सोमवार, 5 मार्च 2012

दिल्ली / भारत की राजधानी को स्थानांतरित करते हैं''



















दिल्ली शहर की बसने और उजड़ने की स्वर्णिम-स्याह दास्तान इतिहास से भी पुरानी है. इतिहास के इसी क्रम में साल 1911 में दिल्ली में सजा एक दरबार और ब्रिटेन के किंग जॉर्ज पंचम ने अंग्रेज़ प्रशासित भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया. इस घटना के शताब्दी वर्ष के मौके पर प्रस्तुत है बीबीसी की विशेष श्रृंखला 'दिल्ली कल आज और कल' . ये श्रृंखला कहानी है दिल्ली की शाहजहानाबाद से नई दिल्ली तक. इस श्रृंखला का संकलन किया है बीबीसी संवाददाता पारुल अग्रवाल और शालू यादव ने. पुरानी तस्वीरें सौजन्य: दिल्ली स्टेट आर्काइव्स.
कैसा रहा पिछले 100 सालों में दिल्ली की शहरी योजना का सफ़र.. क्या 'सपनों का ये शहर' सबके सपनों को पूरा कर पाया?
इस कडी में जानिए कैसे सुस्त और धीमी गति से चलते एक शहर ने पकड़ी रफ़्तार और हर दिन अपनी मंज़िल तय करता है ये शहर.
दिल्ली आज भारत का प्रारुप है, लेकिन दिल्ली की अपनी संस्कृति क्या है. दिल्ली कल आज और कल में एक नज़र इन्हीं सवालों पर.

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बोलती तस्वीरें

  • क्यों दिल्ली को भुला नहीं पाते टॉम ऑल्टर
  • मार्क टली के ज़हन में कैसे बसती है दिल्ली.
  • अशोक वाजपेयी दिल्ली की संस्कृति पर.
  • बीपी सिंह के दिल में धीरे-धीरे घर कर गई दिल्ली.
  • क्या है सूफ़ी फ़लसफ़े से दिल्ली का रिश्ता
  • नई दिल्ली के शहरीकरण पर एक नज़र.
  • तस्वीरें जो दिल्ली में के बदलाव को बयान करती
    हैं.



    पिछले सौ साल में विभिन्न वास्तुशिल्प शैलियों ने नई दिल्ली की संरचना को एक अलग पहचान दी. ब्रितानी शासकों ने अपनी शानो शौक़त का प्रदर्शन करने के लिए कई भव्य इमारतें खड़ी कीं. लेकिन आज़ादी के बाद हुआ निर्माण लोगों के ज़हन में वैसी अमिट छाप छोड़ने में कामयाब नहीं रहा. इस कड़ी में जानिए नई दिल्ली के निर्माण में लगी ईंट, पत्थरों और सीमेंट ने कैसा सफ़र तय किया.

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