बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

Radio News Department / media guruji

Radio News
Department

           आकाशवाणी के प्रमुख,महानिदेशक होते हैं। जिनकी सहायता के लिए कई उपमहानिदेशक कार्यक्रम निर्माण और प्रबंधन संबंधी मामलों में कार्य करते हैं। तकनीकी मामलों में महानिदेशक की सहायता के लिए इंजीनियर इन चीफ और कई अन्य अधिकारी होते हैं। 7 दिसंबर 2001 में की गई गणना के अनुसार आकाशवाणी के 208 स्टेशन हैं। देश का 89.51 % क्षेत्रफल तकरीबन 232 ट्रांसमीटरों द्वारा कवर किया जा रहा है।
समाचार सेवा विभाग
आकाशवाणी का समाचार सेवा विभाग प्रतिदिन 39 घंटे और 32 मिनिट की कुल अवधि के 316 समाचार बुलेटिन प्रसारित करते हैं। इनमें से 84 समाचार बुलेटिन घरेलू सेवा के लिए आकाशवाणी के दिल्ली केन्द्र से प्रसारित किए जाते हैं। दिल्ली केन्द्र से प्रसारण की कुल अवधि 12 घंटे 20 मिनिट तय है। इसके अलावा 45 क्षेत्रीय समाचार केन्द्र, 64 भाषाओं और बोलियों में कुल 17 घंटे 56 मिनिट अवधि के 139 समाचार बुलेटिन प्रतिदिन प्रसारित करते हैं। विदेश प्रसारण सेवा के तहत आकाशवाणी द्वारा 25 भाषाओं (भारतीय और विदेशी) में कुल 8 घंटे 47 मिनिट      अवधि के 64 समाचार बुलेटिन प्रसारित किया जाता है। समाचार सेवा विभाग दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के एफ.एम. चैनलों से समाचारों के 29 मिनिट अवधि के बुलेटिन प्रसारित करता है। प्रतिदिन हर घंटे हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में समाचार बुलेटिन दिल्ली से प्रसारित किए जाते हैं। इसके अलावा अन्य तीन आकाशवाणी केन्द्रों से एफ.एम.चैनलों पर संबंधित क्षेत्रीय भाषा में बुलेटिन प्रसारित किए जाते हैं।
 आकाशवाणी विशेष बुलेटिन, जैसे खेलकूद और युवाओं से   संबंधित बुलेटिन भी प्रसारित करता है। दिल्ली से दो युवा बुलेटिन हिन्दी और अंग्रेजी में आकाशवाणी बंग्ला भाषा में युवाओं के लिए दो बुलेटिन  प्रसारित किये जाते हैं। इसके अलावा समाचार सेवा प्रभाग हिन्दी और अंग्रेजी में समाचार आधारित कार्यक्रम और समीक्षाएं भी प्रसारित करता है।
केन्द्रीय समाचार कक्ष
केन्द्रीय समाचार कक्ष दिल्ली में समाचार प्रभाग के अन्तर्गत कार्य करता है। जनरल न्यूज रूम याने जी.एन.आर. 1991 के पहले तक अकेला समाचार कक्ष था, जो हिन्दी और अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं के लिए समाचार जुटाता था। परन्तु इसका माध्यम अंग्र्रेजी ही था और समाचार की प्रथम प्रति अंग्रेजी भाषा में ही होती थी, जिसे सुविधानुसार अन्य भाषाओं के लिए अनुदित कर लिया जाता था। परन्तु 1991 के बाद अंग्रेजी और हिन्दी में समाचार बुलेटिन अलग-अलग तैयार होते हैं। लेकिन महत्वपूर्ण जी.एन.आर. या जनरल न्यूज रूम ही है। जहाँ लगभग सभी भाषाओं के बुलेटिन तैयार किए जाते हैं।
 यह संपूर्ण क्रियाकलाप पूल में विभाजित होता है। यहाँ एक एडिटर इन्चार्ज होता है जिसके पास सभी सूत्रों से प्राप्त समाचार होते हैं। इनमें एजेंसियों से प्राप्त समाचार, विभिन्न राजनीतिक दलों का सरकारी अथवा गैर सरकारी संस्थानों की विज्ञप्तियाँ, संवाददाता द्वारा भेजी गई खबरें और विशेष स्थानों पर की गई रिकॉर्डिंग का विवरण होता है। कुल मिलाकर तीन पूल होते हैं। जिनमें एक मॉनीपूल, दूसरा डेपूल और तीसरा ईवनिंग पूल होता है। इसके अलावा संसद चालू होने पर संसद पूल और चुनाव के समय इलेक्श पूल बना दिया जाता है। पूल एक में हमारे देश की खबरें होती हैं और पूल दो में विदेशी खबरों को रखा जाता है। खबरों के संपादन के पश्चात मुख्य समाचारों की प्रति तैयार कर एडिटर इन्जार्च, बेलेटिन एडिटर के पास भेजता है। बुलेटिन इसे न्यूज रीडर के साथ बैठकर मिलान करता है तथा न्यूज एडिटर को आने वाली दिक्कतों को समझकर उसे ठीक करवाता है। इनमें किसी विशेष शब्द का उच्चारण बुलेटिन की अवधि प्राप्त समाचार कम होने या      अधिक अवधि के होने संबंधी कठिनाइयाँ प्रमुख रूप से होती हैं। ऐसे में बुलेटिन एडिटर समाचार की अंतिम पंक्तियों को निश्चत करता है। उदाहरण के तौर पर खेल के समाचारों को अधिकतर समाचारों के अन्त में स्थान दिया जाता है, यदि समाचार अवधि से अधिक होते हैं, तो बीच में से कोई कम महत्व का समाचार छोड़ देते हैं या स्थान देने के बाद प्रमुख समाचारों या सुर्खियों को बढ़ा दिया जाता है। एडिटर इन्चार्ज की तैयार की गई प्रति सभी भाषा के लिए एडिटर को भी प्राप्त होती है। इसकी एक प्रति हिन्दी समाचार कक्ष को और एक प्रति दूरदर्शन को भेज दी जाती है।
 हिन्दी समाचार कक्ष अपना हिन्दी बुलेटिन स्वयं तैयार करता है, लेकिन अंग्रेजी समाचार बुलेटिन की प्रति प्राप्त होने पर हिन्दी बुलेटिन में ले लेता है। प्रकारान्तर से वह अंग्रेजी और हिन्दी बुलेटिन का मिलान कर लेता है, जिससे कि समाचार की प्राथमिकता को आघात न पहुँचे।
 रेडियो नेटवर्क बहुत विस्तार वाला है तथा रेडियो के अंशकालिक संवाददाताओं के अतिरिक्त इसके पूर्णकालिक संवाददाता भी सभी जगह फैले हुए हैंै। आकाशवाणी समाचारों की प्रामाणिकता के लिए एडिटर इन्चार्ज कई बार एजेंसी से प्राप्त समाचारों को अपने पूर्णकालिक संवाददाता के साथ मिलान करने के बाद ही प्रसारण योग्य समझता है, क्योंकि कई बार एजेंसियों से प्राप्त समाचार अतिशंयोक्ति पूर्ण अथवा संक्षित होेते हैं।
विदेश प्रसारण सेवा प्रभाग
आकाशवाणी का विदेश प्रसारण सेवा विभाग भारत और अन्य देशों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य कर रहा है। यह विभाग 100 देशों के लिए 26 भाषाओं मंे कुल 71 घंटे प्रसारण करता है। जिनमें 16 विदेशी भाषाएँ भी शामिल हैं। विदेश प्रसारण सेवा प्रत्येक शनिवार को संयुक्त राष्ट्र के लिए समाचार प्रसारित करता है। इसके अलावा सार्क देशों,    मध्य पूर्व व दक्षिण पूर्व एशिया के लिए इसके प्रसारणों में रात 9 बजे अंग्रेजी का राष्ट्रीय समाचार बुलेटिन प्रसारित किया जाता है। यह विभाग सांस्कृति विनिमय कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 100 देशांे को संगीत और स्पोकन वर्ड कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराता है।
समाचार सेवा प्रभाग की प्रमुख छः इकाइयां निम्नलिखित हैं-1. जनरल न्यूज रूम- यह वह कक्ष है जहाँ राष्ट्रीय एवं बाहरी सेवाओं के अंतर्गत प्रसारित किए जाने वाले समाचार बुलेटिनों का चयन एवं संपादन होता है। इसमें पूल डेस्क होता है। जिसका इंजार्च पूल एडिटर महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है। इस पूल में निम्नलिखित स्रोतों से समाचार आते हैं।
  (अ) देश विदेश में नियुक्त आकाशवाणी संवाददाताओं द्वारा भेजी   जाने वाली खबरें।
  (ब) समाचार समिति द्वारा आने वाले समाचार।
  (स) विभिन्न दूतावासों द्वारा प्रेषित सामग्री।
  (द) मॉनीटरिंग यूनिट द्वारा भेजी गई समाचार सामग्री।
2. संवाददाता यूनिट- इस यूनिट में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित संवाददाताओं द्वारा भेजे गए समाचार सामग्री का संग्रह किया जाता है।  बाद में इसे जनरल न्यूज रूम में भेज दिया जाता है।
3. भारतीय भाषाएँ यूनिट- इस यूनिट में जनरल न्यूज रूम द्वारा   संपादित समाचार-कॉपी आती है। जिन-जिन भारतीय भाषाओं में राष्ट्रीय सेवा के तहत समाचार प्रसारित किए जाते हैं, उन सभी भाषाओं की पृथक् यूनिट अथवा समूह (ग्रुप) में उसका अनुवाद सम्बद्ध भाषा में कर लिया जाता है। जनरल न्यूज़ रूम से प्राप्त समाचार-कॉपी अंग्रेजी में होती है।
4. हिन्दी यूनिट- हिन्दी यूनिट भारतीय भाषाओं की यूनिट से एक स्वतंत्र यूनिट है। हिन्दी भाषा में प्रसारित किए जाने वाले समाचार-बुलेटिनों  का चयन और संपादन किया जाता है। इस यूनिट में अलग से विभिन्न समाचार एजेंसियांे के टेलीप्रिंटर लगे रहते हैं।
5. न्यूज रील यूनिट- इस यूनिट में न्यूज रील का निर्माण होता है। इसके प्रसारण की अवधि सामान्यतः 15 मिनिट की होती है। इस विभाग में समाचारोें के अतिरिक्त कमेंट्री और इंटरव्यू भी होते हैं। इस यूनिट का प्रभारी एक वरिष्ठ तथा अनुभवी समाचार संपादक होता है। जिसके साथ दो अन्य सहयोगी संपादक होते हैं।
6. मॉनीटरिंग यूनिट- इस यूनिट में लगभग 40 देशों के करीब 200 समाचार बुलेटिनों को मानीटर किया जाता है। टेप रिकॉर्डिंग के पश्चात इनकी टंकित प्रतियाँ निकाल ली जाती हैं। इनमें एक तो, आकाशवाणी समाचार बुलेटिन ः तैयारी एवं प्रसारण
रेडियो समाचार के बुलेटिन तैयार करने एवं बुलेटिन प्रसारित करने का कार्य एक ‘टीमवर्क’ है। इसलिए इस काम से जुड़े सभी सदस्यों का आपस में अच्छा तालमेल रहना चाहिए।
                      लिखे हुए समाचार ‘पूल’ में रखे जाते हैं। यह एक तरह से समाचारों का ‘भण्डारण गृह’ है। पूल (समाचार-सरोवर) प्रायः दो हिस्सों में होता है- पहला हिस्सा देशी समाचारों के लिए, दूसरा हिस्सा विदेशी समाचारों के लिए। विदेशी समाचारों के साथ पहले खेलकूद संबंधी समाचार भी हुआ करते थे। अब इन समाचारों के लिए स्वतंत्र पूल की व्यवस्था की गई है। यह पूल सुबह, दिन, शाम और रात- इन चार हिस्सों में बंटे होते हैं। इन्हीं के अनुसार इनको क्रमशः मॉर्निंग पूल, डे-पूल, ईवनिंग पूल तथा नाइट पूल कहते हैं। संक्षेप में इनको संकेताक्षरों से इस तरह व्यक्त किया जाता है- एम.पी.-प् (मार्निंग पूल, यानी सुबह का वह पूल जिसमें देश के समाचार हैं)। एम.पी. यानी सुबह का वह पूल जिसमें विदेश के (और आवश्यक हुआ तो खेलकूद के भी) समाचार हैं। इसी तरह डी.पी. प्, डी.पी. प्प्, ई.पी. प्, ई.पी. प्प् एन.पी. प्, एन.पी. प्प् हैं।
 संसद का सत्र चल रहा हो, उन दिनों एक पूल अलग से बना दिया जाता है। इसमें डी.पी.पी., ‘डे पार्लियामेंट पूल’ भी होता है। शाम को ‘ईवनिंग पार्लियामेंट पूल’ (ई.पी.पी.) और यथावश्यक ‘स्पोर्ट पूल’ बनाए जाते हैं।
 समाचार-प्रभाग के प्रायः वरिष्ठ संपादक ही सुबह आठ तथा  सवा आठ के समाचार-बुलेटिन तैयार करते हंै। शाम को मुख्य बुलेटिन  आठ पैंतालीस बजे हिन्दी में और नौ बजे अंग्रेजी में प्रसारित होते हैं। इन बुलेटिनों को भी अनुभवी वरिष्ठ संपादक तैयार करते हैं। सहयोगी संपादकों के लिए अपने सुयोग्य, अनुभवी और वरिष्ठ संपादकों का कार्य एक अनुकरणीय आदर्श होता है। इसलिए वरिष्ठ संपादक बहुत जिम्मेदारी से अपना कार्य करते हैं। वे अपने घर पर भी हों तो भी प्रसारित होने वाले समाचार बुलेटिनों को ध्यान से सुनते हैं। यदि किन्हीं कारणों से यह संभव नहीं हो पाता तो वे उन बुलेटिनों को पढ़ते हैं, जो उनकी पिछली ड्यूटी के बाद प्रसारित हुए थे।
 अपनी ड्यूटी पर आते ही सभी समाचार संपादक सबसे पहले ‘सर्विस रिपोर्ट’ पढ़ते हैं। यह रिपोर्ट प्रत्येक प्रभारी संपादक (इंचार्ज) अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद उत्तराधिकारी संपादक के लिए छोड़ जाता है। इसमें वे बातें लिखी होती हैं, जो अगली ड्यूटी में संपादकों को करनी हैं। इसी में उन निर्देशों की भी चर्चा होती है, जो ‘ऊपर’ से दिए गए हैं। इससे पता चल जाता है कि संपादक को अपनी ड्यूटी में किन बातों का ध्यान रखना है, क्या करना है, क्या नहीं करना है।
 इसके बाद संपादक ‘पूल’ को पढ़ता है। उदाहरण के लिए जो संपादक प्रातः 8 बजे और सवा आठ बजे का बुलेटिन करता है, उसे शाम के सारे पूल पढ़ने होते हैं और देखना होता है कि कोई महत्वपूर्ण समाचार शाम को छूट तो नहीं गया था। इसी तरह उसे ‘नाइट पूल’ पढ़ना होता है। ‘मार्निंग पूल’ तो उसके सामने आते ही रहते हैं। वह एक कागज पर लिखता जाता है कि उसे कौन सी संख्या का कौन-सा समाचार ‘ईवनिंग पूल’ और ‘नाइट पूल’ से लेना है। इसी तरह ‘मार्निंग पूल’ को देखते हुए वह उसमें से अपने उपयोग के समाचार चुनता जाता है।
 संपादक को चाहिए कि वे पूल को पढ़ते समय के साथ उपयोगी समाचारों के शीर्षक नोट करते जायंे। इससे महत्वपूर्ण समाचार या उनके‘शीर्षक (हैडलाइंस) छूटने की आशंका नहीं रहती। कुछ संपादक इस काम को बुलेटिन प्रसारित होने से आधे घंटे पहले करते हैं। ऐसा करने में असुविधा हो सकती है।
 पूल से उपयोगी ‘आइटम’ (समाचार) चुनने के बाद संपादक समाचार को बुलेटिन की आवश्यकता के अनुकूल सुधार कर पुनः लिखता है। उसकी काया में काट-छांट करता है और आवश्यकता होने पर उसे बोल कर देखता तथा फिर से लिखता है। बुलेटिन की जीवंतता, सफलता और प्रभावपूर्णता संपादक की प्रतिभा, कुशलता, अनुभव और क्षमता पर निर्भर करती है।
 समाचार बुलेटिन को तीन हिस्से में बांटा जाता है
   1. मोंटाज
   2.  हैडलाइन
   3.  बुलेटिन में जाने वाला समाचार
   4. ब्रेक
   5. रिपीट हैडलाइट

 रेडियो में पांच, दस और अधिकतम पन्द्रह मिनट का बुलेटिन प्रसारित किया जाता है। बड़े बुलेटिन में दो ब्रेक होते हैं। दस मिनट के बुलेटिन में एक ब्रेक और पांच मिनट के बुलेटिन में कोई ब्रेक नहीं होता है। ब्रेक से दो फायदे होते हैं- एक तो समाचार वाचक को आराम मिल जाता है और दूसरा संपादक हर ब्रेक के बाद नए क्रम में समाचार दे सकता है। रेडियो और समाचार पत्रों के लेखन में बहुत अंतर होता है। रेडियो में समय कम होने के कारण समाचारों को संक्षेप में लिखा जाता है। जिस प्रकार अखबार के पहले पेज में सबसे महत्वपूर्ण समाचार होते हैं उसी तरह रेडियो बुलेटिन में पहली खबर का सबसे ज्यादा महत्व होता है। समाचार पत्र की तरह रेडियो लेखन में अगले पृष्ठ पर या उपरोक्त जैसे शब्दों का उपयोग नहीं किया जाता। रेडियो समाचार मे इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि समाचार श्रंखला बिखरने न पाए। बुलेटिन की शुरूआत में हैडलाइन्स पढ़ी जाती है, बाद में यही समाचार श्रोताओं के सामने विस्तार से बता दिए जाते हैं। 5 मिनट के रेडियो बुलेटिन में कोई हैडलाइन नहीं होती, जबकि 10 मिनट के बुलेटिन में 3 से 4 और 15 मिनट के बुलेटिन में 5 से 6 हैडलाइन समाहित होती हैं।  समाचारों के लेखन और क्रमबद्ध तरीके से लगाते समय हैडलाइन्स और समय का विशेष ध्यान रखा जाता है। आम तौर पर बुलेटिन की शुरूआती खबर राजनीतिक और आखिरी मौसम संबंधी होती है।

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