सोमवार, 7 मई 2012

न्यूज पेपर पर एक नजरिया



 न्यूज पेपर


ये न्यूज पेपर की दुनिया भी अजीब है,
फस्ट से लास्ट पेज तक न्यूज का ढ़ेर है।
जिसमें हर दिन लीड़ में होता घोटालों का खुलासा,
जो सारे न्यूज पेपर की वैल्यू बढ़ता।
नेता हो या अभिनेता, प्लेयर से लेकर अर्थशास्त्री,
सभी की भावनाओं से रूबरू कराता न्यून पेपर।
संसद से लेकर राष्ट्रपति भवन,
सांसदों और नेताओं की पोल खुलाता न्यून पेपर।
कई जगह केवल चित्रों के माध्यम से भी,
समाचारों के सार को दर्शाता न्यूज पेपर।
सुबह के समय चार की चुस्कियों के संग,
सभी के ज्ञान, मंनोरंजन को बढ़ाता न्यूज पेपर।
जहां टीवी रेडि़यों नही, वहां पहुंचता न्यूज पेपर,
तभी सभी के दिलों पर राज करता न्यूज पेपर।
समाचार पत्र के संपादक, उपसंपादक का,
पर्सनल व्यू अपने पाठकों तक पहुंचाया न्यूज पेपर।
और अपने पाठकों की चिट्ठीयों को भी,
संपदकीय पेज पर छपवाता न्यूज पेपर।
सरकार -जनता के बीच मीडि़येटटर का काम करता न्यज पेपर,
तभी लोकत्रंत्र के चैथे स्तंभ के अंदर आता न्यूज पेपर।


साभार 
रचनाकिरण

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