रविवार, 4 मार्च 2012



कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन: संभावनाएं अपार







आज की गला-काट प्रतियोगिता के इस दौर में कम्यूनिकेशन स्किल्स पर अच्छी पकड़ न सिर्फ किसी एक प्रफेशनल के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती है, बल्कि पूरे समाज के विकास पर इसका सकारात्मक असर दिखाई देता है। मीडिया के फैलाव और प्रभाव के बीच अपने ब्रैंड की पॉजिटिव इमेज बनाना यानी ब्रैंडिंग और इमेज मैनेजमेंट की जरूरत ने कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन के आकर्षक करियर का महत्व पहले से कई गुना बढ़ा दिया है।

कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन के अंतर्गत ऑर्गनाइजेशन के अंदर और इससे जुड़े बाहरी लोगों के बीच सभी प्रकार का कम्यूनिकेशन शामिल है। इसकी ऑडियंस में कंपनी के एम्प्लॉइज, पार्टनर, कस्टमर, डीलर और मीडियाकर्मी आदि होते हैं। कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन टीम का मुख्य कार्य कंपनी के प्रति ब्रैंड अवेयरनेस पैदा करना और इसके प्रॉडक्ट्स की ग्लोबल मार्केट में उपस्थिति का एहसास कराना होता है। इसका काम मीडिया के साथ अच्छा तालमेल बनाकर रखना भी होता है, जिससे कंपनी की ब्रैंड इमेज बेहतर रखने में सहायता मिलती है। इसके लिए कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन टीम प्रेस रिलीज तैयार करती है, प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करती है और नियमित रूप से मीडियाकर्मियों से संपर्क भी बनाए रखती है।

कंपनी के प्रवक्ता जैसे - सीएमडी की उपलब्धता और कंपनी के कार्यक्षेत्र संबंधी किसी मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रिया उपलब्ध कराने का काम भी कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन प्रफेशनल्स का ही होता है। इसके अलावा, कंपनी के इन-हाउस न्यूजलेटर्स, मैग्जींस आदि का प्रकाशन भी यही टीम करती है। कंपनी की वेबसाइट को अपग्रेड करना, इसके ले-आउट व कंटेंट इत्यादि को मैनेज करना भी कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन के अंतर्गत आता है। उल्लेखनीय है कि कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन के करियर को पब्लिक रिलेशंस का करियर नहीं समझना चाहिए। दोनों की प्रकृति एक जैसी होने के बावजूद ये दोनों अलग-अलग करियर हैं। कह सकते हैं कि पब्लिक रिलेशंस कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन का सिर्फ एक हिस्सा है।

आज के फैलते कॉरपोरेट जगत में कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन में करियर की असीमित संभावनाएं हैं। 'के.ई.आई. इंडस्ट्रीज लिमिटेड' के कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन हेड गौरव साही कहते हैं, 'इंडस्ट्रीज फैल रही हैं। इससे प्रभावी कम्यूनिकेशन की जरूरत भी बढ़ रही है। हमारे चारों ओर जिस प्रकार का विकास नजर आ रहा है, इससे निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन का फील्ड लंबे समय तक ग्रो करेगा।'

स्किल्स 

कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन में अच्छे करियर के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से मास कम्यूनिकेशन में डिग्री या डिप्लोमा हासिल करना चाहिए। काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट मीनाक्षी वर्मा की सलाह है, 'कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन में करियर बनाने के इच्छुक युवा ग्रैजुएशन लेवल पर साइकॉलजी, इकनॉमिक्स, सोशॉलजी और इंग्लिश जैसे विषय लेकर बाद में मास कम्यूनिकेशन में डिग्री या डिप्लोमा कर सकते हैं। इसके अलावा, वे एमबीए मार्केटिंग या मार्केटिंग कम्यूनिकेशन या ऐडवर्टाइजिंग में पोस्ट ग्रैजुएशन भी कर सकते हैं।'

इस बात से किसी को इनकार नहीं हो सकता कि इस फील्ड में सफलता के लिए किसी प्रफेशनल डिग्री की बजाय अच्छे पर्सनल स्किल्स का होना ज्यादा मायने रखता है। 'बेट्स इंडिया' की सहयोगी कंपनी 'वन ऑन वन सकोर्न इंडिया' के एवीपी नीरज कपूर कहते हैं, 'प्रफेशनल डिग्री होने पर आप हमेशा अपने प्रतिद्वंद्वी से ऊपर गिने जाएंगे। वैसे, डिग्री से आपको इस फील्ड में एंट्री में भले ही मदद मिल जाए, लेकिन आगे का रास्ता आपको पर्सनल स्किल्स के सहारे ही तय करना होगा। इस फील्ड में लैंग्वेज स्किल्स भी बहुत महत्व रखते हैं।' मीनाक्षी आगे कहती हैं, 'कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन प्रफेशनल के लिए जरूरी है कि वह संबंधित कंपनी से जुड़े सभी मामलों को अच्छी तरह समझे। इसके अलावा करंट अफेयर्स की जानकारी और कंपनी को प्रभावित करने वाली घटनाओं पर भी नजर रखनी चाहिए।'

कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन के फील्ड में सफल होने के लिए नेटवर्किंग का गुण भी होना चाहिए। ब्रैंड मैनेजमेंट के लिए कंपनी के अंदर और बाहर अच्छे नेटवर्क की आवश्यकता होती है। इस फील्ड के व्यक्ति को अपना विश्वास भी बनाकर रखना चाहिए।

आमदनी 

इस फील्ड को आकर्षक यूं ही नहीं कहा जाता। शुरुआती स्तर पर 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह की सैलरी आसानी से मिल जाती है, जबकि मिडल लेवल पर 10-25 लाख रुपये सालाना और ऊंचे पदों पर एक-डेढ़ करोड़ रुपये तक का पैकेज मिल सकता है। कुल मिलाकर, इस फील्ड में आपकी ग्रोथ आपकी परफॉर्मेंस पर निर्भर करती है।

संभावनाएं 

कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन का फील्ड असीम संभावनाओं से भरपूर है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है बिजनस वर्ल्ड में लगातार बढ़ती प्रतियोगिता। हर कंपनी अपने ब्रैंड को सबसे आगे देखना चाहती है और इसमें अहम भूमिका निभाते हैं कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन टीम के लोग।

संस्थान 

- भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली

- सिंब्यॉसिस इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन, पुणे

- मुद्रा इंस्टिट्यूट ऑफ कम्यूनिकेशन, अहमदाबाद

- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ जर्नलिजम ऐंड न्यू मीडिया, बेंगलुरु 

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