मंगलवार, 14 अगस्त 2012

अन्ना-रामदेव आंदोलन: कब और किससे हुई 'चूक'?


 सोमवार, 13 अगस्त, 2012 को 15:22 IST तक के समाचार
टीम अन्ना और रामदेव आंदोलन के दौरान हुई दस ऐसी घटनाएं जिन्होंने विवाद पैदा किया.

किरण बेदी की टिप्पणियाँ

किरन बेदी
किरन बेदी ने आरोप लगाया था कि राजनेता उनके साथ खेल रहे हैं.
हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी ने मीडिया में 'छोटे-मोटे रेप' के कवरेज पर बयान देकर सबको चौंका दिया.
बाबा रामदेव के आंदोलन में पहुंची बेदी ने मीडिया पर आरोप लगाया कि वह भ्रष्टाचार जैसे बड़े मुद्दे की अनदेखी कर रहा है.
उनका कहना था, "मीडिया में इन आरोपों पर कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ. अपने आप से पूछिए कि किसी कम ओहदे के पुलिस वाले द्वारा किए गए अपराध या छोटे-मोटे रेप पर आप कैसे बहस छेड़ते हैं. 15 मंत्रियों के खिलाफ़ प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल ने सबूत पेश किए लेकिन मीडिया में किसी ने इस मुद्दे पर न ही बहस छेड़ी और न विचार-विमर्श किया."
इस टिप्पणी की सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर भी काफी आलोचना हुई थी.
इससे पहले पिछले साल टीम अन्ना के आंदोलन के मंच से ही किरण बेदी ने कहा था कि राजनेता नकाब पहनते है.
उन्होंने हज़ारों की संख्या में जुटी भीड़ के सामने अपने सिर पर स्कार्फ को खींचते हुए उसे घूंघट की तरह दर्शाया था.
इस पर लोकसभा में लोकपाल बिल पर हुई बहस के दौरान सांसदों ने गहरी आपत्ति जताई थी और जनता दल(यूनाइटेड) के नेता शरद यादव ने तो इतना भी कह दिया था कि सांसद भी इसका मुंह तोड़ जवाब दे सकते हैं.
इसके विपरीत किरण आक्रामक मुद्रा में ही दिखाई दीं और अपने बयान पर अफ़सोस जताने की बजाए उन्होंने कहा कि उन्होंने आम आदमी की झुंझलाहट को आवाज़ दी क्योंकि सरकार 'हमारे साथ खेल कर रही है.'

अग्निवेश ने नाता तोड़ा

स्वामी अग्निवेश
समाचार चैनलों ने स्वामी अग्निवेश को किसी कपिल नाम के व्यक्ति के साथ बातचीत करते हुए दिखाया था
टीम अन्ना के सदस्य रहे स्वामी अग्निवेश ने मतभेदों के कारण टीम की गतिविधियों से नाता तोड़ लिया था.
दरअसल समाचार चैनलों ने एक वीडियो में उन्हें फोन पर किसी कपिल नाम के व्यक्ति से बात करते हुए दिखाया था.
इस वीडियो में वे कपिल नाम के व्यक्ति से कह रहे हैं, ''महाराज आप इन्हें इतना क्यों दे रहे हैं.'' मीडिया में इसके बाद काफ़ी चर्चा रही कि उस कॉल में अग्निवेश केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से बात कर रहे थे.
इसके बाद अग्निवेश और टीम अन्ना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहा

अरविंद केजरीवाल

टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने सांसदों पर हमला बोलते हुए कहा था कि एक तिहाई सांसदों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं.
उन्होंने सांसदों के लिए कई अपशब्दों का इस्तेमाल किया था. उनका कहना था कि 163 सांसदों के खिलाफ़ जघन्य अपराध के मामले हैं.
गाजियाबाद में एक रैली में बोलते हुए भी उन्होंने सांसदों के लिए अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल किया था.
इस बयान के बाद संसद ने केजरीवाल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया था हालांकि उसे बाद में वापस ले लिया गया था.

अन्ना हज़ारे

अन्ना हज़ारे
अन्ना हज़ारे ने कसाब को चौराहे पर फांसी पर लटकाने की बात कही थी
मुंबई में 26 नवंबर के हमलों में दोषी करार दिए गए अजमल क़साब पर अन्ना हज़ारे ने कहा था कि जिस इंसान ने इतने लोगों को मारा उस पर इतना खर्चा किया जा रहा है.
उनका कहना था कि इस मामले में जल्द से जल्द जांच हो और अजमल कसाब को चौराहे पर फांसी पर लटकाना चाहिए.

मोदी और नीतीश की तारीफ

अन्ना हजारे ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की थी.
उनके इस बयान के बाद काफी हंगामा भी हुआ.
बाद में बेहतर प्रदर्शन की तारीफ करने पर उठे विवादों पर अपना रुख़ स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा था कि राजनीति से उनका कोई संबंध नहीं है और वे वर्ष 2002 के गुजरात दंगों की आलोचना करते हैं.
उन्होंने बयान में कहा था कि जिस तरह इन दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने निचले स्तर पर गांवों में काम किया है, वह सराहनीय है. उन्होंने कहा कि बाकी मुख्यमंत्रियों को उनसे सीख लेनी चाहिए.

टीम अन्ना में फूट

टीम अन्ना कोर कमेटी के सदस्य रहे मैगसेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने अन्ना हज़ारे और अरविंद केजरीवाल को ‘तानाशाह’ बताते हुए कहा था कि आंदोलन दलगत राजनीति की ग़लत दिशा में जा रहा है.
राजेंद्र सिंह और गांधीवादी पीवी राजगोपाल ने कोर कमेटी से इस्तीफ़ा दे दिया था.
बेहद गुस्से में और उत्तेजित होकर एक सवाल के जवाब में राजेंद्र सिंह ने कहा था, “अन्ना और केजरीवाल तानाशाही कर रहे हैं और इसलिए मैंने ख़ुद को इस टीम से अलग किया है. इन दोनों को ये समझ आना चाहिए कि लाखों लोग अन्ना के लिए नहीं आए थे, केजरीवाल के लिए नहीं आए थे. वो देश में भ्रष्टाचार रोकने के लिए इकट्ठा हुए थे.”

ओम पुरी बुरे फंसे

रामलीला मैदान में टीम अन्ना के आंदोलन को समर्थन देने पहुँचे जाने-माने बॉलीवुड अभिनेता ओम पुरी ने सांसदों के खिलाफ़ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ा.
अपने वक्तव्य पर उन्हें लोकसभा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखकर माफ़ी मांगी पड़ी थी.
पिछले साल अगस्त में हुए अन्ना हज़ारे के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के मंच पर भाषण देते हुए ओम पुरी ने बयान दिया था.
अभिनेता के बयान को संज्ञान में लेते हुए संसद ने उन्हें नोटिस भेजा था.
ओमपुरी ने सफाई में कहा था कि वे भावुक हो गए थे और उनकी भावनाएँ बाहर आ गईं थी.

लड़कियों के कपड़ों में भागे योग गुरु

बाबा रामदेव
बाबा रामदेव ने काले धन के खिलाफ अनशन किया था
विदेशों से काला धन लाने के मुद्दे पर दिल्ली के रामलीला मैदान में बैठे योग गुरु बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर जब देर रात पुलिस ने कार्रवाई की तो रामदेव हाँफते हुए मंच पर पहुंचे थे.
वहीं अनशन का एक हफ़्ता पूरे होते-होते उन्हें गहन चिकित्सा यूनिट में भर्ती भी करवाना पड़ा था.
अब जब उनके तीन दिन के अनशन के बात सामने आई तो मीडिया में योग साधना पर बहस तेज़ हो गई कि क्या वे इस बार अपना अनशन पूरा कर पाएंगे.
पिछले साल हुई उसी पुलिस कार्रवाई के दौरान अपना बचाव करने के लिए रामदेव को महिलाओं को कपड़े में छिपते-छिपाते भागना पड़ा था.

रामदेव और पोस्टर विवाद

योग गुरु स्वामी रामदेव के इस बार के आंदोलन में पोस्टर को लेकर विवाद हो गया.
रामलीला मैदान पर अनशन स्थल पर जगह-जगह लगाए गए पोस्टरों में बालकृष्ण को महात्मा गांधी, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, चन्द्रशेखर, भगत सिंह के साथ दिखाया गया था और संदेश दिया गया था कि जिस तरह ये महापुरुष जेल गए, उसी तरह से उन्हें भी जेल जाना पड़ा है.
फर्जी पासपोर्ट और अन्य अनियमितताओं के मामलों में रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण इन दिनों जेल में है.
टीवी चैनलों पर इस संबंध में खबरें दिखाए जाने के बाद यह पोस्टर हटा लिए गए.
इसके बाद रानी लक्ष्मीबाई, सरदार पटेल, महात्मा गांधी, चंद्रशेखर आजाद जैसे महापुरुषों के साथ राजबाला की तस्वीर लगाई गई थी.
राजबाला पिछले साल चार जून को रामदेव समर्थकों पर हुई पुलिस कार्रवाई में घायल हो गई थीं. बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई.
तीन दिन के अपने उपवास कार्यक्रम के बीच रामदेव ने राजबाला के परिवारवालों को मंच पर बुलाकर उनका अभिनंदन किया और उन्हें 'शहीद' का दर्जा दिया.

सरकार से दो चूक

रामदेव
रामदेव और उनके समर्थकों पर देर रात पुलिस ने कार्रवाई की थी
दिल्ली के रामलीला मैदान में कालेधन के खिलाफ अनशन पर बैठे योग गुरु स्वामी रामदेव और उनके हज़ारों समर्थकों को पुलिस ने पिछले साल देर रात अफ़रा-तफ़री और आंसू गैस के गोले चलाने के बीच नाटकीय ढंग से हटा दिया था.
पुलिस का कहना था कि स्वामी रामदेव को गिरफ़्तार नहीं किया गया था और उन्हें किसी 'सुरक्षित स्थान' पर ले जाया गया.
रामलीला मैदान में हुए इस हादसे में कई लोग घायल हो गए थे और एक महिला राजबाला की मौत भी हो गई थी.
विदेशों में भारतीयों के काले धन को भारत वापस लाने के मुद्दे पर आमरण अनशन पर बैठे स्वामी रामदेव के हज़ारों समर्थक भी रामलीला मैदान में जम हुए थे.
इसके बाद अगस्त में जब सरकारी लोकपाल विधेयक के खिलाफ अनशन कर रहे अन्ना हज़ारे को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया गया तो उस पर कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी.
अन्ना को तिहाड़ जेल भेजते ही अन्ना के समर्थक और लोग सड़कों पर आ गए थे और उन्होंने गाड़ियों में भर-भर कर गिरफ्तारियां दी थी.
लोगों ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचनी की थी. पुलिस ने बढ़ते दबाव के बीच बाद में उन्हें रिहा कर दिया था.

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