गुरुवार, 6 सितंबर 2012

एक साल बाद फिर सबकुछ वही हुआ


रामदेव, अन्ना हजारे, मनमोहन सिंह, कपिल सिब्बल, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस.... इन सब चरित्रों को लेकर वरिष्ठ कार्टूनिस्ट मंजुल और सतीश ने अपने हाथ के जादुई स्पर्श से अदभुत कार्टून गढ़ डाले हैं. किन्हीं मित्र के सौजन्य से ये कार्टून भड़ास4मीडिया को मिले तो इन्हें एक साथ परोसने-दिखाने से भड़ास की टीम खुद को रोक न सकी.
फैसला लिया गया कि इन कार्टूनिस्टों से बिना उनकी अनुमति लिए, उनके कार्टूनों को भड़ास के पाठकों के सामने रख दिया जाए. आप लोग देखिए, और बताइए कि कितना मस्त हुए... पर कुछ त्रस्त भी हुए होंगे.. इसलिए कि कितने त्रासद हालात हैं... करप्शन के खिलाफ कंपेन चलाने वालों को कितना दुख झेलना पड़ रहा है... कितने लांछन और उलाहने सहने पड़ रहे हैं... मंजुल और सतीश ने आंदोलन की संवेदना, आंदोलन के तमाशे, सत्ता की साजिशों-शेखियों... बहुत कुछ को कार्टून के जरिए उकेरा है... कार्टूनिस्टों का विजन, कोशिश कितना कनवे हो पाया आप तक, जरूर बताइएगा, नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए कमेंट करके. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया








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