सोमवार, 10 सितंबर 2012

अब सेलेब्रिटी भी ‘मीडिया’ हैं! प्रमोद कृष्ण खुराना


  
           --  पी. के. खुराना

कई  आविष्कार युगांतरकारी होते हैं। इंटरनेट, सोशल मीडिया और स्मार्टफोन ऐसे ही युगांतरकारी उत्पाद हैं जिन्होंने आज मीडिया की परिभाषा को उलट-पलट कर दिया है। हम जानते हैं कि इंटरनेट के बाद ब्लॉग के प्रादुर्भाव ने मीडिया की रूपरेखा बदल दी।

अभी कुछ वर्ष पूर्व तक प्रचार के लिए मीडिया का उपयोग होता था। राजनीतिज्ञ, अभिनेता और कंपनियां प्रचार अपने प्रचार के लिए मीडिया पर आश्रित थे। तब मीडिया की परिभाषा में अखबार, रेडियो और टीवी ही आते थे। परंतु, पहले न्यूज़ वेबसाइट्स और फिर ब्लॉग की सुविधा के बाद तो एक क्रांति ही आ गई है। न्यूज़ वेबसाइट्स ने छपाई, ढुलाई और कागज का खर्च बचाया, तो ब्लॉग ने शेष खर्च भी समाप्त कर दिये। ब्लॉग पर तो अपने विचारों का प्रकाशन लगभग मुफ्त में संभव है। अब कोई भी व्यक्ति लगभग मुफ्त में अपना ब्लॉग बना सकता है, ब्लॉग में मनचाही सामग्री प्रकाशित कर सकता है और लोगों को ब्लॉग की जानकारी दे सकता है, अथवा सर्च इंजनों के माध्यम से लोग उस ब्लॉग की जानकारी पा सकते हैं। स्थिति यह है कि ब्लॉग यदि लोकप्रिय हो जाए तो पारंपरिक मीडिया के लोग ब्लॉग में दी गई सूचना को प्रकाशित-प्रसारित करते हैं। अब पारंपरिक मीडिया इंटरनेट के पीछे चलता है।

यही नहीं, मोबाइल फोन और इंटरनेट के संगम ने भी वेबसाइटों और ब्लॉगों के भाव बढ़ाये हैं। तकनीक में विकास के कारण अब इंटरनेट का प्रसार भी बढ़ रहा है और अब भारतवर्ष में वेबसाइटों के निष्ठावान पाठकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। यह प्रसन्नता की बात है कि पारंपरिक मीडिया ने अपने आपको बदलते ज़माने के हिसाब से तैयार करना शुरू कर दिया है और अब लगभग हर अखबार और चैनल की वेबसाइट भी है तथा ज्यादातर पत्रकारों के अपने-अपने ब्लॉग भी हैं।

इंटरनेट के बाद जब सोशल नेटवर्किंग साइट्स का ज़माना आया तो प्रचार चाहने वालों ने सोशल मीडिया को अपने संदेशों का माध्यम बनाना शुरू कर दिया। इसी दौरान कुछ बड़े राजनीतिज्ञों, अभिनेताओं, गायकों, निर्देशकों आदि कलाकारों तथा अन्य प्रसिद्ध व्यक्तियों ने फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से लोगों से जुडऩा शुरू किया। शुरू में तो इन सेलेब्रिटी लोगों के ब्लॉग और ट्वीट की प्रसिद्धि इसलिए भी हुई कि उसमें व्यक्त विचारों को पारंपरिक मीडिया ने भी छापा तथा ज्यादा से ज्य़ादा लोगों को सेलेब्रिटीज़ ब्लॉग एवं ट्विटर एकाउंट की जानकारी मिली। पर अब स्थिति बदल गई है और सेलेब ब्लॉग्स तथा ट्विटर एकाउंट्स खुद ही माध्यम बन गए हैं और सोशल मीडिया की मार्फत कुछ प्रसिद्ध लोग भी ‘मीडिया’ की श्रेणी में आ गए हैं। आइए, इसे ज़रा विस्तार से समझें।

यह सोशल मीडिया का कमाल था कि ‘कोलावरी डी’ जैसा एक सामान्य गाना अत्यंत प्रसिद्ध हो गया। बेचारे शशि थरूर ने अपने ट्विटर एकाउंट पर ‘कैटल क्लास’ का जिक्र करके कुर्सी गंवा ली। सोशल मीडिया पर चलाए गए विभिन्न प्रचार अभियानों ने कई उत्पादों की बिक्री बढ़ाई है।

एक अंग्रेजी अखबार के साप्ताहिक संस्करण में प्रकाशित रिपोर्ट के अ��ुसार आज भारत में इंटरनेट का प्रयोग करने वाले लोगों की संख्या टीवी सेटों की संख्या से भी बढ़ गई है। भारतवर्ष में फेसबुक की पहुंच दूरदर्शन सहित किसी भी टीवी चैनल से ज्य़ादा है। देश में यूट्यूब के प्रयोक्ताओं की संख्या किसी भी अंग्रेजी चैनल से ज्य़ादा है। यह सोशल मीडिया का एक पहलू है।

सोशल मीडिया का दूसरा पहलू भी ऐसा ही अजब-गजब है। तिरुअनंतपुरम के प्रसिद्ध सांसद श्री शशि थरूर का ब्लॉग भारत में सबसे ज्य़ादा पढ़ा जाने वाला ब्लॉग है और इसके पाठकों की संख्या 13 लाख के आसपास है जबकि गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ब्लॉग के पाठकों की संख्या 5 लाख से कुछ ही कम है और श्रीमती किरन बेदी के ब्लॉग के पाठकों की संख्या पौने चार लाख के  लगभग है। प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन और नायिका प्रियंका चोपड़ा को ऑनलाइन ‘फॉलो’ करने वाले प्रशंसकों की संख्या बीस-बीस लाख है, जबकि शाहरुख खान भी 18 लाख प्रशंसकों की गिनती के साथ ज्य़ादा पीछे नहीं हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि कभी शाहरुख खान फिल्मफेयर के 30,000 पाठकों तक पहुंचने के लिए फिल्मफेयर के मोहताज थे, आज फिल्मफेयर शाहरुख खान के 18 लाख ऑनलाइन प्रशंसकों तक पहुंचने के लिए शाहरुख खान की मोहताज है। बहुत से और भी मीडिया घरानों के प्रकाशनों तथा सेलेब्रिटी ब्लॉगरों की स्थिति ऐसी ही है, यानी अब सेलेब्रिटी ब्लॉगरों को जनसामान्य तक पहुंचने के लिए पारंपरिक संचार माध्यमों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन संचार माध्यमों को जनसामान्य तक पहुंचने के लिए सेलेब्रिटी ब्लॉगरों की आवश्यकता है। स्थिति का यह उलटफेर इंटरनेट, सोशल मीडिया और स्मार्टफोन की वजह से संभव हुआ है।

हाल ही में एक रिपोर्ट यह भी आई थी कि भारत में मोबाइल फोन के ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या बहुत बड़ी है जो मोबाइल फोन का प्रयोग तो करते हँ पर उनके घर में शौचालय नहीं है और नित्यकर्म से निवृत्ति के लिए वे खुले में जाने के लिए विवश हैं। जैसे-जैसे मध्यवर्ग का विस्तार हो रहा है, मोबाइल फोन धारकों की संख्या बढ़ती जा रही है। मोबाइल फोन सस्ते होते जा रहे हैं और स्मार्टफोन अब एक आम चीज़ हैं। अब तो बहुत से 3-जी कंपैटिबल फोन भी इतने सस्ते हैं कि हर कोई उन्हें खरीद सकता है। इसके कारण भी इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है। सोशल मीडिया के इस उपभोग का ही परिणाम है कि अब प्रसिद्ध व्यक्तियों के ऑनलाइन प्रशंसकों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि ये सेलेब्रिटी हस्तियां, ये प्रसिद्ध व्यक्ति स्वयं एक माध्यम बनकर खुद भी ‘मीडिया’ की श्रेणी में आ गए हैं। ***

NOW CELEBS ARE "MEDIA" THEMSELVES

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