रविवार, 9 दिसंबर 2012

भारतीयों को बेवकूफ़ बतानेवाले काटजू को कानूनी नोटिस




 रविवार, 9 दिसंबर, 2012 को 17:16 IST तक के समाचार
काट्जू
जस्टिस काट्जू ने कहा, मात्र दो हज़ार ख़र्च कर दंगे के हालात बनाए जा सकते हैं.
भारतीय प्रेस परिषद के प्रमुख जस्टिस मार्कंडेय काट्जू ने कहा है कि 90 प्रतिशत भारतीय मूर्ख होते हैं जो धर्म के नाम पर आसानी से बहकावे में आ जाते हैं. काटजू के इस बयान पर लखनऊ के दो बच्चों ने उनके खिलाफ़ क़ानूनी नोटिस भेजा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जस्टिस काट्जू ने एक सेमिनार के दौरान कहा, “मैं कहता हूँ कि 90 प्रतिशत भारतीय बेवकूफ हैं. उनके सिर में दिमाग नहीं होता. उन्हें आसानी से बेवकूफ बनाया जा सकता है.”
जस्टिस काट्जू ने कहा कि मात्र दो हजार रुपए देकर दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़काए जा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि दंगे भड़काने के लिए किसी धार्मिक स्थान पर मात्र शरारत करने की जरूरत होती है और उसके बाद लोग लड़ना शुरू कर देते हैं.
जस्टिस काट्जू ने कहा, “उसके बाद पागल लोग आपस में लड़ना शुरू कर देते हैं. उन्हें इस बात का अहसास नहीं होता कि इसके पीछे दुस्साहसी तत्व हैं.”

'सांप्रदायिक का जहर'

"ये एक दुष्प्रचार था कि हिंदी हिंदुओं की भाषा है और उर्दू मुसलमानों की भाषा है. हमारे पूर्वजों ने भी उर्दू पढ़ी है, लेकिन आपको बेवकूफ बनाना कितना आसान है."
जस्टिस काट्जू, प्रेस परिषद के प्रमुख
उनके अनुसार 1857 से पहले देश में सांप्रदायिकता नहीं थी लेकिन अब स्थिति अलग है और 80 प्रतिशत हिंदू और मुसलमान सांप्रदायिक हैं.
प्रेस परिषद के प्रमुख ने कहा कि पिछले 150 सालों में भारतीय आगे के बजाए पीछे गए हैं क्योंकि अंग्रेजों ने लगातार सांप्रदायिकता का जहर घोला है.
जस्टिस काट्जू के अनुसार ब्रितानी नीति साफ थी कि भारत में राज करने का एकमात्र रास्ता है कि हिंदुओं और मुसलमानों को आपस में लड़ाया जाए.
पीटीआई के अनुसार काट्जू ने कहा कि ये एक दुष्प्रचार था कि हिंदी हिंदुओं की भाषा है और उर्दू मुसलमानों की भाषा है.
उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों ने भी उर्दू पढ़ी है, लेकिन आपको बेवकूफ बनाना कितना आसान है.”
जस्टिक काट्जू ने कहा कि वो ये कटु बातें इसलिए कह रहे हैं ताकि भारतीयों को पूरे खेल का पता चले और वो बेवकूफी ना करें.

क़ानूनी नोटिस

काटज़ू के इस बयान पर लखनऊ की तनया ठाकुर और उनके भाई आदित्य ठाकुर ने उनके खिलाफ़ क़ानूनी नोटिस भेजा है.
तनया और आदित्य का कहना है कि जस्टिस काटजू जैसे सम्मानित एवं जिम्मेदार पदधारक व्यक्ति के ऐसी बात कहने से भारत की मर्यादा का उल्लंघन होता है तथा विदेश में भारत व भारतीयों के बारे में ग़लत धारणा बनाने की संभावना बढ़ जाती है.
उन्होंने जस्टिस काटजू के बयान पर खेद और दुःख व्यक्त करते हुए लिखा है कि, "वे चाहते हैं जस्टिस मार्कंडेय काटजू इस बचान के लिए क्षमा मांगें अन्यथा वे 30 दिन बाद न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे.

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