बुधवार, 28 मार्च 2012

बिहारी मीडिया में एक बड़े दलाल हैं पत्रकार श्रीकांत प्रत्युष !


बिहारी मीडिया में एक बड़े दलाल हैं पत्रकार श्रीकांत प्रत्युष !

shrikant_press dalal


राजनामा.कॉम, आज बिहार की पत्रकारिता में वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत प्रत्युष का कोई सानी नहीं है। उन्हें यहां की सरकारी गैर सरकारी-तंत्र में सबसे बड़ा जुगाड़ूलाल माना जाता है। ऐसे ही महानुभावों के कारण पत्रकारिता में इस उक्ति का सृजन हुआ है कि जो जितना जुगाड़ करेगा,वह उतना ही अधिक जल्दी सफल माना जायेगा। कथार्थ, श्रीकांत जैसे लोग यह साबित कर रहे हैं कि आज व्यवस्था में जो जितना बड़ा दलाल है,वह उतना ही बड़ा पत्रकार है। बाकी सब…ऐरा-गैरा,नत्थु-खैरा।
कहते हैं कि जब लालू-राबड़ी जी का राज था, तब भी इनकी तूती बोलती थी और आज जब नीतीश जी का सुराज है,तब भी उनकी तूती बोल रही है। श्री प्रत्युष कोई साधारण पत्रकार नहीं हैं। यदि आप इनकी पत्रकारिता की व्यापकता का आंकलन करेगें तो दंग रह जायेगें और आश्चर्य व्यक्त करेगें कि आखिर देश के इकलौते ऐसे पत्रकार का नाम गिनीज बुक रिकार्ड में अब तक क्यों नहीं दर्ज किये गये हैं।
इस महाशय के बारे में जो रोचक जानकारी मिली है,वे काफी चौंकाने वाले हैं। ये महोदय फिलहाल मशहुर प्रायवेट चैनल जी न्यूज के पटना ब्यूरों चीफ हैं। पटना से ही अपने स्वमित्व में एक पीटीएन न्यूज चैनल के साथ प्रत्युष नव बिहार नामक अखबार भी चला रहे हैं। ये साहब के हाथ में दैनिक सन्मार्ग,पटना संस्करण का प्रकाशन भी है। यही नहीं इनका जुगाड़ कितना बेजोड़ है कि फिलहाल सरकारी विज्ञापन किस मीडिया हाउस को दिया जाय या न दिया जाय या फिर दिया जाय तो किस सौदेबाजी के साथ कितना दिया जाये,ये श्रीमान ही अधिक तय करते हैं। जाहिर है कि कभी फक्कड़ जीवन जीने को अभिशप्त बिहारी पत्रकारिता के इस महारथी के करोड़ों में खेलने का राज किस चीज में छुपी है।  
अपना बिहार.ओआरजी एक रिपोर्ट के अनुसारः
” बियाडा ने बिहार के मीडिया माफ़िया श्रीकांत प्रत्युष (आईजी गुप्तेश्वर पांडेय के रिश्तेदार) को पाटलिपुत्र इंडस्ट्रीयल एरिया में 20 हजार वर्ग फ़ीट की जमीन उपलब्ध कराया, ताकि श्री प्रत्युष वहां एक प्रेस और चैनल खोल सकें। सबसे मजेदार यह है कि श्री प्रत्युष के प्रस्ताव को एसआईपीबी के समक्ष लाया ही नहीं गया। इसका सबूत अभी भी आपको बिहार सरकार के उद्योग विभाग के वेबसाइट पर मिल जायेगा।”
हिन्दी मीडिया.कॉम के अनुसारः
” नेताओं और नौकरशाहों के अलावा पत्रकारों को भी इस बंदरबांट में उपकृत किया गया है। श्रीकांत प्रत्युष सन्मार्ग और ज़ी न्यूज से जुड़े हुए पत्रकार तो हैं ही। साथ ही दैनिक अखबार ‘नवविहार’ के मालिक भी हैं। इन्हें भी बियाडा ने 20,000 वर्ग फीट जमीन दी है। “
भड़ास मीडिया.कॉम में भी खुली पोलः
” उनका नाम श्रीकांत है। बेचारे वरिष्ठ पत्रकार हैं। भले ही इनकी शैक्षणिक योग्यता चपरासी की है, लेकिन हैं ये बड़े वरिष्ठ पत्रकार। पहले जब सूबे में लालू यादव का राज था, तब इनके हाथ की बनाई गई खैनी खाकर श्री यादव मस्त हो जाया करते थे। इनका हाथ पड़ने पर वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत महोदय का दिल बाग-बाग हो उठता था। बाद में जब श्री यादव की राज का पतन हुआ तो श्रीकांत जी ने भी पाला बदल लिया। “
बहरहाल, पत्रकारिता के नाम पर कलंक श्रीकांत प्रत्युष का जारी कारनामा जहां नीतीश सरकार की मीडिया फ्रेम के रहस्यों को उजागर करता है, वहीं पत्रकारिता के व्यवसायिक स्वरुप भी शर्मसार हो रही है। जिसके बल अब यहां तक कहा जाने लगा है कि मीडिया का व्यवसाय वेश्यावृति के धंधे को भी मात दे रही है। क्या इस देश में श्रीकांत प्रत्युष जैसे दलालों से निपटने की संवैधानिक या नैतिक जिम्मेवारी किसी की नहीं है?

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