सोमवार, 20 अगस्त 2012

जान पर खेल कर रहीं रिपोर्टिग



सीरिया सरकार ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कवर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया को अनुमति नहीं दी है. फिर भी मीडिया के कुछ बहादुर रिपोर्टर जान पर खेल कर वहां की पल- पल की खबरें हम तक पहुंचा रहे हैं. इन रिपोर्टरों के गुट में कुछ महिला रिपोर्टर भी शामिल हैं. इन पत्रकारों को गैरकानूनी रूप से सीरिया में घुसना पड़ा और इस काम में उत्तर के विद्रोहियों ने उनकी मदद की.
अगर वे वीजा लेकर वहां जाते, तो उन्हें हर वक्त सरकार की मीडिया गाइड के हिसाब से काम करना पड़ता. इस वजह से उन्हें ज्यादा जगह जाने की अनुमति नहीं मिलती. इस तरह के पत्रकार अपने दम पर काम करते हैं और इसके लिए पैसे के अलावा साहस और जज्बा ही सब कुछ होता है. उनके पीछे हर वक्त पकड़े जाने या मारे जाने का खतरा मंडरा रहा होता है. पूरे मिशन में इन्हें एक ही चीज सहायता करती है, वह है किस्मत.
माइटे करासको
स्पेन की रिपोर्टर माइटे करासको इन महिला रिपोर्टरों में शामिल हैं. करासको का कहना है कि हम ऐसा काम कर रहे हैं, जो आनेवाले दिनों में लुप्त हो सकता है. आज के जमाने में वॉर रिपोर्टिंग बहुत ही कम देखने को मिलती है. वह उन दर्जन भर पत्रकारों और फोटोग्राफरों की दल में चुनी गयी हैं, जिन्हें चुपके से सीरिया में खिसका दिया गया है, ताकि वहां की खबरें सामने आ सकें. सीरिया में पिछले 17 महीने से संघर्ष चल रहा है. माइटे कहती हैं इतना संघर्ष करने के बावजूद हमारा शोषण होता है.

हम हमेशा संकट में रहते हैं. बहुत से पत्रकारों के पास सुरक्षा कवच या हेलमेट भी नहीं है, बहुत कम लोगों के पास सैटेलाइट फोन है. हमारे पास नकद पैसे भी नहीं होते, जिससे हम अपनी जरूरत के कुछ सामान नहीं खरीद पाते. मुङो अपना काम पसंद है और मुङो लगता है कि हम जो कर रहे हैं वह बहुत जरूरी है. फ्रीलांसर को पता है कि वॉर रिपोर्टिंग में खतरे कितने बड़े हैं और यहां तक की जान की भी कोई गारंटी नहीं है. मैं जानती हूं कि मुङो पैसे और शोहरत भी नहीं मिलने वाली है, फिर भी जुनून के आगे इन बातों की भला कौन फिक्र करता है.
कारेन मारोन
मध्य पूर्व में बरसों तक संघर्ष की रिपोर्टिंग करने वाली अर्जेंटीना की कारेन मारोन भी एक फ्रीलांसर हैं. उनका कहना है कि फ्रीलांसर को इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि उन्हें अपना खर्च खुद उठाना पड़ता है. उसके पास कोई मेडिकल बीमा नहीं होता और न ही वह किसी बड़े मीडिया हाउस से एक्रीडेटेड होते हैं. वह अकेला होता है, बिलकुल अकेला. लेकिन इस चुनौती को अपनाना हमारा ही फैसला होता है. इंसानी नजर से देखा जाये तो कभी-कभी हमारा जीना भी मुहाल हो जाता है.

फ्रीलांसर गजब का काम करते हैं जो अन्य पत्रकार नहीं कर सकते और उसे इसकी शाबाशी भी मिलती है, लेकिन इन संघर्षो के बावजूद हमें ऐसे दिन भी देखने पड़ते हैं , जब बिना किसी वजह के हमें किनारे कर दिया जाता है. फ्रीलांसर पत्रकार और मीडिया ग्रुपों में कोई लिखित कांट्रैक्ट नहीं होता. यह आपसी रिश्तों पर निर्भर करता है कि हमसे कितना काम लिया जायेगा और इसकी क्या कीमत हमें मिलेगी.

कई बार हमें सही रकम भी नहीं दी जाती. ऐसे मिशन में सफल होने के बाद एक फ्रीलांसर का कैरियर बिलकुल बदल सकता है. सीरिया का अनुभव मेरे कैरियर के लिए बहुत बड़ा साबित होगा. यहां से जाने के बाद मैं किसी बड़ी उपलब्धि की हकदार हो सकती हूं.
-प्रस्तुति-
रूपम

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