मंगलवार, 11 सितंबर 2012

सूचना समाज और ई-जनसंपर्क

 

 

 

 

 

 

रविवार, अगस्त 05, 2012


ममता बनर्जी ने जब अपनी पार्टी की तरफ से एपीजे अब्दुल कलाम का नाम सामने रखा तो उन्होंने लोगो की राय जानने के लिए ई-जनसंपर्क का सहारा लिया. ऐसा ही रामदेव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगो की राय लेने और लोगो का समर्थन लेने के लिए ई-जनसंपर्क का सहारा लिया. टीम अन्ना ने भी कुछ अलग न करते हुए सूचना समाज के अंतर्गत रहकर ई-जनसंपर्क से ये जाना के लोगो का गुस्सा सरकार के खिलाफ और उनकी नीतियों के खिलाफ कितना हैं. 

शिक्षा, बिजिनेस, राजनीति, मनोरंजन के लिए ई-जनसंपर्क सबसे बेहतर माध्यम बनता जा रहा है. सूचना समाज की एक जबरदस्त शक्ति है. आज का समाज सूचना समाज बन गया है. ध्यान दें तो पता चलेगा कि आज सोचना प्रोद्योगिकी का नाम बदलकर सोचना एवं संचार प्रोद्योगिकी हो गया है. असल में ऐसा इसलिए है क्योकि एक तो तकनीकी सस्ती हुयी है और दूसरा इन्टरनेट आसानी से लोगो तक सस्ते में पहुच पा रहा है. 
जनसंपर्क के सशक्त माध्यम के रूप में जो घोडा इन्टरनेट का दौड रहा है वो किसी और माध्यम का फिलहाल नहीं है. इन्टरनेट ने तकनीकी के बाजार में अन्य माध्यमों को पीछे छोड़ दिया है. कुछ महत्वपूर्ण खासियतों के करना इन्टरनेट अव्वल है. पहला ये कि ये 24 घंटे, हफ्ते के 7 दिन और साल के 365 दिन उपलब्ध रहता है. दूसरा फीडबैक यानी प्रतिपुष्टि तुरंत प्राप्त होती है. कोई भी जानकारी, सन्देश पूरे विश्व में कही भी तुरंत पढ़ी जा सकती है. तीसरा ये बेहद कम खर्चीला है. और चौथा इसकी गति बहुत तेज है. 
एक वक्त था जब वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए या तो माइक्रोवेव बुक करना पड़ता था या सेटलाईट  का सहारा लेना पड़ता था, लाखो तक का खर्चा अत था, तब जाकर दो पक्ष आपस में जुड पाते थे. लेकिन इन्टरनेट ने आज ये माहौल बना दिया है कि वेव कैमरा और कुछ सॉफ्टवेर से दो लोग, मामूली सा खर्च करके, हज़ारो किलोमीटर दूर होने पर भी, वर्तालाप कर सकते हैं, जैसे आमने सामने बैठ कर बातचीत कर रहे हों. बस यही से ई-जनसंपर्क ने अपनी जड़ें ज़माना शुरू कर दिया और आज ये स्थिति है कि अगर आप व्यस्तता के कारण किसी आंदोलन या कसी सेमीनार में नहीं जा सके तो विडियो कांफ्रेंसिंग से लाइव टेलेकास्ट देख सकते हैं.
ई-जनसंपर्क का सबसे बड़ा फायदा आम जन को हुआ है हालांकि ग्रामीण लोग आज भी इन सब से वंचित हैं. क्योकि उनके पास एक तो साधन कम हैं और इसके अलावा ज्ञान की कमी उन्हें और पिछडा बना देती है. जबकि जागरूकता की  सबसे ज्यादा जरूरत इन ग्रामीण वर्ग को ही है. 
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में ये घोषणा की है कि वे 12वीं पास छात्राओं को लैपटॉप देगी. ये एक सुनहरा मोका होगा उन भाग्यशाली छात्राओं के लिए क्योकि लैपटॉप से इन्टरनेट के माध्यम से वे अपने भविष्य से जुडी शैक्षिक जानकारी हांसिल कर सकेंगी और साथ में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा में क्या बदलाव हो रहे हैं उसकी ताज़ा तरीन जानकारी भी मिलेगी जो पहले उन्हें घर बैठे नहीं मिल सकती थी. इतना ही नहीं वे ई-जनसंपर्क का हिस्सा बनकर देश की उन्नति के लिए भी कदम उठा सकेंगी. 
असल में ई-जनसंपर्क ने आम आदमी को सीधे जवाबदेही ऑथोरिटी तक पहुचाया है. और अब सरकार भी अपनी जिम्मेदारियों से नहीं मुकर पाती जैसा कि पहले होता रहा है. अब तो कोई घटना घटने ही लाखो सुझाव सरकार को घंटे भर के अंदर मिल जाते हैं तथा मिनट भर में जनता सरकार को सीख भी दे देती है. 
हम आज सूचना समाज में रह रहे हैं. जब व्यक्ति घर से टीवी और अखबार पढ़ कर निकलता है तो उसके हाथ में एक मोबाइल होता है ताकि इस बीच की किसी भी प्रकार की घटना से अपडेट रह सके. तभी तो जब ओलंपिक में साइना नेहवाल कांस्य पदक और विजय कुमार रजत पदक जीतते हैं तो हमे जानने के लिए सुबह के अखबारों को पढ़ने की जरूरत नहीं होती, बल्कि रात में ही मोबाइल फोन में एक मेसेज आ जाता है कि देश की झोली में एक और पदक गिरा. 

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