शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

यहां महिलाएं छापती और बेचती हैं अखबार



..यहां महिलाएं छापती और बेचती हैं अखबार
23 फरवरी 2012
इंडो एशियन न्‍यूज सर्विस
मनोज पाठक

पटना। 
आपने कई समाचारपत्रों के कार्यालय में पुरुष और महिलाओं की भागीदारी से समाचारपत्र निकालते और बिक्री होते देखा होगा, लेकिन बिहार में एक समाचारपत्र ऐसा भी है जिसका न केवल संपादकीय विभाग खुद महिला संभालती हैं, बल्कि इसकी बिक्री की जिम्मेदारी भी महिलाओं के हाथ में है।

बिहार के सीतामढ़ी और शिवहर से प्रकाशित ‘खबर लहरिया’ इन दिनों न केवल महिलाओं में, बल्कि पुरुषों में भी काफी लोकप्रिय होता जा रहा है। इस अखबार की सह-संपादक लक्ष्मी शर्मा ने आईएएनएस को बताया कि जब उन्होंने आठवीं कक्षा पास की थी, तभी उनका विवाह हो गया। पति और जेठ का सहयोग मिला और आज वह स्नातक पास होकर महिलाओं के लिए कुछ कर पा रही हैं।

प्रारंभ में ई-मेल करने को एक अजूबा कार्य समझने वाली लक्ष्मी आज फर्राटे से अपने कम्प्यूटर पर उंगलियां चलाती हैं। शिवहर के तरियाणी क्षेत्र की रहने वाली लक्ष्मी बताती हैं कि ‘खबर लहरिया’ की शुरुआत अक्टूबर 2010 में ‘निरंतर ट्रस्ट’ और ‘प्रगति: एक प्रयास फेडरेशन-सामाख्या’ द्वारा किया गया।

सीतामढ़ी के डुमरा थाना क्षेत्र के शांतिनगर में रहने वाली एक अन्य सह-संपादक समेत कुल नौ महिलाएं हैं जो न केवल समाचार एकत्रित करती हैं, बल्कि खुद अखबार भी बेचती हैं। इनमें छह महिलाएं सीतामढ़ी जिले की, जबकि तीन महिलाएं शिवहर जिले की हैं।

‘शौचालय नहीं, मोबाइल फोन मांग रही हैं महिलाएं’

आठ पृष्ठों वाले इस अखबार में पहले पृष्ठ पर ताजा खबरें होती हैं तो अन्य पृष्ठों पर गांव, शहर, मनोरंजन और देश-विदेश की खबरों का भी समावेश होता है। अखबार का एक पृष्ठ महिलाओं के लिए होता है, जबकि अंतिम पृष्ठ पर संपादकीय आलेख होता है। एक हजार छपने वाले इस पाक्षिक अखबार में चार पृष्ठ रंगीन होते हैं। सहयोग राशि दो रुपये रखा गया है।

लक्ष्मी कहती हैं कि इस काम में सभी महिलाओं को प्रतिदिन आठ से दस किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। अखबार की खास विशेषता का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह अखबार बज्जिका भाषा में प्रकाशित किया जाता है। स्थानीय भाषा में ग्रामीण बेहतर तरीके से खबरों को समझ सकते हैं।

गौरतलब है कि बज्जिका भाषा तिरहुत प्रमंडल के चार जिलों शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, वैशाली और दरभंगा प्रमंडल के समस्तीपुर और मधुबनी जिला के कुछ भागों में बोली जाती हैं।

वह कहती हैं कि अन्य अखबारों के संवाददाता की तरह इस अखबार के भी संवाददाता ग्रामीण क्षेत्रों में घूम-घूमकर लोगों की समस्या जानते हैं और फिर उसके बारे में अधिकारियों से पूछते हैं। लक्ष्मी कहती हैं कि यह अखबार उन क्षेत्रों की खबरों को प्रमुखता देता है जो आज भी मीडिया से दूर हैं।

भविष्य की अपनी योजनाओं के विषय में लक्ष्मी कहती हैं कि उनकी टीम ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं इस अखबार के जरिये उठाना चाहती हैं। वह कहती हैं कि पाक्षिक छपने वाला यह अखबार मार्च से साप्ताहिक हो जाएगा। आम तौर पर आज मीडिया भी केवल शहरों की खबरों को प्राथमिकता दे रहा है, जिस कारण ऐसे अखबारों की आवश्यकता महसूस की गई।

अधिकारियों या सरकार से मदद मिलने के विषय में पूछने पर वह कहती हैं कि मदद की बात तो दूर, कई बार तो वे कई समस्याओं पर जवाब देने से भी कतराते हैं। लक्ष्मी कहती हैं कि ‘खबर लहरिया’ का पहली बार प्रकाशन वर्ष 2002 में उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से हुआ, फिर वर्ष 2006 में इसका प्रकाशन बांदा जिले से भी होने लगा। आज इन स्थानों पर इस अखबार के पाठकों की संख्या काफी है।

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