रविवार, 4 मार्च 2012

जोश जज्‍बा जुनून जागरूकता और जर्नलिज्‍म
























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एक खबरी के रूप में अगर आप करियर बनाना चाहते हैं तो यह जान लें कि यह एक बेहद चैलजिंग काम है। बाहर से बेहद ग्‍लैमरस और ठसकदार नजर आने वाले इस क्षेत्र में वही कामयाब है, जिसके पास कुछ कर गुजरने का जज्‍बा है। अगर आप खुद को इसी कैटेगरी में पाते हैं, तो जर्नलज्मि की दुनिया को आपका इंतजार है।
आज से करीब डेढ़ दशक पहले पब्लिक के पास दुनिया दराज की खबरों को हासिल करने के लिए न्‍यूजपेपर्स के अलावा सिर्फ दूरदर्शन ही एकमात्र जरिया हुआ करता था, लेकिन उसके बाद शुरू हुआ 2437 न्‍यूज चैनलों ने खबर की दुनिया की काया ही पलट दी। अब चाहे कहीं दो देशों के बीच लड़ाई चल रही हो या फिर पीस मीटिंग, चाहे कहीं आग लगी हो या कहीं आतंकवादी हमला हो गया हो, पत्रकार सबसे पहले आपकी उस जगह से रिपोर्ट करते नजर आते हैं।
इसके अलावा अखबारों के सर्कुलेशन में भी काफी बढ़ोत्‍तरी हुई है। एक अनुमान के मुताबिक भारत के करीब 10 करोड़ से ज्‍यादा लोग अपनी सुबह की शुरूआत किसी हिंदी या अंग्रेजी न्‍यूजपेपर से करते हैं।
बदल रहा है मीडिया
बदलते जमाने के साथ मीडिया फील्‍ड की चुनौतियां भी काफी तेजी से बढ़ी हैं। ब्रेकिंग न्‍यूज का कांसेप्‍ट आने के बाद से जर्नलिस्‍ट का रोल काफी एक्टिव हो गया है। अगर आप थोड़ा भी चूके तो आपका कॉम्पिटीटर उसे बतौर एक्‍सक्‍लूसिव पेश कर देगा। इसलिए अब इस फील्‍ड में भी प्रोफेशनल लोगों की जरूरत महसूस की जाने लगी है। इसी वजह से अब मीडिया ग्रुप इधर-उधर से नियुक्तियां करने की बजाय बाकायदा मीडिया इंस्‍टीटट्यूटों में कैंपस इंटरव्‍यू करके प्रोफेश्‍नल्‍स जर्निलिस्‍ट की भर्ती करना पंसद करते हैं।
जर्नलिज्‍म की पाठशाला
लगातार खुल रहे टीवी चैनलों और न्‍यूजपेपर्स के चलते मीडिया में जॉब के चांस दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं। यही वजह है कि उनकी आवश्‍यकता को पूरा करने के लिए मीडिया इंस्‍टीट्यूटस की संख्‍या में भी बढ़ोत्‍तरी हो रही है। इन मीडिया इंस्‍टीट्यूटस में स्‍टूटेंडस को जर्नलिज्‍म की बेसिक एजुकेशन के अलावा मॉर्डन टेक्‍नीक की जानकारी दी जाती है। इयान स्‍कूल ऑफ मास कम्‍युनिकेशन के मैनेजिंग डायरेक्‍टर अनुज गर्ग कहते हैं, कहा जाता है कि लोग बाई बर्थ जर्नलिस्‍ट होते हैं लेकिन इन इंस्‍टीट्यूटस में बाई बर्थ जर्नलिस्‍ट को फिनिशंग टच देने का काम किया जाता है। बदलते जमाने में हर काम को बेहतर तरीके से करने के लिए थ्‍योरिटिकल के साथ प्रैक्‍टीकल ट्रेनिंग भी दी जाती है इसके तहत अपने इंस्‍टीट्यूट का न्‍यूजपेपर निकालने से लेकर टीवी प्रोग्राम तैयार करना तक शामिल है। मीडिया बेसिकली इन इंस्‍टीट्यूटों में स्‍टूडेंटस को लोगों के साथ बेहतर तरीके से कम्‍युनिकेट करना सिखाया जाता है।
उपलब्‍ध कोर्सेज
जर्नलिज्‍म को बतौर करियर चुनने वाले स्‍टूडेंट्स के लिए कई तरह के कोर्सेज उपलब्‍ध हैं। और किसी भी दूसरे प्रोफेश्‍नल कोर्स की तरह जर्नलिज्‍म का कोर्स करने की बेसिक क्‍वालिफिकेशन भी 10+2 है। इसके बाद आप कई यूनिवर्सिटीज द्वारा उपलब्‍ध बैचलर ऑफ जर्नलिज्‍म और बैचलर ऑफ जर्नलिज्‍म एंड मास कम्‍युनिकेशन जेसे कोर्स कर सकते हैं। मीडिया प्रोफकेशनल बनने के लिए जरूरी नहीं है कि आपने जर्नलिज्‍म में ही ग्रैजुऐशन किया हो। ग्रैजुएट स्‍टूडेंटस इसके बाद भी जर्नलिज्‍म में दो साल का मास्‍टर ऑफ जर्नलिज्‍म और मास्‍टर ऑफ जर्नलिज्‍म एंड मास कम्‍युनिकेशन कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा कई यूनिवर्सिटीज एक साल का पोस्‍ट ग्रेजुएट डिप्‍लोमा इन मास कम्‍यूनिकेशन भी कराती हैं। 
अवसर
जर्नलिज्‍म का कोर्स करने के बाद आपके सामने कई तरह के मौके खुल जाते हैं। आप चाहें, तो टेलीविजन जर्नलिज्‍म के फील्‍ड में जा सकते हैं या फिर किसी न्‍यूजपेपर के साथ जुड़ सकते हैं। साथ ही रेडियो जर्नलिज्‍म के फील्‍ड में करियर बनाने का ऑप्‍शन भी आपके सामने है।
इन सबके अलावा आजकल साइबर जर्नलिज्‍म काफी तेज से ग्रो करता हुआ फील्‍ड है। इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ मास कम्‍यूनिकेशन में एसोशिएट प्रोफेसर डॉक्‍टर आनंद प्रधान कहते हैं, 'जरूरी नहीं है कि जर्नलिज्‍म का कोर्स करने के बाद आप जर्नलिस्‍ट ही बनें। अगर आप चाहें तो इस फील्‍ड में हायर एजुकेशन लेने के बाद आपके लिए रिसर्च और टीचिंग की बहुत सी अपॉचुनिटीज मौजूद हैं।


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