बुधवार, 12 सितंबर 2012

रांची एक्सप्रेस / सबसे पहले तैयार की पत्रकारिता की नयी आधारभूमि:

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श्रवण कुमार गोस्वामी


रांची एक्सप्रेस ने रांची और झारखंड के लोगों में न केवल अखबार पढ़ने की आदत डाली बल्कि, देश-दुनिया के संदर्भ में उनकी जागरूकता बढ़ायी, एक रुझान उत्पन्न किया। एक अखबार के मौलिक धर्म औरर् कत्तव्य से कहीं आगे बढ़कर इसने अनेक लोगों को जहां पत्रकारिता सिखायी वहीं दूसरी ओर देश-दुनिया की गतिविधियों को अपने पन्नों में समेटकर बिहार व झारखंड के लोगों को बताया कि हम सभी को आगे बढ़ने का उतना ही अधिकार है जितना शेष दुनिया के लोगों का। इस अखबार ने महत्वाकांक्षी लोगों के सपनों और अरमानों में पंख लगाये। यह इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। आज रांची एक्सप्रेस में पत्रकारिता की एबीसी सीखकर निकले लोग भारत और दुनिया के हर कोने में मिलेंगे। ऐसी शानदार उपलब्धि के साथ अपने 50वें वर्ष में प्रवेश करते वक्त रांची एक्सप्रेस की प्रशंसा, शब्दो से परे हैं। ऐसी उपलब्धियां के साथ 50वें वर्ष में प्रवेश करनेवाले अखबार ऊंगलियों पर गिने जाने लायक हैं। जबकि झारखंड में तो यह निर्विवाद रूप में ऐसी अकेला अखबार है।
1963 में रांची में कोलकत्ता के विश्वमित्र, सन्मार्ग, दैनिक लोकमान्य, जैसे समाचार पत्र सुबह 9 बजे के बाद मिलते थे जबकि पटना के आर्यावत, प्रदीप, इंडियन नेशनल, सर्चलाईट आदि शाम 5 बजे के बाद। समाचारों के मामले में रांची व झारखंड की उनके बड़ी उपेक्षा होती थी। उसी दौर में रांची एक्सप्रेस का जन्म हुआ। सीताराम मारू जी ने हौसला दिखाया और उन्हें बलबीर दत्त जैसे सुयोग्य संपादक का संबल मिला। तब साधनों के अभाव के बावजूद पहले साप्ताहिक और बाद में दैनिक के रूप में रांची एक्सप्रेस ने अनेक कीर्तिमान गढ़े। आज भले ही औद्योगिक घराने व अखबारी प्रबंधन के महारथियों की नजर में रांची एवं झारखंड देश के उर्वर क्षेत्रों में से एक हो पर इसकी आधार भूमि यदि तैयार करने का सारा श्रेय रांची एक्सप्रेस को ही जाता है। यह समाचार पत्र अनेक परेशानियों से दो चार होकर आगे बढ़ा। रांची एक्सप्रेस को बिहार का पहला फोटो कंपोजिंग अखबार होने का भी श्रेय है। तब वरिष्ठ अधिकारियों राजनीतिक, नेताओं, व्यापारियों प्रोफेशनल लोगों किसानों, छात्र-छात्राओं, गृहणियों से लेकर मजदूरों-रिक्शा चालकों तक के बीच रांची एक्सप्रेस की तूती बोलती थी।
पिछले 32 वर्षों से प्रदान किये जा रहे राधाकृष्ण साहित्यिक पुरस्कार ने रांची एक्सप्रेस की गरिमा बढ़ायी। रांची एक्सप्रेस द्वारा न केवल अपने पाठकों बल्कि आम लोगों की सेवा करने की लंबी परंपरा है, अनोखी कहानी है। ‘रांची एक्सप्रेस’ अब तक अपेक्षाओं पर खरा प्रमाणित हुआ है लेकिन नयी परिस्थितियों में पाठको व समाज की जरूरतों के मद्देनजर स्वयं को निरंतर अपग्रेड करते हुए आगे बढ़ते रहने की जरूरत है। यही वक्त का तकाजा है।

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