सोमवार, 16 अप्रैल 2012

क्या ट्राई में कोई ईमानदार बनेगा नया चेयरमैन?


Written by शैलेन्द्र सिंह Category: सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार
Published on 14 April 2012
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भारतीय टेलीकॉम नियामक संस्था यानी ट्राई देश में टेली कम्युनिकेशन से जुड़ी सेवाओं के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदार संस्था है. ट्राई का काम टेली कम्युनिकेशन से जुड़ी नीतियां बनाना उन्हें लागू करना और सेवाओं को कंज्यूमर फ्रेंडली बनाना है. लेकिन टेलीकॉम से जुड़े टूजी जैसे बड़े हाई प्रोफाइल घोटाले के सामने आने के बाद ट्राई की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है.  ट्राई के वर्तमान चेयरमैन जेएस सर्मा का कार्यकाल मई में पूरा हो रहा है और उनकी जगह नए चेयरमैन की नियुक्ति होनी है. टूजी घोटाले से पूछताछ के दौरान संयुक्ति संसदीय समिति के समक्ष ट्राई के वर्तमान चेयरमैन जे एस सर्मा ने साफ-साफ कहा है कि इस घोटाले के लिए प्रधानमंत्री भी जिम्मेदार हैं उन्होंने इससे जुड़े दस्तावेज भी समिति के सामने रखे.

वर्तमान में ट्राई प्रमुख का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टूजी जैसे बड़े टेलीकॉम घोटाले के सामने आने के बाद पहली बार ट्राई का चेयरमैन बदला जाना है. ट्राई प्रमुख पद पर नियुक्ति पाने की होड़ में देश के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शामिल हैं. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में टूजी नीलामी के दौरान बांटे गए सभी 122 लाइसेंसों को रद्द कर दिया है. ऐसे में ट्राई के नए अध्यक्ष के सामने टूजी से जुड़ी नीलामी को दोबारा नए सिरे से कराने की चुनौती होगी. यह चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि इस आबंटन पर सीधे सुप्रीम कोर्ट की नजर होगी.

ट्राई प्रमुख पद पर नियुक्ति के लिए किसी भी फजीहत से बचने के लिए सरकार द्वारा बाकायदा इस पद के लिए आवेदन मांगे गए. और कैबिनेट सेकेरेट्री अजीत सेठ के नेतृत्व में एक सलेक्शन कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रिंसिपल सेकेरेट्री पुलक चटर्जी, कार्मिक विभाग में सचिव पीके मिश्र, टेलीकॉम सेक्रेटरी आर चंद्रशेखर और प्रधानमंत्री के सलाहकार सैम पित्रोदा शामिल हैं. पुष्ट सूत्रों की मानें तो इस कमेटी के द्वारा 2 अप्रैल, 2012 को 10 लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. साक्षात्कार  के लिए बुलाए गए लोगों में टेलीकॉम इंडस्ट्री के जानकार राकेश मेहरोत्रा, बृहन्मुंबई महानगर पालिका के नगरायुक्त सुबोध कुमार, खाद सचिव अजय भट्टाचार्य, पूर्व रक्षा -वित्त सचिव इंदु लिब्राहन और विजय लक्ष्मी के गुप्ता के अलावा कार्मिक विभाग के पूर्व तकनीकी मामलों के सदस्य चंद्र प्रकाश, कॉमर्स सचिव राहुल खुल्लर, आरपी सिंह और पीके बसु शामिल थे.

गौरतलब है कि सरकार द्वारा जिन बड़े नौकरशाहों की नियुक्ति कई महत्वपूर्ण पदों पर की गई उनमें से कई पर भ्रष्टाचार और अयोग्यता जैसे गंभीर आरोप या तो साबित हो चुके हैं या चल रहे हैं. पूर्व सीवीसी पीजे थॉमस की नियुक्ति के मामले में सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आगे मुंह की खानी पड़ी है. इसके अलावा पूर्व टेलीकॉम सेक्रेटरी सिद्धार्थ बेहुरा, डीएस माथुर जैसे कई अधिकारी हैं जिन पर गंभीर आरोप लग चुके हैं. लेकिन लगता है कि सरकार द्वारा ट्राई चेयरमैन की नियुक्ति के लिए बनाई गई कमेटी भी मात्र दिखावे से कम नहीं है. पुष्ट सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक टेलीकॉम कम्पनियां अपने मनपसंद का ट्राई चेयरमैन बनाने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं. बृहन्मुंबई महानगर पालिका के नगरायुक्त सुबोध कुमार भारती एयरटेल और वोडाफोन के पसंदीदा उम्मीदवार हैं, जबकि टेलिकॉम कमीशन के सदस्य आरपी सिंह की छवि एक न झुकने वाले शख्स की रही है. इसके अलावा राहुल खुल्लर और पीके बसु को टेलीकॉम का कोई अनुभव नहीं है इसलिए वो भी कंपनियों की फेवरेट लिस्ट में शुमार नहीं हैं. इसके अलावा इंडियन टेली कम्युनिकेशन सर्विस के अधिकारी चन्द्र प्रकाश भी उन नामों में शामिल हैं जिन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया गया. जेबी भट्टाचार्य जो टेली कम्युनिकेशन विभाग के पूर्व अधिकारी हैं उनका नाम भी ट्राई प्रमुख कि दौड़ में शामिल नामों में है.

सूत्रों की बात करें तो टेली कम्युनिकेशन विभाग में वर्तमान सचिव चंद्रशेखर भी ट्राई प्रमुख पद के लिए पूरा दांव खेल रहे हैं. हालांकि टेली कम्युनिकेशन इंडस्ट्री के जानकार उन्हें बहुत अच्छा अधिकारी नहीं मानते. चंद्रशेखर इससे पहले पूर्व संचार मंत्री ए राजा और दयानिधि मरण के साथ काम कर चुके हैं. और उन्हें ए राजा का करीबी मना जाता है. क्योंकि ए राजा के कृपा से ही वो कम्युनिकेशन विभाग में सचिव बने थे. ट्राई प्रमुख पद के लिए चल रहे दो नामों में दो महिलाएं भी शामिल हैं जिनमें पूर्व रक्षा-वित्त सचिव इंदु लिब्राहन और विजय लक्ष्मी के गुप्ता के नाम हैं. इंदु लिब्राहन नृपेन्द्र मिश्र के ट्राई प्रमुख रहते हुए ट्राई की वित्त सलाहकार रह चुकी हैं. उनके सलाहकार रहते हुए ट्राई ने टूजी स्पेक्ट्रम नीलामी ना करने की सलाह मंत्रालय को दी थी. लेकिन ट्राई की सलाह को नजरअंदाज करते हुए 122 लाइसेंस जारी कर दिए गए.

दूसरी महिला अधिकारी हैं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विजय लक्ष्मी के गुप्ता टेली कम्युनिकेशन विभाग में वित्त सदस्य रह चुकी हैं. और उन्हीं के सदस्य रहने के दौरान थ्री जी नीलामी की गई थी. विजय लक्ष्मी के गुप्ता की छवि एक बेदाग़ और ईमानदार प्रशासनिक अधिकारी की रही है. विजय लक्ष्मी के गुप्ता कॉमनवेल्थ गेम्स और कोयला खदानों की नीलामी जैसे विवादित प्रोजेक्टों से भी जुड़ी रही लेकिन उन्होंने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया है. विवादित प्रोजेक्ट होने के बावजूद विजय लक्ष्मी के गुप्ता पर कोई आरोप नहीं लगे. उनकी ईमानदारी का लोहा सुप्रीम कोर्ट भी मान चुका है. सवाल यह है कि क्या कोई ईमानदार अधिकारी ट्राई का चेयमैन बन पाएगा.
लेखक शैलेंद्र सिंह पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

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