शनिवार, 22 सितंबर 2012

कमर वहीद नकवी की मदद से हिन्दी सुधारें

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सिंहावलोकन :
शरद सिंह जी ने पूछा है कि सिंहावलोकन का अर्थ क्या है और इसका कहाँ और कैसे प्रयोग होता है. जवाब है:
सिंहावलोकन का अर्थ होता है सिंह का दृष्टिपात. यानी जैसे सिंह पहले पीछे देख कर फिर आगे देखता है और फिर आगे चलता है, उसी तरह पीछे का जायज़ा लेकर फिर आगे की ओर देखनायही सिंहावलोकन है. किसी विषय की पृष्ठभूमि पर दृष्टि डाल कर फिर आगे अवलोकन करना--- यही सिंहावलोकन है.
सिवा या सिवाय :
विनीत क...
ुमार जी का सवाल है कि सिवा सही है या सिवाय? सही है सिवा.
लाश और शव :
सैयद उम्र ने पूछा है कि लाश और शव में क्या अन्तर है और इनमें से क्या लिखना बेहतर है? जवाब है:
अपने वाक्य में आप "लाश और शव"---इन शब्दों के निकट क्या शब्द लिख रहे हैं, इस पर निर्भर करेगा कि आप इनमें से कौन-सा शब्द चुनेंगे. सामान्य नियम है कि दो निकटतम शब्दों में भाषागत तालमेल रखा जाये. जैसे क्षत-विक्षत लाश के बजाय क्षत-विक्षत शव लिखना ज़्यादा बेहतर होगा क्योंकि पहले नमूने में क्षत-विक्षत (हिन्दी) और लाश (उर्दू, मूलतः फ़ारसी) का अटपटा मेल हो रहा है, जबकि दूसरे नमूने यानी क्षत-विक्षत शव में सभी शब्द हिन्दी के हैं.


इंजीनियरों या इंजीनियर्स
समीर वाजपेयी ने पूछा है कि "इंजीनियरों" लिखना चाहिए या "इंजीनियर्स?"
समीर जी, आपने बहुत सही सवाल किया. अंग्रेजी के शब्दों को अगर हिन्दी में लिया जाय तो उनके बहुवचन बनाने में हिन्दी व्याकरण के नियम लिए जायें या अंग्रेजी के--- इस बारे में अच्छा- ख़ासा मतभेद है और आजकल कई अख़बार और टी वी चैनल "इंजीनियर्स" और "स्टुडेंट्स" आदि लिख रहे हैं. मेरे विचार से यह बिलकुल ग़लत है. कोई भी...
भाषा संसार की किसी भी भाषा से शब्द ले सकती है और लेती है, लेकिन उन्हें अपने व्याकरण में ही ढालती है. उदहारण के तौर पर "पंडित" और "बाज़ार" जैसे शब्द अंग्रेजी में आज धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे हैं, लेकिन क्या आप यह कल्पना कर सकते हैं कि अंग्रेजी में “PUNDITS” के बजाय “PUNDITON” लिखा जाय. इसी तरह "रोटी", "जुगाड़" और "क़मीज़" जैसे शब्द भी हाल में अंग्रेजी में शामिल हुए हैं. रोटी और जुगाड़ तो हिन्दी के शब्द हैं और क़मीज़ शब्द (मूल अरबी क़मीस) हिन्दी से होते हुए अंग्रेजी में शामिल हुआ है, लेकिन अंग्रेजी में तो इन्हें अंग्रेजी व्याकरण के हिसाब से ही इस्तेमाल किया जायेगा न कि हिन्दी या अरबी व्याकरण के अनुसार. क़मीज़ शब्द हिन्दी में आया भले अरबी से होगा, लेकिन हिन्दी में तो उस पर हिन्दी का ही व्याकरण लागू होगा. इसलिए मेरा मानना है कि शब्द कहीं से आये, हिन्दी में उसे हिन्दी व्याकरण के अनुसार चलना चाहिए.

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कहाँ लगेगा नुक़्ता?

ये समस्या बहुत लोगों की है कि उर्दू और अंग्रेज़ी के शब्दों में कहाँ नुक़्ता लगता है और कहाँ नहीं. अकसर ऐसा होता है कि जहाँ नुक़्ता लगना चाहिए, वहाँ तो लोग लगाते नहीं और जहाँ नुक़्ते की ज़रूरत नहीं, वहाँ इसे लगा दिया जाता है. आइए आज इसी पर बात करते हैं.

सबसे पहले तो यह बात नोट करें कि नुक़्ता संस्कृत या हिन्दी के मूल शब्दों में नहीं लगता क्योंकि संस्कृत या हिन्दी में वैसी ध्व...
नियाँ हैं ही नहीं. कृपया इसमें हिन्दी के "ड़" और "ढ़" को मत गिन लीजिएगा. ये दोनों स्वतंत्र अक्षर हैं और इनके नीचे लगनेवाली बिन्दी के बिना इनका अस्तित्व सम्भव नहीं. इनके नीचे बिन्दी ऐसे ही लगेगी, जैसे यहाँ दिखायी गयी है.

इसलिए पहला सूत्र यह है कि सबसे पहले यह निश्चित करें कि शब्द मूल रूप से हिन्दी का है क्या? अगर उत्तर हाँ है, तो नुक़्ता लगना ही नहीं है. मैंने बहुत बार "सफल" के "फ" के नीचे लोगों को नुक़्ता लगाते देखा है, जो सरासर ग़लत है. सफल का मतलब है स+फल यानी फल सहित. फल में कैसे नुक़्ता लगेगा? अब मुझे यह नहीं मालूम कि ZUTSHI सरनेम का मूल क्या है. इसमें नुक़्ता लगेगा और इसे "ज़ुत्शी" लिखा जायेगा.

अब अंग्रेज़ी शब्दों की बात. ध्यान दें कि केवल उन्हीं अंग्रेज़ी शब्दों में नुक़्ता लगने की सम्भावना हो सकती है, जिनमें F, PH या Z आते हों. F और PH के लिए फ के नीचे और Z के लिए ज के नीचे नुक़्ता लगा दीजिए. ध्यान रखें कि अंग्रेज़ी में "फ" का उच्चारण है ही नहीं, इसलिए वहाँ जब भी आयेगा "फ़" ही आयेगा. जिन अंग्रेज़ी शब्दों में Z हो, वहाँ "ज" के नीचे नुक़्ता लगा कर "ज़" लिखें. बस.

उर्दू में नुक़्ता वाले उच्चारण सिर्फ़ ये पाँच हैं: क़, ख़, ग़, ज़, और फ़. इसलिए आपको केवल इन पाँचों पर ध्यान केन्द्रित करना है और काॅपी में इन पाँच कैरेक्टरों से बने उर्दू शब्दों को तौलना है कि यहाँ नुक़्ता लगेगा या नहीं. अब अगर ऐसे शब्द व्यक्तियों या स्थानों के नाम हैं और आपके पास समाचार की मूल काॅपी अंग्रेज़ी में (जैसे PTI आदि के समाचार) आयी है तो काम थोड़ा आसान हो जाता है. इसलामी देशों के जिन नामों में अंग्रेज़ी का Q अक्षर आता हो, वहाँ Q के स्थान पर नुक़्ते वाला "क़" लगायें. जैसे : QAZI क़ाज़ी, QAIDA क़ायदा, QAISER क़ैसर, TARIQ तारिक़, SAQLAIN सक़लैन, QUTUB क़ुतुब, IRAQ इराक़. लेकिन इसके एकाध अपवाद भी हैं, जैसे पाकिस्तान का QUETTA शहर, जिसका उच्चारण है क्वेटा और इसमें "क" के नीचे नुक़्ता नहीं लगता.
दूसरा उच्चारण है "ख़" का. अंग्रेज़ी में प्रायः इस उच्चारण को KH से व्यक्त करते हैं. जैसे KHAN ख़ान, AKHTAR अख़्तर, BAKHT बख़्त, KHUSHBU ख़ुशबू, KHADIM ख़ादिम. इसका अपवाद है KHAR. पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिना रब्बानी का सरनेम है खर, जिसे अंग्रेज़ी में KHAR ही लिखा जायेगा. लेकिन उर्दू में एक और शब्द है ख़ार, इसे भी अंग्रेज़ी में KHAR ही लिखेंगे. इसी तरह, एक नाम है निकहत. अंग्रेज़ी में इसे NIKHAT ही लिखेंगे, इसलिए इसे "निख़त" या "निखत" न लिखें.
तीसरा उच्चारण है "ग़" का, जिसे अंग्रेज़ी में GH से व्यक्त करते हैं: जैसे GHULAM ग़ुलाम, GHAZANFAR ग़ज़नफ़र, GHAUS ग़ौस, GHALIB ग़ालिब, GHAZALA ग़ज़ाला, GHAZAL ग़ज़ल, SAGHIR/ SAGHEER सग़ीर, ASGHAR असग़र. ध्यान रखें कि GH के लिए "ग़" केवल नामों के लिए ही लिखा जायेगा.
चौथा उच्चारण है "ज़" का, जिसके लिए अंग्रेज़ी के Z अक्षर का प्रयोग होता है. जैसे ZAIN ज़ैन, ZOHRA ज़ोहरा, ZULFIQAR ज़ुल्फ़िक़ार, HAZRAT हज़रत, AZHAR अज़हर, MUZAFFAR मुज़फ़्फ़र.
पाँचवाँ और अन्तिम उच्चारण है "फ़" का. ध्यान रखें कि उर्दू नामों में केवल F ही "फ़" का उच्चारण देता है. PH से उर्दू में "फ" का उच्चारण ही होगा और नुक़्ता नहीं लगेगा. इसलिए AFROZ अफ़रोज़, FIRDAUS फ़िरदौस, FASIH/FASEEH फ़सीह, FAISAL फ़ैसल, FAIZAL फ़ैज़ल, TUFAIL तुफ़ैल लिखा जायेगा.
उम्मीद है कि इससे उर्दू नामों में नुक़्ते की समस्या सुलझ जायेगी.

"इनाम" और "ईमान"; "इराक़" और "ईरान"
सर्वेश जी ने पूछा है कि "इनाम" सही है या "ईनाम" और "इनामी" सही है या "ईनामी"?
मैंने देखा है कि अकसर लोगों को यह दुविधा होती है कि "इनाम" में छोटी "इ" लगेगी या बड़ी.
"
इनाम" और "इनामी" में छोटी "इ" लगेगी.
"
ईमान" और "ईमानदार" में बड़ी "ई" लगती है.
इसी तरह, अकसर लोग "इराक़" और "ईरान" को लेकर दुविधाग्रस्त होते हैं कि इनमें छोटी "इ" लगेगी या ब ड़ी? कारण यह है कि अंग्रेज़ी में ये दोनों नाम लगभग एक ही तरीक़े से लिखे जाते हैं: IRAQ और IRAN. अंग्रेज़ी के कारण ऐसी दिक़्क़तें बहुत जगह आती हैं और इनका कोई समाधान भी नहीं है.
आप तो बस इतना याद रखें कि "इराक" में छोटी "इ" और "ईरान" में बड़ी "ई" लगेगी.

अभिषेक गर्ग ने पूछा है कि पानी "पिएँ", "पियें' और "पीयें" में कौन-सा सही है. इस पर विनय सिंह ने लिखा कि "पीयें" सही है. विनय जी "पीयें" बिलकुल सही नहीं है. दरअसल, मैं इस विषय पर लिखने ही वाला था कि यह मुद्दा उठ गया.
हिन्दी में जब दीर्घ "ई" का "य" से संयोग होता है तो आमतौर पर "ई" का उच्चारण लघु यानी "इ" हो जाता है. जैसे निम्नलिखित कुछ बहुवचन देखिए.
मेहरबानी से मेहरबानियाँ, मेहरबानियों,
सावधानी से...
सावधानियां, सावधानियों,
सीढ़ी से सीढ़ियाँ, सीढ़ियों,
शादी से शादियाँ, शादियों,
दवाई से दवाइयां, दवाइयों,
खाई से खाइयाँ, खाइयों,
भाई से भाइयों आदि.
इसी तरह पानी पीना से "पिया", "पिये", "पियें" और "पियेंगे" बनेगा. जैसे, कृपया पानी पियें, या क्या आप पानी पियेंगे?
दी (देना के अर्थ में) से दिया, दिये बनेगा जैसे : मैंने उसको पानी दिया, या क्या आपने उसे रुपये दे दिये?
लेकिन इस नियम के कुछ अपवाद भी हैं, जैसे दीया (दीपक), घीया (कद्दू). ध्यान रहे कि यहाँ "दीया" का अर्थ दीपक से है, देने की क्रिया से उसका कोई लेना-देना नहीं है.


परसों एक हिन्दी चैनल पर महाराष्ट्र के शहर DHULIYA का नाम चल रहा था---"धुलिया". सही नाम "धुलै" है. ज़्यादातर हिन्दी चैनलों और अखबारों में "धुलै" को "धुलिया" या "धूलिया" लिखा जाता है, जो ग़लत है. इसी तरह महाराष्ट्र के दो और शहरों के नाम अकसर ग़लत लिखे जाते हैं. "सातारा" को प्रायः "सतारा" और "सोलापुर" को "शोलापुर" लिखा जाता है, जो ग़लत है. इनके सही नाम हैं --- "सातारा" और "सोलापुर". यही नहीं, "आम्बेडकर"...
, "गावसकर" और "तेंडुलकर" भी हिन्दी में ग़लत ढंग से क्रमशः "अम्बेडकर", "गावस्कर" और "तेन्दुलकर" लिखे जाते हैं. हमारे यहाँ अखबारों और टीवी चैनलों के न्यूज़ रूम की विडम्बना यह है कि जिन नामों के सही उच्चारण लोगों को पता नहीं हैं, उनके बारे में सही जानकारी हासिल करने का कष्ट कोई करता ही नहीं है. और अगर बता भी दिया जाय तो ग़लती सुधारने की तकलीफ़ भी कोई उठाना नहीं चाहता. और यह बात सिर्फ हिन्दी के पत्रकारों पर ही लागू नहीं होती. मैं आज से बत्तीस साल पहले जब १९८० में ट्रेनी हो कर नवभारत टाइम्स, मुंबई पहुंचा, तो कुछ महीनों बाद मेरी नज़र एक मराठी अखबार पर पड़ी, जिसमें एक शहर का नाम "मीरत" लिखा हुआ था. (अंग्रेजी में स्पेलिंग होती है: MEERUT). मुझे बड़ी हैरानी हुई. मैंने उनके एक वरिष्ठ सम्पादक से कहा कि यह खबर तो यू. पी. के मेरठ शहर की है लेकिन आप के अखबार में "मीरत" छपा है. इस ग़लती को सुधारा जाना चाहिए. मुझे जवाब मिला कि हम जानते हैं कि सही नाम मेरठ है लेकिन बरसों से हम इसे "मीरत" लिखते आ रहे हैं, इसलिए अब इसे नहीं बदला जा सकता. अजीब तर्क था. ग़लती का जब पता चल जाय, उसे सुधार लेने में क्या हर्ज है?
वैसे ऐसी ज़्यादातर ग़लतियों का बड़ा कारण उनकी अंग्रेजी स्पेलिंग भी हैं. अंग्रेजी के टीवी चैनलों में होनेवाले ग़लत उच्चारण को प्रायः हिन्दीवाले आँख मूँद कर उठा लेते हैं. अब जैसे "कसाब" (KASAB) को ही लें. अंग्रेजी के लोग उसे "कसब" ही कह कर पुकारते हैं, जबकि सबको मालूम है कि सही उच्चारण "कसाब" है.

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