मंगलवार, 21 अगस्त 2012

शब्दों की जादूगरी विज्ञापन कॉपीराइटर / प्रमोद कुमार


 
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First Published:26-06-12 01:36 PM
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विज्ञापन की कॉपी राइटिंग अन्य सभी लेखन विधाओं से एकदम अलग और प्रोफेशनल होती है। यह अपने संतोष के लिए नहीं, बल्कि एक ब्रांड को उसके टारगेट ग्राहक या वर्ग तक इस तरह से प्रस्तुत करने के लिए लिखी जाती है, जो प्रोडक्ट की तमाम खूबियों को तो अभिव्यक्त करे ही, साथ ही विज्ञापन में की गई शब्दों की जादूगरी सुनने वाले के मस्तिष्क में लंबे समय तक अंकित रहे। एक जमाना था, जब टेलीविजन पर विज्ञापन आते ही लोग चैनल बदल देते थे, लेकिन अब लोगों की उस सोच में पूरी तरह से बदलाव आ चुका है। आज कुछ विज्ञापनों का उत्सुकता से इंतजार किया जाता है। चाहे म्यूजिक हो या विजुअल या फिर डायलॉग, हर चीज इतनी रोचक हो गई है कि आप उसे नजरंदाज नहीं कर सकते। ऐसे बहुत से विज्ञापन हैं, जिन्हें देखने या सुनने के लिए लोग बाकायदा इंतजार करते हैं। ऐसे भी बहुत से विज्ञापन हैं, जिनकी बाकायदा लोग आपस में चर्चा करते हैं। उनके किसी संवाद को अपनी रोजाना की जिंदगी में प्रयोग करते हैं जैसे सुनील बाबू बढ़िया है, बड़ा है तो बेहतर है, डर के आगे जीत है आदि। यही वजह है कि विज्ञापनों के लिए कॉपी लिखना बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया है। इसमें बेहद सृजनात्मक बनने की जरूरत होती है। आपकी कॉपी मनोरंजक तो होनी ही चाहिए, साथ में लोगों का उससे सरोकार हो और अत्यंत बारीकी से टारगेट समूह तक ब्रांड कम्युनिकेशन की बात भी पहुंच सके। अगर आप शब्दों की जादूगरी में माहिर हैं तो इस उद्योग में तरक्की की काफी संभावना है। विज्ञापन का क्षेत्र काफी आकर्षक है और विज्ञापन से जुड़े पेशेवरों की भारी मांग है और यह हमेशा रहेगी। कार्य का समय
अन्य क्षेत्रों की भांति विज्ञापन में काम के कोई निश्चित घंटे नहीं होते। हालांकि सुबह 9 बजे से शाम के 5 बजे तक का दैनिक कार्यक्रम जरूर होता है, लेकिन हर किसी को रात में देर तक काम करने के लिए तैयार रहना पड़ता है। बहुत कुछ काम के प्रवाह पर भी निर्भर करता है, जो समय-समय पर अलग-अलग होता है। वैसे आमतौर पर कॉपीराइटर की दिनचर्या इस प्रकार होती है : सुबह 10 बजे: कार्यालय जाना और नए स्टोरीबोर्ड पर काम शुरू करना
दोपहर 12 बजे: मार्केट रिसर्च के लिए बाहर जाना
दोपहर 2 बजे: दोपहर का भोजन
दोपहर 4 बजे: विज्ञापन के लिए क्लाइंट से मिलना-जुलना
दोपहर 6 बजे: घर के लिए प्रस्थान करना वेतन
विज्ञापन के क्षेत्र में भले ही शुरुआत में आपको वेतन अच्छा न मिले, लेकिन आगे चल कर आप अच्छी कमाई कर सकते हैं। अनुभव होने पर आपका वेतन किसी भी क्षेत्र के मुकाबले आकर्षक हो जाता है। नए लोगों को भले ही दस हजार रुपए महीने के काफी कम वेतन से शुरुआत करनी पड़े, लेकिन आगे वे किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। यदि आप अपनी विज्ञापन तैयार करने की एजेंसी बना लेते हैं तो आय लाखों रुपयों में हो सकती है, लेकिन यह तभी संभव है, जब आपकी मार्केट में साख स्थापित हो जाए। कौशल लिखने का हुनर
भाषा की समझ और अच्छी पकड़
हर बार कुछ नया करने की चाहत कैसे करें मुकाम हासिल
कॉपीराइटर के लिए सृजनात्मक लेखन के प्रति ललक और पैदाइशी हुनर होना सबसे अहम है। प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय स्तर पर अच्छी शिक्षा हुई हो, लेकिन अंग्रेजी में ग्रेजुएट और मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा या डिग्री वालों को ज्यादा लाभ मिलता है। संस्थान इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, नई दिल्ली
वेबसाइट:
www.iimc.nic.in जेवियर इंस्टीटय़ूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, मुंबई
वेबसाइट
: www.xaviers.edu मुद्रा इंस्टीटय़ूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, अहमदाबाद
वेबसाइट
: www.mica.ac.in खामियां और खूबियां
लिखने के प्रति जन्मजात लगाव और अच्छी सृजनात्मक अभिव्यक्ति से कॉपीराइटर के सृजनशील मस्तिष्क को चरम संतोष प्राप्त होता है। सबसे बड़ी कमी यह है कि कभी-कभी कॉपीराइटर को बाजार की सच्चाई और क्लांइट की समझ को लेकर अपनी सृजनात्मकता से समझौता करना पड़ता है या सृजनात्मक अभिव्यक्ति को सीमित करना पड़ता है। इस क्षेत्र में वर्षों बिताना तरक्की का पैमाना नहीं है। अपनी प्रतिभा का आपके करियर पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।
राहुल चंद्रा, क्रिएटिव हेड,
शोबिज, दिल्ली
 
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