शनिवार, 5 जनवरी 2013

कोई नहीं आया मदद के लिए: पीड़िता का मित्र


 शनिवार, 5 जनवरी, 2013 को 13:07 IST तक के समाचार
बलात्कार के विरोध प्रदर्शन
बलात्कार पीड़ित लड़की की कई दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद मौत हो गई थी
दिल्ली में बलात्कार का शिकार हुई क्लिक करें लड़की के मित्र ने एक भारतीय टीवी चैनल ज़ी न्यूज़ को इंटरव्यू दिया है जिसमें उसने उस दिन की घटना और उसके बाद पुलिस की प्रतिक्रिया और आम जनता की उदासीनता बयाँ की है.
हालाँकि इस इंटरव्यू के बाद दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है कि टीवी चैनल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत इस आपराधिक मामले में पीड़ित की पहचान सार्वजनिक और कुछ अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा.
उधर क्लिक करें पीड़िता के भाई ने बीबीसी से कहा कि उसे जी़ न्यूज को दिए गए साक्षात्कार के बारे में पता नहीं था.
उन्होंने कहा कि उन्हें इस साक्षात्कार पर कोई आपत्ति नहीं है, और “ क्लिक करें हम चाहते हैं कि किसी तरह उन्हें सजा मिल जाए.”
रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली पुलिस अदालत से अभियुक्तों को अगले हफ्ते पेश करने की इजाजत मांग सकती है.
टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में पीड़ित लड़की के मित्र ने पूरी घटना का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है.
घटना के दिन यानी 16 दिसंबर को पीड़ित लड़की अपने मित्र के साथ दिल्ली के मुनिरका से करीब नौ बजे रात को बस में चढ़ी थी.
दिल्ली की अदालत में प्रस्तुत चार्जशीट के मुताबिक बस में लड़की और उसके मित्र के साथ पहले छेड़छाड़ और फिर उनपर हमला किया गया और लड़की का बर्बरता से सामूहिक क्लिक करें बलात्कार हुआ. सिंगापुर में इलाज के दौरान लड़की की 29 दिसंबर को मौत हो गई.

'....पर कोई न रुका'

लड़के ने कहा है कि बस की खिड़कियाँ ढँकी थीं और वो समझ गए कि बस में मौजूद लोगों ने उन्हें फँसा लिया है.
उनके मुताबिक उन्होंने और पीड़ित लड़की ने भी काफी संघर्ष किया और लड़की को बचाने की कोशिश की थी.
लड़के का कहना था कि पीड़ित ने 100 नंबर पर पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करने की कोशिश की थी, लेकिन अभियुक्तों ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया.
उसने ये भी कहा कि अभियुक्तों ने उन दोनों को बस से नीचे फेंक दिया और कुचलने की भी कोशिश की.
उनके मुताबिक उनकी दोस्त के शरीर से बहुत ज्यादा खून बह रहा था. लड़के का कहना है कि जब उसे और पीड़ित लड़की को नग्न अवस्था में बस से फेंक दिया गया तो उन्होंने राह पर आते-जाते लोगों को रोकने की कोशिश की लेकिन 20-25 मिनट तक कोई नहीं रुका.
लड़के का कहना था कि करीब 45 मिनट बाद पुलिस की पीसीआर वैन्स घटनास्थल पर पहुंची लेकिन आपस में अधिकार क्षेत्र तय करने में उन्हें समय लगा.
उसने कहा कि वो बार-बार कोई कपड़ा दिए जाने की गुहार लगाता रहा लेकिन किसी ने उसकी बात न सुनी और काफी देर बाद एक बेडशीट फाड़ कर दी गई जिससे उसने पहले अपनी मित्र को ढँका.
उधर दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (अभियान) दीपक मिश्रा ने अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक 10.22 मिनट पर इस बारे में एक फोन पुलिस के पास आया था और पुलिस की गाड़ी मौके पर चार मिनट बाद पहुँच गई थी.
दीपक मिश्रा के मुताबिक पुलिस की गाड़ी पीड़ित लड़की और उनके मित्र को अस्पताल लेकर रात 10.55 पर पहुँची.
इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया और इसके विरोध में लगभग दो हफ्ते प्रदर्शन होते रहे.
शनिवार को देश भर के आला पुलिस अधिकारियों की बैठक हुई थी और इसमें संभावित कानूनी सुधारों पर विचार-विमर्श हुआ.
बैठक में पुलिस बल में और ज्यादा महिलाओं को भर्ती करने और दिल्ली के सभी पुलिस थानों में महिला पुलिस कर्मी को तैनात करने का वादा किया गया है.

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