीमती) अजित गुप्ता,“दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा” के विश्वविद्यालय विभाग के हैदराबाद केंद्र के विभागाध्यक्ष और प्रोफ़ेसर डॉ. ऋषभ देव शर्मा,वरिष्ठ कवि श्री आलोकधन्वा,जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल राय ‘अंकित’,‘चिट्ठा चर्चा’ के संचालक व लोकप्रिय ‘फुरसतिया’ ब्लॉग के लेखक अनूप शुक्ल, लखनऊ से रवीन्द्र प्रभात, जाकिर अली रजनीश ,भड़ास4मीडिया डॉट कॉम’ के यशवंत सिंह, हिंद युग्म के शैलेश भारतवासी ,अहमदाबाद से आये संजय वेंगाणी, उज्जैन से पधारे सुरेश चिपलूनकर, पानीपत से विवेक सिंह, दिल्ली से हर्षवर्धन त्रिपाठी,दिल्ली से हीं अवीनाश वाचस्पति, मेरठ से अशोक कुमार मिश्र, वर्धा से श्रीमती रचना त्रिपाठी, सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी,दिल्ली से विनोद शुक्ल,मुम्बई से श्रीमती अनिता कुमार, बंगलोर से प्रवीण पांडेय, कोलकाता से डॉ. प्रियंकर पालीवाल, छतीसगढ़ से संजीत त्रिपाठी, डॉ.महेश सिन्हा तथा प्रमुख ब्लॉगर और आप्रवासी कवयित्री डॉ. कविता वाचक्नवी आदि उपस्थित थे। पहली बार हिंदी ब्लोगिंग की किसी सार्वजनिक संगोष्ठी में देश के प्रमुख साईबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल उपस्थित हुए ।
ब्लोगिंग में ठलुआते हुए प्रमोद तांबट का एक साल पूरा हुआ इस वर्ष और पहले ही वर्ष में वे ब्लोगोत्सव-२०१० में शामिल भी हुए और सम्मानित भी । विगत वर्ष हिंदी ब्लोगिंग में लालू प्रसाद यादव और मनोज बाजपाई जैसी बिहार की चर्चित हस्तियाँ शामिल हुई थी, इस वर्ष नितीश कुमार का भी ब्लॉग आया ।
अभी तक आप ब्लॉग लिखते रहे हैं, माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के जरिए १४० अक्षरों में अपनी बात कहते रहे हैं, सेलेब्रिटी को फॉलो कर उनके दिल की बात जानते रहे हैं, फेसबुक-ऑकरुट जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर स्टेटस अपडेट कर अपना हाल दुनिया को बताते रहे हैं या अपने दोस्तों-परीचितों का हाल जानते रहे हैं। लेकिन, वर्ष -२००९ में ब्लॉगिंग की दुनिया में मीठी आवाज का रस घुलना शुरू हुआ और इस वर्ष की समाप्ति तक पूरे परवान पर है यह ‘वॉयस ब्लॉगिंग’ की दुनिया।
ज्ञान दत्त पाण्डेय ने मानसिक हलचल पर १५ जनवरी २०१० को अपने पोस्ट में ब्लोगिंग की सीमाएं बतायी है वहीं इस आलेख की प्रतिक्रया में समीर लाल समीर का कहना है कि ” वेब तो दिन पर दिन स्मार्ट होता ही जा रहा है, जरुरत है हमारे कदम ताल मिलाने की. जितना तेजी से मिल पायेंगे, उतनी ज्याद उपयोगिता सिद्ध कर पायेंगे.माला भार्गव के आलेख के लिंक के लिए अति आभार !”
१२ मार्च २०१० को परिकल्पना पर यह महत्वपूर्ण घोषणा की गयी कि हिंदी ब्लॉग जगत को आंदोलित करने के उद्देश्य से परिकल्पना ब्लॉग उत्सव का आयोजन किया जाएगा । यह आयोजन १६ अप्रैल२०१० को शुरू हुआ हिंदी के मशहूर चित्रकार इमरोज के साक्षात्कार , हिंदी ग़ज़लों के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर अदम गोंडवी की ग़ज़लों, देश के प्रमुख व्यंग्यकार अशोक चक्रधर की शुभकामनाओं से । अंतरजाल पर यह आयोजन लगभग दो महीनों तक चला ।इस उत्सव का नारा था – ” अनेक ब्लॉग नेक हृदय ” । इस उत्सव में प्रस्तुत की गयी कतिपय कालजयी रचनाएँ , विगत दो वर्षों में प्रकाशित कुछ महत्वपूर्ण ब्लॉग पोस्ट , ब्लॉग लेखन से जुड़े अनुभवों पर वरिष्ठ चिट्ठाकारों की टिप्पणियाँ ,साक्षात्कार , मंतव्य आदि ।विगत वर्ष-२००९ में ब्लॉग पर प्रकाशित कुछ महत्वपूर्ण कवितायें, गज़लें , गीत, लघुकथाएं , व्यंग्य , रिपोर्ताज, कार्टून आदि का चयन करते हुए उन्हें प्रमुखता के साथ ब्लॉग उत्सव के दौरान प्रकाशित किये गए ।कुछ महत्वपूर्ण चिट्ठाकारों की रचनाओं को स्वर देने वाले पुरुष या महिला ब्लोगर के द्वारा प्रेषित ऑडियो/वीडियो भी प्रसारित किये गए ।उत्सव के दौरान प्रकाशित हर विधा से एक-एक ब्लोगर का चयन कर , गायन प्रस्तुत करने वाले एक गायक अथवा गायिका का चयन कर तथा उत्सव के दौरान सकारात्मक सुझाव /टिपण्णी देने वाले श्रेष्ठ टिप्पणीकार का चयन कर उन्हें सम्मानित किया गया । साथ ही हिन्दी की सेवा करने वाले कुछ वरिष्ठ चिट्ठाकारों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया । पहली बार एक साथ लगभग ५१ ब्लोगरों को परिकल्पना सम्मान से नवाज़ा गया ।
इसी दौरान ताऊ ने बुढऊ ब्लागर एसोसियेशन की स्थापना कर दी हुक्का गुड गुड़ाते हुए …….. कौन कौन बुढाऊ ब्लागर वहां पहुचे ये देखिये…….लखनऊ ब्लोगर असोसिएशन के तर्ज पर इस वर्ष कानपुर ब्लोगर असोसिएशन, आजमगढ़ ब्लोगर असोसिएशन और जूनियर ब्लोगर असोसिएशन की भी स्थापना हुई ।
बी एस पावला , हिंदी ब्लॉगजगत के सबसे जिंदादिल ब्लॉगर , जिन्हें संवाद डोट कॉम ने वर्ष-२००९ का ब्लॉग संरक्षक का सम्मान दिया । १७ जून २०१० के अपने पोस्ट में उन्होंने कहा है कि -”ब्लॉगिंग की दुनिया में एक अनोखा ब्लॉग-संकलक, एग्रीगेटर कर रहा आपका इंतज़ार” । बी एस पावला के द्वारा संचालित ‘प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा HEADLINE ANIMATOR’ इस वर्ष योजनाबद्ध तरीके से निष्क्रिय किया गया । प्रिंट मीडिया ब्लॉग को ही वेबसाईट का रूप दे कर http://www.blogsinmedia.com/बनाया गया है।अपने कथन के अनुसार बी एस पावला ने इसे कार्य रूप में परिवर्तित भी किया,जो इस वक्त यह सरपट चल रहा http://www.blogsinmedia.com/ ।
व्यंग्य वर्ग से परिकल्पना सम्मान-२०१० पाने वाले अविनाश वाचस्पतिने २६ अप्रैल २०१० को ब्लोगोत्सव-२०१० पर एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि ” हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की ताकत को कम करके आंकना बिल्‍कुल ठीक नहीं है “०५ मई २०१० को मुहल्ला लाईव पर विनीत कुमार ने कहा कि ” ज्ञानोदय में हिंदी ब्लोगिंग पर शुरू हुआ उनका स्तंभ ” । अपनी आलोचनात्मक टिप्पणी करते हुए आलेख में उन्होंने कहा है कि -”ब्लॉग के बहाने पहले तो वर्चुअल स्पेस में और अब प्रिंट माध्यमों में एक ऐसी हिंदी तेजी से पैर पसार रही है जो कि देश के किसी भी हिंदी विभाग की कोख की पैदाइश नहीं है। पैदाइशी तौर पर हिंदी विभाग से अलग इस हिंदी में एक खास किस्म का बेहयापन है, जो पाठकों के बीच आने से पहले न तो नामवर आलोचकों से वैरीफिकेशन की परवाह करती है और न ही वाक्य विन्यास में सिद्धस्थ शब्दों की कीमियागिरी करनेवाले लोगों से अपनी तारीफ में कुछ लिखवाना चाहती है। पूरी की पूरी एक ऐसी पीढ़ी तैयार हो रही है जो निर्देशों और नसीहतों से मुक्त होकर हिंदी में कुछ लिख रही है। इतनी बड़ी दुनिया के कबाड़खाने से जिसके हाथ अनुभव का जो टुकड़ा जिस हाल में लग गया, वह उसी को लेकर लिखना शुरू कर देता है। इस हिंदी को लिखने के पीछे का सीधा-सा फार्मूला है जो बात जैसे दिल-दिमाग के रास्ते कीबोर्ड पर उतर आये उसे टाइप कर डालो, भाषा तो पीछे से टहलती हुई अपने-आप चली आएगी।”
“जबसे ब्लोगिंग की लत लगी है हमको, हमेशा परेशान रहते हैं। ना दिन में चैन और ना रात में नींद। दिमाग रूपी आकाश में ब्लोग, ब्लोगर, पोस्ट, टिप्पणियाँ रूपी मेघ ही घुमड़ते रहते हैं। परेशान रहा करते हैं कि आज तो ले-दे के पोस्ट लिख लिया है हमने पर कल क्या लिखेंगे? कई बार मन में आता है कि कल से हर रोज लिखना बंद। निश्चय कर लेते हैं कि आज के बाद से अब सप्ताह में सिर्फ एक या दो पोस्ट लिखेंगे पर ज्योंही आज बीतता है और कल है कि है। तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा और अंगुष्ठ याने कि सारी की सारी उँगलियाँ रह-रह कर कम्प्यूटर के कीबोर्ड की ओर जाने लगती हैं। जब तक एक पोस्ट ना लिख लें, चैन ही नहीं पड़ता। पर रोज-रोज आखिर लिखें तो लिखें भी क्या? ” यह मैं नहीं कह रहा हूँ ऐसा कहा है जी के अवधिया ने अपने ब्लॉग धान के देश में पर १२ जुलाई २०१० को “बड़ी बुरी लत है ब्लोगिंग की “१४ अगस्त २०१० को अफलातून ने यही है वह जगह पर “ब्लॉगिंग के चार साल : आंकड़ों में ” प्रस्तुत किया है । छींटे और बौछारें पर ०४ नवंबर २०१० को रवि रतलामी ने टेक्नोराती ब्लॉग सर्वे का व्योरा प्रस्तुत किया है और कहा है कि “टेक्नोराती ब्लॉग सर्वे 2010 आंकड़े – क्या ब्लॉगिंग पुरूषों की बपौती है?”
२५ फरवरी को उड़न तश्तरी पर प्रकाशित ऑपरेशन कनखुजरा में मनुष्य और बाघ को लेकर की गयी टिप्पणी को पाठकों ने काफी सराहा । वहीँ डा अनवर जमाल के द्वारा ०२ अगस्त को मन की दुनिया पर कथा के दर्पण में सच को प्रतिबिम्बित करने का एक अनूठा प्रयास किया गया । ०१ अप्रैल मुर्ख दिवस पर शरद कोकाश ने व्यंग्य के माध्यम से ब्लोगिंग से जुड़े महत्वपूर्ण पहलूओं पर प्रकाश डाला , शीर्षक था -बाल (ब्लॉग ) ना बाँका कर सके जो जग बैरी होय….२९ अप्रैल को नन्ही ब्लोगर पाखी ने चिड़िया टापू की सैर के माध्यम से एक सुन्दर यात्रा वृत्तांत प्रस्तुत किया । २७अगस्त को सफ़ेद घर पर ब्लॉग महंत………..ब्लॉगिंग का ककहरा पढ़ते मिस्टर मदन…….आलू का जीजा……..ढेला ढोवन…….सतीश पंचम का व्यंग्य आया जिसे पाठकों ने काफी सराहा वहीँ ३१ अगस्त को सरस पायस पर सूर्य कुमार पाण्डेय की एक बहुत ही सारगर्भित कविता प्रकाशित हुई ।१६ अगस्त को भला बुरा ब्लॉग ने ५०० वीं पोस्ट लिखी । २७ अक्तूबर को मैं मुरख तुम ज्ञानी पर वर्धा सम्मलेन का पोस्टमार्टम किया गया। १८ नवंबर को स्वास्थ सबके लिए पर ब्लोगिंग और तनाव से संबंधित महत्वपूर्ण पहलूँ को उकेरा ।
१६ मार्च कों विवेक सिंह न ब्लोगिंग कों पत्र लिख कर कहा कि उदास मत हो ब्लोगिंग । ०९ अप्रैल को मा पलायनम पर मनोज मिश्र ने मित्र मिलन की अजब कहानी से अवगत कराया । ११ अप्रैल को ब्लोग्स पंडित ने जी -८ से ब्लॉग जगत में एक नयी क्रान्ति से पाठकों को रूबरू कराया ।३१ जुलाई को प्रवीण जाखर ने कहा कि साइबर सुरक्षा खतरे में : एक्सक्लूसिव पड़ताल २१ अगस्त को डायरी में मनीषा पाण्डेय नकसबे में बसे रबीश कुमार की चर्चा की । एक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण करते हुए आशीष खंडेलवाल ने हिंदी ब्लॉग टिप्स पर 100 से ज़्यादा फॉलोवर वाले हिन्दी चिट्ठों के शतक की जानकारी दी । १७ जुलाई को जानकी पूल पर मनोहर श्याम जोशी की बातचीत प्रकाशित की गयी । सृजन यात्रा में सुभाष नीरव ने अपनी सृजनात्मक यात्रा से अवगत कराया । राजीव तनेजा ने हंसते रहो पर अत्यंत सारगर्भित व्यंग्य प्रस्तुत करते हुए कहा है कि हे पार्थ!…अर्जुन गाँडीव उठाए तो किसके पक्ष में?… ।दिव्य नर्मदा ने ब्लोगिंग की आचार संहिता : कुछ सवाल उठाये हैं ।
१८ नवंबर को दबीर निउज ने अपने एक आलेख में बताया कि फेसबुक की लोकप्रियता 5 साल की मेहमान ….०३ दिसंबर को अपने एक आलेख में भारतीय नागरिक ने यह सूचना दी कि अभी तीन दिन पहले तक wikileaks.org ठीक-ठाक ढ़ंग से खुल रही थी। लेकिन आज यह साइट नहीं खुल पा रही। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस साइट को प्रतिबन्धित कर दिया गया है।
………वर्ष-२०१० में जो कुछ भी हुआ उसे हिंदी चिट्ठाजगत ने किसी भी माध्यम की तुलना में बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने की पूरी कोशिश की है। कुछ ब्लॉग ऐसे है जिनकी चर्चा विगतवर्ष-२००९ में भी हुयी थी और आशा की गई थी की वर्ष- २०१० में इनकी चमक बरक़रार रहेगी । सिनेमा पर आधारित तीन ब्लॉग वर्ष-२००९ में शीर्ष पर थे । एक तरफ़ तो प्रमोद सिंह के ब्लॉग सिलेमा सिलेमा पर सारगर्भित टिप्पणियाँ पढ़ने को मिलीं थी वहीं दिनेश श्रीनेत ने इंडियन बाइस्कोप के जरिये निहायत ही निजी कोनों से और भावपूर्ण अंदाज से सिनेमा को देखने की एक बेहतर कोशिश की थी । तीसरे ब्लॉग के रूप में महेन के चित्रपट ब्लॉग पर सिनेमा को लेकर अच्छी सामग्री पढ़ने को मिली थी । यह अत्यन्त सुखद है की उपरोक्त तीनों ब्लोग्स में से महेन के चित्रपट को छोड़कर शेष दोनों ब्लोग्स वर्ष २०१० में भी अपनी चमक और अपना प्रभाव बनाये रखने में सफल रहे हैं ।
इसीप्रकार जहाँ तक राजनीति को लेकर ब्लॉग का सवाल है तो अफलातून के ब्लॉग समाजवादी जनपरिषद, नसीरुद्दीन के ढाई आखर, अनिल रघुराज के एक हिन्दुस्तानी की डायरी, अनिल यादव के हारमोनियम, प्रमोदसिंह के अजदक और हाशिया का जिक्र किया जाना चाहिए। ये सारे ब्लोग्स वर्ष २००९ में भी शीर्ष पर थे और वर्ष २०१० में अनियमितता के बावजूद शीर्ष पर न सही किन्तु अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल जरूर हुए हैं ।
वर्ष २००९ में सृजनात्मक ब्लोग्स की श्रेणी में सुरपेटी, कबाड़खाना, ठुमरी, पारूल चाँद पुखराज का चर्चित हुए थे , जिनपर सुगम संगीत से लेकर क्लासिकल संगीत को सुना जा सकता था , पिछले वर्ष रंजना भाटिया का ब्लॉग ने भी ध्यान खींचा था और जहाँ तक खेल का सवाल है, एनपी सिंह का ब्लॉग खेल जिंदगी है पिछले वर्ष शीर्ष पर था। पिछले वर्ष वास्तु, ज्योतिष, फोटोग्राफी जैसे विषयों पर भी कई ब्लॉग शुरू हुए थे और आशा की गई थी कि ब्लॉग की दुनिया में २०१० ज्यादा तेवर और तैयारी के साथ सामने आएगा। यह कम संतोष की बात नही कि इस वर्ष भी उपरोक्त सभी ब्लोग्स सक्रीय ही नही रहे अपितु ब्लॉग जगत में एक प्रखर स्तंभ की मानिंद दृढ़ दिखे । निश्चित रुप से आनेवाले समय में भी इनके दृढ़ता और चमक बरकरार रहेगी यह मेरा विश्वास है ।
यदि साहित्यिक लघु पत्रिका की चर्चा की जाए तो पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष ज्यादा धारदार दिखी मोहल्ला । अविनाश का मोहल्ला कॉलम में चुने ब्लॉगों पर मासिक टिप्पणी करते हैं और उनकी संतुलित समीक्षा भी करते हैं। इसीप्रकार वर्ष २००९ की तरह वर्ष-२०१० में भी अनुराग वत्स के ब्लॉग ने एक सुविचारित पत्रिका के रूप में अपने ब्लॉग को आगे बढ़ाया हैं।
पिछले वर्ष ग्रामीण संस्कृति को आयामित कराने का महत्वपूर्ण कार्य किया था खेत खलियान ने , वहीं विज्ञान की बातों को बहस का मुद्दा बनाने सफल हुए थे पंकज अवधिया अपने ब्लॉग मेरी प्रतिक्रया में । हिन्दी में विज्ञान पर लोकप्रिय और अरविन्द मिश्रा के निजी लेखों के संग्राहालय के रूप में पिछले वर्ष चर्चा हुयी थी सांई ब्लॉग की ,गजलों मुक्तकों और कविताओं का नायाब गुलदश्ता महक की ,ग़ज़लों एक और गुलदश्ता है अर्श की, युगविमर्श की , महाकाव्य की, कोलकाता के मीत की , “डॉ. चन्द्रकुमार जैन ” की, दिल्ली के मीत की, “दिशाएँ “की, श्री पंकज सुबीर जी के सुबीर संवाद सेवा की, वरिष्ठ चिट्ठाकार और सृजन शिल्पी श्री रवि रतलामी जी का ब्लॉग “ रचनाकार “ की, वृहद् व्यक्तित्व के मालिक और सुप्रसिद्ध चिट्ठाकार श्री समीर भाई के ब्लॉग “ उड़न तश्तरी “ की, ” महावीर” ” नीरज ” “विचारों की जमीं” “सफर ” ” इक शायर अंजाना सा…” “भावनायें… ” आदि की।इस वर्ष हिंदी ब्लोगिंग को नयी दिशा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में श्रेष्ठ सहयोगी की भूमिका में दिखे एडवोकेट रंधीर सिंह सुमन यानी इस वर्ष की उनकी गतिविधिया को nice कहा जा सकता है ! फिल्म अभिनेता सलमान खान की तरह सलीम खान भी इस वर्ष लगातार विवादों में घिरे रहे, इसके बावजूद वे अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए संवाद सम्मान और लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान ससे नवाजे गए !
इसी क्रम में हास्य के एक अति महत्वपूर्ण ब्लॉग “ठहाका ” हिंदी जोक्स तीखी नज़र current CARTOONS बामुलाहिजा चिट्ठे सम्बंधित चक्रधर का चकल्लस और बोर्ड के खटरागी यानी अविनाश वाचस्पति तथा दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान- पत्रिका आदि की । वर्ष २००९ के चर्चित ब्लॉग की सूची में और भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग जैसे जबलपुर के महेंद्र मिश्रा के निरंतर अशोक पांडे का -“ कबाड़खाना “ , डा राम द्विवेदी की अनुभूति कलश , योगेन्द्र मौदगिल और अविनाश वाचस्पति के सयुक्त संयोजन में प्रकाशित चिट्ठा हास्य कवि दरबार , उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के प्रवीण त्रिवेदी का “ प्राइमरी का मास्टर “ , लोकेश जी का “अदालत “ , बोकारो झारखंड की संगीता पुरी का गत्यात्मक ज्योतिष , उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर सकल डीहा के हिमांशु का सच्चा शरणम , विवेक सिंह का स्वप्न लोक , शास्त्री जे सी फ़िलिप का हिन्दी भाषा का सङ्गणकों पर उचित व सुगम प्रयोग से सम्बन्धित सारथी , ज्ञानदत्त पाण्डेय की मानसिक हलचल और दिनेशराय द्विवेदी का तीसरा खंबा आदि की चर्चा वर्ष -२००९ में परिकल्पना पर प्रमुखता के साथ हुयी थी और हिंदी ब्लॉगजगत के लिए यह अत्यंत ही सुखद पहलू है , की ये सारे ब्लॉग वर्ष-२०१० में भी अपनी चमक बनाये रखने में सफल रहे हैं ।
जून-२००८ से हिंदी ब्लॉगजगत में सक्रिय के. के. यादव का वर्ष-२०१० में प्रकाशित एक आलेख अस्तित्व के लिए जूझते अंडमान के आदिवासी ,वर्ष-२००८ से दस ब्लोगरों क्रमश: अमित कुमार यादव, कृष्ण कुमार यादव, आकांक्षा यादव, रश्मि प्रभा, रजनीश परिहार, राज यादव, शरद कुमार, निर्मेश, रत्नेश कुमार मौर्या, सियाराम भारती, राघवेन्द्र बाजपेयी के द्वारा संचालित सामूहिक ब्लॉग युवा जगत पर इस वर्ष प्रकाशित एक आलेख हिंदी ब्लागिंग से लोगों का मोहभंग ,२४ जून २००९ से सक्रीय और लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित वर्ष की श्रेष्ठ नन्ही ब्लोगर अक्षिता पाखी के ब्लॉग पर प्रकाशित आलेख डाटर्स-डे पर पाखी की ड्राइंग… १० नवम्बर-२००८ से सक्रीय राम शिव मूर्ति यादव का इस वर्ष प्रकाशित आलेख मानवता को नई राह दिखाती कैंसर सर्जन डॉ. सुनीता यादव, २६ अगस्त -२००८ से सक्रीय सामूहिक ब्लॉग साहित्य शिल्पी (जिसके मुख्य संचालक हैं राजिव रंजन प्रसाद ) पर इस वर्ष प्रकाशित पोस्ट बस्तर के वरिष्ठतम साहित्यकार लाला जगदलपुरी से बातचीत ,दिसंबर-२००८ से सक्रीय ब्लोगर त्रिपुरारी कुमार शर्मा का ब्लॉग तनहा फलक पर प्रकाशित पोस्ट हिंदुस्तान की हालत ,जनवरी-२००८ से सक्रीय राम कुमार त्यागी के कविता संग्रह पर प्रकाशित पोस्ट अकेला हूँ तो क्या हुआ ? , मेरी आवाज़ पर प्रकाशित आलेख पश्चताप, गान्धी और मेरे पिता, शोध का सोच और आत्मनिर्भरत पर प्रभाव ,२० जनवरी -२०१० में मनोज कुमार, संगीता स्वरूप, रेखा श्रीवास्तव, अरुण चन्द्र राय, संतोष गुप्ता, परशुराम राय, करण समस्ती पुरी, हरीश प्रकाश गुप्त आदि ब्लोगर के सामूहिक संचालन में प्रकाशित ब्लॉग राजभाषा पर प्रकाशित पोस्ट आम आदमी की हिंदी प्रयोजनमूलक हिंदी के ज़रिए ,सितंबर-२००९ से सक्रीय लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान /बैसाखनंदन सम्मान से सम्मानित ब्लोगर मनोज कुमार का पोस्ट फ़ुरसत में … बूट पॉलिश!,मई-२००७ से सक्रीय वन्दना गुप्ता का वर्ष-२०१० में प्रकाशित आलेख :”पिता का योगदान” और “राष्ट्रमंडल खेलों का असर ?” ,अप्रैल- २००९ से सक्रीय और लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित शिखा वार्शनेय का आलेखक्या करें क्या ना करें ये कैसी मुश्किल हाय.२१ सितंबर-२००८ से सक्रीय रेखा श्रीवास्तव के अपने ब्लॉग पर वर्ष-२०१० में प्रकाशित एक आलेख का शीर्षक और यू आर एल …..किसी की आँख का आंसूं! आदि को पाठकों की सर्वाधिक सराहना प्राप्त हुयी है .
हिन्दी ब्लॉगिंग में “एकल” लिखने वालों तथा यदि इसमें “समूह” ब्लॉग भी जोड़ दिया जाये तो, फ़िलहाल “1000 सब्स्क्राइबर क्लब” के सदस्य गिने-चुने ही हैं, लेकिन जिस रफ़्तार से हिन्दी ब्लॉगरों की संख्या बढ़ रही है और पाठकों की संख्या भी तेजी से विस्तार पा रही है, जल्दी ही 1000 सब्स्क्राइबर की संख्या बेहद मामूली लगने लगेगी और जल्दी ही कई अन्य ब्लॉगर भी इसे पड़ाव को पार करेंगे।०६ दिसम्बर के अपने पोस्ट में सुरेश चिपलूनकर ने कहा है कि महाजाल ब्लॉग के 1000 सब्स्क्राइबर हो गये हैं।
हिंदी ब्लोगिंग को प्राणवायु देने के उद्देश्य से चिट्ठाजगत लगातार सक्रिय रहा इस वर्ष भी, किन्तु हिंदी के बहुचर्चित एग्रीगेटर ब्लोगवाणी का अचानक बंद हो जाना इस वर्ष की महत्वपूर्ण घटना है, ब्लोगवाणी के बंद होने के पश्चात हमारीवाणी आयी, जिसका उद्देश्य है हिंदी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओँ तथा विदेशी भाषाओँ में लिखने वाले भारतियों को अपनी आवाज़ रखने के लिए एक उचित मंच उपलब्ध करना तथा भारतीय भाषाओँ तथा लेखन को एक नई सोच के साथ प्रोत्साहित करना, क्योंकि हमारीवाणी का उद्देश्य लेखकों के लिए अपना ब्लॉग संकलक उपलब्ध करना है, तो इसमें सबसे अधिक ध्यान इस बात पर है कि लेखकों की भावनाओं का पूरा ख्याल रखाजाए । इसीवर्ष इन्डली भी आयी और इसने भी भारतीय ब्लॉग को प्रमोट करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है । इसके अतिरिक्त छोटे-छोटे समूह में http://www.feedcluster.com/ के सहयोग से कई छोटे-छोटे एग्रीगेटर भी कार्यरत है जैसे – आज का हस्ताक्षर, परिकल्पना समूह,महिलावाणी, अपनी वाणी, अपनी माटी , लक्ष्य आदि । हलांकि जिस दृढ़ता के साथ ब्लॉग प्रहरी का आगमन हुआ , वह हिंदी ब्लॉगजगत में लंबी रेस का घोड़ा नहीं बन सका ।
वर्ष-२०१० की शुरुआत में जिस ब्लॉग पर मेरी नज़र सबसे पहले ठिठकी वह है शब्द शिखर , जिस पर हरिवंशराय बच्चन का नव-वर्ष बधाई पत्र !! प्रस्तुत किया गया ।हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग का कोई भी लम्‍हा कहीं नहीं गया है। सब स्‍मृतियों में है। ब्‍लॉगिंग के इस ‘ठंडा ठंडा कूल कूल’ को बिल्‍कुल मत भूलें और न किसी को भूलने दें। ब्‍लॉगिंग के झूले में सदा ही झूलें। पोस्‍टों और टिप्‍पणियों के हिंडोले में डोलें। ब्‍लॉग बो लें। पोस्‍टों को सींचें और टिप्‍पणियों को भी मत भींचें। इन तीनों का होना विश्‍वास का प्रतीक है। इसे जीवन में रचने बसने दें।ऐसा बताया की-बोर्ड के खटरागी ने अपने पोस्ट हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग का आने वाला हर पल हर बरस मंगलमय हो (अविनाश वाचस्‍पति)।मुर्दा पीटना बन्द कर कुछ अच्छा सोचें नये साल में… कुछ ऐसा ही कहा सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी ने सत्यार्थ मित्र पर अपने इस पोस्ट में । विगत वर्ष परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण -२००९ में एक महत्वपूर्ण ब्लॉग हिंदी टेक ब्लॉग की चर्चा नहीं की जा सकी थी कारण था वर्ष के आखिरी महीनो में उस ब्लॉग का आना । इसलिए परिकल्पना पर पहली चर्चा मैंने इसी ब्लॉग से शुरू की । इस वर्ष की शुरुआत में ममता टी वी का स्थानान्तरण हो गया गोवा से इटानगर ।
१५ जनवरी को हिंदी टेक ब्लॉग पर एक महत्वपूर्ण जानकारी इंटरनेट पर हिंदी पत्रिकाओं के संबंध में दी गयी ।उल्लास की संभावनायें लेकर आता है नववर्ष । न जाने कितनी शुभाकांक्षायें, स्वप्न, छवियाँ हम सँजोते हैं मन में नये वर्ष के लिये । अनगिन मधु-कटु संघात समोये अन्तस्तल में विगत वर्ष का विहंग उड़ जाता है शून्य-गगन में । हम नये फलक के लिये उत्सुक हो उठते हैं । क्या-क्या चाहते हैं, क्या-क्या सोचते हैं, क्या फरियाद है हमारी हमारे राम से – अपने प्रिय कवि ’कैलाश गौतम’ की रचना से रूबरू कराया हिमांशु ने – “नये साल में रामजी…” । कुछ मेरी कलम से पर रंजना (रंजू भाटिया ) ने कहा ” झूमता हुआ नया साल फिर आया ” । गत्यात्मक ज्योतिष पर संगीता पुरी ने कहा कि वर्ष-२०१० ही क्यों उसके बाद आने बाले वर्ष भी मंगलमय हो ।यदि ब्लॉग पर बसंत की बात की जाए तो सबसे पहले मैं चर्चा करना चाहूंगा घुघूती बासूती का जिन्होंने एक प्यारी सी कविता के माध्यम से यह प्रश्न किया कि क्या यही है बसंत ? । वहीं दफ अतन पर अपूर्व ने एक प्यारा सा गीत प्रस्तुत किया जो पूर्व में हिंद युग्म पर प्रकाशित किया जा चुका है । महाकवि निराला को याद करते हुए परिकल्पना पर शुरू हुआ “बसंतोत्सव ” जिसके अंतर्गत हिंदी के कालजयी साहित्यकारों के साथ- साथ आज के कुछ महत्वपूर्ण कवियों की वसंत पर आधारित कवितायें प्रस्तुत लगभग महीने भर की गयी और फगुनाहट की यह बयार थमी होली की मस्ती के साथ . इसमें कवितायें भी थी , व्यंग्य भी , ग़ज़ल भी , दोहे भी और वसंत की मादकता से सराबोर गीत भी और अंत में फगुनाहट सम्मान की उद्घोषणा । स्वप्न मञ्जूषा “अदा” ने काव्य मंजूषा पर अनोखे अंदाज़ में प्रस्तुत किया ब्लॉग में फाग । ताऊ ने कहा कि मेरा गधा राम प्यारे अभी भी होली की तरंग में है । इसी दौरान संजीव तिवारी ने आरंभ में फगुनाहट सम्मान के अंतर्गत वोटिंग में छत्तीसगढ़ के ब्लोगरों की सहभागिता पर प्रश्न उठाते बहुत सुन्दर पोस्ट लिखा “आभासी दुनिया के दिबाने और भूगोल के परवाने ” । etips blog ने कुछ ब्लॉग जो सचमुच कर रहे है हिंदी और ब्लॉग की सेवा से अवगत कराया ।
जिस प्रकार जीवन के चार आयाम होते हैं उसी प्रकार हिंदी चिट्ठाकारी की भी चार सीढियां है जिससे गुजरकर हिंदी चिट्ठाकारी संपूर्ण होता है ।प्रथम सीढ़ी – भावना ….जिससे दिखती है लक्ष्य की संभावना ,संभावना से प्रष्फुटित होता है विश्वास ,विश्वास से दृढ़ता , दृढ़ता से प्रयास ….!यानी दूसरी सीढ़ी – प्रयास ….प्रयास परिणाम कम शोध है…यह तभी सार्थक है जब कर्त्तव्य बोध है । यानी तीसरी सीढ़ी – कर्त्तव्य….कर्त्तव्य से होता है समन्वय आसान…और यही है उत्तरदायित्व का प्रत्यक्ष प्रमाण । यानी चौथी सीढ़ी है – उत्तरदायित्व…..जिसमें न भय , न भ्रम , न भ्रान्ति होती है…..केवल स्वावलंबन के साथ जीवन में शांति होती है…..तो -
आईये अब आगे बढ़ते हुए वर्ष के कुछ उपयोगी और सार्थक पोस्ट पर नज़र डालते हैं , क्योंकि ब्लॉग लिखने से ज्यादा महत्वपूर्ण है अपने सामाजिक सरोकार के प्रति सजग रहना और ब्लोगिंग के माध्यम से दूसरों को उत्प्रेरित करना , ऐसा ही कारनामा कर दिखाया ब्लोगर राजकुमार सोनी ने । राजकुमार सोनी ने अपने ब्लाग बिगुल पर बड़ी बेबाकी से अनाथ आश्रम के बच्चों और संचालक के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाया , उन्होंने कहा कि “जीवन में पहली बार ऐसे कमीनों से मुलाकात हो रही है जिन्हें देखकर मैं क्या कोई भी यह कहने का मजबूर हो जाएगा कि बस अब इस धरती का अंत निकट है।” वहीँ अनिल पुसदकर ने एक ब्लोगर की हिम्मत और ताक़त से समाज और राजनीति के कथित ठेकेदारों को अवगत कराते हुए अपने ब्लॉग आमिर धरती गरीब लोग पर कहा कि -”थानेदारों को भ्रष्ट कहना आपकी ईमानदारी नही बेबसी का सबूत है गृहमंत्री जी!” वहीं डॉ.कुमारेन्द्र सिंह ने वित्त मंत्री को माफ़ करिए कहते हुए कहा है कि उनकी नादानी को नजर अंदाज किया जाये……
इस वर्ष महिला आरक्षण को लेकर भी बहुत सारे पोस्ट आये, जिसमें से एक है ललित डोट कौम पर ललित शर्मा का यह पोस्ट -गांव बसा नहीं डकैत पहले पहुंचे……..महिला आरक्षण । अपने इस पोस्ट में ललित शर्मा का कहना है कि “अभी अभी ही महिला आरक्षण विधेयक पास हुआ है राज्य सभा से और इसे कानून बनने में कुछ समय और लगेगा ……. लेकिन इसमें मिले महिला आरक्षण अधिकारों पर सेंध लगाने की क्या कहें…….. सीधे सीधे डाका डालने ने मनसूबे बान्धे जाने लगे हैं…… !” इसी दौरान अजित गुप्ता का कोना पर डॉ. श्रीमती अजित गुप्ता के एक संस्मरण पर मेरी नज़र पड़ी , शीर्षक है – ना मेल है और ना ही फिमेल है………!
२४ जनवरी को पंकज मिश्रा ने हिंदी चिट्ठों की चर्चा के क्रम में अत्यंत उपयोगी प्रश्न उठाये कि “मुंबई बम कांड का अपराधी आजकल मराठी भाषा का बहुत प्रयोग कर रहा है ,अदालत के सवाल जवाब मे भी वह मराठी भाषा का प्रयोग करता है..राज साहब ठाकरे तो बहुत खुश होगे कि कोई तो उनकी पीडा समझता है :) न्युज चैनल अखबार समाचार सभी जगह कसाब के इस भाषा प्रयोग का चर्चा हो रहा है और उन खबरिया बाजार मे कोई भी माई का लाल ये पुछने की जुर्रत नही कर रहा है कि ऐसे अपराधी से जेल मे दोस्ती कौन किया है जो उसको मराठी भाषा और सभ्यता सिखा रहा है ..क्या यह एक नेक काम है कि आप जेल के समय मे उस्का टाईम पास कर रहे है भाषा सिखाकर ?
हिंदी ब्लॉग जगत में इस वर्ष कई अजीबो गरीब घटनाएँ हुई , जिसमें से एक ऐसी घटना हुई कि ब्लोगरों को काफी दिनों तक बेनामी टिप्पणियों से संबंधित खतरों पर चर्चा के लिए मजबूर होना पडा । वह घटना थी किसी छद्म नामधारी कुमार जलजला की व्यथित कर देने वाली टिप्पणियों को लेकर । अपनी,उनकी,सबकी बातें पर रश्मि रविजा ने जलजला को एक खुला पत्र लिखा , जिसमें उन्होंने कहा कि -”कोई मिस्टर जलजला एकाध दिन से स्वयम्भू चुनावाधिकारी बनकर.श्रेष्ठ महिला ब्लोगर के लिए, कुछ महिलाओं के नाम प्रस्तावित कर रहें हैं. (उनके द्वारा दिया गया शब्द, उच्चारित करना भी हमें स्वीकार्य नहीं है) पर ये मिस्टर जलजला एक बरसाती बुलबुला से ज्यादा कुछ नहीं हैं, पर हैं तो कोई छद्मनाम धारी ब्लोगर ही ,जिन्हें हम बताना चाहते हैं कि हम इस तरह के किसी चुनाव की सम्भावना से ही इनकार करते हैं।”१७ मई २०१० को छतीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों ने पहली बार यात्री बस को बारुदी सुरंग से उडा दिया। बस मे यात्रियों के साथ कुछ जवान भी सवार थे। इसमें लगभग ५० लोगों की मौत हो गयी ।देश में एक इतनी बड़ी घटना हो गई जिसको सारा मीडिया चीख-चीख कर बता रहा था , किन्तु अपने को मीडिया के समकक्ष समझने वाला ब्लाग जगत में कुछ विशेष खलबली नहीं देखी गयी , फिर भी नक्सली समस्या पर एक आध ब्लॉग जो बोला उसमें पहला नाम आता है डा सत्यजित साहू का जिन्होंने अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा कि “मेरे देश में अशांति लानें वालों ,यहाँ की जमीं को खुनी रंग से संगने वालों ,इंसानों की इस बेरहमी से जन लेने वालों ,कातिल ,हत्यारे ,जालिम हो हो तुम , तुम्हारा अंत अब नजदीक ही है ,इस तरह से तुमने जनता और जवानों का क़त्ल किया है ,की क़त्ल ही तुमसे अब अपना हिसाब लेगा ,अवाम की ताकत को तुमने पहचना नहीं है ,इस धरती की नियत को जाना नहीं है ,इस धरती को अब उठकर खड़ा होना होगा, जम्हूरियत को ही अब तुम्हारा हिसाब करना होगा,अपराधियों ,हत्यारे नक्सलियों ,तुम्हारा अंत अब निकट ही है ……! कलम बंद में शशांक शुक्ला ने कहा आखिर नक्सलियों को क्या चाहिए ?सद्भावना दर्पण में गिरीश पंकज ने पूछा किसुन्दर-प्यारे बस्तर में ये हिंसा भरे नज़ारे कब तक ॥? छतीसगढ़ पर उदय ने कहा कौन कहता है कि नस्लवाद एक विचारधारा है ?
२६ जून २०१० को माईकल जैक्सन को याद करते हुए कुमायूनी चिली में शेफाली पाण्डेय ने कहा कि “दुःख से भरा , देखा जब चेहरा ….बोल उठे यमराज …..मत हो विकल , बेटा माईकल ! मरने के बाद , कौन सा दुःख…..सता रहा है तुझको ,सब पता है मुझको …!” संवेदनाओं के पंख पर २६ जून को डा महेश परिमल का एक आलेख आया जिसमें उन्होंने अंदेशा व्यक्त किया कि …हम सब अघोषित आपातकाल की ओर… अब पेट्रोल-डीजल और केरोसीन के दाम बढ़ गए। रसोई गैस भी महँगी हो गई। सरकार ने अपना रंग अब दिखाना शुरू कर दिया है। पहले भी यही कहा जाता रहा है कि कांग्रेस व्यापारियों की सरकार है,इसका गरीबों से कोई लेना-देना नहीं है। महँगाई काँग्रेस शासन में ही बेलगाम हो जाती है। एक तो मानसून आने में देर हो रही है। दूध, बिजली के दाम अभी-अभी बढ़े हैं। उस पर सरकार का यह रवैया, आम आदमी को बुरी तरह से त्रस्त करके रख देगा। २५ जून १९७५ को देश में आपातकाल की घोषणा हुई थी। उसी तारीख को इस बार पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और केरोसीन के दाम बढ़ाकर सरकार ने हम सबको एक अघोषित आपातकाल की तरफ धकेल दिया हैलोकसंघर्ष-परिकल्पना द्वारा आयोजित ब्लागोत्सव-2010 में वर्ष की श्रेष्ठ नन्ही चिट्ठाकारा का ख़िताब अक्षिता (पाखी) को मिलाने पर आकांक्षा यादव का कहना था कि आजकल के बच्चे हमसे आगे है ।
सृजन ही वह माध्यम है जिससे समाज समृद्ध होता है, किन्तु सृजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है कार्टून्स । यदि ब्लॉग जगत में सक्रिय कार्टूनिस्टों की बात की जाए तो इस वर्ष लोकसंघर्ष- परिकल्पना ने काजल कुमार को ब्लोगोत्सव-2010 के आधार पर वर्ष के श्रेष्ठ कार्टूनिस्ट का खिताब दिया । वैसे ब्लॉग जगत में इस वर्ष जिन कार्टूनिस्टो की सार्थक उपस्थिति देखी गयी उसमें से प्रमुख हैं काजल कुमार, इरफ़ान खान,अनुराग चतुर्वेदी , कीर्तिश भट्ट , अजय सक्सेना , कार्टूनिस्ट चंदर , राजेश कुमार दुबे, अभिषेक आदि ।
जब सृजन की बात चली है तो सबसे पहले आपको मैं बता दूं कि वेब पत्रिका तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित, साहित्य, संस्कृति, विचार और भाषा की मासिक पोर्टल सृजनगाथा डॉट कॉम के चार वर्ष पूर्ण होने पर चौंथे सृजनगाथा व्याख्यानमाला का आयोजन ६ जुलाई, को स्थानीय प्रेस क्लब, रायपुर में किया गया था। इसमें कविता के सफ़र पर अच्छी चर्चा हुई । इस अवसर पर संजीत त्रिपाठी का सम्मान सृजनगाथा टीम ने किया।
आईये उन ब्लॉग्स की ओर रुख करते हैं जहां बसती है साहित्य की आत्मा । इस दिशा में पहला ब्लॉग है जाकिर अली रजनीश के हमराही जिसमें उन्होंने अदम गोंडवी की ग़ज़ल प्रकाशित की “सुलगते जिस्म की गर्मी का फिर एहसास हो कैसे, मोहब्बत की कहानी अब जली माचिस की तीली है। साधना वैद्य ने कहा – अनगाये रह गए गीत! राजतन्त्र में खुशबू फूलों की…. । सूर्यकान्त गुप्ता के कुछ अटपटे कुछ चटपटे दोहे ,शानू शुक्ला की- कुछ हाइकु कवितायेँ ,बग़ावत के कमल खिलते हैं.. ,गिरीश पंकज का-”गीतालेख”./ अबला गैया हाय तुम्हारी है यह दुखद कहानी.., संजीव तिवारी का – छत्तीसगढ़ की संस्‍कृति से संबंधित महत्‍वपूर्ण लिंक,ई-साहित्‍य और हिन्‍दी ब्‍लॉग : सार्थक अभिव्‍यक्ति का एक झरोखा – ब्‍लॉग जगत पर एक विहंगम दृष्टि वशिनी शर्मा की। अन्तर सोहिल की कविता – आशिकी म्है तेज घनी छोरां सै भी छोरी सैं ,राजकुमार सोनी की – पोस्टर कविताएं,जी.के. अवधिया ने कहा – इक समुन्दर ने आवाज दी मुझको पानी पिला दीजिये………..!
वर्ष-२०१० में सार्थक उपस्थिति दर्ज कराने वाले ब्लोग्स की सूची में उड़न तश्तरी, ताऊ डाट इन, मानसिक हलचल, लो क सं घ र्ष!, ज्ञान दर्पण, दीपक भारतदीप का चिंतन, दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिका, हिन्द-युग्म, ललितडॉटकॉम, Hindi Blog Tips, दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिका, चिट्ठा चर्चा, फुरसतिया, काव्य मंजूषा, शब्दों का सफर, नुक्कड़, उच्चारण, देशनामा, रचनाकार, मेरा पन्ना, ओशो – सिर्फ एक, भड़ास blog, ब्लॉगोत्सव २०१०, परिकल्पना, कस्‍बा, कबाड़खाना, अनवरत, राजतन्त्र, दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिका, अमीर धरती गरीब लोग, प्रवक्‍ता, तीसरा खंबा, क्वचिदन्यतोअपि, छींटें और बौछारें, आरंभ, कुछ इधर की कुछ उधर की, दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान- पत्रिका, नारी, दीपक भारतदीप की शब्दलेख सारथी-पत्रिका, मेरी शेखावाटी,मेरी दुनिया मेरे सपने,सारथी हिन्दी चिट्ठा, आम जन, अदालत, अग्निमन, Vyom ke Paar…व्योम के पार, अमृता प्रीतम की याद में…..,TSALIIM,चर्चा हिन्दी चिट्ठों की !!!,अनसुनी आवाज,अर्पित ‘सुमन’,स्व प्न रं जि ता,चक्रधर की चकल्लस,अविनाश वाचस्पति,अज़दक,जिंदगी : जियो हर पल, उन्मुक्त,चोखेर बाली,महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar),ब्लॉग मदद,आरंभ Aarambha,चिट्ठे सम्बंधित कार्टून,ब्लाग चर्चा “मुन्ना भाई” की,ITNI SI BAAT,चैतन्य का कोना,डॉ. चन्द्रकुमार जैन,चराग़े-दिल,चर्चा पान की दुकान पर,वटवृक्ष,क्रिएटिव मंच-Creative Manch,Hindi Tech Blog,दालान,दाल रोटी चावल,डाकिया डाक लाया,मानवीय सरोकार,Darvaar दरबार,DHAI AKHAR ढाई आखर,एक हिंदुस्तानी की डायरी,स्वप्नलोक,संवेदनाओं के पंख,आइये करें गपशप,एक लोहार की, ghaur bati,गत्‍यात्‍मक चिंतन,पाल ले इक रोग नादां…,गीत कलश,ग़ज़लों के खिलते गुलाब,घुघूतीबासूती,एक आलसी का चिठ्ठा,सद्भावना दर्पण,हँसते रहो Hanste Raho,आदिवासी जगत,हाशिया,”हिन्दी भारत”,Hasya Kavi Albela Khatri,HIndi Jokes,हा र मो नि य म,इंडियन बाइस्कोप,साईब्लाग [sciblog],ब्लॉगरों के जनमदिन,janshabd,झा जी कहिन,Kajal Kumar’s Cartoons काजल कुमार के कार्टून,कल्पनाओं का वृक्ष,कोसी खबर..,खेत खलियान KHET KHALIYAN,सुदर्शन,मेरी रचनाएँ ,मेरी भावनायें…,Lucknow Bloggers’ Association लख़नऊ ब्‍लॉगर्स असोसिएशन,महाशक्ति,मंथन,महावीर,स म य च क्र,प्रत्येक वाणी में महाकाव्य…,मैत्री,mamta t .v.,मनोरमा,मसिजीवी,खिलौने वाला घर,mehek,परवाज़…..शब्दों के पंख,नीरज,निरन्तर,मौन के खाली घर में… ओम आर्य,******दिशाएं******,…पारूल…चाँद पुखराज का……,गुलाबी कोंपलें,पिताजी,An Indian in Pittsburgh – पिट्सबर्ग में एक भारतीय,चाँद, बादल और शाम,पुण्य प्रसून बाजपेयी,प्रत्यक्षा,प्राइमरी का मास्टर,” अर्श “,रेडियोनामा,रेडियो वाणी,सफर – राजीव रंजन प्रसाद,अनुभूति कलश,सच्चा शरणम्,कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se **,,…,रेखा की दुनिया,आशियाना,इक शायर अंजाना सा…,शब्द सभागार,समाजवादी जनपरिषद,जिंदगी के रंग,Science Bloggers’ Association,शब्द-शब्द अनमोल,शस्वरं,पास पड़ोस,सुबीर संवाद सेवा,बावरा मन,कार्टून धमाका…!,सुर-पेटी,तीखी नज़र,तेताला,ठुमरी,टूटी हुई बिखरी हुई,मेरी कलम से,वीर बहुटी,विज्ञान» चर्चा,लावण्यम्` ~अन्तर्मन्`,जोगलिखी:संजयबेंगाणीकाहिन्दी ब्लॉग,TheNetPress.Com,व्यंग्यलोक,ना जादू ना टोना, युग-विमर्श (YUG -VIMARSH), गत्यात्मक ज्योतिष, ब्लॉग परिक्रमा आदि !
इसमें से कुछ ब्लॉग ऐसे हैं जो वर्ष-२०१० में आये हैं किन्तु इससे जुड़े हुए मूल ब्लॉग की चर्चा वर्ष-२००९ में की जा चुकी है और विस्तार के अंतर्गत उन्हें विषय से जुड़े अन्य ब्लॉग इस वर्ष लाने पड़े, ऐसे ब्लॉग की संख्या एक दर्जन के आसपास है ।
इन्टरनेट पर उपलब्ध हिंदी पत्रिकाओ में अनुभूति,अभिव्यक्ति,प्रवक्‍ता समाचार-विचार वेबपोर्टल,पाखी हिंदी पत्रिका,अरगला इक्कीसवीं सदी की जनसंवेदना एवं हिन्दी साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका,तरकश – हिन्दी का लोकप्रिय पोर्टल,एलेक्ट्रॉनिकी -एलेक्ट्रॉनिक्स, कम्प्यूटर, विज्ञान एवं नयी तकनीक की मासिक पत्रिका,सृजनगाथा- साहित्य, संस्कृति और भाषा की मासिक ,अनुरोध : भारतीय भाषाओं के प्रतिष्ठापन का अनुरोध,ताप्तीलोक, कैफे हिन्दी, हंस – हिन्दी कथा मासिक,अक्षय जीवन – आरोग्य मासिक पत्रिका,अक्षर पर्व – साहित्यिक वैचारिक मासिक,पर्यावरण डाइजेस्ट – पर्यावरण चेतना का हिन्दी मासिक,ड्रीम २०४७ – विज्ञान प्रसार की मासिक पत्रिका (पीडीएफ),गर्भनाल ( प्रकाशक : श्री आत्माराम शर्मा ),मीडिया विमर्श,वागर्थ : साहित्य और संस्कृति का समग्र मासिक,काव्यालय,कलायन पत्रिका,निरन्तर – अब सामयिकी जालपत्रिका में समाहित,भारत दर्शन – न्यूजीलैण्ड से हिन्दी की साहित्यिक पत्रिका,सरस्वती (कनाडा से),अन्यथा – magazine of Friends from India in America,परिचय – सायप्रस से अप्रवासी भारतीयों की हिन्दी पत्रिका,Hindi Nest dot Com, तद्भव, उद्गम : हिन्दी की साहित्यिक मासिका,कृत्या : कविताओं की पत्रिका, Attahaas : हास्य पत्रिका, रंगवार्ता : विविध कलारुपों का मासिक,क्षितिज – त्रैमासिक हिन्दी साहित्यिक पत्रिका,इन्द्रधनुष इण्डिया : साहित्य और प्रकृति को समर्पित,सार-संसार : विदेशी भाषाओं से सीधे हिंदी में अनूदित साहित्य की त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका,लेखनी – हिन्दी और अंग्रेजी की मासिक जाल-पत्रिका,मधुमती – राजस्थान साहित्य अकादमी की मासिक पत्रिका,साहित्य वैभव – संघर्षशील रचनाकारों का राष्ट्रीय प्रतिनिधि,विश्वा,सनातन प्रभात,हम समवेत,वाङ्मय – त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका,समाज विकास – अखिल भारतीय मारवाडी सम्मेलन की पत्रिका,गृह सहेली,साहित्य कुंज – पाक्षिक पत्रिका,लोकमंच,उर्वशी – सहित्य और शोध के लिये समर्पित़ डा०राजेश श्रीवास्तव शम्बर द्वारा सम्पादित वेब पत्रिका प्रतिमाह प्रकाशित,संस्कृति – सांस्कृतिक विचारों की प्रतिनिधि अर्द्धवार्षिक पत्रिका, प्रेरणा , जनतंत्र , समयांतर , में केवल साहित्य कुञ्ज वर्ष -२०१० में अनियमित रही , शेष सभी पत्रिकाओं ने अपनी सक्रियता को बनाए रखा ।
वर्ष-२०१० में ब्लॉग पर हिंदी में कई विषयों पर सामग्री उपलब्ध कतिपय ब्लॉग द्वारा उपलब्ध कराई गयी । यह देखकर संतोष हुआ कि ब्लॉग साहित्य को नकारने वाले कुछ लोग ब्लॉग पर लगभग प्रत्येक विधा का साहित्य उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय रहे । कविता व कहानी के साथ-साथ तत्कालीन साहित्यिक जानकारी लगातार परोसी गयी । आज भले ही हिंदी साहित्य ब्लॉग पर अपनी शैशवास्था में हो पर आने वाला समय निश्चित रूप से उसी का है, ऐसा मेरा मानना है ।
आज भले ही हिंदी के साहित्यकारों की पहुंच ब्लॉगों पर लगभग १० प्रतिशत के आसपास ही है। लेकिन इंटरनेट उपयोगकर्त्ताओं की बढ़ती संख्या आस्वस्त करती है कि हिंदी का दायरा अब देश की सीमाएं लांघकर दुनिया भर में अपनी पैठ बना रहा है । अनेक सामूहिक ब्लॉग साहित्यकारों-लेखकों को एक दूसरे के क़रीब ला रहा हैं। फलत: उन्हें एक दूसरे के द्वारा किए गए लेखन के संबंध में जानकारी मिलती है।
साहित्यकारों /संस्कृतिकर्मियों की विश्राम स्थली के रूप में विख्यात इन वेब पत्रिकाओं के अतिरिक्त कुछ ऐसे ब्लॉग हैं जो हिंदी साहित्य को समृद्ध करने और साहित्यिक कृतियों को प्रकाशित करने की दिशा में सक्रिय रहे इस वर्ष । इस वर्ष ब्लॉग पत्रिकाओं के रूप में अपनी पहचान और स्तरीयता बनाए रखने में जो ब्लॉग सफल रहा उसमें पहला नाम आता है हिंद युग्म का । हिंद युग्म एक तरह से हिंदी ब्लोगिंग में साहित्य को प्रतिष्ठापित करने की दिशा में क्रान्ति का प्रतीक है , दूसरा नाम आता है -रचनाकार का , उसके बाद साहित्य शिल्पी और फिर विचार मीमांशा , नारी का कविता ब्लॉग, नारी ,हिंदी साहित्य मंच,हिंदी साहित्य,हिंदी साहित्य,साहित्य ,साहित्य वैभव ,मोहल्ला लाईव, साखी,वटवृक्ष, सृजन (सुरेश यादव ), वाटिका, मंथन, महावीर, शब्द सभागार, राजभाषा, लोकसंघर्ष पत्रिका, राजभाषा हिंदी , गवाक्ष, काव्य कल्पना, ब्लोगोत्सव-२०१०, साहित्यांजलि, कुछ मेरी कलम से ,चोखेर वाली, नवोत्पल ,युवा मन , सुबीर संवाद सेवा, अपनी हिंदी , हथकढ , हिंदी कुञ्ज , पढ़ते पढ़ते , तनहा फलक, आवाज़ , नयी बात, कबाडखाना , कारवां , सोचालय, पुरवाई ,एक शाम मेरे नाम ,साहित्य सेतु कबीरा खडा बाज़ार में आदि ।
कुछ ऐसे व्यक्तिगत ब्लॉग जो ब्लोगरों की निजिगत रचंनाओं से भरे है, किन्तु उनकी सृजनधर्मिता का कायल है हिंदी ब्लॉगजगत । वर्ष-२०१० में जिन व्यक्तिगत ब्लॉग पर सृजनधर्मिता काफी देखी गयी उसमें प्रमुख है – उड़न तश्तरी,फुरसतिया, सद्भावना दर्पण, आखर कलश,…..मेरी भावनाएं, काव्य मंजूषा, यमुनानगर हलचल, कुछ कहानियां कुछ नज्में, विचार , गीत…मेरी अनुभूतियाँ , बिखरे मोती, स्पंदन, खिलौने वाला घर , एक सवाल तुम करो, नन्हा मन, कविता, नज्मों की सौगात, ठाले बैठे , वीर बहुटी , अनुशील,शब्द शिखर, उत्सव के रंग , बाल दुनिया , काव्य कल्पना, अफरा-तफरीह, जख्म जो फूलों ने दिए , एक प्रयास, ज़िन्दगी एक खामोश सफ़र , स्वप्न मेरे , देखिये एक नज़र इधर भी , कविता रावत ,कुछ मेरी कलम से, अमृता प्रीतम की याद में ,सदा ,ज्ञान वाणी ,गीत मेरे ,दो बातें एक एहसास की ,न दैन्यं न पलायनम , मिसफिट सीधी बात ,दिशाएँ ,अर्पित सुमन, बाबरा मन , कोना एक रुबाई का ,सत्यार्थ मित्र,संवाद ,पारुल चाँद पुखराज का,हिंदी भारत , ज़िन्दगी कि आरज़ू , मसि कागद ,मेरे विचारों की दुनिया..श्याम स्म्रिति( The world of my thoughts,shyamsmrtiie modern manusmriti…), हमराही , गुस्ताख ,आदि ।
अब तक यही कहा जाता रहा है कि ब्लॉग पर प्रकाशन की स्वतन्त्रता के कारण जो साहित्य परोसा जा रहा है वह स्तरीयता और प्रभाव के दृष्टिगत मानक के बिपरीत है , किन्तु इस वर्ष कुछ ब्लोगरों ने उस मिथक को तोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है, जिसमें प्रमुख हैं – अशोक चक्रधर,रवि रतलामी,समीर लाल समीर,गिरीश पंकज,हिमांशु कंबोज,रश्मि प्रभा,डा कविता वाचकनवी,निर्मला कपिला,रश्मि रविजा,रन्जू भाटिया,शिखा वार्ष्णेय,महफूज़ अली,गिरीश बिल्लोरे ‘मुकुल’,जय प्रकाश मानस,अविनाश वाचस्पति,अनूप शुक्ल,अलवेला खत्री,जाकिर अली रजनीश,डा श्याम गुप्त,स्वप्न मंजूषा अदा,शरद कोकाश,डा ऋषभ देव शर्मा,अनिता कुमार ,डा अजीत गुप्ता,प्रेम जनमेजय,जगदीश्वर चतुर्वेदी,दिविक रमेश,खुशदीप सहगल ,राम त्यागी,अनुराग शर्मा,महावीर शर्मा,सुभाष नीरव,रवीन्द्र प्रभात,बसंत आर्य ,ओम आर्य,राजेन्द्र स्वर्णकार,प्रमोद सिंह ,दीपक मशाल,अविनाश,सुदर्शन,डॉ. टी एस दराल,महेन्द्र वर्मा,बबली ,कविता रावत ,सुज्ञ ,देवेन्द्र पाण्डे ,संजीव तिवारी ,महेंद्र मिश्र,वाणी गीत ,परमजीत सिंह बाली ,डॉ. मोनिका शर्मा ,प्रवीण त्रिवेदी ,रावेन्द्र कुमार रवि ,इस्मत ज़ैदी ,पारुल पुखराज ,ज्योति सिंह ,पूनम श्रीवास्तव,संगीता स्वरूप ,वन्दना,शाहिद मिर्ज़ा,शोभना चौरे,राहुल सिंह ,श्री पी सी गोदियाल ,अशोक कुमार पाण्डेय,मीनू खरे,हेमंत कुमार ,सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी,विनीता यशस्वी ,मिता दास ,लावण्या शाह ,पंकज नारायण ,कुलवंत हैप्पी,कुसुम कुसुमेश,राजेश उत्साही,दिगम्बर नासवा,वन्दना अवस्थी दुबे,ZEAL,प्रज्ञा पाण्डेय ,आशा जोगलेकर ,आकांक्षा यादव ,ललित शर्मा,के के यादव,मनोज कुमार ,लक्ष्मी शंकर बाजपाई,शेफालिका वर्मा,मिता दास,जयकृष्ण राय तुषार,दीपक बाबा,अर्पिता ,सदा ,डॉ. अनुराग ,अनिल कांत , झरोखा ,उपेन्द्र ,महेन्द्र वर्मा ,प्रवीण पाण्डेय ,प्रवीण शाह,सुशीला पुरी,संजय भास्कर ,राजेश्वर वशिष्ठ ,डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ,अभिषेक ओझा,सुनील गज्जाणी,राजेश्वर वशिष्ठ ,अशोक बजाज,अमिताभ श्रीवास्तव,रानी विशाल,डॉ. दिव्या,अमिताभ मीत,अनामिका की सदायें ,अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी,राजेश उत्साही ,डॉ. दिव्या ,डॉ. मोनिका शर्मा,रचना दीक्षित ,इस्मत ज़ैदी ,सूर्यकांत गुप्ता ,प्रवीण त्रिवेदी ,गिरिजा कुलश्रेष्ठ ,अशोक बजाज ,नूतन नीति,अराधना चतुर्वेदी मुक्ति,वन्दना गुप्ता,मुकेश कुमार सिन्हा,ज्योत्सना पाण्डेय,डा सुभाष राय,सरस्वती प्रसाद,सुमन मीत,खतेलू,अपर्णा,रेखा श्रीवास्तव,विजय कुमार सपत्ति, अपराजिता कल्याणी ,साधना वैद,राजीव कुमार,शेफाली पाण्डेय,नीलम पुरी,अख्तर खान अकेला,संगीता स्वरुप,खुशबू प्रियदर्शनी ,प्रिया चित्रांसी ,नरेन्द्र व्यास नरेन्,राज कुमार शर्मा राजेश,किशोर कुमार खोरेन्द्र,पंकज उपाध्याय,सत्य प्रकाश पाण्डेय,राम पति, एम वर्मा,आलोक खरे,सुमन सिन्हा,नीलम प्रभा,सुधा भार्गव,प्रीति भाटिया,जेन्नी शबनम,अरुण सी राय,प्रतीक माहेश्वरी,डोरोथी,शेखर सुमन,अविनाश चन्द्र,अनिता निहलानी,मुदिता गर्ग,अंजना (गुडिया ),पूजा,अशोक बजाज,क्षितिजा,सीमा सिंघल,अनुपम कर्ण,दीप्ती शर्मा,बबिता अस्थाना,हरिहर झा,अनुपमा पाठक,अर्चना वर्मा,अर्चना देशपांडे,तौशिफ हिन्दुस्तानी,शिशुपाल प्रजापति,अनवारुल हसन,डा आदित्य कुमार,डा मान्धाता सिंह,एजाजुल हक़,जावेद ए जाफ्हरी,गुफरान मोहम्मद,ज्योति वर्मा,फिरदौस खान,लोकेन्द्र,रचना त्रिपाठी,प्रबल प्रताप सिंह,संतोष कुमार प्यासा,सर्बत एम जमाल,सुधीर गुप्ता चक्र,अरविन्द कुमार शर्मा,अशोक मेहता,अताउर रहमान,आवेश,वेद व्यथित,गोपाल जी श्रीवास्तव,डा निरुपमा वर्मा,पवन मेराज,प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) ,रजनीश राज,राकेश पाण्डेय,आचार्य संजीव वर्मा सलिल,सिद्धार्थ कलहंस,सचिन अग्रवाल,उमेश मिश्र,विकास कुमार,अपर्णा बाजपाई,डा अयाज़ अहमद,डी पी मिश्रा,असलम कासमी,हरीश सिंह, एजाज़ अहमद इद्रिशी,घनश्याम मौर्या,हिमांशु पन्त,दुर्गेश कुमार,डा अज़मल खान,आनंद पाण्डेय,विनोद परासर,प्रकाश पाखी,अंबरीश श्रीवास्तव,अंकुर कुमार अश्क,डा कृष्ण मित्तल,दर्शन लाल बबेजा,वीणा,डा अनवर जमाल,अरुणेश मिश्र,मनीष मिश्र,रेखा सिन्हा,शाजिद,सह्वेज मल्लिक,शिवम् मिश्रा,शाहनवाज़,शेषनाथ पाण्डेय,नीरज गोस्वामी,गौतम राजरिशी,पंकज सुबीर,रवि कान्त पाण्डेय,प्रकाश सिंह अर्श,संगीता सेठी,शमा कश्यप,डा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर,विनोद कुमार पाण्डेय,राम शिव मूर्ति यादव,अमित कुमार,प्रवीण पथिक,शोभना चौधरी शुभी,विनय प्रजापति नज़र,हर्षवर्द्धन,अशोक कुमार मिश्र,डा महेश सिन्हा,संजीत त्रिपाठी,प्रियरंजन पालीवाल,जी के अवधिया,इंदु पुरी,विवेक रस्तोगी,रूप सिंह चंदेल,अशोक कुमार पाण्डेय ,देवेन्द्र प्रकाश मिश्रा,चिराग जैन,राकेश खंडेलवाल,सोनल रस्तोगी,संजीव तिवारी,विवेकानंद पांडे,यशवंत मेहता यश,श्यामल सुमन, पवन चन्दन,दीपक शुक्ल,अजित कुमार मिश्र,सुरेश यादव,अमित केशरी,राज कुमार ग्वालानी,पंडित डी के शर्मा बत्स, पंकज मिश्र,मसिजीवी,संगीतापुरी,उदय,एस एम मासूम,विवेक सिंह ,प्रकाश गोविन्द,माधव,दीपक भारतदीप,शैलेश भारतवासी,रतन सिंह शेखाबत,कुंवर कुशुमेश,प्रभातरंजन,अरविन्द श्रीवास्तव,अक्षिता पाखी,प्रताप सहगल,प्रमोद तांबट,योगेन्द्र मौदगिल, डा आशुतोष शुक्ल,एच पी शर्मा,अजित राय,हिमांशु,चंडी दत्त शुक्ल,सिद्दार्थ जोशी,संगीता मनराल,राजीव तनेजा,पद्म सिंह,उपदेश सक्सेना,नरेश सिंह राठौड़,गगन शर्मा,कनिष्क कश्यप,विजय तिवारी किसलय,ब्रिज मोहन श्रीवास्तव,मानव मेहता,राजीव रंजन प्रसाद (साहित्य शिल्पी ),त्रिपुरारी कुमार शर्मा,रोहिताश कुमार,शेखर कुमावत,जितमोहन झा ,बृज शर्मा,अंकुर गुप्ता ,चन्द्रकुमार सोनी,पवनकुमार अरविन्द,जयराम विप्लव,अमरज्योति,अमलेंदु उपाध्याय,विनीत कुमार, शिरीष खरे,इष्ट देव संकृत्यायन,शिव नारायण,श्रुति,सुशील वकलिबास आदि ।
जहां तक मुद्दों की बात है, इस वर्ष प्रमुखता के साथ छ: मुद्दे छाये रहे हिंदी ब्लॉगजगत में । पहला बिभूती नारायण राय के बक्तव्य पर उत्पन्न विवाद, दूसरा नक्सली आतंक,तीसरा मंहगाई,चौथा अयोध्या मामले पर कोर्ट का फैसला,पांचवां कॉमनवेल्थ गेम में भ्रष्टाचार और छठा बराक ओबामा की भारत यात्रा ।इन्हीं छ: मुद्दों के ईर्द-गिर्द घूमता रहा हिंदी ब्लॉगजगत पूरे वर्ष भर ।
साझा संवाद, साझी विरासत, साझी धरोहर, साझा मंच आप जो मान लीजिये हिंदी ब्लॉग जगत की एक कैफियत यह भी है । विगत कड़ियों में आपने अवश्य ही महसूस किया होगा कि हम इस विश्लेषण के माध्यम से यही बातें पूरी दृढ़ता के साथ आपसे साझा करते आ रहे हैं , कुछ यादों, कुछ इबारतों और कुछ तस्वीरों के मार्फ़त ।
जिक्र करना चाहूंगा एक ऐसे परिवार का जो पद-प्रतिष्ठा-प्रशंसा और प्रसिद्धि में काफी आगे होते हुए भी हिंदी ब्लोगिंग में सार्थक हस्तक्षेप रखता है । साहित्य को समर्पित व्यक्तिगत ब्लॉग के क्रम में एक महत्वपूर्ण नाम उभरकर सामने आया है वह शब्द सृजन की ओर , जिसके संचालक है इस परिवार के मुखिया के के यादव । ये जून -२००८ से सक्रिय ब्लोगिंग से जुड़े हैं । इनका एक और ब्लॉग है डाकिया डाक लाया । यह ब्लॉग विषय आधारित है तथा डाक विभाग के अनेकानेक सुखद संस्मरणों से जुडा है ।
आकांक्षा यादव इनकी धर्मपत्नी है और ये हिंदी के चार प्रमुख क्रमश: शब्द शिखर, उत्सव के रंग, सप्तरंगी प्रेम और बाल दुनिया ब्लॉग की संचालिका हैं और इनकी एक नन्ही बिटिया है जिसे पूरा ब्लॉग जगत अक्षिता पाखी (ब्लॉग : पाखी की दुनिया ) के नाम से जानता है, इस वर्ष के श्रेष्ठ नन्हा ब्लोगर का अलंकरण पा चुकी है , चुलबुली और प्यारी सी इस ब्लोगर को कोटिश: शुभकामनाएं !
इनसे जुड़े हुए दो नाम और है एक राम शिवमूर्ति यादव और दूसरा नाम अमित कुमार यादव , जिन्होनें वर्ष -२०१० में अपनी सार्थक और सकारात्मक गतिविधियों से हिंदी ब्लॉगजगत का ध्यान खींचने में सफल रहे हैं । ये एक सामूहिक ब्लॉग भी संचालित करते हैं जिसका नाम है युवा जगत । यह ब्लॉग दिसंबर-२००८ में शुरू हुआ और इसके प्रमुख सदस्य हैं अमित कुमार यादव, कृष्ण कुमार यादव, आकांक्षा यादव, रश्मि प्रभा, रजनीश परिहार, राज यादव, शरद कुमार, निर्मेश, रत्नेश कुमार मौर्या, सियाराम भारती, राघवेन्द्र बाजपेयी आदि ।
जनबरी-२००८ से सक्रिय ब्लॉगिंग में आये राम कुमार त्यागी इस वर्ष अचानक शीर्ष रचनात्मक फलक पर दिखाई दिए । उन्होंने अपने कतिपय आलेखों से हिंदी ब्लॉगजगत को आत्म केन्द्रित करवाने में सफलता पायी । इस वर्ष उन्हें लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से भी नवाज़ा गया । इनका प्रंमुख ब्लॉग है कविता संग्रह । इनका कहना है कि “इस साल हिन्दी ब्लोगिंग में थोडा सक्रीय हुआ तो बहुत सारे दोस्त बने, कई पाठक भी मिले और कई पुरुष्कार भी ! हिन्दी ब्लॉग्गिंग के हिसाब से ये मेरे लिए काफी उपलब्धि वाला वर्ष रहा !एक छोटा सा लेख अपने पिता के महान और प्रेरणादायी कार्यक्रमों के बारे में भी लिखा और जिस हिसाब से मित्रों ने मुझे अपना स्नेह दिखाया उससे यह जरूर सिद्ध हुआ कि हिन्दी ब्लॉग्गिंग लेखन के साथ साथ एक परिवार का वातावरण भी प्रदान कराती है !” इनका मुख्य ब्लॉग है -मेरी आवाज़ ।
इस क्रम के अगले ब्लॉगर हैं सितंबर-२००९ से सक्रिय मनोज कुमार , जो कोलकाता स्थित रक्षा मंत्रालय में कार्यरत हैं ।वेहद प्रखर चिट्ठा चर्चा कार , यशस्वी ब्लोगर और हिंदी के अनुरागी मनोज कुमार का प्रमुख ब्लॉग है – मनोज , इस ब्लॉग पर वर्ष-२०१० में फुर्सत में…बूट पोलिश काफी चर्चित रहा । ये एक सामूहिक ब्लॉग से भी जुड़े हैं जिसका नाम है राज भाषा , इसके प्रमुख सदस्यों में मनोज कुमार, संगीता स्वरूप, रेखा श्रीवास्तव, अरुण चन्द्र राय, संतोष गुप्ता, परशुराम राय, करण समस्ती पुरी, हरीश प्रकाश गुप्तआदि हैं ।
०१ सितंबर -२००९ से हिंदी ब्लॉगिंग में आये नए और प्रतिभाशाली ब्लोगर मानव मेहता ने इस वर्ष अपनी प्रतिभा और योग्यता के बल पर अपनी एक अलग पहचान बनायी ।
दिसंबर-२००८ से सक्रिय त्रिपुरारी कुमार शर्मा ने भी इस वर्ष हिंदी ब्लोगिंग में पाठकों को आकर्षित किया । इस वर्ष के प्रारंभ में यानी १६ जनवरी को एक प्रखर ब्लोगर और कवियित्री का आगमन हुआ , नाम है सुमन कपूर यानी सुमन मीत । ये पूरे वर्ष भर अपनी सुन्दर और भावपूर्ण रचनाओं से हिंदी ब्लॉगजगत को अभिसिंचित करती रही । मई-२०१० से इन्होनें दूसरा ब्लॉग भी शुरू किया जिसका नाम है अर्पित सुमन । इसी वर्ष मार्च महीने में एक और ब्लोगर ने अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज कराई जिसका नाम है शेखर कुमावत ।
मई-२००७ से सक्रिय ब्लोगिंग में कार्यरत वन्दना भी इस वर्ष काफी लोकप्रिय रही , इनके तीन ब्लॉग क्रमश: ज़िन्दगी एक खामोश सफ़र , एक प्रयास और ज़ख्म जो फूलों ने दिए हैं । इस वर्ष की अपनी गतिविधियों के बारे में इनका कहना है कि “सिर्फ इतनी कि आज काफी ब्लोगर्स जानने लगे हैं कि वन्दना नाम की ब्लोगर भी इस जाल जगत के महासागर की छोटी सी बूँद है ………..इस साल गूगल प्रतियोगिता “है बातों में दम ” में भाग लिया था और एक आलेख “राष्ट्रमंडल खेलों का असर ?” पर पुरस्कार स्वरुप टी-शर्ट प्राप्त हुई थी गूगल की तरफ से ………….बाकी सप्तरंगी प्रेम , वटवृक्ष,काव्यलोक जैसे ब्लोग्स पर मेरी रचनायें प्रकाशित होती रहती हैं और अभी इ-पत्रिका गर्भनाल पर कुछ रचनायें भेजी हैं जो अगले महीने के अंक में प्रकाशित होंगी ।”
इस क्रम में एक और प्रमुख नाम है विजय कुमार सपत्ति , जो वर्ष-२००८ से सक्रिय ब्लोगिंग में हैं । इनका प्रमुख ब्लॉग है ख़्वाबों के दामन में , कविताओं के मन से ,आर्ट बाई विजय कुमार सपत्ति , भारतीय कॉमिक्स , अंतर्यात्रा , हृदयम आदि है ।
अप्रैल -२००९ से सक्रिय शीखा वार्ष्णेय ने भी इस वर्ष अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही है । वर्ष-२०१० में इन्हें दो प्रमुख सम्मान क्रमश: लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान-२०१० तथा वैशाखनंदन कांस्य सम्मान-२०१० से नवाज़ा गया ।
“… मन के भावों को कैसे सब तक पहुँचाऊँ कुछ लिखूं या फिर कुछ गाऊँ । चिंतन हो जब किसी बात पर और मन में मंथन चलता हो उन भावों को लिख कर मैं शब्दों में तिरोहित कर जाऊं । सोच – विचारों की शक्ति जब कुछ उथल -पुथल सा करती हो उन भावों को गढ़ कर मैं अपनी बात सुना जाऊँ जो दिखता है आस – पास मन उससे उद्वेलित होता है उन भावों को साक्ष्य रूप दे मैं कविता सी कह जाऊं….!” ऐसे कोमल शब्दों के साथ हिंदी ब्लॉगजगत की सतत सेवा करने वाली संगीता स्वरुप गीत भी इस वर्ष काफी चर्चा में रही । उन्हें इस वर्ष श्रेष्ठ टिप्पणीकार का ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत परिकल्पना सम्मान -२०१० से और शारदा साहित्य मंच खटीमा (उद्धम सिंह नगर ) का साहित्य श्री सम्मान से नवाज़ा गया । इस वर्ष इनका पोस्ट सच बताना गांधारी काफी चर्चित रहा ।
वर्ष-२००७ से सक्रिय परमजीत वाली भी इस वर्ष कुछ महत्वपूर्ण और सार्थक पोस्टों के कारण चर्चा में रहे । २१ सितंबर २००८ से सक्रिय रेखा श्रीवास्तव इस वर्ष के सर्वाधिक सक्रिय ब्लोगरों में से एक रही हैं । इस वर्ष उनका पोस्ट किसी की आंख के आंसू , अदम्य इच्छाएं सीधी है अपराध की , दाम्पत्य जीवन में दरार और ग्रंथियां , जाऊं तो जाऊं कहाँ और संस्कारों का ढोंग काफी चर्चित रहा ।
सर्वाधिक चर्चित ब्लोगरों की श्रेणी में एक और नाम इस वर्ष प्रमुखता के साथ आया लोकसंघर्ष सुमन , जो १५ मार्च-२००९ से हिंदी ब्लोगिंग में सक्रिय हैं , किन्तु ब्लोगोत्सव-२०१० के साथ ये अचानक चर्चा में आये । ये पूरे वर्ष भर चिट्ठाजगत की सक्रियता सूची में चौथे- पांचवें स्थान पर बने रहे । इस वर्ष इनका पोस्ट गिरगिट भी शरमा जाता है काफी लोकप्रिय रहा ।
२३ सितंबर २००९ से हिंदी ब्लोगिंग में सक्रिय चन्द्र कुमार सोनी की भी पोस्ट की इस वर्ष काफी चर्चा हुई । अगस्त-२००८ से हिंदी ब्लोगिंग में सक्रिय पवन कुमार अरविन्द भी इस वर्ष चर्चा में रहे । इस वर्ष इनका पोस्ट अयोध्या फैसले के निहितार्थ काफी चर्चा में रहा । इस वर्ष अपनी दृढ़ता और साफगोई से रचनात्मक फलक पर प्रमुखता के साथ स्थान बनाने वाली महिला ब्लोगरों में एक नाम डा दिव्या श्रीवास्तव (ZEAL) का आता है , जिनका आगमन वर्ष -२०१० के उत्तरार्द्ध में हुआ है , किन्तु लगभग ९० के आसपास पोस्ट के माध्यम से हिंदी ब्लोगिंग में इन्होने धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराई है ।
इस वर्ष एक आश्चर्यजनक पहलू और दिखाई दिया कि पुरुष ब्लोगरों की तुलना में महिला ब्लोगर ज्यादा दृढ़ता के साथ हिंदी ब्लोगिंग में सक्रिय रही । यथा घुघूती बासूती, प्रत्यक्षा , नीलिमा, बेजी, संगीता पुरी, लवली, पल्लवी त्रिवेदी, अदा, सीमा गुप्ता, निशामधुलिका, लावण्या, कविता वाचक्नवी, अनीता कुमार, pratibhaa, mamta, रंजना [रंजू भाटिया ], Geetika gupta, वर्षा, डॉ मंजुलता सिंह, डा.मीना अग्रवाल,Richa,neelima sukhija arora, फ़िरदौस ख़ान, Padma Srivastava, neelima garg, Manvinder, MAYA, रेखा श्रीवास्तव, स्वप्नदर्शी, KAVITA RAWAT, सुनीता शानू , शायदा, Gyaana-Alka Madhusoodan Patel, rashmi ravija, अनुजा, अराधना चतुर्वेदी मुक्ति ,तृप्ति इन्द्रनील , सुमन मीत , साधना वैद , सुमन जिंदल, Akanksha Yadav ~ आकांक्षा यादव, उन्मुक्ति, मीनाक्षी, आर. अनुराधा, रश्मि प्रभा, संगीता स्वरुप, सुशीला पुरी, मीनू खरे,नीलम प्रभा , शमा कश्यप, अलका सर्वत मिश्र, मनीषा, रजिया राज, शेफाली पाण्डेय, शीखा वार्ष्णेय, अनामिका, अपनत्व, रानी विशाल, निर्मला कपिला, प्रिया,संध्या गुप्ता, वन्दना गुप्ता , रानी नायर मल्होत्रा, सारिका सक्सेना, पूनम अग्रवाल , उत्तमा, Meenakshi Kandwal, वन्दना अवस्थी दुबे, Deepa, रचना, Dr. Smt. ajit gupta, रंजना, गरिमा, मोनिका गुप्ता, दीपिका कुमारी, शोभना चौरे, अल्पना वर्मा, निर्मला कपिला, वाणीगीत, विनीता यशश्वी, भारती मयंक, महक, उर्मी चक्रवर्ती बबली , सेहर, शेफ़ाली पांडे, प्रेमलता पांडे, पूजा उपाध्याय,कंचन सिंह चौहान, संध्या गुप्ता , सोनल रस्तोगी, हरकीरत हीर, कविता किरण , अर्चना चाव , जेन्नी शबनम , ZEAL” वन्दना, mala , ρяєєтι , Asha , Neelima , डॉ. नूतन – नीति , सुधा भार्गव, Vandana ! ! ! , Dorothy , पारुल , किरण राजपुरोहित नितिला , नीलम ,ज्योत्स्ना पाण्डेय जैसी महिला ब्लागर्स नितांत सक्रिय हैं और अपने अपने क्षेत्र मे बहुत अच्छा लिख रही हैं ।
चिट्ठाचर्चा पर चर्चा करने वाली ब्लॉग जगत की प्रमुख महिला चर्चाकारों में सुश्री नीलिमा, सुजाता, डा0 कविता वाचकनवी और संगीता स्वरुप गीत हैं जिनके द्वारा निरंतरता के साथ विगत २-३-४ वर्षों से पूरी तन्मयता के साथ चिट्ठा चर्चा की जा रही है । इसके अलावा एक और महिला चर्चाकार हैं वन्दना जिनके द्वारा चर्चा मंच पर लगातार अच्छे -अच्छे चिट्ठों से परिचय कराया गया ।
आईये उन ब्लोगरों के बारे में जानें जिन्होनें वर्ष-२०१० में अपनी गतिविधियों से हिंदी ब्लोगिंग को प्राण वायु देने का कार्य किया, इसमें शामिल हैं नए और पुराने, किन्तु सार्थक हस्तक्षेप रखने वाले ब्लोगर !
इस श्रेणी में आईये सबसे पहले मिलते हैं अशोक चक्रधर से । ये हिंदी के मंचीय कवियों में से एक हैं। हास्य की विधा के लिये इनकी लेखनी जानी जाती है। कवि सम्मेलनों की वाचिक परंपरा को घर घर में पहुँचाने का श्रेय गोपालदास नीरज, शैल चतुर्वेदी, सुरेंद्र शर्मा, ओमप्रकाश आदित्य, कुमार विश्वास आदि के साथ-साथ इन्हें भी जाता है। ब्लोगिंग में वर्ष-२००६ से सक्रीय….इनका प्रमुख ब्लॉग है चक्रधर का चक्कलस ।
और अब समीर लाल समीर से , जिनका जन्म २९ जुलाई, १९६३ को रतलाम म.प्र. में हुआ। विश्व विद्यालय तक की शिक्षा जबलपुर म.प्र से प्राप्त कर आप ४ साल बम्बई में रहे और चार्टड एकाउन्टेन्ट बन कर पुनः जबलपुर में १९९९ तक प्रेक्टिस की. सन १९९९ में आप कनाडा आ गये और अब वहीं टोरंटो नामक शहर में निवास… इस वर्ष ब्लोगोत्सव-२०१० में इन्हें वर्ष का श्रेष्ठ ब्लोगर घोषित किया गया ……हिंदी ब्लोगिंग में वर्ष-२००६ से सक्रीय ….इनका मुख्य ब्लॉग है -उड़न तश्तरी ।
आईये आपको मिलवाते है अब वाराणसी निवासी डा अरविन्द मिश्र से , जो वर्ष-२००७ से हिंदी ब्लोगिंग में सक्रिय हैं और तर्क युक्तियों के साथ अभिव्यक्ति में पारंगत भी । इनके पोस्ट तथा इनकी टिप्पणियाँ बरबस ही पाठकों को आकर्षित करती है । विज्ञान विषयक लेखन में इन्हें एकाधिकार प्राप्त है हिंदी ब्लॉगजगत में । इन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० में वर्ष का श्रेष्ठ विज्ञान लेखक का अलंकरण प्रदान किया गया है । इन्हें विज्ञान में उच्च कोटि के लेखन के लिए संवाद सम्मान से नवाज़ा गया है । इनका प्रमुख ब्लॉग है -साई ब्लॉग , जबकि इनका सर्वाधिक चर्चित ब्लॉग है क्वचिदन्यतोअपि….. , ये साईंस ब्लोगर असोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं ।
इसके बाद चलिए चलते हैं अनूप शुक्ल के पास , जिनका जन्म १६ सितंबर, १९६३ को हुई । इन्होनें बी.ई़.(मेकेनिकल), एम ट़ेक (मशीन डिज़ाइन) की शिक्षा ग्रहण कर संप्रति भारत सरकार रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कानपुर स्थित आयुध निर्माणी में राजपत्रित अधिकारी हैं । ये अगस्त-२००४ से सक्रिय हैं । इनका हिंदी चिट्ठा फुरसतिया और चिट्ठा चर्चा खासा लोकप्रिय है।
आईये अब मिलते हैं रविशंकर श्रीवास्तव उर्फ़ रवि रतलामी से । ये नामचीन हिन्दी चिट्ठाकार, तकनीकी सलाहकार व तकनीकी अनुवादक हैं। ये मध्य प्रदेश शासन में टेक्नोक्रेट रह चुके हैं। इन्होनें लिनक्स तंत्रांशों के हिन्दी अनुवादों के लिए भागीरथी प्रयास किए हैं। गनोम, केडीई, एक्सएफसीई, डेबियन इंस्टालर, ओपन ऑफ़िस मदद इत्यादि सैकड़ों प्रकल्पों का हिन्दी अनुवाद स्वयंसेवी आधार पर किया है। वर्ष २००७ -०९ के लिए ये माइक्रोसॉफ़्ट मोस्ट वेल्यूएबल प्रोफ़ेशनल से पुरस्कृत हैं तथा केडीई हिन्दी टोली के रूप में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फॉस.इन २००८ से पुरस्कृत हैं। सराय द्वारा FLOSS फेलोशिप के तहत केडीई के छत्तीसगढ़ी स्थानीयकरण के महती कार्य के लिये, जिसके अंतर्गत उन्होंने १ लाख से भी अधिक वाक्यांशों का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद किया, रवि को २००९ के प्रतिष्ठित मंथन पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया गया।इन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० में वर्ष के श्रेष्ठ लेखक का अलंकरण प्रदान किया गया । छीटें और बौछारें तथा रचनाकार इनके प्रमुख ब्लॉग हैं।
अब आईये मिलते हैं हर दिल अजीज ब्लोगर अविनाश वाचस्पति से , जिन्हें सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मान से सम्‍मानित किया है। उनको यह सम्‍मान राजभाषा पुरस्‍कार वितरण समारोह में माननीय सचिव ने विगत दिनों प्रदान किया । अंतर्जाल पर हिन्‍दी के लिए किया गया उनका कार्य किसी परिचय का मोहताज नहीं है। अविनाश जी साहित्य शिल्पी से भी लम्बे समय से जुडे हुए हैं इसके अलावा सामूहिक वेबसाइट नुक्‍कड़ के मॉडरेटर हैं, जिससे विश्‍वभर के एक सौ प्रतिष्ठित हिन्‍दी लेखक जुड़े हुए हैं। इसके अतिरिक्‍त उनके ब्‍लॉग पिताजी, बगीची, झकाझक टाइम्‍स, तेताला अंतर्जाल जगत में अपनी विशिष्‍ट पहचान रखते हैं। उन्हें इस वर्ष ब्लोगोत्सव-२०१० में वर्ष के श्रेष्ठ व्यंग्यकार से तथा वर्ष-२००९ के संवाद सम्मान से अलंकृत किया गया है ।
आईये अब मिलते हैं गिरीश पंकज से जो एक बहुआयामी रचनाकार है । ये एक साथ व्यंग्यकार, उपन्यासकार, ग़ज़लकार एवं प्रख्यात पत्रकार हैं । सद्भावना दर्पण नामक वैश्विक स्तर पर चर्चित अनुवाद पत्रिका के संपादक हैं । देश एवं विदेश में सम्मानित । युवाओं के प्रेरणास्त्रोत । सद्भावना, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव के लिए एक विशिष्ट स्थान रखने वाले गिरीश पंकज को पढ़ना अपने आप में एक विशिष्ट अनुभव से गुजरना है । – सृजन-सम्मान …ब्लोगोत्सव-२०१० में इन्हें वर्ष का श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक का अलंकरण प्रदान किया गया …..ब्लोगिंग में वर्ष-२००७ से सक्रीय ….इनका मुख्य ब्लॉग है गिरीश पंकज !
अब आईये मिलते हैं एक और चर्चित ब्लोगर जाकिर अली रजनीश से , ये देश के जाने-माने बाल साहित्यकार और सक्रिय ब्लोगर हैं । ये मूलत: विज्ञान विषयक गतिविधियों को प्राणवायु देने की दिशा में लगातार सक्रिय हैं । इन्हें वर्ष-२०१० के श्रेष्ठ बाल साहित्यकार का अलंकरण प्राप्त है । इनके प्रमुख ब्लॉग है मेरी दुनिया मेरे सपने, हमराही और सर्प संसार । ये गैर राजनीतिक संस्था TASLIMके महामंत्री और साईंस ब्लोगर असोसिएसन के सचिव है । इनका बच्चों पर आधारित प्रमुख ब्लॉग है बाल मन ।
जैसे किसी आईने को आप भले ही सोने के फ्रेम में मढ़ दीजिये वह फिर भी झूठ नहीं बोलता । सच ही बोलता है । ठीक वैसे ही कुछ ब्लोग्स हैं हिंदी ब्लॉगजगत में जो हर घटना, हर गतिविधि , हर योजना का सच बयान करते मिलते हैं । वह घटना चाहे किसी छोटी जगह की हो या किसी बड़ी जगह की , चाहे दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलोर, लखनऊ , पटना की हो अथवा सुदूर गौहाटी, डिब्रूगढ़ या सिक्किम में गंगटोक की हो । आपको हर जगह का सचित्र ब्योरा अवश्य मिलेगा उन ब्लोग्स में ।
कहा जाता है कि भारत वर्ष विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का देश है । सच है । पर इसका एक साथ मेल देखना हो तो रांची निवासी मनीष क़ुमार के ब्लॉग मुसाफिर हूँ यारों पर देख सकते हैं । अप्रैल -२००५ से सक्रिय हिंदी ब्लोगिंग में कार्यरत मनीष क़ुमार का यह ब्लॉग वर्ष-२००८ में आया है और अपनी सारगर्भित अभिव्यक्ति तथा सुन्दर तस्वीरों के माध्यम से हिंदी ब्लॉगजगत में सार्थक उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब हुआ है । इन्हें वर्ष-२००९ का संवाद सम्मान प्रदान किया जा चुका है । सुखद संस्मरणों के गुलदस्ता के रूप में इनका दूसरा ब्लॉग एक शाम मेरे नाम काफी चर्चित है ।
मनीष क़ुमार की तरह ही हिंदी ब्लॉगजगत में एक और घुमक्कर हैं नीरज जाट , जिनका ब्लॉग है मुसाफिर हूँ यारों । आप क्या पढ़ना चाहेंगे यात्रा वृत्तांत, इतिहास, मूड फ्रेश या रेल संस्मरण सब कुछ मिलेगा आपको इस ब्लॉग में । नीरज जाट का अपने बारे में कहना है कि -” घुमक्कडी जिंदाबाद … घुमक्कडी एक महंगा शौक है। समय खपाऊ और खर्चीला। लेकिन यहां पर आप सीखेंगे किस तरह कम समय और सस्ते में बेहतरीन घुमक्कडी की जा सकती है। घुमक्कडी के लिये रुपये-पैसे की जरुरत नहीं है, रुपये -पैसे की जरुरत है बस के कंडक्टर को, जरुरत है होटल वाले को। अगर यहीं पर कंजूसी दिखा दी तो समझो घुमक्कडी सफल है।”
डा.सुभाष राय इस वर्ष हिंदी ब्लॉगिंग के समर्पित व सक्रिय विद्यार्थियों में से एक रहे हैं…निरंतर सीखते जाना और जीवन को समझना ही इनका लक्ष्य रहा हैं । यह हम सभी के लिए वेहद सुखद विषय है कि वे ब्लोगिंग के माध्यम से अपने अर्जित ज्ञान को बांटने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं …… ब्लोगोत्सव-२०१० पर प्रकाशित इनके आलेख : जाति न पूछो साध की को आधार मानते हुए ब्लोगोत्सव की टीम ने इन्हें वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (पुरुष ) का खिताब देते हुए सम्मानित किया हैं । प्रयाग के नार्दर्न इंडिया पत्रिका ग्रुप में सेवा शुरू करके तीन दशकों की इस पत्रकारीय यात्रा में अमृत प्रभात, आज, अमर उजाला , डी एल ए (आगरा संस्करण ) जैसे प्रतिष्ठित दैनिक समाचारपत्रों में शीर्ष जिम्मेदारियां संभालने के बाद इस समय लखनऊ में जन सन्देश (हिंदी दैनिक ) में मुख्य संपादक के पद पर कार्यरत, इनके प्रमुख ब्लॉग हैं -बात बेबात और साखी……!
न्याय और न्याय की धाराएं इतनी पेचीदा हो गयी है , कि अदालत का नाम सुनकर व्यक्ति एकबार काँप जाता है जरूर क्योंकि बहुत कठिन है इन्साफ पाने की डगर । हमारा मकसद यहाँ न तो न्यायपालिका पर ऊंगली उठाने का है और न ही किसी की अवमानना का । पर यह कड़वा सच है की हमारी प्रक्रिया इतनी जटिल हो गयी है की इन्साफ का मूलमंत्र उसमें कहीं खोकर रह गया है। आदमी को सही समय पर सही न्याय चाहकर भी नही मिल पाता। ऐसे में अगर कोई नि:स्वार्थ भाव से आपको क़ानून की पेचीदिगियों से रू-ब-रू कराये और क़ानून की धाराओं के अंतर्गत सही मार्ग दर्शन दे तो समझिये सोने पे सुहागा । ऐसा ही इक ब्लॉग है – तीसरा खम्बा. ब्लोगर हैं कोटा राजस्थान के दिनेश राय द्विवेदी,जो १९७८ से वकालत से जुड़े हैं । साहित्य, कानून, समाज, पठन,सामाजिक संगठन लेखन,साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियों में इनकी रूचि चरमोत्कर्ष पर रही है । ये जून -२००७ से हिंदी ब्लोगिंग में लगातार सक्रिय हैं और प्रत्येक वर्ष इनकी सक्रियता में इजाफा होता रहता है ।
अब एक ऐसे ब्लॉगर की चर्चा , जिन्हें वरिष्ठ ब्लोगर श्री ज्ञान दत्त पाण्डेय ने भविष्य की सम्भावनाओं का ब्लॉगर कहा है ,श्री अनूप शुक्ल ने शानदार ब्लोगर कहा है वहीं श्री समीर लाल समीर ने उनके फैन होने की बात स्वीकार की है । रंजना (रंजू) भाटिया ने स्वीकार किया है कि उनका लिखा हमेशा ही प्रभावित करता है जबकि सरकारी नौकरी में रहते हुए भी अपनी संवेदना को बचाये रखना ….उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं डा अनुराग । नाम है सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी जिनके बारे में बहुचर्चित ब्लोगर डा अरविन्द मिश्र कहते हैं कि -”मैं सिद्धार्थ जी की लेखनी का कायल हूँ -ऐसा शब्द चित्र खींचते है सिद्धार्थ जी कि सारा दृश्य आखों के सामने साकार हो जाता है । उनमें सम्मोहित करने वाली शैली और संवेदनशीलता को सहज ही देखा, महसूस किया जा सकता है और एक प्रखर लेखनी की सम्भावनाशीलता के प्रति भी हम आश्वस्त होते है !” सत्यार्थ मित्र इनका प्रमुख ब्लॉग है । इन्होनें पूर्व की भाँती इस वर्ष भी महत्वपूर्ण पहल करते हुए महात्मा गांधी अंतरार्ष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के तत्वावधान में राष्ट्रीय ब्लोगर संगोष्ठी आयोजित की , जिसकी ब्लॉगजगत में काफी चर्चा हुई । इनकी मौन साधना के बारे में यही कहा जा सकता है कि इस वर्ष इनकी मौन साधना आगे-आगे चलती रही और सारे स्वर-व्यंजन के साथ समय पीछे-पीछे चलता रहा ।
खुशदीप सहगल हिंदी चिट्ठाकारी के वेहद उदीयमान,सक्रीय और इस वर्ष के सर्वाधिक चर्चित चिट्ठाकारों में से एक रहे हैं ! जिनके पोस्ट ने पाठकों को खूब आकर्षित किया और भाषा सम्मोहित करती रही लगातार ….जिनके कथ्य और शिल्प में गज़ब का तारतम्य रहा इस वर्ष ! विगत दिनों ब्लोगोत्सव-२०१० के दौरान उनका व्यंग्य “टेढा है पर मेरा है” और “किसी का सम्मान हो गया ” प्रकाशित हुआ था जिसे आधार बनाते हुए उन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष के चर्चित उदीयमान ब्लोगर का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया ।
बीते दिनों में बहुत कुछ गुजरा है, बहुत कुछ बदला है समय, समाज और हिंदी ब्लोगिंग में भी। हिंदी ब्लोगिंग इस बदलाव का साक्षी रहा है कदम-दर-कदम । लगातार अच्छे और कुशल ब्लोगरों के आगमन से यह हर पल केवल बदलाव का भागीदार ही नहीं रही है, अपितु बदलाव की अंगराई भी लेती रही है वक़्त-दर-वक़्त । सबसे सुखद बात तो यह है कि हिंदी ब्लोगिंग ने देवनागरी लिपि के माध्यम से हिंदी और उर्दू को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया है ।
कहा गया है कि अभिव्यक्ति की ताक़त असीम होती है और अर्थवान भी । वह संवाद कायम करती है , आपस में जोड़ती है , बिगड़ जाए तो दूरी पैदा करती है और खुश हो जाए तो भावनात्मक एकता का अद्भुत सेतु बना सकती है , वसुधैव कुटुंबकम की संकल्पना साकार कर सकती है । इसे साध लिया तो हर मंजिल आसान हो जाती है । आईये हिंदी ब्लोगिंग में सक्रिय कुछ ऐसे साधकों से आपको मिलवाते हैं जिन्होनें वर्ष-२०१० में अपनी सार्थक साहित्यिक-सांस्कृतिक और सकारात्मक गतिविधियों से हिंदी ब्लोगिंग को अभिसिंचित किया है ।
यदि वरिष्ठता क्रम को नज़रंदाज़ कर दिया जाए तो इस श्रेणी में पहला नाम आता है शैलेश भारतवासी का , जिनका प्रमुख ब्लॉग है हिंद युग्म । ये विगत पांच वर्षों से इंटरनेट पर यूनिकोड (हिंदी) के प्रयोग के प्रचार -प्रसार का कार्य कर रहे हैं । १६ अगस्त १९८२ को सोनभद्र (उ0 प्र0 ) में जन्में शैलेश का ब्लॉग केवल ब्लॉग नहीं एक संस्था है जो हिंदी भाषा, साहित्य,कला, संगीत और इनके अंतर्संवंधों को अपने वैश्विक मंच हिंद-युग्म डोट कॉम के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं । दुनिया के सभी वेबसाइटो को ट्रैफिक के हिसाब से रैंक देने वाली वेबसाईट अलेक्सा के अनुसार इस ब्लॉग का रैंक एक लाख के आसपास है जो हिंदी भाषा के कला-साहित्य -संस्कृति-मनोरंजन वर्ग के वेबसाईट में सर्वाधिक है । दुनिया की सभी वेबसाइटो के ट्रैफिक पर नज़र रखने वाली वेबसाईट स्टेटब्रेनडोटकॉम के अनुसार हिंद युग्म को प्रतिदिन लगभग ११००० से ज्यादा हिट्स मिलते हैं । भारत का ऐसा कोई कोना नहीं है , जहां पर इसके प्रयासों के बारे में कुछ लोग ही सही, परिचित नहीं है । विश्व में हर जगह , जहां पर हिंदी भाषा भाषी रहते हैं वहां इस ब्लॉग की चर्चा अवश्य होती है ।
इस श्रेणी के अगले ब्लोगर हैं देश के प्रख्यात व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय , जिनका ब्लॉग है प्रेम जनमेजय ।ये व्यंग्य को एक गंभीर कर्म तथा सुशिक्षित मस्तिष्क के प्रयोजन की विधा मानने वाले आधुनिक हिंदी व्यंग्य की तीसरी पीढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर हैंऔर ‘व्यंग्य यात्रा’ के संपादक भी । ये नुक्कड़ से भी जुड़े हैं । इनकी उपस्थिति मात्र से समृद्धि की नयी परिभाषा गढ़ने की ओर अग्रसर है हिंदी ब्लोगिंग । इस वर्ष ब्लोगोत्सव-२०१० पर प्रकाशित हिंदी ब्लोगिंग के विभिन्न पहलूओं पर उनके साक्षात्कार काफी चर्चा में रहे ।
इस श्रेणी के अगले ब्लोगर हैं डा दिविक रमेश , हिंदी चिट्ठाजगत में सक्रीय एक ऐसा कवि जो २० वीं शताब्दी के आठवें दशक में अपने पहले ही कविता संग्रह ‘रास्ते के बीच’ से चर्चित हुए ! जो ३८ वर्ष की ही आयु में ‘रास्ते के बीच’ और ‘खुली आँखों में आकाश’ जैसी अपनी मौलिक कृतियों पर ‘सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड’ जैसा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले पहले कवि बने । जिनका जीवन निरंतर संघर्षमय रहा है। जो ११ वीं कक्षा के बाद से ही आजीविका के लिए काम करते हुए शिक्षा पूरी की। जो १७ -१८ वर्षों तक दूरदर्शन के विविध कार्यक्रमों का संचालन किया और १९९४ से १९९७ में भारत की ओर से दक्षिण कोरिया में अतिथि आचार्य के रूप में भेजे गए, जहाँ साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उन्होंने कीर्तिमान स्थापित किए।ब्लोगोत्सव-२०१० में उन्हें वर्ष के श्रेष्ठ कवि का अलंकरण प्रदान किया गया ।
इस श्रेणी के अगले ब्लोगर हैं -रवीश कुमार, जिनका प्रमुख ब्लॉग है कस्बा qasba । ये एऩडीटीवी में कार्यरत हैं । ये अपने ब्लॉग पर अपनी ज़िन्दगी के वाकयों, सामयिक विषयों व साहित्य पर खुलकर चर्चा करते हैं, वहीं दैनिक हिन्दुस्तान में प्रत्येक बुद्धवार को ब्लॉग वार्ता के अंतर्गत प्रमुख उपयोगी और सार्थक ब्लॉग को प्रमोट करते है । इनके विषय में बरिष्ठ ब्लोगर रवि रतालामी का कहना है कि “चिट्ठाकारी ने लेखकों को जन्म दिया है तो विषयों को भी। आप अपने फ्रिज पर भी लिख सकते हैं और दिल्ली के सड़कों के जाम पर भी। नई सड़क पर रवीश ने बहुत से नए विषयों पर नए अंदाज में लिखा है और ऐसा लिखा है कि प्रिंट मीडिया के अच्छे से अच्छे लेख सामने टिक ही नहीं पाएँ। हिन्दी चिट्ठाकारी को नई दिशा की और मोड़ने का काम नई सड़क के जिम्मे भले ही न हो, मगर उसने नई दिशा की ओर इंगित तो किया ही है।”
इस श्रेणी के अगले ब्लोगर है गिरीश मुकुल , जिनके दो मुख्य ब्लॉग है गिरेश बिल्लोरे का ब्लॉग और मिसफिट सीधी बात जिसकी चर्चा इसबार खूब हुई । २९ नवंबर १९६३ को जन्में गिरीश मुकुल एम कोम, एल एल बी की शिक्षा प्राप्त करने के बाद बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं । आकाशवाणी जबलपुर से नियमित प्रसारण,पोलियो ग्रस्त बचों की मदद के लिए “बावरे-फकीरा” भक्ति एलबम,स्वर आभास जोशी,तथा नर्मदा अमृतवाणी गायक स्वर रविन्द्र शर्मा इनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है । इनका मानना है कि हमेशा धोखा मिलने पर भी मामद माँगने वालों से कोई दुराग्रह नहीं होता। मदद मेरा फ़र्ज़ है …!!
इस श्रेणी के अगले ब्लोगर हैं डा० टी० एस० दाराल :मेडिकल डॉक्टर, न्युक्लीअर मेडीसिन फिजिसियन– ओ आर एस पर शोध में गोल्ड मैडल– एपीडेमिक ड्रोप्सी पर डायग्नोस्टिक क्राइटेरिया — सरकार से स्टेट अवार्ड प्राप्त– दिल्ली आज तक पर –दिल्ली हंसोड़ दंगल चैम्पियन — नव कवियों की कुश्ती में प्रथम पुरूस्कार — अब ब्लॉग के जरिये जन चेतना जाग्रत करने की चेष्टा — इनका यह उसूल है, हंसते रहो, हंसाते रहो. — जो लोग हंसते हैं, वो अपना तनाव हटाते हैं. — जो लोग हंसाते हैं, वो दूसरों के तनाव भगाते हैं. बस इन्हीं पवित्र सोच के साथ इन्होनें पूरे वर्ष भर अपनी सक्रियता से पाठकों को आकर्षित किया । इनका प्रमुख ब्लॉग है – अंतर्मंथन और चित्रकथा !
इस श्रेणी के अगले, किन्तु महत्वपूर्ण ब्लोगर हैं ललित शर्मा : ललित शर्मा एक ऐसे सृजनकर्मी हैं जिनकी सृजनशीलता को किसी पैमाने में नहीं बांधा जा सकता ….हम सभी इन्हें गीतकार, शिल्पकार, कवि, रचनाकार आदि के रूप में जानते थे, किन्तु इस वर्ष हम उनके एक अलग रूप से मुखातिव हुए । जी हाँ चित्रकार और पेंटर बाबू के रूप में जब मैंने उनकी पेंटिंग की एक गैलरी लगाई ब्लोगोत्सव-२०१० में , इसमें से कुछ छायाचित्र सेविंग ब्लेड से बनाई गयी थी और कुछ एक्रेलिक कलर से । इनके निर्माण में ब्रुश की जगह सेविंग ब्लेड का प्रयोग किया था तथा उससे ही कलर के स्ट्रोक दिये गए थे । इन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० में वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (आंचलिक ) का अलंकरण प्रदान किया गया । इनके प्रमुख ब्लॉग है – ललित वाणी, अड़हा के गोठ, ललित डोट कोम ,ब्लोग४ वार्ता , शिल्पकार के मुख से आदि है ।
हमारे देश में इस वक्त दो अति-महत्वपूर्ण किंतु ज्वलंत मुद्दे हैं – पहला नक्सलवाद का विकृत चेहरा और दूसरा मंहगाई का खुला तांडव । अगली चर्चा की शुरुआत हम नक्सलवाद और मंहगाई से ही करेंगे ।फ़िर हम बात करेंगे मजदूरों के हक के लिए कलम उठाने वाले ब्लॉग , प्राचीन सभ्यताओं के बहाने कई प्रकार के विमर्श को जन्म देने वाले ब्लॉग और देश के अन्य ज्वलंत मुद्दे जैसे अयोध्या मुद्दा, भ्रष्टाचार आदि ….!
जब मुद्दों की बात चलती है तो एक ब्लॉग अनायास ही मेरी आँखों के सामने प्रतिविंबित होने लगता है । जनसंघर्ष को समर्पित इस ब्लॉग का नाम है लोकसंघर्ष । मुद्दे चाहे जैसे हो, जन समस्याओं से संवंधित मुद्दे हों अथवा राष्ट्रीय , सामाजिक हो अथवा असामाजिक, राजनीतिक हों अथवा गैर राजनीतिक …..सभी मुद्दों पर खुल कर अपना पक्ष रखा इस ब्लॉग ने इस वर्ष । इस वर्ष यह ब्लॉग चिट्ठाजगत की सक्रियता सूची में भी चौथे-पांचवें स्थान पर रहा । अयोध्या मुद्दे पर इनका एक पोस्ट (मंदिर के कोई पुख्ता प्रमाण भी नहीं मिले :विनोद दास ) जहां गंभीर विमर्श को जन्म देता दिखाई देता है वहीँ उनका दूसरा पोस्ट ( पुरातत्ववेता प्रोफ़ेसर मंडल का कथन अयोध्या उत्खनन के संवंध में ) विवादों को ।अपने एक पोस्ट में यह ब्लॉग गिन-गिनकर अयोध्या फैसले के गुनाहगार का नाम गिनाते हैं वहीं अपने एक पोस्ट में यह ब्लॉग कहता है कि दुर्लभ मौक़ा आपने गँवा दिया न्यायाधीश महोदय । दूसरा मुद्दा बराक ओबामा की भारत यात्रा पर यह ब्लॉग बोलता है ” चापलूसी हमारा स्वभाव है ” । भ्रष्टाचार के मुद्दे पर यह ब्लॉग कहता है कि भ्रष्टाचार पर कौंग्रेस और भाजपा मौसेरे भाई है वहीं इसी विषय पर एक पोस्ट में ये कहते हैं – गुलामी और लूट का खेल तमाशा ।हाल ही प्रकाशित उनका एक आलेख औद्योगिक घरानों की लोकतंत्र के साथ सांठगाँठ को उजागर करता है शीर्षक है -संसद,लोकतंत्र कठपुतलियाँ हैं औद्योगिक कंपनियों की …..!
मुद्दों पर आधारित इस वर्ष का अगला चर्चित ब्लॉग है दुधवा लाईव , इस ब्लॉग पर २४ जुलाई २०१० को विश्व जनसंख्या पर एक सार्गभितआलेख प्रस्तुत किया गया जिसका शीर्षक था “हम दूसरों के कदमों पर कदम रखना कब छोड़ेंगे ? अगला ब्लॉग है चोखेर वाली जिसपर ३१ अक्तूबर को अरुंधती राय के बहाने कई मुद्दे दृढ़ता के साथ उठाये गए , शीर्षक था ‘अरुंधती राय की विच हंटिंग ….! देश का दर्द बांटने वाला देश का चर्चित सामूहिक ब्लॉग हिन्दुस्तान का दर्द पर ०३ मई २०१० को प्रकाशित इस रिपोर्ट का सच क्या है ? पर बेनजीर भुट्टों से संवंधित कई चौंकाने वाले तथ्य प्रकाश में लाए गए ।
“मुझे ये पूरा विश्वास है कि भ्रष्टाचार आज हम भारतीयों का स्वीकृत आचार बन चुका है. क्षमा चाहूंगा, मैं यहां “हम भारतीयों” पर जोर डालना चाहता हूं. क्योंकि, आज एक-दो आदमी या संस्था नहीं, हम सभी भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ डूबे हैं। ” ऐसा कहा है आजकल ब्लॉग ने अपने २१ अगस्त के पोस्ट पर जिसका शीर्षक है हम सभी भ्रष्ट हैं ।’राजीव गांधी हों, वीपी सिंह हों या मुलायम सिंह यादव हों, कोई भी मुसलमानों का हमदर्द नहीं है।’ ऐसा कहा है २८ अक्तूबर को सलीम अख्तर सिद्दीकी ने अपने ब्लॉग हक की बात में । मीडिया पर असली मुद्दा छुपाने का आरोप लगाया है रणविजय प्रताप सिंह ने समाचार ४ मीडिया पर वहीँ भड़ास 4 मीडिया पर पंकज झा ने अपने एक पोस्ट में कहा है कि अयोध्या मुद्दे को उत्पात न बनाएं । अनिता भारती ने मुहल्ला लाईव में ०७ अगस्त को पूछा कि मुद्दों को डायल्युट कौन कर रहा है ? जनतंत्र के ३० सितंबर के एक आलेख में सलीम अख्तर सिद्दीकी ने भाजपा पर यह आरोप लगाया है कि राख हो चुके मंदिर मुद्दे में आग लगने की कोशिश हो रही है ।
वर्ष के आखिरी चरणों में भारतीय समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जानी मानी हस्तियों ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान शुरू करते हुए देश के भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र में कमियों को दूर करने के वास्ते लोकपाल बिल का मजमून तैयार किया और इसे कानून का रूप देने के अनुरोध के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजा । ब्लॉग पर भी कुछ इसी तरह की चर्चाएँ गर्म रही उस दौरान , यथा- रायटोक्रेट कुमारेन्द्र पर : भ्रष्टाचार का विरोध सब कर रहे हैं, आइये हम सफाया करें । जय जय भारत पर :२ जी स्पेक्ट्रम : ये (भ्रष्टाचार का ) प्रदूषण तो दिमाग को हिला देने वाला है । कडुआ सच पर : भ्रष्टाचार….भ्रष्टाचार ….चलो आज हम हाथ लगा दें । आचार्य जी पर : भ्रष्टाचार । खबर इंडिया डोट कोम पर : भ्रष्टाचार की भारतीय राजनीति मेंविकासयात्रा । ब्लोगोत्सव-२०१० पर : भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए क्या करना चाहिए । ब्लोगोत्सव-२०१० पर : बदलाव जरूरी है… । दबीर निउज में : सुप्रीम कोर्ट की दो टूक भ्रष्टाचार सिस्टम का बदनुमा दाग है । परिकल्पना पर : चर्चा-ए-आम भ्रष्टाचार की आगोश में आवाम और खबर इंडिया डोट कोम पर :भ्रष्टाचार से खोखला हो रहा है देश । ये सभी ब्लॉग भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहीम को हवा देने का कार्य किया हैं , जो प्रशंसनीय है । इस वर्ष के उत्तरार्द्ध में एक नया ब्लॉग आया मंगलायतन , इस पर भी भ्रष्टाचार से संबंधित मुद्दे उठाये गए ।
भारत ने एक संप्रभुता संपन्न राष्ट्र के रूप में १५ अगस्त -२०१० को ६३ वी वर्षगाँठ मनाई । इस समयांतराल में नि:संदेह एक राष्ट्र के रूप में उसने बड़ी-बड़ी उपलब्धियां प्राप्त की । आई टी सेक्टर में दुनिया में उसका डंका बजता है । चिकित्सा,शिक्षा, वाहन, सड़क, रेल, कपड़ा, खेल, परमाणु शक्ति, अंतरिक्ष विज्ञान आदि क्षेत्रों में बड़े काम हुए हैं । परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र का रुतवा भी हासिल किया है । आर्थिक महाशक्ति बनने को अग्रसर है । मगर राष्ट्र समग्र रूप से विकसित हो रहा है इस दृष्टि से विश्लेषण करें तो बहुत कुछ छूता हुआ भी मिलता है, विकास में असंतुलन दिखाई देता है एवं उसे देश के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने में सफलता नहीं मिली है । जिससे भावनात्मक एकता कमजोर हो रही है , जो किसी राष्ट्र को शक्ति संपन्न , समृद्धशाली,अक्षुण बनाए रखने के लिए जरूरी है । यह समस्या चिंता की लकीर बढाती है ।
१५ अगस्त से २४ अगस्त तक परिकल्पना पर एक परिचर्चा आयोजित हुई ” क्या है आपके लिए आज़ादी के मायने ? इस परिचर्चा में शामिल हुए लगभग दो दर्जन ब्लोगर । परिचर्चा में शामिल होते हुए समीर लाल समीर ने कहा कि ” पीर पराई समझ सको तो जीवन भर आज़ाद रहोगे , बरना तुम बर्बाद रहोगे । ” रश्मि प्रभा ने कहा कि ” सब शतरंज के प्यादे राजा बनने की होड़ में और ताज पहनानेवाले अनपढ़ , गंवार !” दीगंबर नासवा ने कहा कि “यदि आप आज की पीढ़ी से पूछें तो शायद आज़ाद भारत में आज़ादी का मतलब ढूँढने में लंबा वक़्त लगेगा । ” दीपक मशाल ने कहा कि “यू के में एक मज़दूर भी चैन का जीवन बिता सकता है मगर क्या आज़ाद भारत में ?” सरस्वती प्रसाद ने कहा कि “”यहाँ पर ज़िन्दगी भी मौत सी सुनसान होती है….यहाँ किस दोस्त की किस मेहरबां की बात करते हो….अमां तुम किस वतन के हो कहाँ की बात करते हो !” अविनाश वाचस्पति ने कहा कि “जिस दिन सोने और सपने देखने की आजादी मिल जाए तो समझना संपूर्ण आजादी मिल गई है। इसे हासिल करना दुष्‍कर है, यह मक्‍का मदीना नहीं है, यह पुष्‍कर है।” शीखा वार्ष्णेय ने कहा कि “घर से निकलती है बेटी तो दिल माँ का धड़कने लगता है,जब तक न लौटे काम से साजन दिल प्रिया का बोझिल रहता है,अपने ही घर में हर तरफ़ भय की जंजीरों का जंजाल हैं, हाँ हम आजाद हैं।” गिरीश पंकज ने कहा कि ” आज़ादी मेरे लिए जीने का सामान है,इश्वर का बरदान है !” अर्चना चाव ने कहा कि ” समय के साथ चलो सिर्फ इतना भर कह देने से कुछ नहीं होगा…!” प्रमोद तांबट ने कहा कि ” आज़ादी का फल भोगने की आज़ादी सब को होना चाहिए ।” उदय केशरी ने कहा कि “क्या भारतीय लोकतंत्र की दशा व दिशा तय करने वाली भारतीय राजनीतिक गलियारे के प्रति युवाओं के दायित्व की इति श्री केवल इस कारण हो गई, क्योकि यह गलियारा मुट्ठी भर पखंडियो और भ्रष्ट राजनीतिकों के सडांध से बजबजाने लगा है …!” खुशदीप सहगल ने कहा कि “दुनिया भर में मंदी की मार पड़ी हो लेकिन भारत में पिछले साल अरबपतियों की तादाद दुगने से ज़्यादा हो गई…पहले २४ थे अब ४९ हो गए हैं….वहीं ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ताजा सर्वे के मुताबिक भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या ६४ करोड़ ५० लाख है…ये देश की आबादी का कुल ५५ फीसदी है…!” अशोक मेहता ने कहा कि “अगर हम गौर करें तो ये पायेंगे कि हमने अपने देश को तो अंग्रेजों से आज़ाद करवा लिया, मगर यहाँ के लोग और उनकी सोच को हम अंग्रेजीपन से आजाद नहीं करवा पाए. आज भी हम उसी अंग्रेजीपन के गुलाम हैं. अपने स्कूल, ऑफिस, या सोसाइटी में तिरंगा फेहरा के हम अगर ये समझते हैं कि हमने आज़ादी हासिल कर ली है तो ये गलत है….!” संगीता पुरी ने कहा कि ” हर प्रकार की स्‍वतंत्रता प्राप्‍त करने के लिए , हर प्रकार की स्‍वतंत्रता को बनाए रखने के लिए नागरिकों के द्वारा अधिकार और कर्तब्‍य दोनो का पालन आवश्‍यक है , ये दोनो एक दूसरे के पूरक हैं। स्‍वतंत्रता का अर्थ उच्‍छृंखलता या मनमानी नहीं होती ।” डा सुभाष राय ने कहा कि “जो समाज आजादी का अर्थ निरंकुशता, उन्मुक्ति या मनमानेपन के रूप में लगाता है, वह भी उसी असावधान पक्षी की तरह नष्ट हो जाता है। अराजकता हमेशा गुलामी या विनाश की ओर ले जाती है। सच्ची आजादी का मतलब ऐसे कर्म और चिंतन के लिये आसमान का पूरी तरह खुला होना है, जो समूचे समाज को, देश को लाभ पहुंचा सके।” प्रेम जनमेजय ने कहा कि ” पहले भी गरीब पिटता था और आज भी गरीबों को पीटने की पोरी आज़ादी है !” इसके अलावा इस महत्वपूर्ण परिचर्चा में शामिल होने वाले ब्लोगर थे -विनोद कुमार पाण्डेय ,एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन,राजीव तनेजा , डा दिविक रमेश , दीपक शर्मा , शकील खान , सलीम खान , ललित शर्मा आदि ।
अयोध्या के हनुमानगढ़ी के पास ही ऊंचाई पर रामद्वार मंदिर के पुजारी चंद्र प्रसाद पाठक की व्यथा-कथा कुछ अलग अंदाज़ में सुनाया रबीश कुमार ने कस्बा पर दिनांक १२.०९.२०१० को । वहीं जिज्ञासा पर २४ सितंबर को प्रमोद जोशी ने कहा कि कॉमनवैल्थ खेल के समांतर अयोध्या का मसला काफी रोचक हो गया है। १० अक्तूबर को विचारार्थ पर राज किशोर ने कहा कि “बचपन से ही मैं नास्तिक हूं। फिर भी राम का व्यक्तित्व मुझे बेहद आकर्षित करता रहा है। वैसे, हिन्दू संस्कारों में पले बच्चे के लिए मिथकीय दुनिया में चुनने के लिए होता ही कितना है? राममनोहर लोहिया ने राम, कृष्ण और शिव की चर्चा कर एक तरह से महानायकों की ओर संकेत कर दिया है। पूजने वाले गणेश, लक्ष्मी और हनुमान को भी पूजते हैं। पर राम, कृष्ण और शिव की मोहिनी ही अलग है। इनकी मूर्ति जन-जन के मन में समाई हुई है। मैं अपने को इस जन का ही एक सदस्य मानता हूं। सीता का परित्याग और शंबूक की हत्या, ये दो ऐसे प्रकरण हैं, जो न होते, तो राम की स्वीकार्यता और बढ़ जाती। लेकिन इधर मेरा मत यह बना है कि महापुरुषों का मूल्यांकन उनकी कमियों के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी श्रेष्ठताओं के आधार पर किया जाना चाहिए। मैं तो कहूंगा, अपने परिवार और साथ के लोगों के प्रति भी हमें यही दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। दूसरों की बुराइयों और कमियों में रस लेना मानसिक रुग्णता है।” भडास4मीडिया पर डा नूतन ठाकुर अयोध्या के लिए नेताओं की तरह मीडिया को भी जिम्मेदार ठहराया है । हमारी भी सुनो पर गुफरान सिद्दीकी ने पूछा है कि किसकी अयोध्या ?
जहां तक महंगाई जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का प्रश्न है १४ जून २०१० को मनोज पर सत्येन्द्र झा कहते है कि ” मंहगाई पहले पैसे खर्च करवाती थी। अब माँ से बेटे को अलग कर के धर दे रही है। इस मंहगाई का. … ऐसी मानसिकता का क्या कहें ? मंहगाई केवल माँ को रखने में ही दिखाई देती है. …(यह एक लघुकथा है जो मूल कृति मैथिली में “अहींकें कहै छी” में संकलित ‘महगी’ से केशव कर्ण द्वारा हिंदी में अनुदित है )।१७ अगस्त २०१० को बाल सजग पर कक्षा-८ में पढ़ने वाले आशीष कुमार की बड़ी प्यारी कविता प्रकाशित हुई है … मंहगाई इतनी बढ़ी है मंहगाई । किसी ने की न जिसकी आवाज सुन मेरे भाई ॥ पूँछा आलू का क्या दाम है भइया । उसने बोला एक किलो का दस रुपया ॥ टमाटर का दाम वो सुनकर । … ०५ अगस्त २०१० को लोकमंच पर यह खबर छपी है कि मंहगाई पर सरकार वेबस है ।आरडी तैलंग्स ब्लॉग पर बहुत सुन्दर व्यंग्य प्रकाशित हुआ है जिसमें कहा गया है कि मंहगाई हमारे देश का गुण है, और हम अपना गुण नष्ट करने में लगे हैं। मैं तो चाह रहा हूं, हर चीज़ मंहगी हो जाए, यहां तक कि आलू भी…ताकि किसी को अगर आलू के चिप्स भी खिला दो, तो वो गुण गाता फिरे कि कितना अच्छा स्वागत किया। पैसे की कीमत भी तभी पता चलेगी, जब पैसा कम हो, और मंहगाई ज्यादा…। सारे रिश्ते नाते, मंहगाई पर ही टिके हैं… जिस दिन मंहगी साड़ी मिलती है, उस दिन बीवी भी Extra प्यार करती है… मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि वो जल्द से जल्द मंहगाई बढ़ाए, देश बढ़ाए…!”
आईये अब वर्ष की कुछ यादगार पोस्ट की चर्चा करते हैं , क्रमानुसार एक नज़र मुद्दों को उठाने वाले प्रमुख ब्लॉग पोस्ट की ओर-
ब्रजेश झा के ब्लॉग खंबा में ०१ जनबरी को प्रकाशित पोस्ट “आखिर भाजपा में क्यों जाऊं ? गोविन्दाचार्य ” , जंगल कथा पर ०२ जनवरी को प्रकाशित ऑनरेरी टाईगर का निधन , नयी रोशनी पर ०२ जनवरी को प्रकाशित सुधा सिंह का आलेख स्त्री आत्मकथा में इतना पुरुष क्यों ? ,तीसरा रास्ता पर 02 जनवरी को एक कंबल के लिए ह्त्या, अपराधी कौन ? , इंडिया वाटर पोर्टल पर पानी जहां जीवन नहीं मौत देता है , नुक्कड़ पर ०४ जनवरी को प्रतिभा कटियार का आलेख नीत्शे,देवता और स्त्रियाँ , हाशिया पर ०४ जनवरी को प्रकाशित प्रमोद भार्गव का आलेख कारपोरेट कल्चर से समृद्धिलाने का प्रयास , ०६ जनवरी को अनकही पर रजनीश के झा का आलेख बिहार विकास का सच (जी डी डी पी ) , ०७ जनवरी को उड़न तश्तरी पर सर मेरा झुक ही जाता है, ०७ जनवरी को चर्चा पान की दूकान पर में बात महिमावान उंगली की , ०७ जनवरी को नारी पर दोषी कौन ?,०८ जनवरी को निरंतर पर महेंद्र मिश्र का आलेख बाकी कुछ बचा तो मंहगाई और सरकार मार गयी , ०८ जनवरी को भारतीय पक्ष पर कृष्ण कुमार का आलेख जहर की खेती ,शोचालय पर चांदी के चमचे से चांदी चटाई ,हिमांशु शेखर का आलेख कब रुकेगा छात्रों का पलायन ,१० जनवरी को आम्रपाली पर हम कहाँ जा रहे हैं ? , १० जनवरी को उद्भावना पर थुरुर को नहीं शऊर , हाहाकार पर अनंत विजय का आलेख गरीबों की भी सुनो , अनाम दास का चिट्ठा पर १७ जनवरी को पोलिश जैसी स्याह किस्मत , टूटी हुई बिखरी हुई पर मेरी गुर्मा यात्रा ,१२ जनवरी को ज़िन्द्ज्गी के रंग पर पवार की धोखेवाज़ी से चीनी मीलों को मोटी कमाई, अज़दक पर प्रमोद सिंह का आलेख बिखरे हुए जैसे बिखरी बोली , विनय पत्रिका पर बोधिसत्व का आलेख अपने अश्क जी याद है आपको , पहलू पर २६ जनवरी को ठण्ड काफी है मियाँ बाहर निकालो तो कुछ पहन लिया करो , १२ जनवरी को तीसरी आंख पर अधिक पूँजी मनुष्य की सामाजिकता को नष्ट कर देती है , १३ जनवरी को उदय प्रकाश पर कला कैलेण्डर की चीज नहीं है , भंगार पर ९१ कोजी होम , कल की दुनिया पर बल्ब से भी अधिक चमकीली, धुप जैसी सफ़ेद रोशनी देने वाले कागज़ जहां चाहो चिपका लो , १० जनवरी को दोस्त पर शिरीष खरे का आलेख लड़कियां कहाँ गायब हो रही हैं , १२ जनवरी को हमारा खत्री समाज पर अपने अस्तित्‍व के लिए संघर्ष कर रहा है ‘कडा’ शहर , १८ जनवरी को संजय व्यास पर बस की लय को पकड़ते हुए , नुक्कड़ पर कितनी गुलामी और कबतक , २१ जनवरी को गत्यात्मक चिंतन पर चहरे, शरीर और कपड़ों की साफ़-सफाई के लिए कितनी पद्धतियाँ है ?, ज़िन्दगी की पाठशाला पर किसी भी चर्चा को बहस बनने से कैसे रोकें ?, १८ जनवरी को क्वचिदन्यतोअपि……….! पर अपनी जड़ों को जानने की छटपटाहट आखिर किसे नहीं होती ? ,२१ जनवरी को प्राईमरी का मास्टर पर प्रवीण त्रिवेदी का आलेख यही कारण है कि बच्चे विद्यालय से ऐसे निकल भागते हैं जैसे जेल से छूटे हुए कैदी , २६ जनवरी को नुक्कड़ पर प्रकाशित अमिताभ श्रीवास्तव का आलेख मुश्किल की फ़िक्र और ३० जनवरी को मानसिक हलचल पर रीडर्स डाईजेस्ट के बहाने बातचीत ……..
जनवरी महीने के प्रमुख पोस्ट के बाद अब उन्मुख होते हैं फरवरी माह की ओर , प्रतिभा कुशवाहा की इस कविता के साथ , कि -
ओ! मेरे संत बैलेंटाइन
आप ने ये कैसा प्रेम फैलाया
प्रेम के नाम पर कैसा प्रेम “भार” डाला
आप पहले बताएं
प्यार करते हुए आप ने कभी
बोला था अपने प्रिय पात्र से
कि …..
आई लव यू…
यह कविता १४ फरवरी २०१० को ठिकाना पर प्रकाशित हुई , शीर्षक था वो मेरे वेलेन्टाय़इन …. यह दिवस भी हमारे समाज के लिए एक मुद्दा है , नि:संदेह !०२ फरवरी को आओ चुगली लगाएं पर गंगा के लिए एक नयी पहल ,०३ फरवरी को भारतनामा पर रहमान के बहाने एक पोस्ट संगीत की सरहदें नहीं होती , ०३ फरवरी को यही है वह जगह पर प्रकाशित आलेख राष्ट्रमंडल खेल २०१०-आखिर किसके लिए? ,खेल की खबरें पर शाहरूख का शिव सेना को जवाब , रोजनामचा पर अमर कथा का अंत , ०४ फ़रवरी को अजित गुप्ता का कोना पर अमेरिकी-गरीब के कपड़े बने हमारे अभिनेताओं का फैशन , पटियेवाजी पर ठाकुर का कुआं गायब , जनतंत्र पर माया का नया मंत्र, विश करो , जिद करो , दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता पत्रिका पर प्रकाशित आलेख विज्ञापन तय करते हैं कहानी आलेख , ०५ फरवरी को कल्किऔन पर पेंड़ों में भी होता है नर-मादा का चक्कर, एक खोज , नारीवादी बहस पर स्त्रीलिंग-पुलिंग विवाद के व्यापक सन्दर्भ , ०५ फरवरी को लखनऊ ब्लोगर असोसिएशन पर लोकसंघर्ष सुमन द्वारा प्रस्तुत प्रेम सिंह का आलेख साहित्य अकादमी सगुन विरोध ही कारगर होगा , ०२ फरवरी को राजतंत्र पर प्रकाशित आलेख हजार-पांच सौ के नोट बंद होने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा , १४ फरवरी को कबाडखाना पर नहीं रहा तितली वाला फ्रेडी तथा २२ फरवरी को विचारों का दर्पण में आधुनिकता हमारे धैर्य क्षमता को कमजोर कर रही है आदि ।
मार्च में हिंदी ब्लॉग पर महिला आरक्षण की काफी गूँज रही । समाजवादी जनपरिषद, ध्रितराष्ट्र ,नया ज़माना आदि ब्लॉग इस विषय को लेकर काफी गंभीर दिखे । ०५ मार्च को नारी में ना..री..नारी ,०९ मार्च को वर्त्तमान परिस्थितियों पर पियूष पाण्डेय का सारगर्भित व्यंग्य आया मुझे दीजिये भारत रत्न …….,०६ मार्च को प्रतिभा की दुनिया पर बेवजह का लिखना, १० मार्च को यथार्थ पर क़ानून को ठेंगा दिखाते ये कारनामे ,१० मार्च को अक्षरश: में महिला आरक्षण ,१२ मार्च को ललित डोट कौम पर महिला आरक्षण,१४ मार्च को साईं ब्लॉग पर अरविन्द मिश्र का आलेख बैंक के खाते-लौकड़ अब खुलेंगे घर-घर आकर , १५ मार्च को प्रवीण जाखड पर उपभोक्ता देवो भव: , १८ मार्च को अनुभव पर शहर के भीतर शहर की खोज,१६ मार्च को काशिद पर कौन हसरत मोहानी ?,१८ मार्च को संवाद का घर पर उपभोक्ता जानता सब है मगर बोलता नहीं ,२३ मार्च को लखनऊ ब्लोगर असोसिएशन पर अशोक मेहता का आलेख आतंकवाद की समस्या का समाधान आदि ।
ये तो केवल तीन महीनों यानी वर्ष के प्रथम तिमाही की स्थिति है , क्या आपको नहीं लगता कि हिंदी ब्लॉग जिसतरह मुद्दों पर सार्थक बहस की गुंजाईश बनाता जा रहा है , यह समानांतर मीडिया का स्वरुप भी लेता जा रहा है ? आईये इस बारे में प्रमुख समीक्षक रवीन्द्र व्यास जी की राय से रूबरू होते हैं ।
रवीन्द्र व्यास का मानना है कि “हिंदी ब्लॉगिंग की दुनिया फैल रही है, बढ़ रही है। इसे मिलती लोकप्रियता आम और खास को लुभा रही है। इसे संवाद के नए और लोकप्रिय माध्यम के रूप में जो पहचान मिली है उसका सबसे बड़ा कारण यही है कि सीधे लोगों तक पहुँच कर आप उनसे हर बात बाँट सकते हैं, कह सकते हैं।”
इस तकनीक के नवीन युग में अपनी बात कहने के माध्यम भी बदल गये हैं पहले लोगों को इतनी स्वतन्त्रता नहीं थी कि वह अपनी बात को खुले तौर पर सभी के सामने तक पंहुचा सके लेकिन आज के इस तकनीकी विकास ने यह संभव कर दिया है इन्ही नए माध्यमों में एक नया नाम ब्लाग का भी है ये कहना है लखीमपुर खीरी के अशोक मिश्र का जो इसी वर्ष अगस्त में हिंदी ब्लॉगजगत से जुड़े हैं ,आईये चलते हैं उनके ब्लॉग निट्ठले की मजलिसमें, जहां इन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय दक्षिण परिसर में पत्रकारिता पाठ्यक्रम से जुड़े छात्रों के ब्लाग की जानकारी दी है ।
दूसरी तिमाही के प्रमुख पोस्ट की चर्चा करें उससे पहले एक ऐसे ब्लॉग पर नज़र डालते हैं जिसपर इस तिमाही में आये तो केवल १२ पोस्ट किन्तु हर पोस्ट किसी न किसी विषय पर गंभीर वहस की गुंजाईश छोड़ता दिखाई दिया , संजय ग्रोवर के इस ब्लॉग का नाम है संवाद घर यानी चर्चा घर । इस घर में ब्लॉग की तो चर्चा नहीं होती , किन्तु जिसकी चर्चा होती है वह कई मायनों में महत्वपूर्ण है । इस पर चर्चा होती है समसामयिक मुद्दों की , समसामयिक जरूरतों की , समाज की, समाज के ज्वलंत मुद्दों की यानी विचारों के आदान-प्रदान को चर्चा के माध्यम से गंभीर विमर्श में तब्दील करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है इस तिमाही में इस ब्लॉग ने, यथा ०१ अप्रैल को फिर तुझे क्या पडी थी वेबकूफ ?,११ अप्रैल को बिन जुगाड़ के छापना , २२ मई को मोहरा अफवाहें फैलाकर….तथा २४ जून को टी वी के पहले टी वी के बाद आदि ।
वर्ष की दूसरी तिमाही में मेरी डायरी पर फिरदौस खान के कई यादगार पोस्ट देखने को मिले , यथा ३० मार्च को मुस्लिम मर्दों पर शरीया कानून क्यों नहीं लागू होता? ,२९ मई को “जान हमने भी गंबायी है वतन की खातिर” ,२७ जून को “लुप्त होती कठपुतली कला” आदि ।
इसके अलावा ०१ अप्रैल को रचना की धरती पर आलोचना की पहली आंख पर “विस्थापन का साहित्य “,०३ अप्रैल को अनिल पाण्डेय का आलेख क्या सानिया की शादी राष्ट्रीय मुद्दा है ?, लडू बोलता है ..इंजिनियर के दिल से पर आलेख सानिया तुम जहां भी रहो खुश रहो पुरुषों ने तुम्हारे लिए क्या किया है ? , एडी चोटी पर ना आना इस देश मेरी लाडो ,०४ अप्रैल को नयी रोशनी पर “भाषा में वर्चस्व निर्माण की प्रक्रिया , १५ अप्रैल को उठो जागो पर विज्ञान की नज़र से क्या पुनर्जन्म होता है ?,१७ अप्रैल को विचार विगुल पर कौन ख़त्म करेगा जातिवाद विचारों का दर्पण पर मीडिया खडी है कटोरा लेके , राजकाज पर शहीदों के शव पर जश्न यही है माओवाद ,१९ अप्रैल को कहाँ गयी वो घड़ों -सुराहियों की दुकानें , २१ अप्रैल को अमीर गरीब लोग पर अनिल पुसदकर का आलेख “जहां दिल ख़ुशी से मिला मेरा वहीं सर भी मैंने झुका दिया , २३ अप्रैल को बतंगड़ पर और भी खेल है इस देश में क्रिकेट के सिवा २६ अप्रैल को सोचालय पर समानांतर सिनेमा तथा २८ अप्रैल को काहे को ब्याहे विदेश पर फोन कुछ पलों के लिए गुणगा हो गया आदि यादगार पोस्ट पढ़े जा सकते हैं ।
यदि मई की बात करें तो ०३ मई को हंसा की कलम से पर एक आलेख आया शहरों के बीच भी है एक जंगल तथा ०६ मई को उपदेश सक्सेना का आलेख आया नुक्कड़ पर कि जनगणना है जनाब मतगणना नहीं एक गंभीर विमर्श को जन्म देता महसूस हुआ वहीं १४ मई को अल्पना पाण्डेय की कलाकृतियों से रूबरू हुए हिंदी ब्लॉग जगत के पाठक ब्लोगोत्सव-२०१० के माध्यम से ।०६ मई ko हलफनामा पर धंधे का मास्टर स्ट्रोक, ०७ मई को घुघूती बासूती पर क्या किसी के कहने पर मैं कलम का रूख बदल लूं , ०८ मई को धम्मसंघ पर पोर्तव्लेयर, पानी और काला पहाड़ , ०९ मई को अमित शर्मा पर कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति” ——— , ०९ मई को दिशाएँ पर मेरी डायरी का पन्ना -२, १० मई को स्वप्न मंजूषा अदा ने अपने ब्लॉग पर एक नया प्रयोग किया पोडकास्ट के माध्यम से ब्लॉग समाचार प्रस्तुत करने का , कल हो न हो पर धोनी का अवसान , ११ मई को वेद-कुरआन पर नियमों का नाम ही धर्म है , १२ मई को जंतर-मंतर पर शेष नारायण सिंह का आलेख मर्द वादी सोच के बौने नेता देश के दुश्मन हैं , १५ मई को आर्यावर्त पर धोनी की कप्तानी बरकरार , १४ मई को बलिदानी पत्रकार पर जातीय आधार पर जनगणना राष्ट्रहित में नहीं , १५ मई को शब्द शिखर पर शेर नहीं शेरनियों का राज ,२५ मई को हारमोनियम पर पी एम , प्रेस कोंफ्रेंस और पत्रकारिता,२७ मई को खबरिया पर कुछ कहता है मणिपुर , २७ मई को तीसरी आंख पर चिन्ता का विषय होना चाहिए सगोत्रीय विवाह, २८ मई को नटखट पर माया के आगे ओबामा फिस्स , २८ मई को दोस्त पर जंगल से कटकर सूख गए माल्धारी तथा ३१ मई को सत्यार्थ मित्र पर ये प्रतिभाशाली बच्चे घटिया निर्णय क्यों लेते हैं ? और हिमांशु शेखर पर प्रतिष्ठा के नाम पर को यादगार पोस्ट की श्रेणी में रखा जा सकता है ।
और प्रथम छमाही के आखिरी महीने जून की बात की जाए तो इस महीने में भी कुछ यादगार पोस्ट पढ़ने को मिले हैं , मसलन – मीडिया डॉक्टर पर आखिर हम लोग नमक क्यों नहीं कम कर पाते ? , तस्वीर घर पर संगेमरमर की नायाब इमारतों की धड़कन सुनो , अनबरत पर सांप सालों पहले निकल गया और लकीर अब तक पित रहे हैं , जुगाली पर क्या हम सामूहिक आत्महत्या की ओर बढ़ रहे हैं , नां जादू न टोना पर इस तरह से आ रही है मृत्यु, देश्नामा पर क्रोध अनलिमिटेड आदि ।
वर्ष की दूसरी तिमाही की एक महत्वपूर्ण घटना पर नज़र डाली जाए तो २३ मई को पश्चिमी दिल्ली के नांगलोई में सर दीनबंधु छोटूराम जाट धर्मशाला में दिल्ली हिन्‍दी ब्‍लॉगरों की एक बैठक संपन्न हुई । आभासी दुनिया के जरिए एक दूसरे से जुडे़ , समाज के विभिन्न वर्गों और देश के विभिन्न्न क्षेत्रों के लेखक और पाठक एक दूसरे के साथ साझे मंच पर न सिर्फ़ लिखने पढने तक सीमित रहे बल्कि उन्होंने आभासी रिश्तों के आभासी बने रहने के मिथकों को तोडते हुए आपस में एक दूसरे के साथ बैठ कर बहुत से मुद्दों पर विचार विमर्श किया। इस बैठक में लगभग ४० से भी अधिक ब्‍लॉगरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराई। शामिल होने वाले ब्‍लॉगर थे श्री ललित शर्मा, श्रीमती संगीता पुरी, श्री अविनाश वाचस्पति, श्री रतन सिंह शेखावत, श्री अजय कुमार झा, श्री खुशदीप सहगल,श्री इरफ़ान, श्री एम वर्मा, श्री राजीव तनेजा, एवँ श्रीमती संजू तनेजा, श्री विनोद कुमार पांडे , श्री पवन चन्दन , श्री मयंक सक्सेना, श्री नीरज जाट, श्री अमित (अंतर सोहिल), सुश्री प्रतिभा कुशवाहा जी, श्री एस त्रिपाठी, श्री आशुतोष मेहता, श्री शाहनवाज़ सिद्दकी ,श्री जय कुमार झा, श्री सुधीर, श्री राहुल राय, डॉ. वेद व्यथित, श्री राजीव रंजन प्रसाद, श्री अजय यादव ,अभिषेक सागर, डॉ. प्रवीण चोपडा,श्री प्रवीण शुक्ल प्रार्थी , श्री योगेश गुलाटी, श्री उमा शंकर मिश्रा, श्री सुलभ जायसवाल, श्री चंडीदत्त शुक्ला, श्री राम बाबू, श्री देवेंद्र गर्ग , श्री घनश्याम बागला, श्री नवाब मियाँ, श्री बागी चाचा आदि ।
एक वेहतरीन लेखक हैं दिनेश कुमार माली, जो पेशे से खनन-अभियंता हैं पर उन्हें नशा है लेखन का। सम्प्रति ओडिशा में कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी महानदी कोल-फील्ड्स लिमिटेड की खुली खदान सम्ब्लेश्वरी, ईब-घाटी क्षेत्र में खान-अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं। इनका एक ब्लॉग है जगदीश मोहंती की श्रेष्ठ कहानियां । उड़ीसा भारत के नक्सल प्रभावित प्रान्तों में एक है। सत्तर के दशक से लेकर आज तक इस खतरनाक समस्या से जूझते उड़ीसा के जनमानस में एक अलग छाप छोड़ने वाले इस आन्दोलन के कुछ अनकहे अनदेखे पक्ष को उजागर करने वाली यह कहानी लेखक का न केवल सार्थक व जीवंत प्रयास है, बल्कि भारतीय कहानियों में अपना एक स्वतन्त्र परिचय रखती है। ‘सचित्र विजया’ पत्रिका में छपने के बाद यह कहानीकार के कहानी संग्रह ‘बीज- बृक्ष – छाया’ में संकलित हुई है। लेखक जगदीश महंती द्वारा इस कहानी में किये गए शैली के नवीन प्रयोग इस कहानी को अद्वितीय बना देती है ।
अब आईये आपको मिलवाते हैं इस वर्ष के द्वितिय तिमाही में ब्लॉग जगत का हिस्सा बने एस.एम.मासूम से जो सेवा निवृत शाखा प्रवन्धक हैं और देश की मर्यादा, सना नियुज़ मुम्बई से जुड़े हैं । इनका iमानना है कि ब्लोगेर की आवाज़ बड़ी दूर तक जाती है, इसका सही इस्तेमाल करें और समाज को कुछ ऐसा दे जाएं, जिस से इंसानियत आप पे गर्व करे / यदि आप की कलम में ताक़त है तो इसका इस्तेमाल जनहित में करें” इन्होनें वर्ष -२०१० के मई महीने में अपना ब्लॉग अमन का पैगाम बनाया ,जिसमें सभी धर्म के लोगों को साथ ले के चलने की कोशिश जारी है . बहुत हद तक इसमें कामयाब भी रहे हैं ये । ये हमेशा जब किसीसे मिलते हैं तो यह सोंच के मिलते हैं कि मैं अपने जैसे इंसान से मिल रहा हूँ ना की किसी हिन्दू , मुसलमान सिख या ईसाई से, और ना यह की किसी अमीर से या ग़रीब से। ये जब किसी को पढ़ते हैं तो यह नहीं देखते कि कौन कह रहा है बल्कि यह देखते हैं कि क्या कह रहा है?’ इनके प्रमुख ब्लॉग हैं अमन का पैगाम, ब्लॉग संसार , बेजवान आदि ।
सबसे अहम् बात यह कि “अमन के पैग़ाम पे सितारों की तरह चमकें” श्रेणी में अलग अलग ब्लोगेर्स ने अपने शांति सन्देश “अमन का पैग़ाम ” से दिए जिनमें से २१ लेख़ और कविताएँ पेश की जा चुकी हैं..’और अनगिनत अभी पेश की जानी है। कोई भी व्यक्ति समाज में शांति कैसे कायम की जाए इस विषय पे अपने लेख़ ,कविता, विचार इन्हें भेज सकता है, उसको उस ब्लोगर के नाम, ब्लॉग लिंक और तस्वीर के साथ ये प्रस्तुत करते रहते हैं ।
जून महीने में एक और ब्लॉग आया नाज़-ए-हिंद सुभाष , ब्लोगर हैं जय दीप शेखर । जय दीप भूतपूर्व वायु सैनिक हैं और सम्प्रति भारतीय स्टेट बैंक में सहायक के पद पर कार्यरत हैं । इस ब्लॉग में मिलेंगे आपको नेताजी से प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष रुप से जुड़े वे तथ्य और प्रसंग, जिन्हें हर भारतीय को- खासकर युवा पीढ़ी को- जानना चाहिए, मगर दुर्भाग्यवश नहीं जान पाते हैं।
इस चर्चा को विराम देने से पूर्व एक एक चर्चाकार की चर्चा , क्योंकि यह ब्लोगर अपने सामाजिक सरोकार रूपी प्रभामंडल के भीतर ही निवास करता है और अच्छे-अच्छे पोस्ट की चर्चा करके हिंदी ब्लॉग जगत को समृद्ध करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है । नाम है शिवम् मिश्रा और काम सत्यम शिवम् सुन्दरम से ब्लॉग जगत को अवगत कराना यानी नाम और काम दोनों दृष्टि से साम्य । इन्होनें ब्लोगिंग मार्च’ २००९ में शुरू की … अपना पहला ब्लॉग बनाया … बुरा भला के नाम से … तब से ले कर आज तक ये हिंदी ब्लोगिंग में सक्रिय हैं हाँ बीच में नवम्बर २००९ से ले कर अप्रैल २०१० तक ये इस ब्लॉग जगत से दूर रहे पर केवल तकनीकी कारणों से ! आज ये ९ ब्लोगों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं जिस में से कि २ ब्लॉग इनके है बाकी सामूहिक ब्लॉग है ! जिन-जिन ब्लोग्स से ये जुड़े हैं उनमें प्रमुख है बुरा भला , जागो सोने वाले, सत्यम नियुज़ मैनपुरी , लखनऊ ब्लोगर असोसिएशन , नुक्कड़ , ब्लॉग4वार्ता , ब्लॉग संसद , मन मयूर और दुनिया मेरी नज़र से । इन प्रतिभाशाली ब्लोगरों को मेरी शुभकामनाएं !
प्रथम छमाही के यादगार आलेखों/रचनाओं तथा महत्वपूर्ण पोस्ट की चर्चा के बाद आईये चलते हैं दूसरी छमाही में प्रकाशित कुछ यादगार पोस्ट की ओर । दूसरी तिमाही के उत्तरार्ध में हिंदी ब्लॉग टिप्स ने यह जानकारी दी की १०० से अधिक फॉलोवर वाले ब्लॉग की संख्या १०० तक पहुँच चुकी है , यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ, किन्तु यह स्थिति १८ सितम्बर तक की थी । ३१ दिसंबर तक की स्थिति पर गौर करें तो व्यक्तिगत ब्लॉग की श्रेणी में हिंदी ब्लॉग टिप्स १००० प्रशंसकों के संमूह में तथा शब्दों का सफ़र ५०० प्रशंसकों के समूह में एकलौते नज़र आये, जबकि १०० से ४०० प्रशंसकों वाले ब्लॉग की सूची में लगभग १२५ के आसपास , जिनमें से प्रमुख है -महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर,हरकीरत ‘ हीर, दिल की बात छींटें और बौछारें,ताऊ डाट इन,काव्य मंजूषा,मेरी भावनाएं,व्योम के पार ,GULDASTE – E – SHAYARI,लहरें,ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र,पाल ले इक रोग नादां…,Rhythm of words…,प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा,अंतर्द्वंद्व ,Hindi Tech Blog – तकनीक हिंदी में,उच्चारण,नीरज,मेरी कलम – मेरी अभिव्यक्ति,चक्रधर की चकल्लस,अमीर धरती गरीब लोग,गुलाबी कोंपलें,गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष,रेडियो वाणी,उड़न तश्तरी,कुछ मेरी कलम से,वीर बहुटी,ज्ञान दर्पण,मेरी रचनाएँ,चाँद, बादल और शाम,KISHORE CHOUDHARY,सुबीर संवाद सेवा,स्पंदन,संवेदना संसार,प्राइमरी का मास्टर,स्वप्न मेरे,” अर्श “,आरंभ,कुश की कलम,झरोखा ,अमृता प्रीतम की याद में…..,ज़ख्म…जो फूलों ने दिये,आदत.. मुस्कुराने की,मनोरमा,महाशक्ति,अलबेलाखत्री .कॉम ,कुमाउँनी चेली,शस्वरं,ज्योतिष की सार्थकता,मसि-कागद,हिंदीब्लॉगरोंकेजनमदिन,कवि योगेन्द्र मौदगिल,ललितडॉटकॉम,संवाद घर ,गठरी,उल्लास: मीनू खरे का ब्लॉग,क्वचिदन्यतोअपि,शब्द-शिखर,घुघूतीबासूती,संचिका,देशनामा,मेरी छोटी सी दुनिया,जज़्बात,बिखरे मोती,चाँद पुखराज का,अनामिका की सदायें,मनोज,मुझे कुछ कहना है,सच्चा शरणम ,दिशाएं,आनंद बक्षी,नारदमुनि जी,BlogsPundit by E-Guru Rajeev,ज़िंदगी के मेले,अलग सा ,बेचैन आत्मा,काव्य तरंग,मेरी दुनिया मेरे सपने,सरस पायस,नवगीत की पाठशाला,पिट्सबर्ग में एक भारतीय,काव्य तरंग,मुझे शिकायत हे,अदालत,काजल कुमार के कार्टून,अजित गुप्‍ता का कोना,हृदय गवाक्ष,आज जाने कि जिद न करो ,अंधड़,गीत मेरी अनुभूतियाँ,एक आलसी का चिठ्ठा,महावीर , रचना गौड़ ’भारती’ की रचनाएं,एक नीड़ ख्वाबों,ख्यालों और ख्वाहिशों का,कल्पनाओं का वृक्ष,ZEAL, मेरा सागर, कुछ एहसास ‘सतरंगी यादों के इंद्रजाल,वटवृक्ष,परिकल्पना,मुसाफिर हूँ यारों,कुछ भी…कभी भी..,ज्ञानवाणी,आदित्य (Aaditya), लावण्यम्` ~अन्तर्मन्`,समयचक्र,मेरे विचार, मेरी कवितायें,पराया देश,मानसिक हलचल,”सच में!” आदि।
कुछ ब्लॉग जो सामूहिक लेखन से या संग्रहित सामग्री से चलते हैं और जिनके वर्ष-२०१० तक १००० से ज़्यादा प्रशंसक हो चुके हैं, उनमें प्रमुख हैं -भड़ास blog, इसके अलावा १००से ९९९ प्रशंसकों वाले सामूहिक/सामुदायिक ब्लॉग की सूची में स्थान बनाने में सफल रहे -रचनाकार,चिट्ठा चर्चा,नारी, नुक्कड़, TSALIIM,हिन्दीकुंज, Science Bloggers’ Association, हिन्दुस्तान का दर्द, चर्चा मंच, माँ ! ,चोखेर बाली, क्रिएटिव मंच-Creative Manch, ब्लॉग 4 वार्ता, ब्लॉगोत्सव २०१०, लखनऊ ब्लोगर असोसिएशन,कथा चक्र,”हिन्दी भारत”,चर्चा हिन्दी चिट्ठों की, मुहल्ला लाईव , कबाड़खाना आदि।
३१ दिसंबर तक के आंकड़ों के आधार पर Shobhna: The Mystery ९२ प्रशंसकों ,मा पलायनम ! ९५ प्रशंसकों ,THE SOUL OF MY POEMS ९५ प्रशंसकों ,आवाज़ ९६ प्रशंसकों,मानसी ९९ प्रशंसकों के साथ निकटतम स्थिति में रहे हैं ।
बड़ों की चर्चा के बाद आईये बच्चों की ओर उन्मुख होते हैं । बच्चों की बात ही निराली होती है। फिर बच्चों से जुड़े ब्लॉग भी तो निराले हैं। अब तो बाकायदा इनकी चर्चा प्रिंट-मीडिया में भी होने लगी है। ‘ हिंदुस्तान’ अख़बार के दिल्ली संस्करण में १६ सितम्बर, २०१० को प्रकाशित भारत मल्होत्रा के लेख ‘ब्लॉग की क्रिएटिव दुनिया’ में बच्चों से जुड़े ब्लॉगों की इस वर्ष भरपूर चर्चा हुई है । अक्सर विश्लेषण के क्रम में बच्चों का ब्लॉग छूट जाता रहा है , किन्तु इस वर्ष पहली बार किसी नन्हे ब्लोगर (अक्षिता पाखी )को वर्ष का श्रेष्ठ नन्हा ब्लोगर घोषित किया गया और उनकी रचनात्मकता को जनमानस के समक्ष प्रस्तुत किया गया इसलिए आईये कुछ नन्हे ब्लोगरों के ब्लॉग पर नज़र डालते हैं ।
जब बड़ों के प्रशंसक इतने ज्यादा हैं तो बच्चे भला कैसे पीछे रह सकते हैं । १०० से ज्यादा प्रशंसकों के समूह में शामिल बाल ब्लॉग सूची में इस वर्ष केवल चार नन्हे ब्लोगर शामिल हुए इनके ब्लॉग है क्रमश: – पाखी , आदित्य ,सरस पायस और मेरी छोटी सी दुनिया……!
इस वर्ष के चर्चित नन्हे ब्लोगरों की सूची में शामिल रहे हैं जो ब्लॉग उनके नाम है- आदित्य, पाखी की दुनिया , नन्हे सुमन , बाल संसार , नन्हा मन , क्रिएटिव कोना , बाल दुनिया, बाल सजग, बाल मन , चुलबुली,नन्ही परी, मेरी छोटी सी दुनिया, माधव , अक्षयांशी, LITTLE FINGER , मैं शुभम सचदेव आदि ।
बच्चों के ब्लॉग को प्रमोट करने हेतु एक चर्चा मंच भी है जिसका नाम है बाल चर्चा मंच जो इन ब्लोग्स की निरंतर चर्चा करके उत्साह वर्द्धन का कार्य करता रहा पूरे वर्ष भर । इस ब्लॉग के ८४ प्रशंसक हैं ।
आज की चर्चा को विराम देने से पूर्व आपको एक ऐसे ब्लॉग से रूबरू कराने जा रहे हैं ,जों एक मंच है और समर्पित है भारत चर्चा को। भारत से सम्बन्धित किसी भी विषय पर आपके विचार चर्चा के लिये आमन्त्रित हैं। भारत विश्व की सर्वाधिक धनी और प्राचीन सभ्यता का स्थान है, जिसका अस्तित्व सदियो तक रहा है, तथा जिसके प्रमाण हमे आज भी मिलते हैं। प्राचीन भारत को विश्व ज्ञान गुरु कहा जाता है। गणित और विज्ञान की कई विधाओं की जन्म-स्थली है यह भूमि। इस मंच पर आप भारत के स्वर्णिम इतिहास के बारे मे अपने विचार रख सकते हैं। भारत तो अनगिनत विविधताओ से भरा देश है। इसे पूर्णतः जानना तो असंभव प्रतीत होता है, परन्तु यह एक प्रयास है और इस प्रयास मे अपना योगदान दीजिए।
विगत वर्ष कतिपय तकनिकी ब्लोग्स के द्वारा हिंदी ब्लोगिंग की सेहत को दुरुस्त करने में अहम् भूमिका अदा की गयी , कुछ समय के साथ अनियमित भी हुए और कुछ काल कलवित भी, किन्तु कुछ ब्लोग्स की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रही लगातार , उसमें प्रमुख है श्री रवि रतलामी का ब्लॉग छीटें और बौछारें, आशीष खंडेलवाल का ब्लॉग हिंदी ब्लॉग टिप्स, विनय प्रजापति नज़र का ब्लॉग TECH PREVUE यानी तकनीकी द्रष्टा आदि । इन ब्लोग्स को हिन्दी चिट्ठाजगत में तकनीकी चिट्ठाकारी को लोकप्रिय बनाने हेतु जाना जाता है।
इस वर्ष जनवरी के उत्तरार्द्ध में कई वर्षों की अनियमितता के बाद अचानक श्रीश शर्मा यानी “epandit” का आगमन हुआ । उल्लेखनीय है कि ‘ई-पण्डित’ का आरम्भ २००६ में अधिक से अधिक अन्तर्जाल प्रयोक्ताओं को हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रति आकर्षित करने, नए लोगों की सहायता करने तथा हिन्दी में तकनीकी ब्लॉगिंग को प्रमोट करने (और चिट्ठाकार की गीकी खुजली मिटाने) के लिए किया गया। ‘ई-पण्डित’ तकनीक, हिन्दी कम्प्यूटिंग, हिन्दी टाइपिंग, इनपुट विधियों पर बहुत से लेख लाया। विशेषकर कम्प्यूटर पर यूनिकोड हिन्दी टाइपिंग नामक लेख बहुत ही सराहा गया एवं विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ। य़ह पहला लेख था जिसमें कम्प्यूटर पर हिन्दी टाइपिंग के विभिन्न तरीकों को सुव्यवस्थित तरीके से डॉक्यूमेंट किया गया।
‘ई-पण्डित’ महज एक ब्लॉग नहीं एक विचार था, एक दृष्टिकोण, एक स्वप्न कि हिन्दी को भी इण्टरनेट पर अपना उपयुक्त स्थान मिले। हिन्दी की स्थिति तब भी और अब भी अन्य देशों की भाषाओं यथा चीनी, अरबी आदि से बहुत पीछे थी और है। चिट्ठाकारों का स्वप्न था कि इण्टरनेट पर अपनी भाषा हिन्दी की भी अलग दुनियाँ हो। ‘ई-पण्डित’ इसी दिशा में एक अदना सा प्रयास था। दूसरा मुख्य उद्देश्य था कि आम हिन्दी भाषी जिसकी अंग्रेजी तक किञ्चित कारणों से पहुँच नहीं है उसे अपनी भाषा में सरल रुप से तकनीकी जानकारी मिले।
दूसरे उस समय हिन्दी में कोई भी तकनीकी ब्लॉग नहीं था। कुछ चिट्ठाकार यदा-कदा तकनीकी पोस्टें लिखते रहते थे परन्तु कोई सम्पूर्ण, संगठित और विषय आधारित चिट्ठा नहीं था। कुछेक चिट्ठे तकनीकी विषयों पर शुरु हुए पर दो-चार पोस्टें लिखकर गायब भी हो गए। कारण था कि उस समय हिन्दी में तकनीकी पोस्टों को विशेष पढ़ा नहीं जाता था, न तो पर्याप्त हिट्स मिलते थे और न पर्याप्त टिप्पणियाँ। इस कारण कोई भी तकनीकी विषयों पर लिखता न था। यद्यपि इससे कई बार मनोबल गिरता था परन्तु कुछ साथियों के हौसला बढ़ाने और कुछ ही सही लेकिन अच्छी फीडबैक के चलते लेखन जारी रहा। साथ ही एक उम्मीद थी की शायद इससे से प्रेरित होकर भविष्य में कुछ अन्य लोग भी तकनीकी ब्लॉग लिखने लगें। खैर धीरे-धीरे समय के साथ बदलाव आया और ‘ई-पण्डित’ प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय होता गया। इनके अज्ञातवास पर जाने के समय ‘ई-पण्डित’ की लोकप्रियता चरम पर थी और रविरतलामी जी के बाद ‘ई-पण्डित’ के सबसे ज्यादा फीड सबस्क्राइबर थे।
नवम्बर २००७ के दौरान ‘ई-पण्डित’ किञ्चित कारणों से अवकाश (या अज्ञातवास) पर चले गए तथा दो वर्ष पश्चात २७ जनवरी २०१० को वापस आये । खैर हार्दिक खुशी की बात है कि हिन्दी चिट्ठाजगत अब भाषाई अल्पसंख्यक ब्लॉगरों का कुनबा न रहकर विशाल कॉम बन गया है। पुराने समय तकनीक सम्बन्धी अपडेट्स जानने के लिए अंग्रेजी चिट्ठों का रुख करना पड़ता था पर अब बहुत सी खबरें हिन्दी चिट्ठों से ही मिल जाती हैं। उम्मीद है यह स्थिति धीरे-धीरे और सुधरेगी।
मेरी जानकारी में कई तकनीकी चिट्ठे हैं जो वर्ष-२०१० में धमाल मचाते रहे मगर सबकी चर्चा करना संभव नही । तो आईये कुछ चिट्ठों पर प्रकाशित तकनीकी पोस्ट जो मुझे अत्यन्त उपयोगी लगे उसी की चर्चा करते हैं -पहला चिट्ठा है “Raviratlami Ka Hindi Blog ” इस ब्लॉग पर इस वर्ष प्रकाशित १४३ पोस्ट्स में से कुछ पोस्ट जो सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ उनमें प्रमुख है – हिंदी पी डी एफ फाईलों को यूनिकोड वर्ड डाक्यूमेंट में कैसे जोड़ें ?, ५० मजेदार कम्प्यूटिंग कहावतें , सावधान ऊर्जा वचत के लिए अर्थ आवर बन सकता है’डिजास्टर आवर’ , अपने हिंदी ऑफिस में जोडीये एक लाख शब्दों की कस्टम डिक्सनरी , बच्चों के लिए ख़ास -लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम -क्विमो लिनक्स-तथा ऑफिस सूट ….., ये कम्फर्ट स्टेशन क्या होता है ?, ब्लॉग : आईये आचार संहिता को मारे गोली आदि ।
इस वर्ष सर्वाधिक चर्चित तकनीकी ब्लॉग की श्रेणी में रवि रतलामी के ब्लॉग बाद जिस ब्लॉग का नाम शीर्ष फलक पर दिखाई दिया उसमें पहला नाम आता है आशीष खंडेलवाल का , जिनके ब्लॉग का नाम है हिंदी ब्लॉग टिप्स । इसपर प्रकाशित कुछ पोस्ट काफी लोकप्रिय हुए, जिनमें से प्रमुख है – ब्लोग्स पर कॉमेंट से जुडी दो नयी सुविधाएं , सौ से ज्यादा फौलोवर वाले हिंदी चिट्ठों का शतक , एक घंटे में गूगल से ३४९७.६२ रुपये कमाने का मौक़ा आदि ।
इस वर्ष उन्मुक्त पर तकनीकी बातें कम देखने को मिली, किन्तु इसके एक पोस्ट ने मुझे आकर्षित किया वह है हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गए …! तकनीकी दस्तक पर इस वर्ष मात्र एक पोस्ट प्रकाशित हुआ । इस बार दस्तक ने चार साल पूरे किये , दस्तक पर एक सार्गाभित पोस्ट देखने को मिला यथा IRCTC अब नए अंदाज़ में । अंकुर गुप्ता के हिंदी ब्लॉग पर इस वर्ष कुछ सार्थक और सारगर्भित पोस्ट देखने को मिले यथा -फायरफौक्स अब नए रूप में, फेसबुक को जी मेल से जोड़ें , अंतरजाल.इन , तकनीकी चिट्ठे का शुभारंभ , देशभक्ति संगीत डाऊनलोड करें आदि . kunnublog – Means Total Entertainment पर भी इस वर्ष काफी अच्छे-अच्छे पोस्ट पढ़ने को मिले यथा मेरा नया साईट : किसी भी साईट को अनब्लोक करे , ब्लॉग/ साईट का बैक लिंक कैसे बनाएं, पेज रैंक बढायें , जी मेल का वैक अप बनाकर कंप्यूटर पर सेव करें आदि ।
तकनीकी जानकारी देने में हिंद युग्म का ई -मदद इस वर्ष काफी सक्रिय तो नहीं रहा किन्तु इस वर्ष प्रकाशित उसके दोनों पोस्ट कई अर्थों में काफी महत्वपूर्ण रहा । यथा चैट करके जानिये अंग्रेजी शब्दों के हिंदी अर्थ तथा कृतिदेव ०१० से यूनिकोड से कृतिदेव ०१० प्रवर्तक आदि ।
परिकल्पना के विश्लेषण में विगत वर्ष-२००९ में सर्वाधिक सक्रिय क्षेत्र छत्तीसगढ़ के सक्रीय शहर रायपुर के खरोरा के रहने वाले नवीन प्रकाश २४ अगस्त २००९ को अपना नया चिटठा हिंदी टेक ब्लॉग लेकर आये और ब्लॉग जगत को समर्पित करते हुए कहा कि “बस एक कोशिश है -जो थोडी बहुत जानकारियां मुझे है मैं चाहता हूँ कि आप सभी के साथ बांटी जाए। “
इस वर्ष इस चिट्ठे ने हिंदी ब्लोगिंग में पूरी दृढ़ता के साथ अपना कदम बढाया है और लगातार अपने महत्वपूर्ण विचारो /जानकारियों से हिन्दी चिट्ठाकारी को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है ।इसके अलावा इधर उधर की , ब्लॉग मदद, टेक वार्ता , ज्ञान दर्पण , तकनीकी संवाद आदि ब्लॉग की भी सक्रियता और प्रासंगिकता बनी रही है इस वर्ष ।
तकनीकी चिट्ठों की प्रासंगिकता और उद्देश्यपूर्ण सक्रियता के सन्दर्भ में तकनीकी चिट्ठाकार विनय प्रजापति का मानना है कि “हिन्दी चिट्ठाजगत से जुड़े सभी ब्लोगर हिन्दी का मान बढ़ाकर भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं जबकि अंग्रेजी कोस-कोस में व्याप्त हो चुकी है और उसके बिना तो किसी साक्षात्कार में दाल ही नहीं गलती। हिन्दी के प्रचार-प्रसार को लेकर हम जो भी कर रहे हैं, वह बहुत ही सराहनीय है पर हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं जो सब कुछ जानते हैं लेकिन तकनीकि सरल स्रोत उपलब्ध न होने के कारण अपने पृष्ठों पर प्रस्तुतिकरण ठीक से नहीं कर पा रहे हैं, जिससे पाठक के मन से उन्हें पढ़ने की रुचि जाती रहती है और वह टिप्पणी करके या उससे भी बचकर निकल जाता है। ऐसे में तकनीकी जानकारी प्रदान करने वाले चिट्ठों की आवश्यकता महसूस होती है । तकनीकी चिट्ठों के आगमन में लगातार इजाफा हो रहा है और यह इजाफा आने वाले दिनों में हिंदी ब्लोगिंग को निश्चित रूप से समृद्ध करने में अहम् भूमिका निभाएगा , इसमें कोई संदेह नहीं है । “
यहाँ एक और प्रतिभाशाली ब्लोगर की चर्चा आवश्यक प्रतीत हो रही है वे हैं संजय वेंगाणी , जिनके ब्लॉग का नाम है जोग लिखी यानी तरकश.कॉम , इसपर भी समय-समय पर तकनिकी जानकारियाँ दी जाती रही है ।वर्तमान में भारत के अहमादाबाद (कर्णावती) शहर से मीडिया कम्पनी चला रहे हैं , हिन्दी के प्रति मोह राष्ट्रवादी विचारधारा की छाया में पनपा. इन्हें जिस काम में सबसे ज्यादा आनन्द मिलता है वे है अभिकल्पना और वेब-अनुप्रयोगों का ।
परिवर्तन दुनिया का आईना है इसलिए हर वर्ष परिस्थितियाँ बदली हुई होती है । परिस्थितियों का अंतर्द्वंद्व , सोचने-समझने का नज़रिया, वैचारिक दृष्टिकोण और कहने की शैली में बदलाव साफ़ दिखाई देता है । हमारा समाज नयी-नयी चीजें अपना तो रहा है , साथ ही बहुत पुरानी चीजें छोड़ भी रहा है । बीता हुआ २०१० भी इसका गवाह रहा है और आने वाले दिनों में भी यह दौर कायम रहेगा । कुछ लोग कहते हैं कि ब्लॉग डायरी का दूसरा रूप है और दूसरी तरफ ब्लोगर की निजता पर प्रश्न भी उठाये जाते हैं । कुछ ब्लोगर पोस्ट के माध्यम से सफल नहीं हो पाते तो अनावश्यक प्रलाप में निमग्न रहते हैं ताकि मुख्यधारा में बने रह सके । कुछ तो जानबूझकर विवाद को हवा देते हैं और कुछ अपनी सहूलियतों के हिसाब से अपने लिए पैमाने तय कर लेते हैं । यही है हिंदी ब्लोगिंग की सच्चाई ।
सदी के दूसरे दशक का पहला साल २०११ नयी उम्मीदें और उमंगें लेकर आ रहा है । इस वर्ष जनवरी में विकिपीडिया अपनी दसवीं वर्षगाँठ मनायेगा । नेट पर दुनिया के लगभग सभी देशों में उपलब्ध यह विश्वकोष पढ़ने -लिखने वालों के लिए वरदान है । मार्च में सोशल नेटवर्क ट्विटर अपने पांच साल पूरा करेगी । संयोग से उसी दिन विश्व कविता दिवस भी मनाया जाएगा । इसी महीने दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण में जुटे लोग एक घंटे तक बिजली के उपकरणों को बंद करके ‘अर्थ आवर मनाएंगे । उद्देश्य होगा उर्जा की बचत करना और जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को दर्शाना । जून के महीने में ‘आई बी एम ‘ अपनी सौवीं वर्षगाँठ मनाने के साथ हीं यह साबित कर देगी वक़्त के साथ बदलते रहना जरूरी है ।
भारतीय परिदृश्य में ब्लोगिंग की भूमिका की बात करें तो इस वर्ष के प्रारंभ में पांच राज्यों में प्रस्तावित चुनाव पर ब्लोगिंग की ख़ास नज़र देखी जा सकती है । राष्ट्रीय राजधानी के सौ साल पूरे हो रहे हैं इस पर भी हिंदी ब्लॉग की नज़र रहेगी इस वर्ष खासकर दिल्ली के ब्लोगरों की । खट्टी-मीठी यादों के साथ वर्ष-२०१० को हम सभी ने अलविदा कह दिया किन्तु भ्रष्टाचार का सवाल हमें पूरे साल सालता रहा , इस वर्ष भी यह मुद्दा ब्लॉग जगत का हिस्सा बना रह सकता है ऐसी संभावना है । मौजूदा ब्लोगिंग परिदृश्य में विरोधी पक्ष को नीचा दिखाने और उसके मुकावले ज्यादा टिप्पणियाँ बटोरने का सिलसिला अभी जारी रह सकता है , क्योंकि हिंदी ब्लोगिंग अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हो पाया है । विगत वर्ष के आखिरी क्षणों में प्याज ने लगाई महंगाई में आग , टमाटर और पेट्रोल के ऊँचे दामों से खाद्य मुद्रास्फीति १४.४४ फीसदी तक पहुंची अगले वर्ष में भी रियायत की संभावना कम है , यह भी मुद्दा छाया रहेगा अगले वर्ष ब्लोगिंग में ।
वर्ष-२०१० ब्लोगर गहमागहमी, ब्लोगर मिलन,ब्लोगर संगोष्ठी और ब्लॉग बबाल से भरपूर रहा । हिंदी ब्लोगिंग के चहुमुखी विकासमें भले ही अवरोध की स्थिति बनी रही पूरे वर्ष भर, किन्तु बुद्धिजीवियों का एक बड़ा तबका अपने इस आकलन को लेकर करीब-करीब एकमत है कि आने वाला कल हमारा है यानी हिंदी ब्लोगिंग का है ।
इसकों लेकर किन्तु-परन्तु हो सकता है कि हिंदी ब्लोगिंग का विकास अन्य भाषाओं की तुलना में धीमा रहा , लेकिन इसे लेकर किसी को संशय नहीं होना चाहिएकि हिंदी चिट्ठाकारी उर्जावान ब्लोगरों का एक ऐसा बड़ा समूह बनता जा रहा है जो किसी भी तरह की चुनौतियों प़र पार पाने में सक्षम है और उसने अपने को हर मोर्चे पर साबित भी किया है । वस्तुत: विगत वर्ष की एक बड़ी उपलब्धि और साथ ही आशा की किरण यह रही है कि ब्लॉग के माध्यम से वातावरण का निर्माण केवल वरिष्ठ ब्लोगरों ने ही नहीं किया है , अपितु एक बड़ी संख्या नए और उर्जावान ब्लोगरों की हुई है , जिनके सोचने का दायरा बहुत बड़ा है । वे सकारात्मक सोच रहे हैं , सकारात्मक लिख रहे हैं और सकारात्मक गतिविधियों में शामिल भी हो रहे हैं ।
साहित्य और पत्रकारिता से गायब हो चुके यात्रा वृतांतों ने ब्लॉग में अपनी जगह तलाशनी शुरू कर दी है । इसी तलाश के क्रम में इस वर्ष जून के महीने में ललित शर्मा लेकर आये चलती का नाम गाडी । भुखमरी पर चर्चा में अब मीडिया की दिलचश्पी भले ही न रह गयी हो किन्तु ब्लॉग में इस समस्या पर गंभीर लेखन की शुरुआत हो चुकी है यह जानकर संतोष होता है । ब्लॉग का नाम है दोस्त । सचमुच यह दोस्त है संवेदनाओं का , दोस्त है उन भूखों का जो अपनी आवाज़ उचित प्लेटफोर्म पर नहीं उठा पाते , दोस्त है उन बच्चों का जो कुपोषण के कारण हर वर्ष एक बड़ी संख्या में काल कलवित होने की स्थिति में हैं । सवालों से जूझते-टकराते इस ब्लॉग से नए वर्ष में कुछ और सार्थक पहल की उम्मीद की जा सकती है । अब तो इंटरनेट पर लहलहाने लगी है फसलें, सिखाये जाने लगे हैं गेहूं-धान आदि । शिव नारायण के ब्लॉग खेत खलियान ने विगत वर्ष की तरह इस वर्ष भी कुछ सार्थक पोस्ट दिए हैं अपने ब्लॉग पर । उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर फतहपुर से प्रवीण त्रिवेदी वर्त्तमान शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलते हुए इस वर्ष भी नज़र आये , उनका ब्लॉग ‘प्राईमरी का मास्टर’ कई सार्थक और सकारात्मक बहस का गवाह बनने में सफल रहा । संस्मरणों से भरी ब्लॉग की दुनिया में बेजान मुकदमों में सामाजिक प्रसंग ढुन्ढने में सफल रहा इस वर्ष भी अदालत ।
हिंदी ब्लॉग अंतर्विरोधों से भरा है, क्योंकि हम ऐसे ही हैं । एक ओर हम विदेशी संस्कृति से अपनी संस्कृति को बचा कर रखना चाहते हैं , तो दूसरी तरफ उसी को पूरी तरह अपनाने में अपना गौरव समझते हैं । ऐसे में एक ब्लॉग से साक्षात्कार सुखद रहा इस वर्ष । ब्लॉग का नाम है लोकरंग और ब्लोगर हैं गाजियावाद की प्रतिमा वत्स। वहीं अनुभवों के आधार पर बाज़ार के उत्पादों की विवेचना करता एक गृहणी का ब्लॉग ‘सवा सेर शॉपर’ इस वर्ष पूरी तरह अनियमित रहा । ऐसे ब्लॉग का अनियमित होना शालता रहा पूरे वर्ष भर । विगत वर्ष विश्लेषण के दौरान एक आदिवासी ब्लोगर की चर्चा हुई थी और ख़ुशी जाहिर की गयी थी कि जब एक आदिवासी ब्लोगर बन गया है तो प्राचीन मानवीय संस्कृति को ग्लोबलाईज करने में मदद मिलेगी, किन्तु हरिराम मीणा के ब्लॉग आदिवासी जगत पर केवल पांच पोस्ट ही प्रकाशित हुए । पर ये पाँचों पोस्ट आदिवासी संस्कृति को वयां करता हुआ कई महत्वपूर्ण विमर्श को जन्म देने में सफल रहा ।
अंतरजाल पर कुछ वेब पत्रिकाएं हैं जो ब्लॉग को प्रमोट करने की दिशा में सक्रिय है, उसमें प्रमुख है सृजनगाथा, अभिव्यक्ति, अनुभूति, दि सन्दे पोस्ट, पाखी ,एक कदम आगे, गर्भनाल , पुरवाई, प्रवासी टुडे, अन्यथा, भारत दर्शन, सरस्वती पत्र आदि , किन्तु साहित्य कुञ्ज इस वर्ष पूरी तरह अनियमित रहा । इस वर्ष एक और वेब पत्रिका पांडुलिपि का आगमन हुआ जो अनेक साहित्यिक सन्दर्भों को प्रस्तुत करके कम समय में ही अपनी पहचान बनाने में सफल रही है । यह प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान की त्रैमासिक पत्रिका है , जो पूरी तरह अंतरजाल पर सक्रिय नहीं हो पायी है ।
विशुद्ध साहित्यिक सन्दर्भों को सहेजने में पूरे वर्ष मशगूल रहा प्रभात रंजन का ब्लॉग जानकी पुल । बना रहे बनारस पर पूरे वर्ष गंभीर साहित्यिक सामग्रियां परोसी जाती रही , साथ ही रचनाकार ,कृत्या ,साखी ,स स्वरं ,आखर कलश,नेगचार,कांकड़,अनुसिर्जन, शब्दों का उजाला,साहित्य शिल्पी, कागद हो तो हर कोई बांचे,अनुवाद घर,गवाक्ष, सेतु साहित्य,नयी कलम उभरते हस्ताक्षर ,पंचमेल ,उद्धव जी ,पढ़ते-पढ़ते , मोहल्ला लाईव, नया ज़माना , जनपक्ष , जनशब्द , हुंकार , तनहा फलक , वटवृक्ष , पुरविया , काव्य प्रसंग , स्वप्नदर्शी , हरी मिर्च , सरगम ,हरकीरत हीर , संचिका , उदय प्रकाश , शहर के पैगंबरों से कह दो , शहरोज का रचना संसार , कतरनें , समीक्षा , हाशिया , अनकही, आलोचक , जिरह , नास्तिकों का ब्लॉग , नयी रोशनी , दिल की बात , कुछ औरों की कुछ अपनी , पुनर्विचार , हमजवान , गीता श्री , हारमोनियम , रिजेक्ट माल , मेरी डायरी, शरद कोकाश , शुशीला पुरी , दिलें नादाँ , पाल ले एक रोग नादाँ , संजय व्यास ,डा कविता किरण , मुक्तिवोध ,जिंदगी-ए-जिंदगी , हमारी आवाज़ ,जोग लिखी, नयी बात ,मेरी भावनाएं ,खिलौने वाला घर,हिंद युग्म हिंदी कविता, पद्मावली ,जिंदगी एक खामोश सफ़र, , काव्य तरंग,राजभाषा हिंदी, ज्ञान वाणी,यात्रा एक मन की, लम्हों का सफ़र,एहसास अंतर्मन के ,पलकों के सपने,अनुशील,आदत मुस्कुराने की,जज्वात ज़िंदगी और मैं,इक्कीसवीं सदी का इन्द्रधनुष, बस यूँ हीं , रसबतिया, मेरी बात, न दैनयम न पलायनम, उल्लास मीनू खरे का ब्लॉग,अमन का पैगाम,जो मेरा मन कहे,शीखा दीपक, स्वप्न मेरे ,सरोकार,आवाज़ दो हमको,दिल का दर्पण ,सच में, फुलबगिया,चाँद की सहेली, रचना रवीन्द्र, कासे कहें, कुछ मेरी कलम से, नीरज,शाश्वत शिल्प,अनामिका की सदायें , नजरिया , मेरी छोटी सी दुनिया ,हास्य कवि अलवेला खत्री, भाषा सेतु , हुंकार , काजल कुमार के कार्टून , शब्दों का सफ़र ,आखर माया,मेरा सामान ,बचपन, बेचैनआत्मा, अनवरत,कबाडखाना,आवाराहूँ,अनकहीबातें,अलफ़ाज़,ज़िन्दगीकेमेले,चवन्नीचैप,कविताएँ ,बरगद ,क्वचिदन्यतोअपि……….! , अनुनाद , कस्बा , नुक्कड़ ,कर्मनाशा आदि ब्लोग्स पर कतिपय रचनात्मक पोस्ट देखने को मिले हैं इस वर्ष ।
इसप्रकार सक्रियता में अग्रणी रहे श्री समीर लाल समीर और सकारात्मक सोच के साथ हिन्दी चिट्ठाकारी में अपनी उद्देश्यपूर्ण भागीदारी में अग्रणी दिखे डा अरविन्द मिश्र । रचनात्मक आन्दोलन के पुरोधा रहे श्री रवि रतलामी , जबकि सकारात्मक लेखन के साथ-साथ हिन्दी के प्रचार -प्रचार में अग्रणी दिखे श्री शास्त्री जे सी फिलिप । विधि सलाह में अग्रणी रहे श्री दिनेश राय द्विवेदी और तकनीकी सलाह में अग्रणी रहे श्री आशीष खंडेलवाल । वहीं अनूप शुक्ल समकालीन चर्चा में अग्रणी दिखे और दीपक भारतदीप गंभीर चिंतन में । इसीप्रकार चिट्ठा चर्चा में अग्रणी रहे मनोज कुमार और राकेश खंडेलवाल कविता-गीत-ग़ज़ल में अग्रणी दिखे इस वर्ष ।
महिला चिट्ठाकारों के विश्लेषण के आधार पर हम जिन नतीजों पर पहुंचे है उसके अनुसार साहित्यिक गतिविधियों को प्राण वायु देने में अग्रणी रही रश्मि प्रभा । काव्य रचना में अग्रणी रहीं रंजना उर्फ़ रंजू भाटिया वहीं कथा-कहानी में अग्रणी रहीं निर्मला कपिला , ज्योतिषीय परामर्श में अग्रणी रही संगीता पुरी । टिप्पणियों में अग्रणी रही संगीता स्वरुप वहीं रचनात्मक पहल में अग्रणी रही स्वप्न मंजूषा अदा । समकालीन सोच में अग्रणी रही डा दिव्या श्रीवास्तव यानी ZEAL और गंभीर लेखन में अग्रणी दिखी रश्मि रविजा । सांस्कृतिक जागरूकता में अग्रणी दिखी अल्पना वर्मा वहीं समकालीन सृजन में अग्रणी रही आकांक्षा यादव । डा कविता वाचकनवी सांस्कृतिक दर्शन में अग्रणी रही और नन्हे ब्लोगर की श्रेणी में अग्रणी रही अक्षिता पाखी । इसी क्रम में एक बात और बताना चाहूंगा कि अल्पना देशपांडे इस वर्ष सर्वाधिक चर्चित चित्रकार के रूप में लोकप्रिय हुई , उन्हें लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रिकोर्ड में स्थान मिला, साथ ही वन्दना ने चर्चा मंच के माध्यम से अपना एक अलग मुकाम बनाने में सफल रही ।
प्रतिभाशाली लेखन में सर्वाधिक योगदान देने वालों में श्री सुभाष राय,दिगंबर नासवा,अलवेला खत्री,खुशदीप सहगल,राजीव तनेजा,गिरीश बिल्लोरे मुकुल,महफूज अली, मिथिलेश दुबे,केवलराम,डा सुशील बाकलीवाल,सुरेश चिपलूनकर, हिमांशुपाण्डेय, शिवम् मिश्र ,रेखा श्रीवास्तव ,रचना,उदय,रणधीर सिंह सुमन,मनोज कुमार,डा टी एस दाराल,राम त्यागी,के के यादव ,सतीश पंचम,परमजीत सिंह बाली, संजय ग्रोबर, सतीश सक्सेना, कुमार राधारमण, डा ऋषभ देव शर्मा, घनश्याम मौर्या, डा श्याम गुप्त, जय कुमार झा , संजीत त्रिपाठी, प्रियरंजन पालीवाल,उन्मुक्त, प्रमोद तांबट,अमित कूमार यादव,डॉ महेश सिन्हा ,जाकिर अली रजनीश ,हरीश गुप्त,प्रकाश गोविन्द,संजय झा, संजय भास्कर,संजीव तिवारी,प्रवीण त्रिवेदी,प्रवीण पाण्डेय,राज कुमार ग्वालानी , सुदर्शन ,सिद्धेश्वर, बसंत आर्य ,ओम आर्य, पंकज मिश्र,पवन चन्दन,नीलम प्रभा, मानव मेहता,अविनाश चन्द्र, राजीव कुमार ,शाहिद मिर्ज़ा शाहिद,पंकज त्रिवेदी,राजेश उत्साही,दीपक मशाल,एम वर्मा,सुनील गज्जानी,मुकेश कुमार सिन्हा,नरेन्द्र व्यास नरेन्,पंकज उपाध्याय, सत्य प्रकाश पाण्डेय,अमलेंदु उपाध्याय,ओम पुरोहित कागद, प्रकाश सिंह अर्श,विवेक रस्तोगी,राजेश उत्साही,यशवंत सिंह,राजेन्द्र स्वर्णकार,यशवंत मेहता,देव कुमार झा,सूर्यकांत गुप्ता ,पंकज सुबीर, नीरज गोस्वामी,गौतम राज ऋषि,रवि कान्त पाण्डेय, डा मनोज मिश्र,सलिल शर्मा (चला बिहारी ब्लोगर बनने ),रतन सिंह शेखावत,राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ ,अरविन्द श्रीवास्तव ,प्रवीण शाह,गौरव,सुमन सिन्हा,अभियान भारतीय,प्रतुल,सुज्ञ,अमितशर्मा,महेंद्र वर्मा ,रजनीश तिवारी,विजय माथुर,मयंक भारतद्वाज,सत्यम शिवम्,अपर्णा मनोज भटनागर,दीपक बाबा,विना श्रीवास्तव,कविता रावत,उषा राय,सुरेश यादव, प्रबल प्रताप सिंह,डा महेंद्र भटनागर, तोशी गुप्ता, गगन शर्मा, प्रेम सागर सिंह,अनुराग शर्मा,राजीव
महेश्वरी ,भूषण,आशीष,एस.एम.मासूम,कौशलेन्द्र,कुवंरकुशुमेश,अमितओम,अभिषेक,करणसमस्तीपुरी,डॉअनुराग,राजभाटिया,भारतीय नागरिक,स्मार्ट इन्डियन,डा रूप चन्द्र शास्त्री मयंक,सलीम खान,डा अनिता कुमार, श्रीमती अजित गुप्ता,वन्दना गुप्ता, वन्दना अवस्थी दुबे,सरस्वती प्रसाद, वाणी शर्मा, प्रीति मेहता ,शोभना चौरे,शिखा वार्शनेय ,सदा,रचना,साधना वैद्य,आशा जोगलेकर ,अंशुमाला,सदा,डॉ नूतन निति,इस्मत जैदी,फिरदौस खान ,वाणी गीत,गिरिजा कुलश्रेष्ठ,प्रतिभा कटियार, मीनू खरे, अलका सर्बत मिश्र,मनविंदर भिन्बर,रंजना सिंह,सीमा सिंघल,अराधना चतुर्वेदी मुक्ति, अपराजिता कल्याणी,शेफाली पाण्डेय, ज्योत्सना पाण्डेय,नीलम पुरी, रिज़वाना कश्यप,शमा, रानी विशाल और प्रतिभा कुशवाहा आदि के नाम इस वर्ष शीर्ष पर रहे ।इनके सिवा बहुत से लेखक एवं लेखिका है जो हिंदी भाषा और विभिन्न विषयों पर अच्छी पकड़ रखते हैंऔर ब्लोगिंग के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति को धार देने की दिशा में सक्रिय हैं ।
वर्ष -२०१० में श्री दीपक भारतदीप जी के द्वारा अपने ब्लॉग क्रमश: ….. दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका …शब्दलेख सारथी …..अनंत शब्दयोग ……दीपक भारतदीप की शब्द योग पत्रिका …..दीपक बाबू कहीन …..दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका …..दीपक भारतदीप की ई पत्रिका …..दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका …..दीपक भारतदीप की शब्दलेख पत्रिका ……दीपक भारतदीप की शब्द ज्ञान पत्रिका …..राजलेख की हिंदी पत्रिका ….दीपक भारत दीप की अभिव्यक्ति पत्रिका …दीपक भारतदीप की शब्द प्रकाश पत्रिका …..आदि के माध्यम से पुराने चिट्ठाकारों के श्रेणी में सर्वाधिक व्यक्तिगत ब्लॉग पोस्ट लिखने का गौरव प्राप्त किया है ।
इस वर्ष रचनात्मकता के प्रति कटिबद्धता पारुल चाँद पुखराज का …पर देखी गयी । इस ब्लॉग पर पहले तो गंभीर और गहरी अभिव्यक्ति की साथ कविता प्रस्तुत की जाती थी , किन्तु अब गहरे अर्थ रखती गज़लें सुने जा सकती है । सुश्री पारुल ने शब्द और संगीत को एक साथ परोसकर हिंदी ब्लॉगजगत में नया प्रयोग कर रही हैं , जो प्रशंसनीय है ।
वर्ष-२०१० में हास्य को सपर्पित चिट्ठों में सर्वाधिक अग्रणी चिट्ठा रहा ” ताऊ डोट इन ” इस ब्लॉग ने सक्रियता-सफलता और सरसता का जो कीर्तिमान स्थापित किया है वह शायद अबतक किसी भी ब्लॉग को प्राप्त नहीं हुआ होगा । अपनी चुटीली टिप्पणियों के कारण यह ब्लॉग इस वर्ष लगातार सुर्ख़ियों में बना रहा ।इस ब्लॉग की सर्वाधिक रचनाएँ चिट्ठाकारों को केंद्र में रखकर प्रस्तुत की जाती रही और कोई भी ब्लोगर इनके व्यंग्य बाण से आहत होकर न मुस्कुराया हो , ऐसा नहीं हुआ ….यानी यह ब्लॉग वर्ष के सर्वाधिक चर्चित ब्लॉग की कतार में अपना स्थान बनाने में सफल हुआ ।
चिट्ठाकारी में अपने ख़ास अंदाज़ और स्पस्टवादिता के लिए मशहूर हास्य कवि एवं सपर्पित चिट्ठाकार श्री अलवेला खत्री परिकल्पना के लिए विशेष साक्षात्कार देते हुए सीधी बात के अंतर्गत कहा कि- “साहित्य अकादमी की तरह ब्लोगिंग अकादमियां भी बननी चाहियें , जिस प्रकार देहात तथा अहिन्दी भाषी क्षेत्रों से प्रकाशित होने वाले हिन्दी प्रकाशनों को विशेष मदद मिलती है उसी तर्ज़ पर दूर दराज़ तथा अहिन्दी भाषी क्षेत्रों के ब्लोगर्स को विशेष सहायता मिलनी ही चाहिए।”
हास्य कवि अलवेला खत्री ने अपनी चुटीली टिप्पणियों से इस वर्ष पाठकों को सर्वाधिक आकर्षित किया । इसके अलावा वर्ष-२०१० में हास्य-व्यंग्य के दो चिट्ठों ने खूब धमाल मचाया पहला है श्री राजीव तनेजा का हंसते रहो । आज के भाग दौर , आपा धापी और तनावपूर्ण जीवन में हास्य ही वह माध्यम बच जाता है जो जीवन में ताजगी बनाये रखता है । इस दृष्टिकोण से राजीव तनेजा का यह ब्लॉग वर्ष-२०१० में हास्य का बहुचर्चित ब्लॉग होने का गौरव हासिल किया है । इनके एक पोस्ट “झोला छाप डॉक्टर ” को वर्ष का श्रेष्ठ व्यंग्य पोस्ट का अलंकरण प्राप्त हुआ है इस वर्ष । के. एम. मिश्र का सुदर्शन हास्य और व्यंग्य के माध्यम से समाज की विसंगतियों पर प्रहार करने में पूरी तरह सफल रहा इस वर्ष , किन्तु राजीव तनेजा की तुलना में इस ब्लॉग की सक्रियता में थोड़ी शिथिलता देखी गयी ।
सांस्कृतिक नगर वाराणसी के डा अरविन्द मिश्र और राजनैतिक नगरी दिल्ली के अविनाश वाचस्पति अपने स्पष्टवादी दृष्टिकोण के साथ-साथ विभिन्न चिट्ठों पर अपनी तथ्यपरक टिप्पणियों के लिए लगातार चर्चा में बने रहे । डा० अमर कुमार ने इस वर्ष टिप्पणियों के माध्यम से खूब धमाल मचाया । -रवीश कुमार ने महत्वपूर्ण चिट्ठों के बारे में लगातार प्रिंट मिडिया में लिखकर पाठकों को खूब आकर्षित किया । पुण्य प्रसून बाजपेयी अपनी राजनीतिक टिप्पणियों तथा तर्कपूर्ण वक्तव्यों के लिए लगातार चर्चा में बने रहे । एक वरिष्ठ मार्गदर्शक की भूमिका में इस वर्ष दिखे रवि रतलामी ,शास्त्री जे सी फिलिप,दिनेश राय द्विवेदी, जी के अवधिया, गिरीश पंकज, ज्ञान दत्त पाण्डेय, निर्मला कपिला,अनिता कुमार , मसिजीवी आदि ।
हिंदी ब्लोगिंग के लिए सबसे सुखद बात यह रही कि इस वर्ष हिंदी चिट्ठों कि संख्या २२००० के आसपास पहुंची विगत वर्ष की तरह इस बार भी वर्ष का सर्वाधिक सक्रीय क्षेत्र रहा छतीसगढ़ । वर्ष का सर्वाधिक सक्रीय शहर रहा रायपुर । विगत दो वर्षों में सर्वाधिक पोस्ट लिखने वाले नए चिट्ठाकार रहे थे डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक , किन्तु इस बार सर्वाधिक पोस्ट लिखने का श्रेय गया लोकसंघर्ष को । विगत वर्ष की तरह इस बार भी वर्ष में सर्वाधिक टिपण्णी करने वाले चिट्ठाकार रहे श्री समीर लाल । विगत वर्ष-२००९ में हिंदी चिट्ठों की चर्चा करने वाला चर्चित सामूहिक चिटठा था चिट्ठा चर्चा किन्तु इस वर्ष मार्च में आया एक नया चर्चा ब्लॉग “ब्लॉग4वार्ता” ने पोस्ट, चर्चा और लोकप्रियता में चिट्ठा चर्चा से ज्यादा प्रखर दिखा । इसने महज नौ महीनों में २९३ पोस्ट प्रकाशित करके एक नयी मिसाल कायम की, जबकि लगभग तीन दर्जन योगदानकर्ता होने के वाबजूद चिट्ठा चर्चा पर १२ महीनों में केवल १९९ पोस्ट प्रकाशित हुए ।
उल्लेखनीय है कि वर्ष-२०१० में चिट्ठा चर्चा के ६ वर्ष पूरे हुए, यह एक सुखद पहलू रहा हिंदी ब्लोगिंग के लिए, क्योंकि वर्ष-२००४ में ज़ब इसकी शुरुआत हुई थी, तब उस समय हिन्दी ब्लॉगजगत मे गिने चुने ब्लॉगर ही हुआ करते थे। उस समय हिन्दी ब्लॉगिंग को आगे बढाने और उसका प्रचार प्रसार करने पर पूरा जोर था, इसलिए चिट्ठा चर्चा ब्लोगिंग को एक नयी दिशा देने में सफल हुआ, किन्तु विगत वर्षों में इस सामूहिक चिट्ठा पर ठहराव की स्थिति देखी गयी है । यही कारण है कि ब्लॉग4वार्ता अपनी निष्पक्ष गतिविधियों के कारण इस वर्ष अग्रणी बनने में सफल हुआ ।
उल्लेखनीय है कि ललित शर्मा नें पहली वार्ता १० मार्च २०१० की टेस्ट पोस्ट में की ,जबकि पहली (आफ़िसियल) वार्ता ११ मार्च २०११ को ना कोई खर्चा-पढ़ने को मिलेगी ब्लॉग चर्चा —- लेकर आए यशवंत मेहता । इस वार्ता के सदस्य के तीसरे रूप में आए राजीव तनेजा ,उसके बाद संगीतापुरी ने भी ब्लॉग4वार्ता के मंच पर शुरुआत की, उनके द्वारा नए ब्लोगरों की सर्वाधिक चर्चा की गयी । केवल पांच दिनों के अन्दर ही ब्लॉग4वार्ता ने अपना असर दिखानें लगी और ब्लॉग जगत में एक अलग स्थान बनाने में सफल हुई । १६ मार्च को गिरीश बिल्लोरे मुकुल नें चर्चा आरम्भ की,फिर इससे जुड़े राजकुमार ग्वालानी के साथ-साथ सूर्यकान्त गुप्ता ,१५ अप्रैल तक ताऊ रामपुरिया भी आ पहुंचे, फ़िर आया जून का महीना….. “रोज वार्ता लगेगी” के संकल्प पर सभी अडिग थे फलत: रोजाना वार्ता लगती रही। फ़िर वार्ताकार के रूप में आये शिवम मिश्र …. और उन्होनें व्यर्थ वार्ताओं से क्या लाभ लगाकर अपनी पारी की शुरुआत की।११ नवम्बर को ब्लॉग4वार्ता परिवार में इंट्री हुईनवोदित ब्लोगर रुद्राक्ष पाठक की …तत्पश्चात इस टीम से अजय कुमार झा भी जुड़ गए … फ़िर २३ नवम्बर को देव कुमार झा भी ब्लॉग4वार्ता के परिवार में शामिल हो गए । इसप्रकार लोग साथ आते गए और कारवां बनाता गया ! इसी का नतीजा है महज नौ महीनों में ३०० के आसपास पोस्ट (२९३ ) !यही है इस सामूहिक चर्चा ब्लॉग की सबसे बड़ी उपलब्धि,जबकि सर्वाधिक समर्थकों वाला व्यक्तिगत तकनीकी ब्लॉग बना रहाविगत वर्ष की तरह इस वर्ष भी हिंदी ब्लॉग टिप्स ।
इस वर्ष साहित्य-संस्कृति और कला को समर्पित अत्यधिक चिट्ठों का आगमन हुआ, जिसमें प्रमुख है कवियित्री रश्मि प्रभा के द्वारा संपादित ब्लॉग “वटवृक्ष ” । चिट्ठों कि चर्चा करते हुए इस वर्ष मनोज कुमार ज्यादा मुखर दिखे । चुनौतीपूर्ण पोस्ट लिखने में इस बार महिला चिट्ठाकार पुरुष चिट्ठाकार की तुलना में ज्यादा प्रखर रहीं । इस वर्ष मुद्दों पर आधारित कतिपय ब्लॉग से हिंदी पाठकों का परिचय हुआ । मुद्दों पर आधारित नए राजनीतिक चिट्ठों में सर्वाधिक अग्रणी रहा – लोकसंघर्ष …….आदि ।
इस वर्ष का सर्वाधिक ज्वलंत मुद्दा रहा -कॉमनवेल्थ गेम, अयोध्या प्रकरण, विभूति नारायण और रवीन्द्र कालिया प्रकरण, भ्रष्टाचार, घोटाला, मंहगाई आदि ।
वर्ष-२०१० में मेरी निगाह कई ऐसे ब्लॉग पर गयी, जहां स्तरीय शब्द रचनाएँ प्रस्तुत की गयी थी !शब्द का साहित्य के साथ वही रिश्ता है जो ब्लॉग के साथ है !ब्लॉग हमारी इच्छाओं की वह भावभूमि है जहां पहचान का कोई संकट नहीं होता, अपितु विचारों की श्रेष्ठता का बीजारोपण होता है, भावनाओं का विस्तार होता है और परस्पर स्नेह-संवंधों का आदान-प्रदान !
वर्ष-२०१० में कुछ ऐसे ब्लॉग से मैं रूबरू हुआ जिसमें सृजन की जिजीविषा देखी गयी वहीं कुछ सार्थक करने की ख्वाहिश भी !जिसमें जागरूकता और सक्रियता भी देखी गयी तथा जीवन के उद्देश्यों को समझते हुए अनुकूल कार्य करते रहने की प्रवृति भी ! इन ब्लोगरों ने अपने चिंतन को इतना स्पष्ट बनाए रखा कि किसी भी प्रकार का पूर्वाग्रह इसे न ढक पाए ! ये जो कुछ भी निर्णय करे उसमें उद्देश्यों की स्पष्टता रहे और एकाग्रता की सघनता भी !इस प्रवृति को आदर्श प्रवृति कहते हैं तो ऐसे ब्लोगर को आप क्या कहेंगे ?
आदर्श ब्लोगर !
यही न ?
वर्ष -२०१० में हिन्दी ब्लॉगजगत के लिए सबसे बड़ी बात यह रही कि इस दौरान अनेक सार्थक और विषयपरक ब्लॉग की शाब्दिक ताकत का अंदाजा हुआ । अनेक ब्लोगर ऐसे थे जिन्होनें लेखन के दौरान अपने चंदीली मीनार से बाहर निकलकर जीवन के कर्कश उद्घोष को महत्व दिया , तो कुछ ने भावनाओं के प्रवाह को । कुछ ब्लोगर की स्थिति तो भावना के उस झूलते हुए बटबृक्ष के समान रही जिसकी जड़ें ठोस जमीन में होने के बजाय अतिशय भावुकता के धरातल पर टिकी हुयी नजर आयी । जीवन के कर्कश उद्घोष को महत्व देने वाले प्रखर ब्लोगरों में इस वर्ष ज्यादा सार्थक और ज्यादा सकारात्मक नज़र आये शब्दों के सर्जक अजीत वाडनेकर , जिनका ब्लॉग है – शब्दों का सफर । अजीत कहते हैं कि- “शब्द की व्युत्पति को लेकर भाषा विज्ञानियों का नजरिया अलग-अलग होता है । मैं भाषा विज्ञानी नही हूँ , लेकिन जब उत्पति की तलाश में निकालें तो शब्दों का एक दिलचस्प सफर नज़र आता है । “अजीत की विनम्रता ही उनकी विशेषता है । वर्ष-२०१० में इनके ब्लॉग पर प्रकाशित २२४ पोस्टों में से जिन-जिन पोस्ट ने पाठकों को सर्वाधिक आकर्षित किया उनमें से प्रमुख है पहले से फौलादी हैं हम… , फोकट के फुग्गे में फूंक भरना , जड़ से बैर, पत्तों से यारी ,भीष्म, विभीषण और रणभेरी ,[नामपुराण-6]नेहरू, झुमरीतलैया, कोतवाल, नैनीताल ….. आदि !
शब्दों का सफर की प्रस्तुति देखकर यह महसूस होता है की अजीत के पास शब्द है और इसी शब्द के माध्यम से वह दुनिया को देखने का विनम्र प्रयास करते हैं . यही प्रयास उनके ब्लॉग को गरिमा प्रदान करता है .सचमुच यह ब्लॉग नही शब्दों का अद्भुत संग्राहालय है, असाधारण प्रभामंडल है इसका और इसमें गजब का सम्मोहन भी है ….!
इस श्रेणी का दूसरा ब्लॉग है कर्मनाशा !
कर्मनाशा !
विंध्याचल के पहाड़ों से निकल कर काफ़ी दूर तक उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा उकेरने वाली यह छुटकी-सी नदी अंतत: गंगा में मिल जाती है किन्तु आख्यानों और लोक विश्वासों में इसे अपवित्र माना गया है ! आखिर कोई भी नदी कैसे हो सकती है अपवित्र? इस ब्लॉग से जुड़े शब्दों के सर्जक सिद्धेश्वर का कहना है कि “अध्ययन और अभिव्यक्ति की सहज साझेदारी की नदी है कर्मनाशा …..!”
“खोजते – खोजते
बीच की राह
सब कुछ हुआ तबाह।
बनी रहे टेक
राह बस एक…!”
ये पंक्तियाँ सिद्धेश्वर ने अपने ब्लॉग पर लिखे १० फरवरी-२०१० को, जो हिंदी ब्लोगिंग के उद्देश्यों को रेखांकित कर रही है !इसे यदि हिंदी ब्लोगिंग हेतु पञ्च लाईन के रूप में इस्तेमाल किया जाए तो शायद किसी को भी आपत्ति नहीं होगी ,क्योंकि मानव जीवन से जुड़े विविध विषयों को मन के परिप्रेक्ष्य में देखना ही इस ब्लॉग की मूल अवधारणा है ! उपरोक्त दोनों शब्दकार कबाडखाना से जुड़े हैं और श्रेष्ठ कबाडियों की श्रेणी में आते हैं !
शब्द प्राणवान होते हैं,गतिमान होते हैं और इसे गति प्रदान करता है ब्लॉग !इस तथ्य को जिन ब्लोगरों ने दृढ़ता के साथ प्रतिष्ठापित किया उनमें प्रमुख हैं – क्रिएटिव मंच-Creative Manch ….एक ऐसा मंच जहां आप पहुँच कर सृजनशीलता का सच्चा सुख अनुभव करेंगे । इस ब्लॉग के मुख्य संयोजक हैं प्रकाश गोविन्द और उनके प्रमुख सहयोगी हैं मानवी श्रेष्ठा, अनंत , श्रद्धा जैन ,शोभना चौधरी , शुभम जैन और रोशनी साहू ।
इस ब्लॉग से जुड़े चिट्ठाकारों का शरू से यह प्रयास रहा है कि कुछ सार्थक करने का प्रयास किया जाए ! आप कोई भी पोस्ट देख सकते हैं भले ही परिलक्षित न हो किन्तु अत्यंत मेहनत छुपी है हर एक पोस्ट में !साज-सज्जा के लिहाज से आम तौर पर किसी के लिए ऐसी पोस्ट तैयार करना संभव नहीं है ब्लॉग जगत में जैसा कि कहा जाता है यहाँ प्रतिक्रियाएं लेन-देन के अंतर्गत होती हैं ! ऐसे माहौल में ‘क्रिएटिव मंच’ की लोकप्रियता हतप्रभ करती है क्योंकि ‘क्रिएटिव मंच’ कभी कहीं जाकर प्रतिक्रिया नहीं देता ! इसके बावजूद भी किसी भी पोस्ट पर २५ – ३० प्रतिक्रियाएं आना आम बात है !
इस समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो हमारे लिए प्रेरणा के प्रकाशपुंज हैं । हमें ग़लत करने से वे बचाते हैं और सही करने की दिशा में उचित मार्गदर्शन देते हैं । ऐसे लोग हमारे प्रेरणा स्त्रोत होते हैं । हमारे लिए अनुकरनीय और श्रधेय होते हैं। हिन्दी ब्लॉग जगत की कमोवेश जमीनी सच्चाईयां भी यही है।
कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके विचार तो महान होते हैं, कार्य महान नही होते । कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके कार्य तो महान होते हैं विचार महान नही होते । मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके कार्य और विचार दोनों महान होते हैं । हमारे कुछ हिन्दी ब्लोगर भी इसी श्रेणी में आते हैं जिनकी उपस्थिति मात्र से बढ़ जाती है नए चिट्ठों की गरिमा ।
वर्ष-२०१० में सकारात्मक प्रस्तुति को आधार मानते हुए कुछ ऐसे ब्लॉग का चयन किया है,जिसपर अनुपातिक रूप से पोस्ट तो कम प्रकाशित हुए किन्तु पोस्ट की प्रासंगिकता बनी रही , इसमें साहित्यिक ब्लॉग भी हैं और सामाजिक-सांस्कृतिक भी …………… जिनमें प्रमुख है -
सदा का (सद़विचार) / रमण कॉल का ब्लॉग (इधर उधर की) / युनुस खान का (रेडियो वाणी) / रविश कुमार का (कस्बा qasba ) / डा आशुतोष शुक्ल का (सीधी खरी बात..) / मनोज कुमार का (मनोज) /अमरेन्द्र त्रिपाठी का (कुछ औरों की , कुछ अपनी …)/ प्रेम प्रकाश का ब्लॉग (पूरबिया) / डा रूप चन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ का (शब्दों का दंगल) / राजीव ठेपडा का ब्लॉग (दखलंदाज़ी) / यशवंत माथुर का (जो मेरा मन कहे) / विजय माथुर का (विद्रोही स्व-स्वर में….) / अशोक कुमार पाण्डेय का (जनपक्ष) /रश्मि प्रभा- रवीन्द्र प्रभात का (वटवृक्ष) /रवि रतलामी का (रचनाकार) /मनीष कुमार का (एक शाम मेरे नाम)/ अमितेश का (रंगविमर्श) / आना का ब्लॉग (कविता) / (Lucknow Bloggers’ Association लख़नऊ ब्लॉगर्स असोसिएशन) / ललित कुमार का (राइटली एक्सप्रेस्ड) / पारुल पुखराज का (…….चाँद पुखराज का……) / अनूप शुक्ल का (फुरसतिया) / एस एम मासूम का (अमन का पैग़ाम) / मनोज कुमार का (राजभाषा हिंदी) / अमीत-निवेदिता का (बस यूँ ही) /डा पवन कुमार मिश्र का ब्लॉग (पछुआ पवन (pachhua पवन) / विनीता यशस्वी का (यशस्वी) / जीतेन्द्र चौधरी का (मेरा पन्ना) / केवल राम का (चलते -चलते ….!) / सुमनिका का (सुमनिका) / मनोज कुमार का (विचार) / परमेन्द्र सिंह का (काव्य-प्रसंग) / अनुपमा पाठक का (अनुशील) / दिनेश शर्मा का ब्लॉग (प्रेरणा) / सदा का ब्लॉग (SADA ) / प्रत्यक्षा की (प्रत्यक्षा) / प्रकाश बादल का ब्लॉग (प्रकाश बादल) / (नया सवेरा) / संजय बेंगानी का (जोगलिखी : संजय बेंगाणी का हिन्दी ब्लॉग :: Hindi Blog of Sanjay bengani, Hindi site, tarakash blog, Hindi न्यूज़) / अरविन्द श्रीवास्तव का (जनशब्द) / माधवी शर्मा गुलेरी का ब्लॉग (उसने कहा था ..) / नीरज गोस्वामी का (नीरज) / शास्त्री जे सी फिलिप का (सारथी) /(संकल्प शर्मा . . .) / (विद्रोही स्व-स्वर में….) / दीप्ती शर्मा का (स्पर्श) आदि !
हर क्रिया की प्रतिक्रया होती है, जो चंचलता को बनाए रखती है ! हर वाद के साथ प्रतिवाद होता है, जो चंचलता को बनाए रखता है !हर राग के साथ द्वेष जुडा होता है जो चंचलता को बनाए रखता है !विकास के लिए समभाव की,योग की आवश्यकता होती है !चंचलता को शान्ति में परिवर्तित करने की आवश्यकता होती है !अपने आत्मविश्वास को जगाने की आवश्यकता है, ताकि एक सुन्दर और खुशहाल सह-अस्तित्व की परिकल्पना को मूर्तरूप दिया जा सके ! इसके लिए जरूरी है विचारों की द्रढता, क्योंकि कहा भी गया है कि विचार विकास का बीज होता है !
आईये अब एक ऐसे ही दृढ विचारों वाले ब्लोगर की बात करते हैं,जो ब्लॉग के माध्यम से एक नयी सामाजिक क्रान्ति का उद्घोष कर रहा है नाम है जय कुमार झा और ब्लॉग है-honestyprojectrealdemocracy
ब्लॉगर का कहना है कि -”क्या जनता सिर्फ इसलिए है कि वोट डालकर 5साल के लिए अंधी-बहरी-गूंगी होकर भ्रष्ट नेताओं की अव्यावहारिक,अतर्कसंगत नीतियों को असहाय होकर सहती रहे और यह पूछने को मज़बूर हो कि किससे कहें,कहां जाएं,कौन सुनेगा हमारी? भारत एक गणतंत्र है और अब हम जनता असल मालिक बनकर रहेंगे । क्या आप हैं हमारे साथ? आइए,मिलकर सरकार को आदेश दें।”उपरोक्त विचारों को पढ़कर आपको अंदाजा लग ही गया होगा कि यह ब्लोगर देश और समाज के लिए कुछ करने की जीबटता रखता है,इनके ब्लॉग पोस्ट्स से गुजरते हुए भी यही महसूस होता है !
एक चौंकाने वाला तथ्य आपके सामने रख रहा हूँ कि एक ब्लॉग जिसकी शुरुआत २७ नवम्बर २०१० को हुई ! वर्ष के आखिरी ३५ दिनों में इसपर वैसे तो मात्र १२ पोस्ट प्रकाशित हुए मगर इस ब्लॉग के प्रशंसकों की संख्या ५० के आसपास पहुँच गयी , ब्लॉग का नाम है नज़रिया और ब्लोगर हैं – सुशील बाकलीवाल जबकि -एक पुराना ब्लॉग है अमरेन्द्र त्रिपाठी का कुछ औरों की , कुछ अपनी, जो वर्ष २००९ से ब्लॉगजगत का हिस्सा है, किन्तु इस ब्लॉग पर पूरे वर्ष में केवल १४ पोस्ट ही प्रकाशित हुए !हलांकि इस पर जो भी पोस्ट प्रकाशित हुए हैं वह गंभीर विमर्श को जन्म देने में सक्षम है !
वर्ष-२०१० में हिंदी ब्लॉगजगत को अचानक सदमें में ले गयी ब्लोगवाणी ! कई लोगों ने इसका कारण बताया ब्लोगवाणी का अव्यवसायिक होना तो कईयों ने कहा कि ब्लोगवाणी कुछ लोगों के साथ पक्षपातपूर्ण रबैया अपना रही थी और जब विरोध हुआ तो उसने बोरिया-विस्तार समेट ली ! कारण कुछ भी रहा हो मगर ब्लोवाणी का बंद होना हिंदी ब्लॉगजगत के लिए एक दु:खद पहलू रहा !
वरिष्ठ ब्लोगर श्री रवि रतलामी का मानना है कि -”ब्लॉगवाणी और फिर चिट्ठाजगत की अकाल मृत्यु के पीछे इनका घोर अ-व्यवसायिक होना ही रहा है. मेरे विचार में यदि ये घोर व्यवसायिक होते, अपने सृजकों के लिए नावां कमाकर देने की कूवत रखते और परमानेंट वेब मास्टर रखने, नित नए सपोर्ट व इनफ्रास्ट्रक्चर जुटाने की कवायदें करते रहते तो इनमें सभी में व्यवसायिक रूप से पूर्ण सफल होने की पूरी संभावनाएँ थीं….!” वहीं एक और प्रमुख ब्लोगर श्री जाकिर अली रजनीश का मानना है कि -”वहाँ पर जान बूझकर एक खास प्रकार की नकारात्मक मानसिकता वाली पोस्टों को तो लगातार बढ़ावा दिया जा रहा था पर कम्यूनिष्ट तथा अन्‍य विचारधारा वाले लोगों के ब्लॉग तक नहीं रजिस्टर्ड किये जा रहे थे। जो लोग इसके शिकार बने, उनमें ‘नाइस’ मार्का सुमन जी का नाम सबसे ऊपर है। यहाँ तक तो जैसे-तैसे मामला चल रहा था, लेकिन जब ब्लॉगवाणी ने जानबूझकर पाबला जी को भी अपने लपेटे में ले लिया, तो पानी सिर के ऊपर निकलना ही था, और निकला भी। नतीजतन ब्लॉगवाणी वालों को लगा कि उनका अपमान किया जा रहा है और उन्होंने उसकी अपग्रेडेशन रोक दी।” वहीं डा.अरविन्द मिश्र जी जाकिर भाई के उक्त विचारों से सहमत नहीं थे, उनका कहना था कि -”मैथिली और सिरिल जी ने बिना आर्थिक प्रत्याशा केब्लोगवाणी के माध्यम से हिन्दी ब्लागिंग में जो अवदान दिया उसकी सानी नहीं है ..!”
चिट्ठा-विश्व और नारद का पतन वर्ष-२०१० से पूर्व हो चुका है, किन्तु हिंदी ब्लॉगिंग को प्रमोट करने की दिशा में अग्रणी ब्लॉग एग्रीगेटर ब्लोगवाणी की अकाल मृत्यु पूरे ब्लॉगजगत को चौंका गयी एकबारगी !हिंदी ब्लॉगजगत को सबसे बड़ा झटका लगा वर्ष के आखिरी माह में अनायास ही चिट्ठाजगत के अस्वस्थ हो जाने से, हलांकि अस्वस्थता से उबरकर कुछ ही दिनों में चिट्ठाजगत उठ खडा हुआ था, तब ब्लोगरों, खासकर नए ब्लोगरों में आशा की एक किरण तैर गयी थी ,किन्तु कुछ दिन ज़िंदा रहने के उपरांत चिट्ठाजगत की भी अकाल मृत्यु हो गयी !
उल्लेखनीय है कि चिट्ठाजगत से संदर्भित महत्वपूर्ण सन्दर्भ देते हुए पावला जी ने कहा है कि -” चिट्ठाजगत के पीछे मूलत: 3 व्यक्ति हैं,आलोक कुमार, विपुल जैन, कुलप्रीत (सर्व जी) !आलोक कुमार हिन्दी जाल जगत के आदि पुरूष कहलाते हैं। ये वही हैं जिन्होंने हिन्दी का पहला चिट्ठा “नौ दो ग्यारह” में लिखना शुरू किया और ब्लॉग को चिट्ठा कह कर पुकारा। वर्षों से ये अपनी वेबसाईट “देवनागरी॰नेट” द्वारा दुनिया को अन्तर्जाल पर हिन्दी पढ़ना व लिखना सिखाते आ रहे हैं। 2007 की शुरूआत में आलोक जी ने अपने चिट्ठाजगत की कल्पना को अपने मित्र विपुल जैन के समक्ष रखा और विपुल उनकी कल्पना से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसको वास्तविक रूप देने की ठान ली। विपुल का अपना एक जाल स्थल “हि॰मस्टडाउनलोड्स॰कॉम” है जहाँ से आप अनेक उपयोगी सॉफ्टवेयरों के नवीनतम संस्करण डाउनलोड कर सकते हैं।इस कार्य में अहम मदद की कुलप्रीत सिंह ने। कुलप्रीत कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर में पीएचडी हैं और डबलिन, आयरलैंड में कार्यरत हैं। इन्होंने चिट्ठाजगत की संरचना को बनाने में विपुल की खास मदद की है। कुलप्रीत भारतीय बहुभाषीय जालस्थल “शून्य॰इन” के संस्थापक हैं। जहाँ विभिन्न भारतीय भाषाओं में तकनीकी विषयों पर बहस की जाती है।चिट्ठाजगत पर दिखने वाले विभिन्न ग्राफ़िक्स संजय बेंगाणी जी द्वारा प्रदत्त हैं !” यह वर्ष हलांकि एग्रीगेटर के आने और काल कलवित हो जाने के वर्ष के रूप में याद किया जाएगा, क्योंकि इस वर्ष दो अतिमहत्वपूर्ण ब्लॉग एग्रीगेटर की अकाल मौत हुई है और इसी शोक के बीच कई महत्वपूर्ण ब्लॉग एग्रीगेटर का आगमन भी हुआ है !
आठ माह पूर्व इंडली आई और उसने कई भारतीय भाषाओं में एक साथ ब्लॉग फीड की सुविधा प्रदान किया,इसकी सबसे बड़ी समस्या है ब्लॉग की फीड को ऑटोमैटिक न लेना। ब्लोगवाणी की अकाल मौत के बाद हमारीवाणी अस्तित्व में आई,किन्तु कई प्रकार के अफवाहों के बीच यह अभी भी कायम है !हामारीवाणी की टीम के द्वारा प्रसारित वक्तव्य के आधार पर ” हमारीवाणी की ALEXA रैंकिंग विश्व में 81,000 तक पहुंच चुकी है। इसमें हर दिन सुधार हो रहा है।हमारीवाणी का एक अभिनव प्रयास ये भी है कि एग्रीगेटर को निर्विवाद रूप से चलाने के लिए ब्लॉगजगत से ही मार्गदर्शक-मंडल बनाया जाए। प्रसिद्ध अधिवक्ता और सम्मानित वरिष्ठ ब्लॉगर श्री दिनेशराय द्विवेदी (अनवरत, तीसरा खंभा) ने मार्गदर्शक-मंडल का प्रमुख बनना स्वीकार कर लिया है। लोकप्रिय ब्लॉगर श्री समीर लाल समीर (उड़नतश्तरी), मार्गदर्शक-मंडल के उप-प्रमुख के तौर पर मार्गदर्शन देने के लिए तैयार हो गए हैं। पांच सदस्यीय मंडल के तीन अन्य सदस्य श्री सतीश सक्सेना (मेरे गीत), श्री खुशदीप सहगल (देशनामा), और श्री शाहनवाज़ (प्रेमरस)हैं। हमारीवाणी की पूरी कोशिश रहेगी कि जहां तक संभव हो सके, एग्रीगेटर से विवादों का साया दूर ही रहे। फिर भी कभी ऐसी स्थिति आती है तो मार्गदर्शक मंडल का बहुमत से लिया फैसला ही अमल में लाया जाएगा।”
एक और नया हिंदी ब्लॉग एग्रीगेटर -अपना ब्लॉग हाल ही में चालू हुआ है जो ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत की तरह बेहतरीन, ढेर सारी सुविधाओं वाला, तेज ब्लॉग एग्रीगेटर महसूस हो रहा है !इसके अलावा एक स्वचालित ब्लॉग संकलक यहाँ पर है जिसमें आप रीयल टाइम गूगल सर्च के जरिए संग्रहित ताज़ा 500 हिंदी ब्लॉग पोस्टों को देख सकते हैं. पर चूंकि यह स्वचालित है, और कुछ कुंजीशब्द के जरिए संग्रह करता है, अतः सारे के सारे नवीन ब्लॉग पोस्टें नहीं आ पातीं, फिर भी कुछ पढ़ने लायक लिंक के संग्रह तो मिलते ही हैं !
इस वर्ष एक और ब्लॉग एग्रीगेटर लालित्य पर मेरी नज़र पडी ,यह एग्रीगेटर ललित कुमार का व्यक्तिगत एग्रीगेटर है ,जिसमें उनके द्वारा कुछ उत्कृष्ट ब्लॉग को जोड़ा गया है !ललित कुमार का कहना है कि -” हिन्दी ब्लॉगिंग के बारे में कहा जाता है कि यह अभी तक भी शैशव अवस्था में है। मैं नहीं जानता कि यह कितना सच है लेकिन लालित्य हिन्दी ब्लॉग्स का एक ऐसा एग्रीगेटर है जिसमें केवल अच्छे और उन्नत हो चुके ब्लॉग्स ही संकलित किए जाते हैं। यह ब्लॉग्स केवल तब तक संकलित रहते हैं जब तक उन पर उपलब्ध सामग्री की गुणवत्ता बनी रहती है। इस तरह लालित्य के ज़रिये आपको सीधे, सरल तरीके से उम्दा हिन्दी ब्लॉग्स तक पँहुचने में आसानी होती है !”
कुछ और साईट है जो ब्लॉग को प्रमोट करने की दिशा में कार्य करती है, या फिर जहां आप अपने पसंदीदा ब्लॉग को ढूंढ सकते हैं,जिसमें प्रमुख है ब्लॉग अड्डा ,Woman Who Blog In Hindi , ब्लोग्कुट, इंडी ब्लोगर, रफ़्तार , ब्लॉग प्रहरी, क्लिप्द इन , हिंदी चिट्ठा निर्देशिका, गूगल लॉग , वर्ड प्रेस की ब्लोग्स ऑफ द डे , वेब दुनिया की हिंदी सेवा, जागरण जंक्सन ,बीबीसी के ब्लॉग प्लेटफार्म आदि !साथ ही हिंदी मे ब्लॉग लिखती नारी की अद्भुत रचना यहाँ पढे जा सकते हैं ! इसके अतिरिक्त यदि आपको उन ब्लोग्स के बारे में जानने की इच्छा है जिसे समाचार पत्र में समय-समय पर स्थान दिया गया हो तो आप ब्लोग्स इन मीडिया पर क्लिक कर सकते हैं !
इस वर्ष कुछ ब्लोगरों ने फीड क्लस्टर.कॉम के सहयोग से भी ब्लॉग एग्रीगेटर बनाकर अपने साथियों को परस्पर जोड़ने का महत्वपूर्ण काम किया है, जिसमें प्रमुख है आज के हस्ताक्षर, परिकल्पना समूह, महिलावाणी , हिन्दीब्लॉग जगत, हिन्दी – चिट्ठे एवं पॉडकास्ट, ब्लॉग परिवार, चिट्ठा संकलक, लक्ष्य, हमर छत्तीसगढ़, हिन्दी ब्लॉग लिंक आदि ।
और चलते-चलते मैं आपको एक ऐसे ब्लॉग पर ले चलता हूँ जो ब्लॉगजगत के वेहद कर्मठ और हर दिल अजीज ब्लॉग संरक्षक श्री बी एस पावला का ब्लॉग है ब्लॉग बुखार,जिसपर आप ब्लॉग से संवंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कर सकते हैं ! यह ब्लॉग अपने-आप में अनूठा है !
ब्लॉग लेखन एक तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है और लोग तेजी से इसकी ओर आकृष्ट हो रहे हैं। ऐसे में इसके द्वारा विज्ञान संचार की अपार सम्भावनाएं छिपी हुई हैं। ब्लॉग लेखन की सबसे बडी विशेषता यह है कि यह पूरे विश्व में पढा जा सकता है और अनन्त समय तक अंतर्जाल पर सुरक्षित रहता है। इसके साथ ही साथ विश्व के किसी भी कोने से किसी भी सर्च इंजन द्वारा खोजने पर ब्लॉग में उपलब्ध सामग्री तत्काल ही इच्छुक व्यक्ति तक पहुंच जाती है। यही कारण है कि ब्लॉग लेखन द्वारा विज्ञान संचार की अपार सम्भावनाएं बनती हैं। यदि ब्लॉग लेखकों और विज्ञान संचारकों को इसके महत्व एवं प्रक्रिया की समुचित जानकारी प्रदान की जाए, तो विज्ञान संचार के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्र साबित हो सकता है।
जी हाँ ,मैं बात कर रहा हूँ समाजिक एवं वैज्ञानिक चेतना के प्रचार के लिए कार्य करने वाले ब्लॉग की ,जिनके द्वारा केवल ब्लॉग पर ही नहीं,अपितु अनेक कार्यक्रमों को क्रियान्वित किया जाता है, ताकि जन चेतना को विज्ञान से जोड़ा जा सके !विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्ययन, और प्रयोग से मिलती है, जो कि किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या सिद्धान्तों को जानने के लिये किये जाते हैं। विज्ञान शब्द का प्रयोग ज्ञान की ऐसी शाखा के लिये भी करते हैं, जो तथ्य, सिद्धान्त और तरीकों को प्रयोग और परिकल्पना से स्थापित और व्यवस्थित करती है । इस प्रकार कह सकते हैं कि किसी भी विषय का क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कह सकते है। ऐसा कहा जाता है कि विज्ञान के ‘ज्ञान-भण्डार’के बजाय वैज्ञानिक विधि विज्ञान की असली कसौटी है।
इस दिशा में एक ब्लॉग है तस्लीम , जिसके द्वारा विभिन्न स्थानों एवं समयों पर विविध कार्यक्रम सम्पन्न किये जाते रहे हैं तथा वैज्ञानिक जागरूकता के काम को नियमित रूप से सम्पादित किया जाता रहा है।‘तस्लीम‘ द्वारा निष्पादित उक्त गतिविधियों को विद्वतजनों ने न सिर्फ पसंद किया है, बल्कि समाचार पत्रों आदि में इस सम्बंध में प्रकाशित रिपोर्टों आदि ने संस्था का उत्साहवर्द्धन किया है। इसके अतिरिक्त ब्लॉग पर उपलब्ध सामग्री को सम्पूर्ण विश्व में ११ हजार से अधिक पाठकों द्वारा न सिर्फ पढ़ा गया है, बल्कि अपनी टिप्पणियों के द्वारा इसे सराहा और प्रोत्साहित भी किया गया है।‘तस्लीम‘ ने अपने ब्लॉग कार्यशालाओं के माध्यम से विज्ञान संचार के अपने प्रयासों के दौरान यह देखा है कि हिन्दी भाषी लागों में इससे जुड़ने की प्रबल आकांक्षा है किन्तु तकनीकी जानकारी न होने के कारण वे पीछे रह जाते हैं। इस दिशा में तस्लीम के द्वारा किया जा रहा कार्य प्रसंशनीय है ! इस ब्लॉग के ३३९ प्रशंसक हैं ! इस संस्था के अध्यक्ष हैं अब्दुल कवी, उपाध्यक्ष हैं डा0 अरविंद मिश्र, सचिव हैं ज़ाकिर अली ‘रजनीश, ‘ कोषाध्यक्ष हैं अर्शिया अली, सक्रिय सहयोगी हैं जीशान हैदर ज़ैदी !
दूसरा ब्लॉग है साईंस ब्लोगर असोसिएशन,इसकी स्‍थापना 20 दिसम्‍बर 2008 को हुई थी। यह भी अंधविश्वास के प्रति एक अभियान का हिस्सा है, जो ब्लॉग पोस्ट और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से वैज्ञानिक गतिविधियों को प्राणवायु देने का महत्वपूर्ण कार्य करता है ! इस पर प्रत्येक वर्ष “साईंस ब्लोगर ऑफ़ दी ईयर” का खिताब किसी एक ब्लोगर को प्रदान किया जाता है !यह मंच है विज्ञान के ब्लागरों का, यहाँ होता है विज्ञान का संवाद और संचार ब्लॉग के जरिये और होती हैं विज्ञान और टेक्नोलॉजी की बातें, जन जन के लिए, आम और खास के लिए भी! इनका कहना है कि आप वैज्ञानिक हो तो भी इस ब्लॉग से जुडें, जन संचारक हों तो भी आपका स्वागत है इस ब्लॉग पर ! इस संस्था के अध्यक्ष हैं डा0 अरविंद मिश्र, उपाध्यक्ष हैं ज़ीशान हैदर ज़ैदी,सचिव हैं ज़ाकिर अली ‘रजनीश’, कोषाध्यक्ष हैं अर्शिया अली,तकनीकि निर्देशक हैं विनय प्रजापति तथा इसके सक्रिय सहयोगी हैं रंजना भाटिया,अल्पना वर्मा,मनोज बिजनौरी,जी0के0 अविधया,सलीम खान,डा0 प्रवीण चोपड़ा,अभिषेक मिश्रा,अंकुर गुप्ता,अंकित,हिमांशु पाण्डेय,पूनम मिश्रा और दर्शन बवेजा आदि !
विज्ञान का एक और महत्वपूर्ण ब्लॉग है साईब्लाग [sciblog] , ब्लोगर हैं डा अरविन्द मिश्र !यह ब्लॉग २९ सितंबर -२००७ को अस्तित्व में आया !ब्लॉग पर वैज्ञानिक जागरूकता लाने के उद्देश्य से सक्रिय लोगों में सर्वाधिक चर्चित ब्लोगर हैं डा अरविन्द मिश्र , जिनका इस ब्लॉग को शुरू करने के पीछे जो उद्देश्य रहा है उसके बारे में इनका कहना है कि -” मेरा मानना है कि ब्लॉग एक खुली डायरी है ,वेब दुनिया का एक सर्वथा नया प्रयोग .अभिव्यक्ति का एक नया दौर .एक डायरी चिट्ठा कैसे बन गयी /या बन सकती है मेरा मन स्वीकार नहीं कर पा रहा.फिर चिट्ठे से कच्चे चिट्ठे जैसी बू भी आती है .मगर चूँकि नामचीन चिट्ठाकारों ने इस पर मुहर लगा दी है और यह शब्द भी अब रूढ़ सा बन गया है मैंने पूरे सम्मान के साथ असहमत होते हुए भी इसे स्वीकार तो कर लिया है पर अपने हिन्दी ब्लॉग पर इस प्रयोग के दुहराने की हिम्मत नही कर पाया -इसलिए देवनागरी मे ही अंगरेजी के शब्दान्शों को जोड़ कर काम चलाने की अनुमति आप सुधी जनों से चाहता हूँ.इस ब्लॉग पर मैं विज्ञान के विविध विषयों पर अपना दिलखोल विचार रख सकूंगा .यह ब्लॉग तो अभी इसके नामकरण पर ही आधारित है .आगे विज्ञान की चर्चा होगी …!”
इसके अलावा इस वर्ष जहां-जहां ब्लॉग पर वैज्ञानिक गतिविधियाँ देखी गयीं उसमें प्रमुख Science Fiction in India , विज्ञान गतिविधियां Science Activities , क्यों और कैसे विज्ञान मे , प्रश्न मंच ,ईमली ईको क्लब Tamarind Eco Club ,सर्प संसार (World of Snakes) , Dynamic , स्वच्छ सन्देश: विज्ञान की आवाज़ , विज्ञान की दुनिया… हिंदी के झरोखे से…, विज्ञान हिन्दी वेबसाइट , विज्ञान – विक्षनरी , विज्ञान BBC Hindi , Hash out Science » विज्ञान » चर्चा,विज्ञान , विज्ञान « Hindizen – निशांत का हिंदीज़ेन …, कलिकऑन , विज्ञान मन आदि !
वर्ष-२०१० में स्वास्थ्य संवंधित जागरूकता लाने वाले ब्लॉग की चर्चा
कहा गया है पहला सुख निरोगी काया,स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है !शरीर की रुग्णता के कारण मन की अनेक इच्छाएं पूरी होने से रह जाती है !शरीर में भी प्रकृति ने इतनी शक्ति दी है कि व्यक्ति हर तरह से स्वयं को स्वस्थ रख सके !धर्म-विचार- हास्य -रुदन अपनी जगह है, पर आरोग्यता की शीतल छाया के लिए कोई आयुर्वेद को अपनाता है तो कोई होमियोपैथ तो कोई अंग्रेजी अथवा यूनानी दवाओं को !हिंदी ब्लॉगजगत में स्वास्थ्य सलाह देने वाले ब्लोग्स की काफी कमी है !आयुर्वेद और होमियोपैथ के ब्लॉग तो कुछ अत्यंत स्तरीय है मगर संख्या के लिहाज से अन्य भारतीय भाषाओं की तुलना में काफी कम ! ऐसे में जब स्वास्थ्य परामर्श को लेकर सचालित ब्लोग्स की काफी कमी महसूस होती है वहीं दो ब्लॉग अपनी गतिविधियों से हमें काफी चमत्कृत करते हैं पहला कुमार राधारमण और विनय चौधरी का साझा ब्लॉग स्वास्थ्य सबके लिए और दूसरा लखनऊ निवासी अलका सर्बत मिश्र का ब्लॉग मेरा समस्त !
स्वास्थ्य सबके लिए हिंदी एक ऐसा महत्वपूर्ण ब्लॉग है, जिसमें समस्त असाध्य विमारियों से लड़ने के उपचार बताये जाते हैं ! चूँकि, व्यक्ति अनेक धरातलों पर जीता है, अत: रोग भी हर धरातल पर अलग-अलग स्वरूपों में प्रकट होते हैं ! सबके लिए स्वास्थ्य का अभिप्राय यह है कि हर बीमारी से लड़ने का हर किसी को साहस प्रदान करना !इस ब्लॉग के द्वारा किया जा रहा कार्य श्रेष्ठ और प्रशंसनीय है !
दूसरा ब्लॉग है मेरा समस्त जो पूर्णत: आयुर्वेद को समर्पित है ! आयुर्वेद के सन्दर्भ में ब्लोगर का कहना है कि “आयुर्वेद का अर्थ औषधि – विज्ञान नही है वरन आयुर्विज्ञान अर्थात ” जीवन-का-विज्ञान” है…ऐड्स, थायराइड, कैंसर के अतिरिक्त भूलने की बीमारी, चिड़चिड़ापन आदि से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है,बस आयुर्वेद पर भरोसा होना चाहिये !ब्लोगर अलका मिश्र केवल आलेखों से ही पाठकों को आकर्षित नहीं करती वल्कि आलेखों में उल्लिखित औषधियों के आदेश पर आपूर्ति भी करतीं हैं……!
आयुर्वेद से संवंधित इस वर्ष की प्रमुख पोस्ट इन ब्लोग्स पर देखी जा सकती है अर्थात आयुर्वेद : आयुषमन , आयुर्वेद,पर्यायी व पूरक औषध पद्धती –Indian Alternative Medicine , only my health , अपने विचार, The Art of Living , shvoong .com , वन्दे मातरम्, आयुष्मान, हरवल वर्ल्ड, चौथी दुनिया, ब्रज डिस्कवरी , Dr. Deepak Acharya , दिव्य हिमांचल , उदंती . com , विचार मीमांशा, दिव्ययुग निर्माण न्यास , स्वास्थ्य चर्चा , स्वास्थय के लिये टोटके , प्रवक्ता आदि पर !
जहां तक होमियोपथिक से संवंधित ब्लॉग का सवाल है तो हिंदी ब्लॉगजगत में ज्यादा ब्लॉग नहीं दिखाई देता, एक ब्लॉग है E – HOMOEOPATHIC MIND magazine जिसपर यदाकदा कुछ उपयोगी पोस्ट देखने को मिले हैं ! इस ब्लॉग को वर्डप्रेस पर भी वर्ष-२००९ में बनाया गया, किन्तु नियमित नहीं रखा जा सका !जब होमियोपैथिक की बात चली है तो वकील साहब दिनेश राय द्विवेदी के अनवरत पर विगत वर्ष कुछ महत्वपूर्ण पोस्ट देखे गए , किन्तु आलोचनात्मक ! १० अप्रैल को उनका आलेख आया होमियोपैथी हमारी स्वास्थ्यदाता हो गई ,११ अप्रैल-२०१० को उनका कहना था कि क्या होमियोपैथी अवैज्ञानिक है? इस पोस्ट के प्रकाशन के दो दिन बाद उनका एक और आलेख प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था होमियोपैथी को अभी अपनी तार्किकता सिद्ध करनी शेष है !
आयुर्वेदिक पध्‍दति की तरह ही होम्‍योपेथी भी धैर्य की मॉंग करती है। यह एक मात्र ‘पेथी’ है जिसके प्रयोग पशुओं पर नहीं, मनुष्‍यों पर होते हैं। इन दिनों इनका सस्‍तापन कम हो रहा है। यह चिकित्‍सा पध्‍दति भी मँहगी होने लगी है। ऐसा कहना है विष्णु वैरागी का, जबकि मनोज मिश्र का मानना है कि निश्चित रूप से डॉ. हैनिमेन एक विलक्षण व्यक्तित्व थे जिन्हों ने एक नई चिकित्सा पद्धति को जन्म दिया। जो मेरे विचार में सब से सस्ती चिकित्सा पद्धति है। इसी पद्धति से करोड़ों गरीब लोग चिकित्सा प्राप्त कर रहे हैं। यही नहीं करोड़पति भी जब अन्य चिकित्सा पद्धतियों से निराश हो जाते हैं तो इस पद्धति में उन्हें शरण मिलती है….!
“वैज्ञानिकों एवं चिकित्साशास्त्रियों ने विभिन्न प्रकार के अनुसंधानों से यह निश्चित रूप से पुष्टि कर दिया है की मनुष्य के शरीर की रचना एवं शरीर के विभिन्न अंग जैसे मुंह, दाँत, हाथों की अंगुलियाँ,नाख़ून एवं पाचन तंत्र की बनावट के अनुसार वह एक शाकाहारी प्राणी है …..!”ऐसा कहना है स्वास्थ्य विशेषज्ञ राम बाबू सिंह का अपने ब्लॉग एलोबेरा प्रोडक्ट में !०५ जून-२०१० को प्रकाशित इस आलेख का शीर्षक है शाकाहारी बनें स्वस्थ रहें !
वर्ष-२०१० के उत्तरार्द्ध में स्वास्थ्य से संवंधित एक वेहतर ब्लॉग का आगमन हुआ है,जिसका नाम है स्वास्थ्य सुख ! इसकी पञ्चलाईन है निरोगी शरीर -सुखी जीवन का आधार…..३० अक्तूबर-२०१० को सुशील बाकलीवाल द्वारा प्रसारित इस ब्लॉग का पहला आलेख पाठकों को ऐसा आकर्षित किया कि मानों उनका मनोनुकूल ब्लॉग आ गया है हिंदी ब्लॉगजगत में ! इस ब्लॉग को मेरी अनंत आत्मिक शुभकामनाएं !
चिन्ता , क्रोध , आतम ,लोभ , उत्तेजना और तनाव हमारे शरीर के अंगों एवम नाड़ियो मे हलचल पैदा करते हैं , जिससे हमारी रक्त धमनियों मे कई प्रकार के विकार हो जाते हैं । शारीरिक रोग इन्ही विकृतियों के परिणाम हैं ।शारीरिक रोग मानसिक रोगों से प्रभावित होते है । अत्याधिक चिंता , निराशा , आत्म ग्लानी , उदासीनता , जरुरत से ज्यादा खुश दिखना , बहुत बोलना या एक दम चुप रहना , संदेह करना , आत्महत्या के प्रयास बीमारी के लक्षण है । जन्म जात बीमारी को छोड़ कर रेकी के द्वारा सभी बीमारियों का इलाज संभव हैं । रेकी बीमारी के कारण को जड़ मूल से नष्ट करती हैं , स्वास्थ्य स्तर को उठाती है , बीमारी के लक्षणों को दबाती नहीं हैं । रेकी के द्वारा मानसिक भावनायो का संतुलन होता है और शारीरिक तनाव , बैचेनी व दर्द से छुटकारा मिलता जाता हैं ।
रेकी गठिया , दमा , कैंसर , रक्तचाप , फालिज , अल्सर , एसिडिटी , पथरी , बावासीर , मधुमेह , अनिद्रा , मोटापा , गुर्दे के रोग , आंखो के रोग , स्त्री रोग , बाँझपन , शक्तिन्युनता , पागलपन तक दूर करने मे समर्थ है । यदि बीमारी का इलाज शुरू मे ही कर लिया जाये तो रेकी शीघ्र रोग मुक्त कर देती हैं । ऐसा कहना है रेकी विशेषज्ञ डा. मंजुलता सिंह का, ये ब्लोगर भी हैं और इनका ब्लॉग है My Sparsh Tarang ….!
रेकी से संवंधित यह ब्लॉग संभवत: हिंदी का एकलौता ब्लॉग है, जो वर्ष-२००७ से अस्तित्व में है , किन्तु पोस्ट की अनियमितता के कारण यह ब्लॉग आम पाठकों का ध्यान खींचने में पूर्णत:सफल नहीं रहा है,इस वर्ष इसपर केवल तीन पोस्ट ही प्रकाशित हुए हैं !
कुलमिलाकर देखा जाए तो स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने में अभी भी अंग्रेजी या फिर अन्य भाषाओं की तुलना में हिंदी बहुत पीछे है,किन्तु आनेवाले दिनों में वेहतर स्थिति होगी ऐसी आशा की जा रही है !
भारतीय संगीत की गूँज पूरी दुनिया में सुनाई देती है ! संगीत के कारण आज हमारा भारत दुनिया में अपनी एक अलग छवि प्रस्तुत करने में सफल हुआ है ! अपने इस गौरवशाली परंपरा को जीवंत बनाए रखने की दिशा में कई घराने सक्रिय हैं और उन घरानों की जानकारी देने के लिए हिंदी में कई ब्लॉग भी सक्रिय है ,जो भारतीय संगीत की इस परंपरा को आम जन-जीवन से जोड़ते है !
“एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी, ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी, गीतों की बात ही कुछ ऐसी होती है। खुद को ही मैं ढूँढ रहा नज्मों में, कुछ गीतों में और नज्म? वो तो गोया गुलजार के लफ्जों में अगर कहूँ तो -नज़्म उलझी हुई है सीने में/मिसरे अटके हुए हैं होठों पर/उड़ते-फिरते हैं तितलियों की तरह। गर किसी मोड़ पे अगर मिल जाऊँ तो बस एक गीत गुनगुना देना…!” ऐसा कहना है तरुण का अपने बारे में, ब्लॉग गीत गाता चल पर ! यह ब्लॉग पूरी तरह भारतीय गीत-संगीत की प्रस्तुति से जुडा है !
इस वर्ष संगीत को समर्पित ब्लॉग्स पर ज्यादा हलचल नहीं देखी गयी , सुर-पेटी पर केवल दो पोस्ट प्रकाशित हुए ,वहीं सुर साधकों से मुलाक़ात पर आधारित ब्लॉग एक मुलाक़ात पर पूरे वर्ष में केवल तीन पोस्ट ही देखे गए !जाने क्या मैंने कही पर केवल चार,शब्द सृष्टि पर केवल एक ही पोस्ट देखे गए,गीतों की महफ़िल पर केवल छ:पोस्ट देखे गए , किन्तु वर्ष-२००६ से हिंदी ब्लॉगजगत का हिस्सा बने एक बेहद खुबसूरत ब्लॉग एक शाम मेरे नाम ने इस वर्ष खूब धमाल मचाया !इस पर कुल ७७ पोस्ट देखे गए इस वर्ष “वार्षिक संगीत माला ” की प्रस्तुति इस ब्लॉग की सबसे बड़ी उपलब्धि है ! इस पर आप फैज़ अहमद फैज़, कातिल शिफाई, परवीन शाकर, अहमद फ़राज़ , सुदर्शन फाकिर आदि कि गज़लें और नज्में ….वर्ष की चुनिन्दा संगीत मालाओं से आप रूबरू हो सकते हैं ! यह ब्लॉग हिंदी का एक नायाब ब्लॉग है !
वर्ष-२०१० में संगीत से जुड़े जिन ब्लॉग्स पर सार्थक पोस्ट की उपस्थिति देखी गयी उसमें प्रमुख है-”ठुमरी”ब्लोगर हैं विमल वर्मा !अपने बारे में विमल कहते हैं कि- “बचपन की सुहानी यादों की खुमारी अभी भी टूटी नही है.. जवानी की सतरंगी छाँह आज़मगढ़, इलाहाबाद,बलिया और दिल्ली मे.. फिलहाल १६-१७ साल से मुम्बई मे..मनोरंजन चैनल के साथ रोजी-रोटी का नाता……!”
न शास्‍त्रीय टप्‍पा.. न बेमतलब का गोल-गप्‍पा.. थोड़ी सामाजिक बयार.. थोड़ी संगीत की बहार.. आईये दोस्‍तो, है रंगमंच तैयार.. छाया गांगुली की आवाज में फागुन के गीत या फिर कवि नीरज जी की आवाज़ में… ” कारवां गुज़र गया ग़ुबार देखते रहे , ग्रामोफोनीय रिकोर्ड के कबाड़खाने से कुछ रचनाएँ सुननी हो अथवा एक अफ़गानी की आवाज़ में ….जब दिल ही टूट गया ….पूरे वर्ष में केवल १२ पोस्ट और सभी नायाब !
सर्दियों की ठुठुरती रातें…दूर एक वीरान सा महल…घुप्प अँधेरा और किसी के पायल की झंकार…सफ़ेद चोले में लहराता एक बदन…और एक सुरीली आवाज़….जी हाँ ऐसी ही आवाज़ से पूरे वर्ष हमें रूबरू कराता रहा हिंद युग्म का आवाज़ ब्लॉग!मशहूर फिल्म समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज के साथ – वर्ष २०१० के टॉप गीत सुनना हो तो इस खुबसूरत ब्लॉग पर अवश्य पधारें !
संगीत की बात हो और रेडियो न बजे तो सबकुछ नीरस सा लगता है , ऐसे में रेडियोनामा हमारी उस कमी को पूरा करता है ! यह एक सामूहिक ब्लॉग है और इससे जुड़े हैं-पियूष मेहता, अन्नपूर्णा, ममता, डा.प्रवीण चोपड़ा,अफलातून,युनुस खान, रवि रतलामी, डा अजित कुमार, संजय पटेल, इरफ़ान,काकेश, तरुण, प्रियंकर, अनिता कुमार, सजीव सारथी ,कमल शर्मा ,मनीष कुमार, लावण्या शाह, जगदीश भाटिया, विकास शुक्ला, बी.एस. पावला आदि !
रेडियोनामा रेडियो-विमर्श का सामूहिक-प्रयास है। अगर आप भी रेडियो-प्रेमी हैं और रेडियो से जुड़ी अपनी यादें या बातें इनके साथ साथ बांटना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। अपनी बात आपको हिंदी में लिखनी होगी। अगर आप केवल अंग्रेजी में लिखते हैं तो भी कोई बात नहीं, आपका लेख ये हिंदी -अनुवाद करके प्रकाशित करेंगे। हिन्दी सबंधी तकनीकी सहायता के लिए नि:संकोच आप इनसे संपर्क कर सकते हैं । रेडियोनामा के अलावा यदि आप रेडियो प्रेमी हैं तो यहाँ भी सुन सकते हैं रेडियो -यानी कौल साहब का रेडियो-पन्ना, सागर नाहर की सूची, बीबीसी हिंदी, वॉइस ऑफ अमेरिका हिंदी, हम एफ एम सऊदी अरब, डॉयचे वेले–जर्मनी की हिंदी सेवा, रेडियो जापान की हिंदी सेवा, आकाशवाणी समाचार, रेडियोवर्ल्ड, रेडियो तराना आदि पर !
संवाद सम्मान-२००९ से सम्मानित युनुस खान का ब्लॉग रेडियोवाणी पर इस वर्ष भी अनेक सार्थक पोस्ट देखे गए !मध्‍यप्रदेश के दमोह शहर में पैदा हुए ब्लोगर युनुस खान म0प्र0के कई शहरों में पाले बढ़ें । बचपन से ही संगीत, साहित्‍य और रेडियो में गहरी दिलचस्‍पी थी । सन 1996 से मुंबई स्थित देश के प्रतिष्ठित रेडियो चैनल विविध भारती (vividh bharati) में एनाउंसर के पद पर कार्यरत हैं । नए पुराने तमाम अच्‍छे गीतोंके साथ-साथ दुनिया भर की फिल्‍मों में इनकी गहरी रूचि है । कविताएं और अखबारों में लेखन भी ये यदा कडा करते रहते हैं !इस ब्लॉग पर कुल ३०० पोस्ट प्रकाशित है जो आपका भरपूर मनोरंजन करने में पूरी तरह सक्षम है !
वहीं मिर्जापुर में पैदा हुए इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़े और समकालीन जनमत के साथ पटना होते हुए दिल्ली पहुंचे इरफ़ान स्वतंत्र पत्रकारिता,लेखन और ऒडियो-विज़ुअल प्रोडक्शन्स से जुड़े होने के वावजूद हिंदी ब्लोगिंग को समृद्ध करने की दिशा में दृढ़ता के साथ सक्रिय हैं ! इनका ब्लॉग है टूटी हुई बिखरी हुई !इस ब्लॉग पर इस वर्ष कुल २७ पोस्ट प्रकाशित हुए और सब एक से बढ़कर एक !
संगीत की साधना को समर्पित ब्लॉग का यह विश्लेषण तबतक पूर्ण नहीं हो सकता जबतक पारुल चंद पुखराज का ….की चर्चा न हो जाए , क्योंकि यह ब्लॉग हिंदी ब्लॉग जगत के लिए विशिष्ट है !युनुश खान की तरह पारुल भी संवाद सम्मान-२००९ से सम्मानित हैं ! इस ब्लॉग पर इस वर्ष ६५ पोस्ट प्रकाशित हुए हैं, जो पूरी तरह साहित्यिक, सांस्कृतिक गतिविधियों और संगीत को समर्पित है !पारुल “पुखराज” को गुलज़ार की ये पंक्तियाँ बहुत पसंद है -”कुछ भी क़ायम नही है,कुछ भी नही…रात दिन गिर रहे हैं चौसर पर…औंधी-सीधी-सी कौड़ियों की तरह…हाथ लगते हैं माह-ओ साल मगर …उँगलियों से फिसलते रहते है…धूप-छाँव की दौड़ है सारी……कुछ भी क़ायम नही है,कुछ भी नही………………और जो क़ायम है,बस इक मैं हूँ………मै जो पल पल बदलता रहता हूँ …!”
इसके अलावा वर्ष-२०१० में गीत-संगीत से जुड़े जिन ब्लोग्स पर सार्थक पोस्ट की प्रस्तुति हुई है, उसमें प्रमुख है – संगीत, किससे कहें , गीतों की महफ़िल, सुख़नसाज़ ,रंगे सुखन , जोग लिखी संजय पटेल की , बाजे वाली गली , दिलीप के दिल से , आगाज़ , कबाड़खाना आदि !इन सारे ब्लोग्स का उद्देश्य रहा है अच्छे संगीत,साहित्य और उससे जुड़े पहलुओं को उजागर करना रहा है, जो प्रशंसनीय है !इनपर सुगम संगीत से लेकर क्लासिकल संगीत को सुना जा सकता है , मन के अंतर में हर क्षण अनेकों भाव उमडते रहतें हैं ,इन्ही भावों को हिन्दी भाषा के माध्यम से अंतर्जाल पर लिखने का प्रयास है अंतर्ध्वनि ! नीरज रोहिल्ला का यह ब्लॉग अन्य ब्लॉग कि तुलना में कुछ अलग है यह संगीत का ब्लॉग नहीं है अनुभूतियों का ब्लॉग है ! इस पर भी अनेक सार्थक पोस्ट देखे गए इस वर्ष !
वर्ष- २००६ से संचालित हास्य-व्यंग्य का प्रमुख ब्लॉग है चक्रधर का चक्कलस ! यह ब्लॉग हिन्दी के श्रेष्ठ हास्य-व्यंग्य कवि अशोक चक्रधर का है ,वर्ष-२०१० में इस पर कुल ५८ पोस्ट प्रकाशित हुए जो वर्ष-२००८ और २००९ में प्रकाशित पोस्ट के बराबर है अर्थात इस वर्ष अशोक चक्रधर जी के इस ब्लॉग पर सक्रियता अचंभित करती है !
इस वर्ष ताऊ डोट इन ने हास्य व्यंग्य को माध्यम बनाकर पाठकों को भरपूर रूप से आकर्षित किया,इस ब्लॉग की सर्वाधिक रचनाएँ चिट्ठाकारों को केंद्र में रखकर प्रस्तुत की जाती रही और कोई भी ब्लोगर इनके व्यंग्य बाण से आहत होकर न मुस्कुराया हो , ऐसा नहीं हुआ ….यानी यह ब्लॉग वर्ष के सर्वाधिक चर्चित ब्लॉग की कतार में अपना स्थान बनाने में सफल हुआ है ,इस ब्लॉग पर इस वर्ष से वैशाखनंदन सम्मान की भी शुरुआत हुई है ! अलग हरियाणवी शैली और प्रस्तुति के कारण यह हिंदी ब्लॉगजगत में रातो-रात मशहूर हो गया है ।वर्ष-२०१० के वहुचर्चित हास्य ब्लोगर ताऊ रामपुरिया ने जहां ब्लॉग पर अनेक प्रयोग किये हैं इस वर्ष, वहीं संजय झाला ने भी पाठकों को हंसा हंसाकर लोटपोट करने में कोई कसर नहीं छोड़ा !
हास्य व्यंग्य पर आधारित ब्लॉग सुदर्शन की सक्रियता लगातार हमें अचंभित करती रही है !विगत दो वर्षों में इस ब्लॉग पर मैंने अनेक अच्छी-अच्छी सामग्रियां देखी है,प्रस्तुतिकरण और भाषा का लालित्य इसकी विशेषता है ,क्योंकि ब्लोगर के.एम .मिश्रा को स्वस्थ हास्य परोसने में महारत हासिल है !यह ब्लॉग पूरी तरह हास्य और व्यंग्य को समर्पित है !देश के लगभग सभी ज्वलंत मुद्दों पर चुटीली टिप्पणियाँ इस वर्ष यहाँ देखने को मिली है !
GWALIOR TIMES हास्‍य व्‍यंग्‍य में पूरे वर्ष में केवल ८ पोस्ट प्रकाशित हुए, वहीं ठहाका में केवल ३ पोस्ट ! दीपकबापू कहिन पर यद्यपि इस वर्ष कुछ अच्छी हास्य-व्यंग्य रचनाएँ देखी गयी, तीखी नज़र पर हास्य-व्यंग्य की क्षणिकाएं लगातार देखने को मिली ।बामुलाहिजा पर कार्टून के माध्यम से आज के सामाजिक ,राजनैतिक कुसंगातियों पर पूरे वर्ष भर व्यंग्य बरसते रहे । कार्टूनिष्ट हैं कीर्तिश भट्ट । current CARTOONS ताज़ा राजनैतिक घटनाक्रमों पर आधारित कार्टून का महत्वपूर्ण चिट्ठा बनने में सफल रहा । कार्टूनिस्ट हैं -चंद्रशेखर हाडा जयपुर ।मजेदार हिंदी एस एम एस चटपटे और मजेदार चुटकुलों अथवा हास्य क्षणिकाओं का अनूठा संकलन बनने में सफल रहा इस वर्ष,वहीं चिट्ठे सम्बंधित कार्टून हिन्दी चिट्ठाजगत में हो रही गतिविधियों को कार्टून रूप में पेश करने की पूरी कोशिश करता रहा विगत वर्ष, किन्तु इस वर्ष यह पूरी तरह अनियमित रहा ।; SAMACHAR AAJ TAK पर आज की ताज़ा खबरें परोसी गयी मगर मनोरंजक ढंग से और यही इस ब्लॉग की विशेषता रही । अज़ब अनोखी दुनिया के काफी दिलचस्प रहा इस वर्ष ।
आईये अब मिलते हैं की बोर्ड के खटरागी से यानी अविनाश वाचस्पति से जिनके ब्लॉग पर हास्य-व्यंग्य और अन्य साहित्यिक समाचार खूब पढ़ने को मिले हैं इस वर्ष । यूँ ही निट्ठल्ला….. का प्रस्तुतीकरण अपने आप में अनोखा , अंदाज़ ज़रा हट के , आप भी पढिये और डूब जाईये व्यंग्य के सरोबर में ।डूबेजी के ब्लोगर श्री राजेश कुमार डूबे जी का कार्टून सामाजिक आन्दोलन की अगुआई करता रहा । दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान- पत्रिका पर भी कभी-कभार अच्छी और संतुलित हास्य कवितायें देखने कोमिलती रही , यह ब्लॉग सुंदर और सारगर्भित और स्तरीय है । hasya-vyang पर ब्लोगर हास्य-व्यंग्य के साथ न्याय करता हुआ दिखा ।
सितंबर-२०१० में हास्य-व्यंग्य का एक नया ब्लॉग आया,नाम है वक़्त ही वक़्त कमबख्त !हास्य कविता,व्यंग्य,शायरी व अन्य दिमागी खुराफतों का संकलन (Majaal)है यह !वर्ष-२०१० के आखिरी चार महीनों में इस ब्लॉग पर कुल८९ पोस्ट प्रकाशित हुए जो प्रशंसनीय है !
किसी ने कहा है कि हंसना रवि की प्रथम किरण सा,कानन में नवजात शिशु सा ……हमारा वर्त्तमान इतना विचित्र है कि हमने अपनी सहज-सुलभ विशिष्टताओं को ओढ़ लिया है,आज हर आदमी इतना उदास है कि उसे हंसाने के लिए लाखों जतन करने पड़ते हैं !ऐसे में यदि कोई हमारे उदास चहरे पर हंसी की लालिमा फैलाने की दिशा में कार्य करता है या करती है तो प्रशंसनीय है !हास्य के ऐसे ही एक ब्लॉग से मैं रूबरू हुआ इस वर्ष ,नाम है हास्य फुहार ….इस ब्लॉग को संचालित करने वाली ब्लोगर का कहना है कि “मैं एक घरेलु महिला हूं , हंसो और हंसाओ में विश्वास रखती हूं।”
निरंतर पर भी आप व्यंग्य के तीक्ष्ण प्रहार को महसूस किया गया इस वर्ष । अनुभूति कलश पर डा राम द्विवेदी की हास्य-व्यंग्य कविताओं से हम रू-ब रू हुए । इसी प्रकार योगेन्द्र मौदगिल और अविनाश वाचस्पति के सयुक्त संयोजन में प्रकाशित चिट्ठा है हास्य कवि दरबार पर आपको मिली हास्य-व्यंग्य कविताएं, कथाएं, गीत-गज़लें, चुटकुले-लतीफे, मंचीय टोटके, संस्मरण, सलाह व संयोजन। विचार मीमांशा पर भी पढ़े गए इस वर्ष कुछ उच्च कोटि की हास्य रचनाएँ !
हास्य की चर्चा हो और हास्य कवि अलवेला खत्री की चर्चा न हो तो हिंदी ब्लॉगजगत की कोई भी वह चर्चा अधूरी ही मानी जायेगी, क्योंकि अलवेला खत्री टी वी जगत और मंच के मशहूर हस्ताक्षर है, किन्तु ब्लॉग के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अनुकरणीय है ! चलते-चलते आपको बता दूँ कि नई दिल्ली में 27 जुलाई को हास्य-कविता की कार्यशाला आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय कविसंगम के अध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल ने की। विषय पर व्याख्यान देने के लिए मंच के जाने-माने हस्ताक्षर श्री अरुण जैमिनी, डॉ. प्रवीण शुक्ला,ब्लोगर चिराग़ जैन, डॉ. प्रवीण शुक्ला तथा डॉ.विनय विश्वास मौजूद थे।
आईये अब आपको एक ऐसे ब्लॉग से परिचय करवाते हैं जो संभवत: हिंदी में अनूठा और अद्वितीय है ब्लॉग का नाम है मिसफिट:सीधीबात, ब्लोगर हैं गिरीश बिल्लोरे मुकुल ….हिंदी ब्लॉगजगत में होने वाली हर गतिविधियों पर इनकी तीखी नज़र रहती है और हर आम व ख़ास ब्लोगर के मन की बात पाठको के समक्ष दृढ़ता के साथ परोसना इनकी आदत है !ये अपने ब्लॉग के बारे में बड़े फक्र से कहते हैं कि “जी हां !मिसफ़िट हूं हर उस पुर्ज़े की नज़र में जो हर जो हर ज़गह फ़िट बैठता हो.आप जी आप और आप जो मिसफ़िट हो वो मेरी ज़मात में फ़िट है !!”ऐसे ब्लोगर को अतुलनीय और अद्वितीय न कहा जाए तो क्या कहा जाए ? ये हिंदी ब्लोगिंग में लाईव वेबकास्ट की प्रस्तुति करने वाले पहले ब्लोगर हैं !
कुल मिलाकर देखा जाए तो वर्ष २०१० में हिंदी ब्लॉगिंग में व्यापक विस्तार देखा गया, किन्तु कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आपसी मतैक्यता का अभाव दिखा, साथ अपनी डफली अपना राग अलापने का सिलसिला इस वर्ष भी जारी रहा !
रवीन्द्र प्रभात
मुख्य संपादक : परिकल्पना ब्लॉगोत्सव
लेखक परिचय:
हिंदी के मुख्य ब्लॉग विश्लेषक के रूप में चर्चित रवीन्द्र प्रभात विगत ढाई दशक से निरंतर साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखनरत हैं । इनकी रचनाएँ भारत तथा विदेश से प्रकाशित लगभग सभी प्रमुख हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं तथा कविताएँ लगभग डेढ़ दर्जन चर्चित काव्य संकलनों में संकलित हैं। इन्होंने सभी साहित्यिक विधाओं में लेखन किया है परंतु व्यंग्य, कविता और ग़ज़ल लेखन में विशेष सक्रिय हैं। लखनऊ से प्रकाशित हिंदी “दैनिक जनसंदेश टाइम्स” के नियमित स्तंभकार, जिसमें व्यंग्य पर इनका साप्ताहिक स्तंभ “चौबे जी की चौपाल ” काफी लोकप्रिय है। “हमसफ़र” और “मत रोना रमजानी चाचा” दो ग़ज़ल संग्रह तथा एक कविता संग्रह “स्मृति शेष” प्रकाशित है । इन्होंने “समकालीन नेपाली साहित्य” में सक्रिय हस्ताक्षरों की रचनाओं का एक संकलन भी संपादित किया है । विगत चार वर्षों से हिंदी चिट्ठों का विहंगम विश्लेषण कर रहे रवीन्‍द्र को “संवाद सम्मान” से वर्ष-२००९ में सम्मानित किया गया। साहित्यिक संस्था “काव्य संगम” के प्रकाशन सचिव,”लख़नऊ ब्लॉगर एसोसिएशन” के अध्यक्ष तथा “प्रगतिशील बज्जिका लेखक संघ” के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं । वर्त्तमान में ये अंतरजाल की बहुचर्चित ई-पत्रिका “हमारी वाणी” के सलाहकार संपादक तथा प्रमुख सांस्कृतिक संस्था “अन्तरंग” के राष्ट्रीय सचिव हैं। अनियतकालीन “उर्विजा” ,” फागुनाहट” का संपादन तथा हिंदी मासिक संवाद और “साहित्यांजलि” का विशेष संपादन कर चुके हैं। “ड्वाकरा” की टेली डक्यूमेंटरी फ़िल्म “नया विहान” के पटकथा लेखन से भी जुड़े रहे हैं। जीवन और जीविका के बीच तारतम्य स्थापित करने के क्रम में इन्होंने अध्यापन का कार्य भी किया, पत्रकारिता भी की, वर्त्तमान में ये विश्व के एक बड़े व्यावसायिक समूह में प्रशासनिक पद पर कार्यरत हैं। आजकल लखनऊ में हैं। इस वर्ष इनकी तीन पुस्तकें क्रमश: ताकि बचा रहे लोकतंत्र (उपन्यास) , हिंदी ब्लॉगिंग : अभिव्यक्ति की नई क्रान्ति (संपादित) तथा हिंदी ब्लॉगिंग का इतिहास एक साथ प्रकाशित हुई है है तथा प्रेम न हाट विकाय(उपन्यास ) प्रकाशनाधीन है !

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