मंगलवार, 14 अगस्त 2012

हिंदी न्यू मीडिया






हिंदी वेब पत्रकारिता में भारत-दर्शन की भूमिका
इंटरनेट पर हिंदी का नाम अंकित करने में नन्हीं सी पत्रिका भारत-दर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 1996 से पहली भारतीय पत्र-पत्रिकाओं की संख्या लगभग नगण्य थी। 1995 में सबसे पहले अँग्रेज़ी के पत्र, 'द हिंदू' ने अपनी उपस्थिति दर्ज की और ठीक इसके बाद 1996 में न्यूज़ीलैंड से प्रकाशित भारत-दर्शन ने प्रिंट संस्करण के साथ-साथ अपना वेब प्रकाशन भी आरंभ कर दिया। भारतीय प्रकाशनों में दैनिक जागरण ने सबसे पहले 1997 में अपना प्रकाशन आरंभ किया और उसके बाद अनेक पत्र-पत्रिकाएं वेब पर प्रकाशित होने लगी।

हिंदी वेब पत्रकारिता लगभग 15-16 वर्ष की हो चुकी है लेकिन अभी तक गंभीर ऑनलाइन हिंदी पत्रकारिता देखने को नहीं मिलती। न्यू मीडिया का मुख्य उद्देश्य होता है संचार की तेज़ गति लेकिन अधिकतर हिंदी मीडिया इस बारे में सजग नहीं है। ऑनलाइन रिसर्च करने पर आप पाएंगे कि या तो मुख्य पत्रों के सम्पर्क ही उपलब्ध नहीं, या काम नहीं कर रहे और यदि काम करते हैं तो सम्पर्क करने पर उनका उत्तर पाना बहुधा कठिन है।  
अभी हमारे परम्परागत मीडिया को आत्म मंथन करना होगा कि आखिर हमारी वेब उपस्थिति के अर्थ क्या हैं? क्या हम अपने मूल उद्देश्यों में सफल हुए हैं? क्या हम केवल इस लिए अपने वेब संस्करण निकाल रहे है क्योंकि दूसरे  प्रकाशन-समूह ऐसे प्रकाशन निकाल रहे हैं?

क्या कारण है कि 12 करोड़ से भी अधिक इंटरनेट के उपभोक्ताओं वाले देश भारत की कोई भी भाषा  इंटरनेट पर उपयोग की जाने वाली भाषाओं में अपना स्थान नहीं रखती? मुख्य हिंदी की वेबसाइटस के लाखों पाठक हैं फिर भी हिंदी का कहीं स्थान न होना किसी भी हिंदी प्रेमी को सोचने को मजबूर कर देगा कि आखिर ऐसा क्यों है! हमें बहुत से प्रश्नों के उत्तर खोजने होंगे और इनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने होंगें।
- रोहित कुमार 'हैप्पी'



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न्यू मीडिया
न्यू मीडिया और ऑनलाइन पत्रकारिता की नई माँगें
नि:संदेह न्यू मीडिया बड़े सशक्त रूप से परंपरागत प्रचलित मीडिया को प्रभावित कर रहा है। आज पत्रकारों को  न्यू मीडिया से जुड़ने के लिए नई तकनीक, आधुनिक सूचना-प्रणाली, सोशल-मीडिया, सर्च इंजन प्रवीणता और वेब शब्दावली से परिचय होना अति-आवश्यक हो गया है। केवल ब्लागिंग मात्र करने से आप संपूर्ण वेब-पत्रकार नहीं कहलाते। वेब-पत्रकारिता का क्षेत्र काफी विस्तृत है और आपको पत्रकारिता के अतिरिक्त वेब, मल्टीमीडिया, सर्च इंजन और उनकी कार्यप्रणाली व ग्रॉफिक की समझ होनी चाहिए। इन तत्वों के बिना भी आप न्यू मीडिया में काम तो कर सकते हैं परंतु एक सक्षम वेब पत्रकार के लिए इनमें प्रवीणता हासिल करना उपयोगी होगा।
आइए, देखें एक वेब पत्रकार के लिए किन-किन योग्यताओं की आवश्यकता होती है:
  • पत्रकारिता का ज्ञान
  • इंटरनेट का उपयोग
  • सर्च इंजन उपयोग में दक्षता
  • इंटरनेट इंवेस्टिगेश
  • एच टी एम एल ( html ) का आधारभूत ज्ञान
  • यदि हम हिंदी वेब पत्रकारिता में काम करना चाहते हैं तो हिंदी यूनिकोड का ज्ञान व हिंदी टंकण
  • ब्लागिंग जैसे वर्डप्रैस, गूगल ब्लाग्स इत्यादि
  • सर्च इंजन आप्टिमज़ैशन (एस सी ओ)
  • सी एम एस (कांटेंट मैनेजमैंट स्सिटम) जैसे जुमला, वर्ड प्रैस, सी एम एस एम एस इत्यादि
  • यू ट्यूब इत्यादि पर वीडियो अपलोड कैसे करे, मैटा टैग कैसे लिखे इत्यादि
  • बेसिक ग्रॉफिक का ज्ञान जैसे अडोबी फोटोशॉप पर फोटो को संपादित करना व उसे वेब के लिए तैयार करना
  • बेसिक वीडियो व ऑडीओ एडटिंग
  • पॉडकास्ट
  • आर एस एस फीड
  • सोशल नेटवर्क (फेसबुक, माई स्पेस, गूगल प्लस, ट्विटर),
  • विकिपीडिया
उपरोक्त अधिकतर योग्यताओं में यदि पूर्ण निपुणता न भी हो लेकिन इनका आधारभूत ज्ञान न होने पर वेब-पत्रकारिता का सफल होना संभव नहीं। हाँ, आप परंपरागत पत्रकारिता को ही वेब-पत्रकारिता कहते या समझते रहे तो अलग बात है।
- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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न्यू मीडिया

वेब पत्रकारिता लेखन व भाषा

वेब पत्रकारिता, प्रकाशन और प्रसारण की भाषा में आधारभूत अंतर है। प्रसारण व वेब-पत्रकारिता की भाषा में कुछ समानताएं हैं। रेडियो/टीवी प्रसारणों में भी साहित्यिक भाषा, जटिल व  लंबे शब्दों से बचा जाता है। आप किसी प्रसारण में, 'हेतु, प्रकाशनाधीन, प्रकाशनार्थ, किंचित, कदापि, यथोचित इत्यादि' जैसे शब्दों का उपयोग नहीं पाएँगे।   कारणप्रसारण ऐसे शब्दों से बचने का प्रयास करते हैं जो उच्चारण की दृष्टि से असहज हों या जन-साधारण की समझ में न आएं। ठीक वैसे ही वेब-पत्रिकारिता की भाषा भी सहज-सरल होती है।
वेब का हिंदी पाठक-वर्ग आरंभिक दौर में अधिकतर ऐसे लोग थे जो वेब पर अपनी भाषा पढ़ना चाहते थे, कुछ ऐसे लोग थे जो विदेशों में बसे हुए थे किंतु अपनी भाषा से जुड़े रहना चाहते थे या कुछ ऐसे लोग जिन्हें किंहीं कारणों से हिंदी सामग्री उपलब्ध नहीं थी जिसके कारण वे किसी भी तरह की हिंदी सामग्री पढ़ने के लिए तैयार थे। आज परिस्थितिएं बदल गई हैं मुख्यधारा वाला मीडिया आनलाइन उपलब्ध है और पाठक के पास सामग्री चयनित करने का विकल्प है।
इंटरनेट का पाठक अधिकतर जल्दी में होता है और उसे बांधे रखने के लिए आपकी सामग्री पठनीय, रूचिकर व आकर्षक हो यह बहुत आवश्यक है। यदि हम ऑनलाइन समाचार-पत्र की बात करें तो भाषा सरल, छोटे वाक्य व पैराग्राफ भी अधिक लंबे नहीं होने चाहिएं।

विशुद्ध साहित्यिक रुचि रखने वाले लोग भी अब वेब पाठक हैं और वे वेब पर लंबी कहानियां व साहित्य पढ़ते हैं। उनकी सुविधा को देखते हुए भविष्य में साहित्य डाऊनलोड करने का प्रावधान अधिक उपयोग किया जाएगा ऐसी प्रबल संभावना है।  साहित्यि क वेबसाइटें स्तरीय साहित्यका प्रकाशन कर रही हैं और वे निःसंदेह साहित्यिक भाषा का उपयोग कर रही हैं लेकिन उनके पास ऐसा पाठक वर्ग तैयार हो चुका है जो साहित्यिक भाषा को वरियता देता है।
सामान्य वेबसाइट के पाठक जटिल शब्दों के प्रयोग व  साहित्यिक भाषा से उकता जाते हैं और वे आम बोल-चाल की भाषा अधिक पसंद करते हैं अन्यथा वे एक-आध मिनट ही साइट पर रूककर साइट से बाहर चले जाते हैं।

सामान्य पाठक-वर्ग को बाँधे रखने के लिए आवश्यक है कि साइट का रूप-रंग आकर्षक हो, छायाचित्र व ग्राफ्किस  अर्थपूर्ण हों, वाक्य और पैराग्राफ़ छोटे हों, भाषा सहज व सरल हो। भाषा खीचड़ी न हो लेकिन यदि उर्दू या अंग्रेज़ी के प्रचलित  शब्दों का उपयोग करना पड़े तो इसमें कोई बुरी बात न होगी। भाषा सहज होनी चाहिए शब्दों का ठूंसा जाना किसी भी लेखन को अप्रिय बना देता है।
- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

न्यू मीडिया क्या है?
न्यू मीडिया और ऑनलाइन पत्रकारिता की नई माँगें
वेब पत्रकारिता की भाषा
न्यू मीडिया विशेषज्ञ या साधक

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न्यू मीडिया विशेषज्ञ या साधक
आप पिछले १५ सालों से ब्लागिंग कर रहे हैं, लंबे समय से फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब इत्यादि का उपयोग कर रहे हैं जिसके लिए आप इंटरनेट, मोबाइल व कम्प्यूटर का प्रयोग भी करते हैं तो क्या आप न्यू मीडिया विशेषज्ञ हुए? ब्लागिंग करना व मोबाइल से फोटो अपलोड कर देना ही काफी नहीं है। आपको इन सभी का विस्तृत व आंतरिक ज्ञान भी आवश्यक है। न्यू मीडिया की आधारभूत वांछित योग्यताओं की सूची काफी लंबी है और अब तो अनेक शैक्षणिक संस्थान केवल  'न्यू मीडिया' का विशेष प्रशिक्षण भी दे रहे हैं या पत्रकारिता में इसे सम्मिलित कर चुके हैं।
ब्लागिंग के लिए आप सर्वथा स्वतंत्र है लेकिन आपको अपनी मर्यादाओं का ज्ञान और मौलिक अधिकारों की स्वतंत्रता की सीमाओं का भान भी आवश्यक है। आपकी भाषा मर्यादित हो और आप आत्मसंयम बरतें अन्यथा जनसंचार के इन संसाधनों का कोई विशेष अर्थ व सार्थक परिणाम नहीं होगा।
इंटरनेट पर पत्रकारिता के विभिन्न रूप सामने आए हैं -
  • अभिमत - जो पूर्णतया आपके विचारों पर आधारित है जैसे ब्लागिंग, फेसबुक या टिप्पणियां देना इत्यादि।
  • प्रकाशित सामग्री या उपलब्ध सामग्री का वेब प्रकाशन  - जैसे समाचारपत्र-पत्रिकाओं के वेब अवतार।
  • पोर्टल व वेब पत्र-पत्रकाएं (ई-पेपर और ई-जीन जिसे वेबजीन भी कहा जाता है)
  • पॉडकास्ट - जो वेब पर प्रसारण का साधन है।
कोई भी व्यक्ति जो 'न्यू मीडिया' के साथ किसी भी रूप में जुड़ा हुआ है किंतु वांछित योग्यताएं नहीं रखता उसे हम 'न्यू मीडिया विशेषज्ञ' न कह कर 'न्यू मीडिया साधक' कहना अधिक उपयुक्त समझते हैं। 

- रोहित कुमार 'हैप्पी', न्यू मीडिया साधक


 



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