शनिवार, 24 नवंबर 2012

रिसर्च में भविष्य



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यदि आप उन लोगों में से हैं, जिन्हें चीजों को गहराई से समझना पसंद है तो रिसर्च का क्षेत्र आपके लिए सबसे मुफीद है। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक भारत में वैज्ञानिक शोध का स्तर बेहतर हो रहा है। इस अध्ययन के मुताबिक भारत में शोध के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिकाओं में भारतीयों की भागीदारी भी बढ रही है। अनुमान है कि अगले आठ वर्षो में हमारे देश में शोध जी-आठ देशों के मुकाबले का हो जाएगा उसके बाद हम उनसे भी आगे निकल सकते हैं। मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल को उम्मीद है कि देश शोध के क्षेत्र में 2030 तक सुपर पॉवर बन सकता है।

रिसर्च का क्रेज

टीचिंग फील्ड के अलावा डॉक्टरेट उपाधि प्राप्त किए हुए कैंडिडेट की दूसरे क्षेत्र में डिमांड बढने के कारण शोध में प्रवेश के लिए स्टूडेंट्स क ी संख्या में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रोजगार के लिए शोध की बढती अनिवार्यता और शुरू हुई शोधवृत्तियों ने इस ओर स्टूडेंट्स को आकर्षित किया है। जहां शिक्षण संस्थानों में टीचिंग फैकल्टी के लिए रिसर्च को अनिवार्य कर दिया गया है, वहीं सरकारी एवं गैरसरकारी संगठनों ने डॉक्टरेड कैंडिडेट को वरीयता देना शुरू कर दिया है। शायद ही कोई ऐसा बडा संस्थान हो, जहां आर ऐंड डी (रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट)डिपार्टमेंट नहीं होता हो। इसके अलावा कंपनियों एवं निजी संस्थानों में सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी डिपार्टमेंट होता है, वहां भी डॉक्टरेट उपाधि धारकों को वरीयता दी जाती है।

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन

यदि आप किसी भी सब्जेक्ट में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ पोस्टग्रेजुएट हैं तो आप रिसर्च की योग्यता रखते हैं। इस परीक्षा में सफल कैंडिडेट्स को गाइड यानी शोध निर्देशक के निर्देशन में शोध विषय एवं चेप्टर प्लानिंग करके भावी शोध क5ी रूपरेख तय करनी पडती है। कुछ विश्वविद्यालय गाइड के चयन का अधिकार कैंडिडेट को देते हैं, तो कुछ विश्वविद्यालयों में सीटों की उपलब्धता के अनुसार गाइड शोधार्थी का चयन करते हैं।

फेलोशिप ने बढाई रुचि

एमए, एमएससी एवं एमकॉम करने के बाद पहले स्टूडेंट्स रोजगार तलाशते थे। भारत सरकार द्वारा नई-नई शोधवृत्तियां जारी करने तथा यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन की जूनियर रिसर्च फैलोशिप और सीनियर रिसर्च फैलोशिप को बढाने से इस सोच ्रमें बदलाव आया है।

जरूरत है रिसर्च

रिसर्च की स्ट्रीम व टॉपिक चाहे जो हों,लेकिन रिसर्च वर्क ऐसा होना चाहिए जिससे सबका फायदा हो। गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय उत्तराखंड के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. भगवानदेव पाण्डेय का कहना है कि सिनॉप्सिस या रिसर्च प्रपोजल रिसर्च का पहला स्टेप है। सिनॉप्सिस में ही आपके शोध की भावी रूपरेखा होती है। इसलिए शोध की बुनियादी जानकारी के साथ और कौन-कौन सी हैं प्रक्रियाएं..

शोध का विषय नवीनतम होने के साथ महत्वपूर्ण हो।

ऐसे गाइड का चयन करें, जिसका विशेषज्ञता क्षेत्र आपके शोध विषय से संबंधित हो।

सिनॉप्सिस बनाने से पहले बुनियादी जानकारी जरूर हासिल करें।

सब्जेक्ट से रिलेटेड महत्वपूर्ण किताबें पढने के बाद सिनॉप्सिस बनाएं।

यदि शोध का विषय पुराने विषय से मिलता दिखे, तो अपने कार्य की भिन्नता डीप में बताएं।

विषय और अनुशासन के हिसाब से शोध पद्घति अपनाएं।

रिसर्च में पांच से सात चेप्टर जरूर बनाएं तथा शुरुआती चेप्टर विषय से जुडा सैद्घांतिक होना चाहिए।

संदर्भ सूची में प्राइमरी एवं सेकंडरी सोर्स का जिक्र करना न भूलें।

रोजगार की संभावनाएं

रिसर्च क रने के उपरान्त आप विश्वविद्यालय, डिग्री कालेजों, संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर, रिसर्च एसोसिएट जैसे पदों पर जॉब्स पा सकते हैं। निजी संस्थानों एवं कंपनियों के आर ऐंड डी डिपार्टमेंट, सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी डिपार्टमेंट में महत्वपूर्ण पदों पर जॉब्स पा सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

जेएनयू, नई दिल्ली।

दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।

आईआईटी, कानपुर, दिल्ली,रुडकी,मुम्बई,चेन्नई।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, दिल्ली।

लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद।

छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर।

जोश डेस्क

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