बुधवार, 7 मार्च 2012

हाथ से लिखकर निकालता है अखबार




उत्कर्ष त्रिपाठी
मात्र 12 वर्ष की उम्र के बच्चों को अखबारों के कार्टन वाला पन्ना पढ़ते देखना आम है, लेकिन उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद का एक बच्चा इसी छोटी उम्र में सामाजिक मुद्दे उठाने वाला एक अखबार निकालता है. इतना ही नहीं, वह इस अखबार का संपादक ही नहीं है, बल्कि संवाददाता, प्रकाशक और हॉकर भी है.
इलाहाबाद के चांदपुर सलोरी इलाके की काटजू कालोनी में रहने वाला उत्कर्ष त्रिपाठी पिछले एक वर्ष से हाथ से लिख कर ‘जागृति’ नामक चार पृष्ठों का एक साप्ताहिक अखबार निकाल रहा है. वह ब्रज बिहारी इंटर कॉलेज में आठवीं कक्षा का छात्र है.
उत्कर्ष कहता है, ‘मैं अखबार के लिए खबरों को एकत्र करने से लेकर उसका संपादन, प्रकाशन और यहां तक कि वितरण तक की जिम्मेदारी खुद उठाता हूं.’ ‘जागृति’ के पाठकों को अपने साप्ताहिक अखबार के लिए एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ता. उत्कर्ष सबसे पहले हाथ से सारी सामग्री को लिख कर अखबार के चार पन्ने तैयार करता है. बाद में उसकी फ़ोटो कॉपी करवाकर उसकी प्रतियां अपने पाठकों तक पहुंचाता है. वर्तमान समय में जागृति के विभिन्न आयु वर्ग के करीब 150 पाठक हैं.
उत्कर्ष कहता है कि ‘जागृति’ के पाठकों में मेरे स्कूल के सहपाठी, वरिष्ठ छात्र, शिक्षक और पड़ोसी शामिल हैं. मैं अखबार के संपादकीय पन्ने पर भ्रूणहत्या, पर्यावरण जैसे सामाजिक मुद्दों को नियमित उठाने का प्रयास करता हूं. इसके अलावा अखबार में जनकल्याणकारी योजनाओं एवं बच्चों के कल्याण के लिए सरकारी नीतियों के बारे में जानकारी भी देता हूं. इसमें प्रेरणात्मक लेख होने के साथ प्रसिद्ध वैज्ञानिकों, कलाकारों, राजनेताओं की सफ़लता की कहानियां भी होती हैं. मैं रोज एक घंटे का समय अखबार के लिए निकालता हूं.

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