शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

पागल कहते थे लोग जब मैं दौड़ लगाता था : वैद्यनाथ

‎=== महत्वपूर्ण योगदान देने वालों को मिला सम्मान ===
पागल कहते थे लोग जब मैं दौड़ लगाता था : वैद्यनाथ
जीवन के रंगमंच पर सबको करना है अभिनय : ब्रजेश


दाउदनगर (औरंगाबाद),  : हम जब जीवन में लक्ष्य निश्चित कर किसी राह पर दौड़ लगाते हैं तो लोग तंग करते हैं। यह हर उस बार होता है जब आप समाज की अपेक्षाओं से इतर कुछ नया करते हैं। एथलेटिक्स वैद्यनाथ भगत पाल को भी समाज से ऐसे ही कड़वे अनुभव मिले हैं। बुधवार को प्रय} संस्था द्वारा जब कन्या इंटर स्कूल में उन्हें सम्मानित किया गया तो वे अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए। कहा कि सन 1975 में जब दौड़ता था, छोटे-छोटे बच्चों को दौड़ना सिखाता था तो लोग मुङो पागल कहते थे। वर्ष 2004 में राष्ट्रीय पहचान मिली जब हैदराबाद में आयोजित खेल समारोह में 10 किलोमीटर की दौड़ में भारत में द्वितीय स्थान लाया।
यहीं 21 किमी की हाफ मैराथन दौड़ में भारत का दूसरा धावक बना। कहा कि मलेशिया के लिए चयन हुआ, लेकिन पैसे के अभाव और अधिकारियों की लापरवाही के कारण विदेश नहीं जा सके। इनका संदेश है - खुद पर करो भरोसा, जितनी मेहनत उतनी
सफलता। यहां सांस्कृतिक गतिविधियों के जन्मदाता माने गए श्रीशचंद्र मिश्र सोम एवं इनसे प्रेरणा ले समाज में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का माहौल बनाने वाले ब्रजेश कुमार भी सम्मानित हुए। श्री कुमार ने कहा कि जीवन एक रंगमंच है, हर किसी को अभिनय करना है। फिर चले जाना है, इसलिए जिएं तो दूसरों के लिए मरें तो दूसरों के लिए।
मिसाइल वैज्ञानिक संजय कुमार का सम्मान इनके पिता सेवानिवृत्त शिक्षक रामचन्द्र प्रसाद ने ग्रहण किया। कहा मेरा बेटा, मेरा ही शिष्य रहा। आज जितने भी मिसाइल परीक्षण होते हैं, संजय उसमें शामिल रहता है। रूस जाकर वैज्ञानिकों के कार्यकलाप को भी उसने देखा।
स्वतंत्रता सेनानी डा.रामपरीखा यादव ने कहा कि व्यक्तित्व को बनाइए और निखारिये। कला पेंटिंग में 181 पुरस्कार ले चुके संजय कुमार गांधी को भी सम्मानित किया गया। डा. शमसुल हक,फूलमान सिंह, रामाशीष सिंह, डीएसपी जहानाबाद इन्द्रप्रकाश, फिल्म निर्देशक संतोष कुमार बादल, आईआरपीएस शशि भूषण सिंह का सम्मान परिजनों ने ग्रहण किया। डा. यादव की चाहत है कि जयप्रकाश नारायण के गुजरे बचपन की यादों को संजोने के लिए इनसे जुड़ी स्थानीय जमीन को स्मृति के रूप में जीवित रखने का। इंद्र प्रकाश का सम्मान इनके बड़े भाई कमांडेंट ओमप्रकाश ने लिया।
=== महत्वपूर्ण योगदान देने वालों को मिला सम्मान ===
पागल कहते थे लोग जब मैं दौड़ लगाता था : वैद्यनाथ
जीवन के रंगमंच पर सबको करना है अभिनय : ब्रजेश 
दाउदनगर (औरंगाबाद), जागरण प्रतिनिधि : हम जब जीवन में लक्ष्य निश्चित कर किसी राह पर दौड़ लगाते हैं तो लोग तंग करते हैं। यह हर उस बार होता है जब आप समाज की अपेक्षाओं से इतर कुछ नया करते हैं। एथलेटिक्स वैद्यनाथ भगत पाल को भी समाज से ऐसे ही कड़वे अनुभव मिले हैं। बुधवार को प्रय} संस्था द्वारा जब कन्या इंटर स्कूल में उन्हें सम्मानित किया गया तो वे अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए। कहा कि सन 1975 में जब दौड़ता था, छोटे-छोटे बच्चों को दौड़ना सिखाता था तो लोग मुङो पागल कहते थे। वर्ष 2004 में राष्ट्रीय पहचान मिली जब हैदराबाद में आयोजित खेल समारोह में 10 किलोमीटर की दौड़ में भारत में द्वितीय स्थान लाया। 
यहीं 21 किमी की हाफ मैराथन दौड़ में भारत का दूसरा धावक बना। कहा कि मलेशिया के लिए चयन हुआ, लेकिन पैसे के अभाव और अधिकारियों की लापरवाही के कारण विदेश नहीं जा सके। इनका संदेश है - खुद पर करो भरोसा, जितनी मेहनत उतनी सफलता। यहां सांस्कृतिक गतिविधियों के जन्मदाता माने गए श्रीशचंद्र मिश्र सोम एवं इनसे प्रेरणा ले समाज में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का माहौल बनाने वाले ब्रजेश कुमार भी सम्मानित हुए। श्री कुमार ने कहा कि जीवन एक रंगमंच है, हर किसी को अभिनय करना है। फिर चले जाना है, इसलिए जिएं तो दूसरों के लिए मरें तो दूसरों के लिए। 
मिसाइल वैज्ञानिक संजय कुमार का सम्मान इनके पिता सेवानिवृत्त शिक्षक रामचन्द्र प्रसाद ने ग्रहण किया। कहा मेरा बेटा, मेरा ही शिष्य रहा। आज जितने भी मिसाइल परीक्षण होते हैं, संजय उसमें शामिल रहता है। रूस जाकर वैज्ञानिकों के कार्यकलाप को भी उसने देखा। 
स्वतंत्रता सेनानी डा.रामपरीखा यादव ने कहा कि व्यक्तित्व को बनाइए और निखारिये। कला पेंटिंग में 181 पुरस्कार ले चुके संजय कुमार गांधी को भी सम्मानित किया गया। डा. शमसुल हक,फूलमान सिंह, रामाशीष सिंह, डीएसपी जहानाबाद इन्द्रप्रकाश, फिल्म निर्देशक संतोष कुमार बादल, आईआरपीएस शशि भूषण सिंह का सम्मान परिजनों ने ग्रहण किया। डा. यादव की चाहत है कि जयप्रकाश नारायण के गुजरे बचपन की यादों को संजोने के लिए इनसे जुड़ी स्थानीय जमीन को स्मृति के रूप में जीवित रखने का। इंद्र प्रकाश का सम्मान इनके बड़े भाई कमांडेंट ओमप्रकाश ने लिया।
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