गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

भारत-चीन युद्ध के पचास साल / बीबीसी स्पेशल


 सोमवार, 22 अक्तूबर, 2012 को 12:14 IST तक के समाचार
वर्ष 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध में भारत बुरी तरह पिटा. चीन की हर रणनीति सफल रही और भारत की विफल. कौन था भारत की इस नाकामी के लिए ज़िम्मेदार. नेहरू, मेनन या फिर कोई और? इंदर मल्होत्रा का आकलन.
1962 युद्ध के दौरान नेफ़ा में भारत के लेफ़्टिनेंट कर्नल केके तिवारी को चीनियों ने बंदी बना लिया था. चीनी युद्ध बंदी शिविर में उन्हें किन-किन मुसीबतों का सामना करना पड़ा बता रहे हैं खुद केके तिवारी.
1962 में चीनी हमले के समय एक शहर की चहल-पहल वीराने में बदल गई. लोग शहर छोड़कर भाग रहे थे. क्यों खाली हुआ ये शहर. क्या अहमियत थी इस शहर की?
वर्ष 1962 में चीन भारत पर भारी तो पड़ा था, लेकिन उस युद्ध में भारत ने वायु सेना का इस्तेमाल नहीं किया था. आइए नज़र डालते हैं 50 साल बाद दोनों देशों के सैन्य संतुलन पर.

विशेष रिपोर्ट

मल्टीमीडिया

वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान अमरजीत बहल सेकेंड लेफ़्टिनेंट थे और काफ़ी जवान थे. युद्ध के मोर्चे पर जाने के लिए तत्पर. उनकी इच्छा पूरी भी हुई. फिर क्या हुआ?

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