सोमवार, 1 अक्तूबर 2012

काइरोप्रेक्टि चिकित्सा: यानी जादुई इलाज


दुर्घटनाएं भी गाहे बगाहे हमारे जीवन में घटती ही रहतीं हैं. कई जगह लिखा होता है दुर्घटना संभावित क्षेत्र, कृपया गाडी धीरे चलाएं आदि आदि. आये दिन रेल दुर्घटनाएं भी होती रहतीं हैं. दुर्घटनाएं ग्राहक और मौत  कभी बताकर नहीं आते, न मालूम कब चले आएं अकस्मात! लेकिन इनके बाद की पीड़ा और पेचीदेपन से बचा जा सकता है काइरोप्रेक्टिक देखभाल के ज़रिए.

Traumas Cause Subluxations
आकस्मिक  दुर्घटनाओं  से कई मर्तबा बेहद सदमा भी लगता है दिल को ही नहीं रीढ़ को भी ठेस लगती है. काया का संरचनात्मक संतुलन ऐसे में गडबडा जाता है. इसी गडबडी को कहतें हैं subluxations. यानी रीढ़ की हड्डियों का परस्पर संरेखण, एलाइन-मेंट, नेचुरल कर्व बिगड़ जाना, विरूपण पैदा हो जाना रीढ़ में.

नामालूम से ये संरचनात्मक विरूपण (structural  distortions) एक असामान्य स्ट्रेस की वजह बनते देखे जातें हैं, जिनकी अकसर  हमें खबर भी नहीं रहती. भीतर-भीतर नुकसान होता रहता है. कोई नस दबी खिंची बनी  रहती है इसी स्ट्रेस की वजह से, इसी खिंचाव की वजह से. इसका दुष्प्रभाव हमारी पेशियों, अंदरूनी कायिक अंगों, ग्रंथियों, डिस्क्स और अस्थियों (हड्डियों) पर पड़ता है यहाँ तक कि हमारा दिमाग भी इन subluxations से अछूता नहीं रह पाता, बच नहीं पाता इस संरचनात्मक विरूपण के बिखराव  से.

अलावा इसके ये शरीर के काम करने के सारे ढर्रे को ही तबदील कर देतें हैं .गालिबन कई बीमारियों की भी वजह बनते हैं. इनसे पैदा बीमारियाँ कमजोरी, उम्र से पहले बुढापे की भी वजह बन सकती हैं. पेशीय कमजोरी और arthritic changes, जोड़ों की अकड़न, सोजिश और जोड़ों के दर्द तथा अंदरूनी अंगों के काम करने के ढंग को भी असर ग्रस्त करतीं हैं.

काइरोप्रेक्टिक क्‍या है? What is Chiropractic?
काइरोप्रेक्टिक एक चिकित्सा प्रणाली है स्वास्थ्य की बिना दवा-दारु कुदरती देखभाल का एक तरीका है. इस प्रणाली को subluxations का पता लगाके उसे दूर करने में महारत हासिल है. इसका माहिर ही कहलाता है काइरोप्रेक्टर. वह ख़ास और निरापद,  सामाधान की  तकनीकों का (safe, gentle, "adjustment " techniques) को काम में लेता है.

मामूली दुर्घटनाएं Minor Accidents:
कई  मर्तबा मामूली सी लगने वाली चोटें,गर्दन में लगने वाला आकस्मिक झटका किसी भी वजह से (ड्राइवर के अचानक तेज़ रफ्तार गाडी को ब्रेक  लगाने, कूदने फांदने आदि से ), सामान्य सी लगने वाली चोट के बाद की साजिश, चोट से बना गुमड़ा subluxations की वजह बन जाता है जो आगे चलकर खासी मुसीबत पैदा करता है सेहत के लिए.

काइरोप्रेक्टिक देखभाल में आये मरीजों  को तब बहुत ताज्जुब होता है जब उन्हें बताया जाता है यह समस्या तब से चली आ रही है जब आप बचपन में कभी गिर गए थे या फिर प्रसव ही इसकी वजह बन गया था, बर्थ स्ट्रेस इसके लिए कुसूरवार है. बेशक तब न तो आपकी कोई हड्डी टूटी थी और न ही कहीं से बेतहाशा खून बहा था, लेकिन एक ऐसी अंदरूनी नुकसानी घर बना गई संरचनात्मक गडबडी पैदा करके, जिसका खामियाज़ा आप अब उठा रहें हैं. क्योंकि वह क्षति कभी गई नहीं. Subluxations को पूर्व में हटाया ही नहीं गया. बेशक मेडिकल डॉक्टर्स ने ‘सब कुछ ठीक  है’ कहकर आपको बिदा किया होगा, क्योंकि  वह वाकिफ ही नहीं रहतें हैं subluxations से. इनके  समाधान से, स्पाइनल एडजस्टमेंट से.

लाखों लोग अस्पतालों के आपातकालीन कक्षों  से ये बिना जाने चले आते हैं कि वह गुप्त चोट से ग्रस्त हो गए हैं चोट भी ऐसी जो आगे चलके बहुत परेशान करेगी, भले आज मामूली दिख रही है. जितने subluxatios लिए आप इमरजेंसी रूम्स में दाखिल होतें हैं डिसचार्ज के वक्त भी वह बने रह गए हैं. यही वजह है अमरीका भर में अब काइरोप्रेक्टर की मौजूदगी प्रत्येक आपातकालीन कक्ष में बनाए रखी जाती है. यही वह जगह है जहां उनकी सबसे ज्यादा ज़रुरत रहती है.

गम्‍भीर दुर्घटना Serious Accidents:
आपातकाल में गंभीर दुर्घटनाओं के मामले में तमाम तरह के चिकित्सा उपाय काम में लिए जातें हैं, काइरोप्रेक्टिक हर ज़रूरी चिकित्सा सेवा लेने की सलाह देते हैं किसी का भी कहीं से विरोध नहीं करते वक्त ज़रुरत पड़ने पर. लेकिन जब मेडिकल डॉक्टर अपना काम निपटा लेता तब है हर किसी को स्वास्थ्य लाभ के लिए कामना करनी होती है. डॉक्टर भी यही कहता है वह सब कुछ किया गया जो उसके हाथ में था. अब आगे ईश्वर की इच्छा है.

वजह इसकी साफ़ है, असल स्वास्थ्य लाभ मरहम पट्टी, सुइयों, दवाओं से न होकर मरीज़ की खुद की काया से प्राप्त होता है. हमारी काया के अन्दर एक अंतरजात बुद्धि तत्व है, इनेट इंटेलिजेंस है, खुद से अच्छे होने परिपूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने की कुदरती जन्मजात क्षमता है. यह बच्चे के जन्म की तरह ही एक कौतुक भरी बात है. आखिर कहाँ से आता है वह सूक्ष्म जीव एकल ह्यूमेन फ़र्तिलाइज़्द एग के विभाजन दर विभाजन के बाद. स्पर्मेटाजोआ और ओवम (शुक्राणु और अंडाणु/ डिम्ब/फिमेल एग) के मिलान मनाने के बाद. पुरुष स्त्री के दैहिक एकनिष्ठ मैथुन स्पर्श के बाद. क्या इस सूक्ष्म जीव का आवाहन किया गया था?

हरेक चिकित्सक का पहला फर्ज़ है, लक्ष्य है जीवन की अभिव्यक्ति में आने वाले अवरोधों को वह हटाये. एक ऐसा दैहिक परिवेश रचे संवारे जो इस काया में आने वाली  स्वास्थ्य लाभ की अडचनों को हटाये. इसीलिए जब भी यह निरापद तरीके से मुमकिन हो हमारी काया को काइरोप्रेक्टिक देखभाल भी मिलती रहनी चाहिए.

दुर्घटना के बाद की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं Post Accidental Health Problems:
दुर्घटना से पहुंचे सदमे के बाद भी व्यक्ति दर्द, कमजोरी, शारीरिक अक्षमता से महीनों क्या कई मर्तबा सालों साल जूझता रहता है, दवा दारु के बावजूद भी. बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं और दर्द नाशियों, मसल रिलेक्सर्स (मसल रिलेक्सेंत) लेते रहने के बाद भी उसे परिपूर्ण स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पाता, लेती रहनी पड़तीं हैं ये सारी दवाएं बाद में भी.

बाद दुर्घटना के कई मरीज़ कहते सुने जाते हैं भाई साहब चलता फिरता मेडिसन बोक्स, मेडिसन कैबनिट बनके रह गया हूँ , बस दवा पे दवा खाते जाओ, खाते ही जाओ. फिर भी कई बार दर्द और पीड़ा बे-तहाशा भड़कती है इतना के एक दम से बे-जान, बेदम  कर देती है हफ्तों के लिए. दर्द को भले सुन्न कर देतीं हैं ये दवाएं लेकिन मुकम्मिल स्वास्थ्य लाभ मिलना ना-मुमकिन सा ही हो जाता है. विशेष कुछ हो नहीं पाता है.

दुर्घटना के बाद गर्दन में एंठन अकड़ाव बना रह सकता है. कंधों, बाजुओं और कलाइयों, टांग और कमर यहाँ तक की चेहरा  भी पैन और स्पेज्म की गिरिफ्त में हुआ रह सकता है. सदमे के बाद Scoliosis (sideways twisting of the spine) के  मामले भी काइरोप्रेक्टर की  पकड़ में आये हैं. और कई मर्तबा तो personality change के मामले भी पकड में आयें हैं. मरीज़ के रिश्ते नाते दोस्त खुद बतलाते मिलते हैं, दुर्घटना से पहले यह ऐसा था ही नहीं.

अकसर यही स्थिति कहलाती है- "post traumatic stress disorder". व्यापक होतें हैं इस स्थिति के लक्षण. इनमें शरीक रह सकतें हैं अनिद्रा, मानसिक अवमंदन, बेचैनी, अवसाद, कब्जी, अतिसार, सिरदर्द, श्रवण और बीनाई (विजन) सम्बन्धी समस्याएं, एपिलेप्सी (अपस्मार, कभी कभार आम भाषा में जिसे मिरगी का रोग भी कह देतें हैं), एलार्जीज़ तरह तरह की (प्रत्युर्जात्मक प्रतिक्रियाएं) और चक्कर पे चक्कर आते रहना.

This  is sometimes referred as "post traumatic stress disorder"  and may include insomnia, mental dullness, nervousness, anxiety, memory problems, depression, constipation,diarrhea, headache,hearing, vision problems and even epilepsy, allergies and dizziness.

subluxations के दुर्घटनाके भी  बाद बने रहने पर खासकर बालकों में  दमा, बेड वोटिंग, बेदमी, मिचली आना, मूत्र त्याग में अ-संयम, पेशाब  न रोक पाना बाथ रूम, टॉयलिट, रेस्टरूम तक भी. मूत्रमार्ग का संक्रमण जैसी समस्याएं भी बनी रह सकतीं हैं. हाइपरएक्टिविटी के लक्षण भी बच्चों में दिख सकतें हैं, बीनाई सम्बन्धी समस्या, और ब्लाइंडनेस भी सिर उठा सकती है. इस प्रकार के अनेक मामले काइरोप्रेक्टि चिकित्सा से पूरी तरह  ठीक किए गए हैं.

"You'll Have To Live With It"
यह  एक दुर्भाग्य पूर्ण स्थिति है कि खासकर ऑटोएक्सीडेंट के (सडक दुर्घटना) तकरीबन आधे मामले कभी भी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाते बावजूद तमाम मेडिकल चिकित्सा और ओर्थोपीडिक केयर के. दर्द, अक्षमता और कई अन्य कमियाँ शेष रह जाती हैं उम्र भर के लिए. काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा इनमे  से बहुतों   की कितनी ही परेशानियों से निजात दिलवा सकती पूरी तरह, कम से कम आंशिक तौर पर भी वह भी कम समय में बिना कोई और दवा-दारु लिए, बिना शल्य कराए आपकी पीड़ा का निवारण प्रस्तुत करती है.

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही उपयोगी जानकारी। कई बार शरीर के भीतरी भागों की संरचना में मामूली सा परिवर्तन बड़ी पीड़ा का कारण बन जाता है। ये परिवर्तन आधुनिक मशीनों की पकड़ से बाहर होते हैं इसलिये इनका सही निदान नहीं हो पाता। एल.टी.टी. ऑपरेशन के बाद शायद ही कोई महिला होगी जिसे पीठ दर्द की शिकायत न हुयी हो। परंतु इस पीड़ा का कोई इलाज़ आधुनिक चिकित्सा के पास नहीं है। काइरोप्रेक्टिक से ऐसी पीड़ाओं से मुक्ति पायी जा सकती है।

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  2. Nice.

    आप चिंता, नफ़रत और ग़ुस्सा छोड़ दीजिये, आपके शरीर में फ़ालतू एसिड नहीं बनेगा. एसिड की ज़्यादती से होने वाली बीमारियों से आप बचे रहेंगे। आप दुश्मनों को माफ़ कर दीजिये. आपका मन निर्मल हो जाएगा. सारी मनोग्रंथियाँ विलीन हो जायेंगी तो आपके मनोरोग भी चले जायेंगे। आप लोगों से मुस्कुरा कर मिलें, हर जगह आपका स्वागत किया जाएगा. आप नौकरी कर रहे हैं तो स्किल्ड लेबर है. आप हमेशा तंगदस्त और क़र्ज़दार रहेंगे. ५० साल में आप जो बचायेंगे उसे आप से किसी अस्पताल में ५० दिन में ले लिया जाएगा. आप अपना छोटा सा बिजनेस शुरू करें. समय के साथ वह बढ़ता जाएगा और दो चार साल में ही आप धनवान हो जायेंगे.

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