बुधवार, 5 दिसंबर 2012

आदिवासी समाज के चितेरा


अपने लिए तो सभी जीते हैं लेकिन असली जिंदगी तो उन्हीं की होती है जो गैरों और जरूरतमंदों के लिए अपनी जिंदगी को कुर्बान कर दें। दूसरों की खुशी में जिन्हें खुशी मिलती है, असल में इंसान कहलाने के लायक वही हैं। बाकि के बारे में तो मैं नहीं जानता
सालों तक वैश्विक स्तर पर सामाजिक कार्यों से जुडी रहकर ज्योति सतीजा ने आदिवासी समाज को बेहद करीब से देखा। अब इन् दिनों फुर्सत के पल में आदिवासी जीवन को कैनवास पर उतार रही हैं। सबसे ख़ास बात है की अपनी पेंटिंग्स को वो चैरिटी के लिए बेच रही हैं। मतलब पेंटिंग्स बेचकर जो पैसा आएगा उसे वह धरती फौन्डेशन को दान देंगी। कालाहांडी की अनब्याही माताओं के बच्चों की परवरिश के लिए। बधाई हो ज्योति।
सालों तक वैश्विक स्तर पर सामाजिक कार्यों से जुडी रहकर ज्योति सतीजा ने आदिवासी समाज को बेहद करीब से देखा। अब इन् दिनों फुर्सत के पल में आदिवासी जीवन को कैनवास पर
उतार रही हैं। सबसे ख़ास बात है की अपनी पेंटिंग्स को वो चैरिटी के लिए बेच रही हैं। मतलब पेंटिंग्स बेचकर जो पैसा आएगा उसे वह धरती फौन्डेशन को दान देंगी। कालाहांडी की अनब्याही माताओं के बच्चों की परवरिश के लिए। बधाई हो ज्योति।

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