मंगलवार, 27 मार्च 2012

प्रतिभा, मेहनत और अध्‍ययन के सहारे शिखर पर पहुंचे थे आलोक तोमर


 

: आलोक तोमर परम्‍परापीठ ने आयोजित की व्‍याख्‍यानमाला 
: ग्वालियर : देश के जाने-माने हिंदी पत्रकार प्रदीप सिंह ने कहा कि सरल और संतुलित भाषा, खबर की समझ और ख़बरों का फ़ॉलो-अप करने के प्रति आतुर रहना, यही गुण है जो किसी पत्रकार को निखारते हैं और इसके लिए सबसे जरूरी चीज है निरंतर अध्ययनशील रहने की प्रवृति। खबर से समझौता न करने का माद्दा, चाहे वह किसी को भी प्रभावित करती हो। यही बातें हैं जो किसी पत्रकार को शिखर पर पहुंचाती हैं।
श्री सिंह ने यह बात रविवार को कलावीथिका में "आलोक तोमर परमपरापीठ" द्वारा उनकी पहली पुण्यतिथि पर आयोजित व्याख्यान माला में मुख्यवक्ता के रूप में कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार और स्वदेश के पूर्व संपादक जय किशन शर्मा ने की। विशिष्ठ अतिथि के रूप में स्व. आलोक तोमर की पत्नी श्रीमती सुप्रिया रॉय तोमर, मध्यप्रदेश के जनसंपर्क आयुक्त राकेश श्रीवास्तव, उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ के अतिरिक्त महाधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी मौजूद थे।
कार्यक्रम की शुरुआत स्व. तोमर के चित्र पर पुष्पांजलि के साथ हुई। इसके बाद पीठ से जुड़े लोगों भगवान सिंह तोमर, अरुण सिंह तोमर, देव श्रीमाली, अशोक सिंह, शरद श्रीवास्तव, डॉ. अयूब खान, सुरेन्द्र शर्मा, रमन अग्रवाल ने अतिथियों को पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। पीठ के सदस्य और मध्य प्रदेश राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष अरुण सिंह तोमर ने आयोजन की रूपरेखा रखी और वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली ने अतिथियों का परिचय कराया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री सिंह ने कहा कि अपने प्रोफेशन के प्रति कमिटमेंट होना बहुत जरूरी है। यह कमिटमेंट लगातार अध्ययन से आता है। आलोक तोमर से बात करके ही लगता था कि वे कम उम्र में कितना पढ़ चुके थे। श्री सिंह ने साफ़ कहा- लगातार ना पढ़ने वाला कभी ज्यादा नहीं लिख सकता। पत्रकारिता में सफलता के लिए सिर्फ प्रतिभा ही नहीं मेहनत की भी जरूरत होती है। एक अध्ययनशील पत्रकार ही समाज में विश्वसनीयता पैदा कर सकता है और आलोक तोमर में यह गुण विद्यमान थे। इसे की बदौलत वे हिंदी पत्रकरिता के शिखर पर पहुंचे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार जय किशन शर्मा ने कहा कि आलोक तोमर में जबरदस्त उर्जा थी और एक बार जिम्मेदारी मिल जाने पर वे उसकी तह तक जाते थे। वे मूलत क्राईम रिपोर्टर थे लेकिन जब मैंने उन्हें तानसेन समारोह कवर करने का जिम्मा सौंपा तो कुछ ही दिनों में वे संगीत के इतने जानकार बन गये कि हम सब दंग थे। अपनी पढ़ने और समझने की भूख ने ही आलोक को हर क्षेत्र में लिखने का अधिकार दिया। वे साहित्य पर जितना अच्छा लिखते थे उतना ही अच्छा क्रिकेट पर भी, जबकि क्रिकेट खेलना तो दूर उन्हें देखना भी पसंद नहीं थी।
श्री शर्मा ने स्व. तोमर के जुड़े अन्तरंग पलों को साझा करते हुए कहा कि आलोक तोमर जैसा परिश्रमी पत्रकार मैंने अपने जीवन में दूसरा नहीं देखा। जिस पान सिंह तोमर की फिल्म की आज धूम है, उन पान सिंह तोमर का यह पक्ष आलोक तोमर ने ही समाज के सामने उजागर किया था। पान सिंह तोमर के साक्षात्कार को लेकर जब मैंने उसे टोका तो उसने विनम्रता से कहा- एक पत्रकार के नाते मेरी जो जिम्मेदारी है वह मुझे करने दें।
इस मौके पर आलोक तोमर की पत्नी और पत्रकार श्रीमती सुप्रिया रॉय तोमर ने कहा कि स्व. आलोक किसी भी बिषम परिस्थिति में भी विचलित नहीं होते थे और निरंतर अध्ययन और लेखन इससे कभी प्रभावित नहीं होता था। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद उन्होंने न लिखना कम किया और पढ़ना। अंतिम समय तक उन्होंने लिखा। गर्दिशों के दौरान भी मैंने कभी उन्हें बिचलित नहीं देखा। कैंसर पर उन्होंने अनेक लेख लिखे और इसको लेकर होने वाली धन्धेबाजी पर भी खूब लिखकर लोगों का ध्यान खींचा।
इस कार्यक्रम का संचालन जय सिंह तोमर तथा आभार प्रदर्शन शरद श्रीवास्तव ने किया। इस कार्यक्रम में ग्वालियर प्रेस क्लब के सचिव राकेश अचल, वरिष्ठ पत्रकार अवध आनंद, डॉ. सुरेश सम्राट, स्वदेश के संपादक लोकेन्द्र पाराशर, कमल माखीजानी, राजेश शर्मा, जीतेंद्र जादौन, ब्रज मोहन सिंह परिहार, राज देव पाण्डेय, पुष्पेन्द्र सिंह तोमर, संजय तोमर, लाजपत अग्रवाल, सुनील पाठक, नासिर गौरी, रविकांत सैनी, जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक एचएल चौधरी, सहायक संचालक संजीव पाठक, सहायक सूचना अधिकारी हितेंद्र सिंह भदौरिया समेत सैकड़ों की संख्या में पत्रकार, बुद्दिजीवी, साहित्यकार, समाजसेवी और राजनीति से जुडी हस्तियाँ शामिल हुईं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें