गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

वाया गोधरा के 10 साल


 गुरुवार, 27 सितंबर, 2012 को 17:11 IST तक के समाचार
डबडबाई याचना करती आंखें और जुड़े हाथों वाली वो तस्वीर बाद में गुजरात दंगों की पहचान सी बन गई. वो तस्वीर जिसने बाद में फोटोग्राफर और फ़ोटो में दिख रहे व्यक्ति, दोनों की जिंदगी बदल दी.
दस वर्ष पहले गुजरात दंगों के दौरान किस तरह उन्हें दंगाइयों की भीड़ का सामना करना पड़ और कैसे उनकी जान बची बता रहे हैं रेहान फ़ज़ल
अहमदाबाद में कुछ ही सालों में काफी परिवर्तन हुए है. हर तरफ़ सड़कें चौड़ी की जा रही हैं. नई जगमगाती दुकानें, नए शॉपिंग मॉल और नए बाज़ार हर जगह देखने को मिलते हैं.
गुजरात दंगों के समय शहज़ाद की उम्र ग्यारह बरस थी. आज वे 21 साल के हैं और उनकी ज़िंदगी एकदम बदल गई है.
अयोध्या और गोधरा राजनीतिक हिंदुत्व के दो बड़े प्रतीक के रुप में उभरे हैं लेकिन अभी भी राजनीतिक हिंदुत्व के घृणित रुप की वापसी का खतरा बरकरार.
गुजरात के गोधरा में हुए ट्रेन हादसे और उसके बाद हुए दंगों की जांच के लिए आयोग तो बने लेकिन आयोगों की रिपोर्टों पर एक राय किसी की नहीं है.

ख़ास ऑडियो रिपोर्ट

  • वर्ल्ड प्रेस अवार्ड पुरस्कृत फोटोजर्नलिस्ट औरको दत्ता की तस्वीरों के ज़रिए गुजरात के गुलबर्ग सोसायटी में दस साल पहले राख हुए आशियाने की कहानी.

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