गुरुवार, 9 अगस्त 2012

श्वेत पत्र: सरकार को पता नहीं, कितना है काला धन


 सोमवार, 21 मई, 2012 को 17:46 IST तक के समाचार
प्रणब मुखर्जी (फाइल फोटो)
प्रणब मुखर्जी ने बजट पेश करते हुए श्वेत पत्र लाने की घोषणा की थी
भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी प्रणब ने सोमवार को संसद के निचले सदन लोकसभा में काले धन पर श्वेत पत्र जारी किया.
प्रणब मुखर्जी ने इस रिपोर्ट के जरिए अवैध तरीक़े से विदेशों में जमा भारतीय धन की रोकथाम और उन्हें देश में वापस लाने के लिए सरकार के जरिए उठाए गए कदमों और आगे की योजनाओं की जानकारी संसद को दी.
कुल 97 पेज के इस श्वेत पत्र में किसी का नाम नहीं लिया गया है और ना ही इस बारे में कोई जानकारी है कि दरअसल कितना काला धन विदेशों में है.सरकार ने हालाकि अन्य एजेंसियों के आकलन शामिल किए हैं.
सरकार का कहना है कि काले धन के एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट आने के कारण फिलहाल किसी का नाम नहीं लिया गया है.
रुपया
सुप्रीम कोर्ट ने काले धन को लेकर सरकार की खूब खिंचाई की है
श्वेतपत्र में वित्तीय अपराध से तेजी से निपटने के लिए ‘फास्ट ट्रैक’ अदालतों का ज़िक्र किया गया है और अपराधियों को कड़ी सज़ा देने की बात कही गई है.

लोकपाल और लोकायुक्त पर जोर

डेबिट और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए श्वेत पत्र में कर रियायतों का प्रस्ताव किया गया है ताकि लेनदेन पर नजर रखी जा सके.
काले धन की समस्या से निपटने के लिए कर छूट स्कीम विशेषकर स्वर्ण जमा स्कीम की संभावना के बारे में श्वेत पत्र में कहा गया है कि पूर्ण रूप से कर छूट के मुद्दे पर अन्य नीतिगत उद्देश्यों के आलोक में समीक्षा की आवश्यकता है.
सरकार ने इस श्वेत पत्र के जरिए इस धारणा को गलत साबित करने की कोशिश की है कि वो काले धन की समस्या से निपटने के लिए गंभीर नहीं है.
लोकपाल और लोकायुक्त जैसी संस्थाओं के बारे में श्वेत पत्र में कहा गया है कि इन संस्थाओं का जल्द से जल्द गठन होना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच तेजी से हो सके और मुजरिमों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके.
काले धन की समस्या से निपटने के लिए श्वेतपत्र की प्रस्तावना में मुखर्जी ने कहा कि उनकी सरकार ने पांच विधेयक पेश किए, जो लोकपाल विधेयक, न्यायिक जवाबदेही विधेयक, व्हिसल ब्लोअर विधेयक, शिकायत निपटान विधेयक और सार्वजनिक खरीद विधेयक हैं.
ये तमाम विधेयक संसद में विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन हैं.
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचना के आदान प्रदान के नेटवर्क का विस्तार करने से अवैध धन के सीमा पारीय प्रवाह पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
काले धन की उत्पत्ति को रोकने के लिए दस्तावेज में चार सूत्री रणनीति का सुझाव दिया गया है.
इनमें कर कानूनों के स्वैच्छिक अनुपालन के लिए अधिक रियायतें और अर्थव्यवस्था के संवेदनशील क्षेत्रों में सुधार शामिल हैं.
श्वेत पत्र में कहा गया है कि वित्तीय और रीयल इस्टेट क्षेत्र के सुधारों से दीर्घकाल में काले धन की उत्पत्ति को कम करने में मदद मिलेगी जैसा कि सोने के आयात को मुक्त करने से तस्करी को रोकने में मदद मिली है.
दस्तावेज में कहा गया कि वित्तीय नियमन को दुरूस्त करना काले धन की उत्पत्ति को रोकने के खिलाफ प्रतिरोधक तंत्र तैयार करने और लेनदेन में काले धन का पता लगाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है.
रीयल इस्टेट क्षेत्र में काले धन के प्रवाह को रोकने के लिए श्वेत पत्र में सुझाया गया है कि सरकार को राष्ट्रव्यापी डाटाबेस तैयार करना चाहिए। संपत्तियों की बिक्री पर टीडीएस शुरू करना चाहिए और इलेक्ट्रानिक भुगतान प्रणाली लगानी चाहिए.
इसके पहले सरकार ने बजट पर चर्चा के दौरान श्वेत पत्र पेश करने की बात कही थी.
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष की अगुवाई वाली आठ सदस्यीय टीम ने ये रिपोर्ट तैयार की है. सरकार ने पिछले साल इस समिति का गठन किया था जिसने इस साल के शुरू में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी.

भारत 15वें स्थान पर

श्वेत पत्र में बताया गया है कि काले धन के मामले में विश्व में भारत 15वें स्थान पर है. इस सूची के आधार पर पहले नंबर पर चीन है जबकि दूसरे स्थान पर रूस है.
भारत का कितना पैसा काले धन के रूप में विदेशों में जमा है इसको लेकर अलग-अलग लोगों या संस्थाओं की अलग-अलग राय है.
श्वेत पत्र में भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.
सरकार ने काले धन का आकलन करने के लिए तीन अलग-अलग संस्थाओं को जिम्मेदारी दी है.
उन संस्थाओं के नाम हैं नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ पब्लिक फाइनांस एंड पॉलिसी, नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फाइनांस एंड मैनेजमेंट और नेशनल काउंसिल फॉर अप्लायड इकॉनॉमिक रिसर्च.
कहा गया है कि ये संस्थाएं सितंबर 2012 तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगी.
केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के एक पूर्व प्रमुख ने कहा है कि ये रकम लगभग 500 अरब डॉलर है जबकि प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि ये रकम 27 लाख करोड़ रूपए से लेकर 77 लाख करोड़ रूपए तक हो सकती है.
बाबा रामदेव काले धन का कुछ और आंकड़ा बताते हैं.

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