शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

संपादकों की गिरफ्तारी पर सोशल मीडिया को अफसोस नहीं

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जी न्यूज के दो संपादकों की गिरफ्तारी को जी न्यूज द्वारा भले ही मीडिया पर हमला बताया जा रहा हो लेकिन सोशल मीडिया पर सक्रिय पत्रकार या संपादक ही इसे मीडिया पर हमला मानने को कत्तई तैयार नहीं हैं। सोशल मीडिया पर जी की जी हुजूरी में कोई नजर नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया (खासकर फेसबुक) पर जी समूह के संपादकों की गिरफ्तारी पर अफसोस जताने पर संतोष जताया जा रहा है और इस मामले में पत्रकारों/संपादकों की ओर से जिस तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं उससे लग रहा है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय पत्रकार भी जी न्यूज और उनके संपादकों को दोषी मान रहे हैं।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद न्यूज24 चैनल के संपादक अजीत अंजुम ने तत्काल अपने फेसबुक एकाउण्ट पर टिप्पणी की थी ''जी न्यूज और जिंदल प्रकरण में दो संपादक सुधीर चौधरी और समीर अहलुवालिया गिरफ्तार..........जो बोया, सो काटा.'' तहलका से जुड़े पत्रकार अतुल चौरसिया सवाल पूछ रहे है कि "जी न्यूज आपातकाल की दुहाई दे रहा है, मीडिया पर हमला बता रहा है और तो और संसदीय विषेशाधिकार को भी घसीट रहा है... सिर्फ दो सवाल के जवाब चाहिए एक नैतिक और दूसरा तकनीकी... ईमानदारी से पुण्य प्रसून बताएं कि जिन्हें वे तथाकथित संपादक मानते हैं वे तीन बार मिलने क्यों गए थे जिंदल से (यह काम मार्केटिंग और एड डिपार्टमेंट का है संपादक का नहीं) दूसरा अगर आप उन्हें संपादक कह रहे हैं तो फिर ये बताएं कि संपादक और बिजनेस हेड कोई साथ-साथ कैसे हो सकता है. यहां कंफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट है. और अगर आपने दोनों साथ साथ बनाए है तब आप उन्हें सिर्फ संपादक के ऊपर हमले के रूप में प्रचारित नहीं कर सकते. ईमानदारी से आप कहिए कि आपका 'दुकानदारी प्रमुख' गिरफ्तार हुआ सिर्फ संपादक नहीं... जी न्यूज लोगों को मिसलेड कर रहा है...''
पी7न्यूज के बिजनेस एडीटर हर्षवर्धन त्रिपाठी लिखते हैं ''मैं निजी तौर पर बेहद खुश हूं कि दलाली के जरिए पत्रकारिता में किस ऊंचाई तक पहुंचा जा सकता है और वहां क्या हश्र होता है ये साफ हुआ है। क्योंकि, हम तो सीधे पत्रकारिता करके ही कितनी भी ऊंचाई तक जा सकते हैं और शायद दलाल पत्रकारिता के दौर में थोड़ा मुश्किल हो रहा था हमारे जैसों का ज्यादा ऊंचा जाना। मुझे अपने ऊंचे-नीचे जाने से कोई खास परेशानी नहीं है। परेशानी ये है कि मीडिया के शिखर पर दलालों का समूह सम्मान पाने लगा है। शायद ये खत्म होगा या थोड़ा तो, कम होगा ही।'' हर्षवर्धन आगे लिखते हैं ''और कोई वजह होती तो, सरकारी दमन के खिलाफ अपने संपादकों के साथ किसी मीडिया हाउस का खड़े होना पत्रकारीय मानदंडों को और ऊपर उठाता। लेकिन, अभी जी ग्रुप अगर इसी तरह अड़ा रहा तो, शायद पत्रकारीय मनदंड धव्स्त ही हो जाएंगे.''
भास्कर समूह के वेब संस्करण से जुड़े आशीष महर्षि अपने फेसबुक वाल पर सवाल उठाते हुए कहते हैं '' अपने संपादकों की गिरफ्तारी को जी समूह लोकतंत्र और मीडिया पर हमला बता रहा है। कुछ तो शर्म करो। उम्‍मीद है कि पत्रकार साथी और मीडिया समूह दलाली खाने से पहले दस बार सोचेंगें।'' मौर्य टीवी से जुड़े अनुरंजन झा फेसबुक पर सवाल उठा रहे हैं कि ''कल रात जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी और सीनियर समीर आहलूवालिया को गिरफ्तार किया गया.. आज जी न्यूज़ सफाई दे रहा है... और जिस तरीके से छीछालेदर लाइव हो रही है उससे लगता है बाकी सभी चैनल दूध के धुले हैं।.. आजतक, एनडीटीवी, एबीपी, न्यूज़ २४, आईबीएऩ ७ और न जाने कौन कौन? जैसे इस खबर को दिखा रहे हैं लगता है सबने जो इतने पैसे कमाए हैं.. साफ-सुथरे तरीके से ही कमाए हैं। और हां जो लोग भी चाहे वो मीडिया के किसी धड़े के हैं उन्हें आरोप लगाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।''

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