रविवार, 2 दिसंबर 2012

एकदम चमत्कार से कम नहीं


मोहाली से भवन निर्माण
के क्षेत्र में अहम शुरुआत
इसे आप अविश्वसनीय अजूबी घटना भी कह सकते हैं और स्मार्ट बिल्डिंग निर्माण की दिशा में भारत की अनूठी पहल भी। देश के आधुनिक शहर चंडीगढ़ के बिल्कुल बगल में स्थित पंजाब के मोहाली में सिनजी ग्रुप ने जो कारनामा करके दिखाया है, उसने लिम्का बुक आॅफ रिकार्डस ने तो दर्ज कर ही लिया है, दुनिया भर के देशों ने भी नोटिस किया है। ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं, जिनमें दुनिया के कुछ ही देशों के साथ भारत ने पहलकदमियां करके अपना एक विशेष स्थान बनाया है। अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरद्विपीय मिसाइल सहित ऐसे कई क्षेत्र हैं, जिनमें अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन सहित बस कुछ ही गिने-चुने देश शामिल हैं। अब मोहाली में मात्र 48 घंटे में दस मंजिला इमारत खड़ी करने का कारनामा करके भारत के इंजीनियरों ने अपनी काबिलियत और क्षमता का एक और लोहा दुनिया में मनवा लिया है। इसे भवन निर्माण के क्षेत्र में ऐसी शुरुआत माना जा रहा है, जो क्रांति ला सकती है। हालांकि अभी इसकी परख होनी बाकी है कि पर्यावरण और सुरक्षा सहित दूसरे मानदंडों पर यह भवन कितना खरा उतर पाता
है परन्तु इसे बनाने वाली कंपनी ने जिस तरह के दावे किए हैं, उससे तो साफ लग रहा है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है। यह सभी जानते हैं कि भवन निर्माण में कितना वक्त लगता है और आस-पास के निवासियों को कितने तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन वे इसलिए खामोशी से सब कुछ सह जाते हैं क्योंकि उससे पहले उन्होंने भी अपने भवन का निर्माण ठीक उसी अंदाज और तरीके से किया हुआ होता है। कई बार तो भवन निर्माण में एक-डेढ़ से दो-तीन साल तक लग जाते हैं। इस लिहाज से देखें तो मोहाली में सिनजी ग्रुप ने जो पहल की है, वह वाकई इस क्षेत्र में ऐसी पहल हो सकती है, जिसे हर कोई अपनाकर अपने सपनों के घर में जल्दी से जल्दी पहुंच सकता है। और चूकि दोनों तरह से बनने वाले भवनों की लागत लगभग बराबर है, इसलिए नए तरीके से बनाए जाने वाले भवन को लोग तरजीह दें तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा। दिलचसंप बात तो यह है कि इस बिल्डिंग के कई फायदे हैं। यह बहुत कम समय में बनकर तैयार होती है। यह भूकंप रोधी है। साथ ही इसमें रहने वाले लोगों को गर्मी या सर्दी के मौसम में परेशान नहीं होना पड़ेगा। तापमान कम या अधिक होने पर बिल्डिंग में लगे पर्दे आटोमेटिक ढंग से बंद और खुल जाएंगे। बिल्डिंग को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि इसमें बिजली की खपत अन्य भवनों से पांच गुना कम होती है। अंदर 62 प्रतिशत तक शुद्ध साफ हवा आएगी। दिलचंप तथ्य यह है कि ये पूरी तरह फैक्टरी में निर्मित भवन है। इसमें 200 टन लोहा लगा है। इसे 200 मजूदरों और तीन क्रेनों की मदद से लगातार काम करके तैयार किया गया। कंक्रीट का प्रयोग केवल बिल्डिंग की नींव में किया गया है। बिल्डिंग में नट बोल्ट और स्टील का प्रयोग किया गया है। इस स्टील में जंग नहीं लगती है। कोई अपने मकान को तोड़ना चाहता है या जगह बदलना चाहता है तो आसानी से ऐसा किया जा सकता है। क्योंकि इसमें नट बोल्ट लगे होते हैं जिन्हें आसानी से खोलकर कहीं भी ले जाया जा सकता है जबकि कंक्रीट की बिल्डिंग में ऐसा नहीं हो सकता है। एक अहम बात ये भी है कि इस बिल्डिंग में आग लगने का कोई खतरा नहीं है। बिल्डिंग को टेक्नोलॉजी आॅफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च स्ट्रकचरल इंजीनियरिंग रिसर्च सेंटर चेन्नई की तरफ से मान्यता मिली हुई है। बिल्डिंग के इस मॉडल को भूकंप मापदंड जोन-5 की मान्यता मिली हुई है।

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