रविवार, 29 जुलाई 2012

पत्रकारिता media books




Sunday, July 29, 2012
03:10:09 PM
ई जर्नलिज्म
ई जर्नलिज्म आज इंटरनेट के विस्तार के साथ ही सूचना की शक्ति नित बड़ी संख्या में न्यूज पोर्टल, वेबसाइट, ब्लाग, कियास्क, सोशल नेटवर्किंग साइट आदि के अस्तित्व में आने से बढ़ती जा रही है। यही नहीं आज सारे अखबार और चैनलों में भी अपने इंटरनेट संस्करण लांच करने को लेकर होड़ मची है।
आंदोलनकारी पत्रकार को सादर नमन
आंदोलनकारी पत्रकार को सादर नमन पत्रकारिता और आंदोलनों की दुनिया में उनका कितना ऊंचा स्थान था, उनका व्यक्तित्व कितना बहुआयामी था, इसकी छोटी सी झलक इन कुछ वक्तव्यों से महसूस की जा सकती है।
प्रभाष दीपो भव
प्रभाष दीपो भव ‘मेरे पास सिर्फ पांच साल बचे हैं। अब मुझे पक्की बातें कह देनी चाहिए। जो देखा, समझा और अनुभव किया उसे लिख देने का यही समय है।’ अपना यह विचार एक लंबी बातचीत के दौरान प्रभाष जी ने बताया। 12 अगस्त, 2007 वो तारीख थी। उस दिन थोड़ी फुरसत में थे क्योंकि वह मुलाकात पहले से तय थी। उनका विचार सुनकर उत्साहित हुआ।
आइए खबर की सौदेबाजी रोकें?
आइए खबर की सौदेबाजी रोकें? जिन लोगों से मिल रही प्रतिक्रिया से प्रभाष जोशी बेहद उत्साहित थे उन लोगों को आगे आकर प्रभाष जी की मुहिम को चलाना होगा और पैसे लेकर खबर छापने की कुप्रथा को खत्म करना होगा। अच्छी बात यह है कि इस लड़ाई की जमीन और रास्ता प्रभाष जी खुद तैयार करके गए हैं।
Political Obsession Kills Serious Issues
Political Obsession Kills Serious Issues Media and Society are giving excessive importance to the dramatic political issues but they are ignoring some basic issues, which are more important. In fact, political obsession is limiting the scope of serious debates on very serious issues like Right to Education to every child.
पुस्तक समीक्षा : मीडिया का स्टिंग आपरेशन
पुस्तक समीक्षा : मीडिया का स्टिंग आपरेशन पुस्तक को पढ़कर पता चलता है कि हिंदी समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं के पत्रकारों में 87 प्रतिशत पत्रकार सवर्ण हिंदू हैं। इनमें 34 फीसदी ब्राह्मण, 23 फीसदी राजपूत, 14 फीसदी भूमिहार तथा 16 फीसदी कायस्थ हैं। मुसलमान और दलित समाज से आने वाले पत्रकार मात्र 13 फीसदी ही है।
विजय भाई को दिया गया कंचना स्मृति पुरस्कार
विजय भाई को दिया गया कंचना स्मृति पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार एवं सीएनईबी चैनल के मुख्य संपादक एवं सीईओ राहुल देव ने अपना व्याख्यान देते हुए बाजार और बाजारीकरण की आलोचनाओं को अतिवाद एवं भ्रम का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि बाजार से बचा नहीं जा सकता है और बाजार के बगैर मीडिया की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
अखबार नहीं आंदोलन
अखबार नहीं आंदोलन प्रभात खबर इस वर्ष अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रहा है। जिस अखबार के शुरुआती दिनों में उससे जुड़े लोग रोज अपनी आवश्यक जरूरतों में से कटौती करते थे, ताकि अखबार के लिए न्यूजप्रिंट कागज खरीदा जा सके, ऐसा अखबार 25 वसंत सफलतापूर्वक देख लेता है तो यह आंधी और तूफान में एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने जैसा है।
साहित्कारों से गुफ्तगू
साहित्कारों से गुफ्तगू राजेन्द्र सारथी एक निर्भीक व निष्ठावान पत्रकार होने के साथ-साथ एक संवेदनशील साहित्यकार भी हैं। उन्होंने अपनी नई पुस्तक ‘परिसंवाद’ में हरियाणा के चुनिंदा बीस साहित्यकारों के साक्षात्कारों को संकलित किया है जो कि एक श्रमसाध्य कार्य है।
सामाजिक दायित्व से दूर होती मीडिया
सामाजिक दायित्व से दूर होती मीडिया संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकारों के सार्वभौम घोषणा-पत्र की प्रस्तावना और घोषणा को पढ़ा जाये, जिसे महासभा ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया है, तो मालूम होगा कि शायद ही कोई राष्ट्र होगा जो वास्तव में अपने नागरिकों एवं अन्य देशों के निवासियों के जीवन को मानवाधिकारों की भावना के अनुकूल विकसित करने के प्रयास कर रहा है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें