रविवार, 4 मार्च 2012

New era of journalism


New era of journalism

new age journalism
उत्तरी अफ्रीका के तानाशाह देश ट्यूनीशिया से जो समाचार आ रहे हैं उसके अनेक आयाम और दूरगामी परिणाम हैं लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से एक और रुझान जुडा है जो पिछले कुछ वर्षों में प्रकाश में आया है और आज इस अफ्रीकी देश के नागरिक विद्रोह के बाद पटल पर has arrived. The uprising caused the largest social networking such as Facebook and Twitter can be added to the information explosion has come.
तानाशाही और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के घोर प्रतिबंध के युग में जी रहे ट्यूनीशिया के लोगों के मध्य इन सोशल नेटवर्किंग साइट की पैठ ने न केवल जनता को सूचना उपलब्ध कराई वरन उन्हें सशक्त भी बनाया और उनका आत्मविश्वास भी बढाया।
ट्यूनीशिया की इस घटना का संदर्भ इसलिये मह्त्वपूर्ण है कि अरब के देशो में अतिशय तानाशाही, आधुनिकता का अभाव और व्यक्तिगत स्वतन्त्रता की घोर कमी के चलते नागरिक प्रतिक्रिया सनसनीखेज रही लेकिन अन्य संदर्भों के लिये भी इसका कुछ संदेश अवश्य है। जिन देशों में लोकतंत्र है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान है वहाँ भी सोशल नेटवर्किंग के इस युग में कुछ नये रुझान अवश्य सामने आ रहे हैं जिनको लेकर उस प्रकार की तैयारी नहीं दिखती जैसी कि होनी चाहिये।
In the last few years, networking and personal blogging website of their own efforts by raising the level of the media have created.
कुछ वर्ष पूर्व जब ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद पुनः सत्ता में चुनकर आये थे तो उस चुनाव का विरोध तो केवल ईरान में हुआ लेकिन ट्वीटर का चलन उसी समय हुआ और इसके मध्यम से ईरान के चुनावों का विरोध समस्त विश्व के मीडिया के लिये समाचार बन गया and remained for months. But news of the move was neither the media nor the access to resources and were dependent on all Twitter feed. इसी प्रकार विकीलीक्स के सूचना लीक को अनेक विश्लेषकों ने ढेर की संज्ञा दी लेकिन प्रत्येक लीक के बाद न केवल यह विश्व भर में समाचारों में छाया रहा वरन अनेक देशों की राजनीति को भी प्रभावित किया और शायद ही कोई बडा समीक्षक या विश्लेषक रहा हो जिसने इस Do not run your stylus on the subject are.
This is a new round of journalism. Journalism in India over the past few months, many are standing question. Several columns have been demolished, many of journalism became heroes and villains has been an erosion of the ideals of journalism. In this case the question arises whether the Web journalism and social networking in India is in a position to leave an impression.
Journalism of the past six years through the web based on their experience of being involved in the subject I have some conclusions.
विश्व के अन्य देशों में वेब पत्रकारिता और सोशल नेटवर्किंग अपना प्रभाव छोड़ने में इसलिये समर्थ हो पाई है कि इसे भारत के अतिरिक्त अन्य देशों में अत्यन्त आरम्भ से पत्रकारिता और सूचना के माध्यम के रूप में प्रयोग किया गया लेकिन भारत में यह प्रयास इस स्तर कभी नहीं was.
Through this personal frustration or anger out somewhere to make more. एक ओर अन्य देशों में जहाँ इस माध्यम को जनसंचार का माध्यम माना गया और अत्यंत आरम्भ से इसको लेकर आत्मविश्वास था तो वहीं भारत में और विशेषकर हिंदी माध्यम में इसे लेकर एक प्रकार की हीनभावना रही जिसके चलते बड़े लम्बे समय तक इस माध्यम को कृत्रिम , कम्प्यूटर sit on the nomenclature given to such unethical journalism.
इसके अतिरिक्त वेब पत्रकारिता और सोशल नेट्वर्किंग न केवल व्यक्तिगत प्रयास तक सीमित रहे वरन इसकी सामग्री और पहुँच भी कहीं न कहीं व्यक्तित्वों के इर्द गिर्द रही। पिछले अनेक वर्षों में शायद ही कोई अवसर ऐसा आया हो जब इस माध्यम ने जनसंचार के रूप में कभी किसी घट्ना या प्रसंग को अपने माध्यम से प्रकाशित किया जो कि मुख्यधारा की मीडिया के लिये भी प्रमुख समाचार बन गया हो।
इसके पीछे एक मुख्य कारण यह भी है कि हम लोकतांत्रिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की व्यस्था में हैं तो अवश्य पर अनेक विषयों पर स्वयं ही या तो सेंसरशिप थोप रखी है या सूचनाओं के विषय में उतनी पारदर्शिता नहीं है और सूचनाओं के लिये सरकारी माध्यमों पर निर्भर हैं information or do not understand the democratic effects.
In addition, in India it is Hindi or English, so that the ideological divide information, events or incidents are classified according to their ideology. Media or social networking website in India through the media to become one of the biggest reasons too. Since the majority of Web access through the old ideological definitions beaten Gusedne efforts to force the brain to information and public utility sometimes appears to be trying to bring up the test.
लेकिन इसके लिये प्रमुख शर्त यह है कि वेब माध्यम के प्रति कुंठा, हीन भावना और निजी विचारधारा को थोपे जाने की प्रवृत्ति का शमन करके इसे पत्रकारिता का नया दौर माना जाये जो न केवल समाचार पत्रों और चैनल के लिये एजेंडा निर्धारित करे वरन समाज के लिये movements and the role of leadership was also an option as well.
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