शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

भारतीय प्रिंट मीडिया का विकास अगले 15 सालों तक होता रहेगा



नई दिल्ली।
२ अप्रैल २०१२
अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार, रॉबिन जेफरी का कहना है कि पश्चिमी देशों के विपरीत भारतीय अखबार उद्योग अगले 15 वर्षो तक मजबूती के साथ विकास करता रहेगा, और ऐसा देश में बढ़ रही साक्षरता के कारण सम्भव होगा। जेफरी यहां शनिवार शाम राजेंद्र माथुर स्मृति व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा, "मेरा अनुमान है कि समाचार पत्र कम से कम अगले 10 वर्षों तक विकास करते रहेंगे और टेलीविजन स्थिर हो जाएंगे।"
जेफरी ने कहा, "मुझे लगता है कि भारत में प्रिंट मीडिया 10-15 वर्षो तक अभी और विकास करता रहेगा और उसके बाद इसमें मंदी आएगी, जैसी स्थिति अमेरिका और अन्य देशों में बनी हुई है।" 'इंडियाज न्यूजपेपर रिवोल्यूशन' नामक पुस्तक के लेखक जेफरी एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे। व्याख्यान का विषय था- 'मीडिया मेडिटेशन : हिस्ट्री, प्रॉस्पेक्ट्स एंड चैलेंजज फॉर इंडिया'।

जेफरी ने भारत में प्रिंट मीडिया की अनवरत वृद्धि का श्रेय यहां बढ़ रही साक्षारता को दिया। जेफरी ने 30 प्रतिशत निरक्षरों का जिक्र करते हुए कहा, "30 करोड़ से अधिक लोगों में अभी भी अखबार पढ़ने की क्षमता पैदा करना बाकी है।" जेफरी पश्चिम के अलावा अन्य देशों में पुराने अखबारों के पुन: इस्तेमाल के महत्व को अखबार उद्योग के न बिखरने का एक दूसरा कारण मानते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में जहां लाखों लोग सामान्य जीवन जीते हैं, वहां पुराने अखबार बहुत उपयोगी हैं, क्योंकि इनका पुनर्चक्रण किया जा सकता है और कई अन्य वस्तुओं में इस्तेमाल किया जा सकता है।

कनाडा के पत्रकार जेफरी भारत, आस्ट्रेलिया और सिंगापुर में भी पत्रकारिता कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत में मीडिया के सामने सुखद व दुखद, दोनों तरह की चुनौतियां हैं। जेफरी ने कहा कि भारतीय मीडिया को निजता में घुसपैठ के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मीडिया उद्योग को निजता में अप्रिय, क्रूर, और अवैध दखल को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसी के कारण ब्रिटेन में 'न्यूज ऑफ द वर्ल्ड' का पतन हुआ।

जेफरी ने कहा, "भारतीय मीडिया में नैतिकता, रुचि और सुरक्षा के संदर्भ ठीक उसी तरह हैं, जिस तरह अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य अंग्रेजी भाषी देशों में 200 वर्षो से अधिक समय से बने हुए हैं।" लेकिन भारत के पास अल जजीरा, बीबीसी और सीएनएन की तरह वैश्विक भारतीय आवाज क्यों नहीं है? इस प्रश्न पर जेफरी ने कहा कि भारतीय वैश्विक समाचार की उपस्थिति एक विश्व मानक बन सकता है, क्योंकि भारत के पास सबकुछ है और दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है, जो दुनिया को भारत जैसा प्रस्तुत कर सके।

जेफरी ने कहा, "भारत में प्रतिभावान, बहुभाषी, अंग्रेजी भाषी पत्रकारों की प्रचुरता है, इसके साथ ही प्रत्येक महाद्वीप में भारतीय प्रवासी हैं जो पत्रकार और सम्पर्क दोनों मुहैया करा सकते हैं।"

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