शनिवार, 22 जून 2013

हिंदी के बिना देश का विकास संभव नहीं- त्रिवेदी



25, September 2012
DINKAR
नई दिल्ली। हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उन्हें याद किया गया और इस मौके पर कुछ रचनाकारों को सम्मानित किया गया। मशहूर पर्यावरणविद और ग्लोबल युनिवर्सिटी (नगालैंड) के कुलपति प्रियरंजन त्रिवेदी ने कहा कि हिंदी के विकास के बिना देश का विकास नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हिंदी की वजह से ही देश के पहचान है और वह हमें एक सूत्र में बंधती है। त्रिवेदी इंद्रप्रस्थ इंडिया इंटरनेशल के तत्वधान में आयोजित राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर जयंती समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा पद्धिति ठीक नहीं है जिसकी वजह से बेरोजगारी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाने की जिम्मेदारी भी हमारी है और इसे हर स्तर पर ठीक करना होगा, तभी हम राष्ट्रकवि दिनकर के उन सपनों को पूरा कर पाएंगे, जो सपना उन्होंने देखा था। संस्था के महासचिव अंजनी कुमार राजू ने कहा कि हमें दिनकर के जीवन से प्रेरणा लेनी होगी, जिन्होंने हिंदी का परचम हमेशा बुलंद रखा। आज हम हिंदी को भूलते जा रहे हैं जबकि हिंदी हमें बेहतर ढंग से संप्रेषित करती है। राजू ने अफसोस जताया कि राजनीति से जुड़े लोग दिनकर जयंती को भी गंभीरता से नहीं लेते हैं।

उन्होंने कहा कि एक केंद्रीय मंत्री को जब हमने आयोजन के लिए न्योता तो उन्होंने कहा कि समारोह में हम हिंदी में बात करेंगे तो हम दक्षिण के जिस प्रदेश से आते हैं, वहां हमारा विरोध होगा। राजू ने दिनकर की रचनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि जरूरत इस बात की है साहित्य के जरिए फिर से क्रांति लाई जाए। संस्था के अध्यक्ष डॉ जी पी एस कौशिक ने कहा कि दिनकर जी की रचनाएं हमें बेहतर समाज बनाने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने बताया कि हम यह कार्यक्रम और भव्य तरीके से मनाना चाहते ते और इस कार्यक्रम के लिए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से समय मांगा गया था लेकिन वर्तमान राजनीतिक हलचल की वजह से राष्ट्रपति भवन से जो संदेश मिला उसमें कहा गया कि अक्तूबर या नवंबर की कोई तारीख आपको दी दाएगी। कौशिक ने कहा कि हम दो महीने बाद दिनकर जी को याद करने के बहाने जुटेंगे और भव्य कार्यक्रम करेंगे। इस मौके पर सांसद प्रदीप सिंह, अधिवक्ता रामनगीना सिंह और निशलेश ने भी दिनकर के साहित्यिक योगदान पर अपनी बात रखी। इस मौके पर अनिल सुलभ, फजल इमाम मल्लिक, डा. कौशलेंद्र नारायण, रविकांत सिंह को दिनकर साहत्यि रत्न सम्मान से नवाजा गया। समाजसेवा के क्षेत्र में जहांगीर, रणजीत कुमार और ओमप्रकाश ठाकुर को सम्मानित किया गया।

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