बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

History of TV / टेलीविजन का इतिहास

History

विश्व मे टेलीविजन का विकास असमान रूप से हुआ है। यह स्वाभाविक भीए क्योंकि औद्योगिक क्रांति के बाद पश्चिमी देश जिस प्रकार तकनीक एवं उत्पादन में एशियाई और अफ्रीकी देशों से काफी आगे निकल गएए उसकी भरपाई करना औपनिवेषिक देशों के लिए इतना आसान नहीं था। टेलीविजन का विकास तकनीक और धन की उपलब्धता.दोनों से सीधा जुड़ा रहा है। इसलिए अमीर विकसित देशों. ब्रिटेन, अमेरिका, रूस और जापान में टेलीविजन काफी पहले 30 के दशक में ही आरंभ हो गया  ताकि गरीब एशियाई.अफ्रीकी देशों में इसे शुरू होने में आधी सदी निकल गई। इनमें भी जिन देशों की सरकारों ने टेलीविजन के प्रसार में अधिक रूचि दिखाईए वहाँ पर ही टेलीविजन जल्दी पनप पाया। अधिकांश विकासशील देशों में धनाभाव के चलते सरकारों का टेलीविजन के प्रति रवैया ढुल.मुल रहा। अधिकांश पिछड़े देशों में विदेशी मदद से ही टेलीविजन    शुरू हो पाया। टेलीविजन का जो रूप आज अमेरिकाए ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में हैए उसकी तुलना में एशियाई और अफ्रीका देशों में टेलीविजन की तस्वीर कहीं भी मुकाबले में नहीं ठहरती। जब भी टेलीविजन के विकास की बात होती है तो उसका आशय होता है. टेलीविजन की तकनीक ;टेलीविजन रिसीविंग सेट टेलीविजन ट्रांसमीटरए वीडियो कैमरेए एडीटिंग तकनीक इत्यादिद्धए टेलीविजन सॉफ्टवेयर ;टेलीविजन कार्यक्रमद्ध  और टेलीविजन विशेषज्ञों ;टेलीविजन की समझ रखने वाले कार्यक्रम निर्माता.निर्देशकोंद्ध का विकास। विकासशील देशों में टेलीविजन तकनीक के रूप में तो काफी पहलेए 50 और 60 के दशक में स्थापित हुआए लेकिन 80 के दशक तक टेलीविजन कार्यक्रम निर्माण तकनीक उपलब्ध न होने के कारण बड़ी संख्या में इन देशों को टेलीविजन कार्यक्रमों का आयात करना पड़ता था। ये कार्यक्रम अमेरिकाए ब्रिटेनए जर्मनीए जापान आदि देशों से मँगाए जाते थे और देशज भाषा में डब करके इन्हें दिखाया जाता था। विश्व मे टेलीविजन का विकास असमान रूप से हुआ है। यह स्वाभाविक भीए क्योंकि औद्योगिक क्रांति के बाद पश्चिमी देश जिस प्रकार तकनीक एवं उत्पादन में एशियाई और अफ्रीकी देशों से काफी आगे निकल गएए उसकी भरपाई करना औपनिवेषिक देशों के लिए इतना आसान नहीं था। टेलीविजन का विकास तकनीक और धन की उपलब्धता.दोनों से सीधा जुड़ा रहा है। इसलिए अमीर विकसित देशों. ब्रिटेनए अमेरिकाए रूस और जापान में टेलीविजन काफी पहले 30 के दशक में ही आरंभ हो गयाय ताकि गरीब एशियाई.अफ्रीकी देशों में इसे शुरूहोने में आधी सदी निकल गई। इनमें भी जिन देशों की सरकारों ने टेलीविजन के प्रसार में अधिक रूचि दिखाईए वहाँ पर ही टेलीविजन जल्दी पनप पाया। अधिकांश विकासशील देशों में धनाभाव के चलते सरकारों का टेलीविजन के प्रति रवैया ढुल.मुल रहा। अधिकांश पिछड़े देशों में विदेषी मदद से ही टेलीविजन शुरूहो पाया। टेलीविजन का जो रूप आज अमेरिकाए ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में हैए उसकी तुलना में एशियाई और अफ्रीका देशों में टेलीविजन की तस्वीर कहीं भी मुकाबले में नहीं ठहरती। जब भी टेलीविजन के विकास की बात होती है तो उसका आशय होता है. टेलीविजन की तकनीक ;टेलीविजन रिसीविंग सेट टेलीविजन ट्रांसमीटरए वीडियो कैमरेए एडीटिंग तकनीक इत्यादिद्धए टेलीविजन सॉफ्टवेयर ;टेलीविजन कार्यक्रमद्ध  और टेलीविजन विशेषज्ञों ;टेलीविजन की समझ रखने वाले कार्यक्रम निर्माता.निर्देशकोंद्ध का विकास। विकासशील देशों में टेलीविजन तकनीक के रूप में तो काफी पहलेए 50 और 60 के दशक में स्थापित हुआए लेकिन 80 के दशक तक टेलीविजन कार्यक्रम निर्माण तकनीक उपलब्ध न होने के कारण बड़ी संख्या में इन देशों को टेलीविजन कार्यक्रमों का आयात करना पड़ता था। ये कार्यक्रम अमेरिकाए ब्रिटेनए जर्मनीए जापान आदि देशों से मँगाए जाते थे और देशज भाषा में डब करके इन्हें दिखाया जाता था। इससे पूरी दुनिया के विकासशील देशों में एक बिलकुल नए किस्म का सांस्कृतिक संकट उत्पन्न होने लगा। टेलीविजन के माध्यम से सांस्कृतिक हमले का यह नया रूप थाए अधिकांश पिछड़े देश जिसके षिकार बन रहे थे। सन् 1980 में प्रकाशित प्रसिद्ध मैकब्राइड कमीशन की रिपोर्ट में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि विकासशील देश यदि अपने देशज टेलीविजन तकनीक अपना लेने से उनका भला नही बल्कि नुकसान ही अधिक होगा। भारत में भी पीण्सीण् जोषी की अध्यक्षता में बनी एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में भारत में टेलीविजन के भारतीय चेहरे को तराशने पर बल दिया।
 विकसित राष्ट्रों ने मीडिया को हमेषा षीतयुद्ध के एक सशक्त हथियार के रूप में उपयोग किया। हालाँकि एशियाई और अफ्रीकी देश मीडिया का कूटनीति औजार के रूप मे अधिक प्रभावी ढंग सै प्रयोग नहीं कर पाए। मैकब्राइड रिपोर्ट में सूचना के एकतरफा और असंतुलित प्रवाह  के बारे में भी आगाह किया गया था। टेलीविजन के मामले में प्रवाह की यह दिया आज भी आसानी से देखने को मिल सकती है। विकासशील देशों में बनने वाले ढेरों टेलीविजन कार्यक्रम या तो अमेरिकी या ब्रिटिश कार्यक्रमों की सीधी नकल होते हैं अथवा उनसे आइडिया चुराया गया होता है। दुनिया में जिस प्रकार तेजी से मीडिया कंपनियों के बड़े समूह आपस में हाथ मिला रहे हैंए उससे प्रतीत होता है कि आने वाले दशकों में टेलीविजन जग्त की दिषा दुनिया की कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ही तय करेंगी।  स्वाभाविक है कि इन कंपनियों में अधिकांश  पष्चिम की हैं। लगभग इसी प्रकार दुनिया भर में सूचना.प्रवाह को नियंत्रित करने वाली कुछ न्यूज एजेंसियाँ पष्चिम की हैं। टेलीविजन तगत् में असमानता के समीकरण का अगले कुछ सालों में कम होने का अनुमान तो लगाया जा सकता हैए लेकिन ऐतिहासिक विशमता समाप्त हो जाएगीए यह कहना मुश्किल है।

ब्रिटेन
दुनिया में सबसे पहले इंग्लैड में टेलीविजन की शुरूआत हुई। आज भी ब्रिटिश टेलीविजन अपनी तकनीक और कार्यक्रमों के मामले में विश्व भर में माना जाता है। ऐतिहासिक दृष्टि से ब्रिटेन में टेलीविजन काफी नियंत्रित और संतुलित रूप में विकसित हुआ है। ब्रिटेन में पब्लिक सर्विस और व्यावसायिक टेलीविजन का मिला.जुला रूप है और दोनों के बीच स्वास्थ्य प्रतिस्पर्द्धा भी देखने को मिलती है। वर्तमान में बीण्बीण्सीण् के चार प्रमुख चैनलों में से तीन  और चैनल.4 जनहित कार्यक्रमों को समर्पित हैं। अल्पसंख्यकों और विशेष उद्देष्यों के लिए कार्यक्रम प्रसारित करते हैंए ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कंपनी नाम से बीण् बीण् सीण् का गठन अक्टूबर 1922 में मारकोनी सहित ब्रिटेन के प्रमुख वायरलेस निर्माताओं ने किया था। इसी साल 14 नवम्बर को मारकोनी के लंदन स्थित स्टूडियो से बीण्बीण्सीण् रेडियो का पहला प्रसारण हुआ। अगले दिन बर्मिघम और मैनचेस्टर में भी रेडियो प्रसारण किया गया। एक साल के अंदर ही बीण्बीण्सी रेडियो पूरे इंग्लैंड में सुना जाने लगा। अपने पहले जनरल मैनेजर जॉन रीड की अगुवाई में बीण्बीण्सी इस दौरान नाटकए लोकप्रिय कंसर्टए शास्त्रीय संगीतए वार्ताएँ और वैराइटी षोज का प्रसारण करता था। सन् 1926 में पहली बार देशव्यापी हड़ताल के दौरान बीण्बीण्सी और ब्रिटेन की सरकार आमने.सामने आ गए। बीण्बीण्सी को सरकार को नियंत्रण में लाने की चर्चा होने लगी।
 सन् 1927 में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कंपनी को सरकार ने रॉयल चार्टर देकर ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन बना दिया और जॉन रीड को ष्नाइटष् प्रदान कर इसका पहला डायरेक्टर जनरल नियुक्त कर दिया गया। बीण्बीण्सी के नियंत्रण की जिम्मेदारी बारह गवर्नरों के हाथ में होती है। न्यासी के रूप में ये गवर्नर समाज के षिक्षाए इतिहासए कलाए संस्कृतिए राजनीति आदि क्षेत्रों में से चुने जाते हैं। इनकी नियुक्ति ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की सिफारिश पर महारानी द्वारा की जाती है। बीण्बीण्सी की स्वायत्ता बरकरार रखने के लिए इन्हें हटाने की प्रक्रिया को काफी कठिन बनाया गया है। फिर भी से गवर्नर संसद के प्रति उत्तरदायी होते हैं और इन्हें वार्षिक रिपोर्ट संसद में पेश करनी पड़ती है।
 बीण्बीण्सी ने अपनी टेलीविजन सेवा.2ए नवम्बर 1936 को उत्तरी लंदन के अलेक्जेंडर पैलेस से आरंभ की। इस प्रसारण को लोगों ने 10 इंच के टेलीविजन पर देखा।  सन् 1936.39 क दौरान टेलीविजन का विकास तेजी से हुआ। 12 मई 1937 को जार्ज छठे के राज्याभिषेक जुलूस के प्रसारण और इसी साल जून महीने में विंबल्डन की कवरेज ने टेलीविजन को लोगों के बीच काफी लोकप्रिय बना दिया। सितम्बर 1939 का द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ हो गया। इस समय मिक्की माउस का कार्टून कार्यक्रम दिखाया जा रहा था। प्रसारण यहीं रोक दिया गया और सात साल बाद 7 जून 1946 को इसी कार्टून को दिखाकर पुनः टेलीविजन प्रसारण शुरूकिया गया। टेलीविजन प्रसारण रोकने का एक कारण युद्ध में इसको नुकसान पहुँचाने का डर थाए साथ ही अधिकांश इंजीनियर भी युद्ध संबंधी कार्यो में लगे थे। इसलिए यह काल टेलीविजन के विकास के लिए काफी झटका देनेवाला रहा।
 जॉन रीड टेलीविजन के प्रति अधिक उत्साहित नहीं थे लेकिन 1952 में जब सर इयान जैकब बीण्बीण्सी के डायरेक्टर बने तो उन्होंने   बीण्बीण्सी टेलीविजन को महत्व देना शुरूकर दिया। 2 जून 1953 की घटना ने ब्रिटेन में टेलीविजन के इतिहास को सदा के लिए बदल दिया। महारानी की ताजपोषी के टेलीविजन प्रसारण को लगभग 2 करोड़ 20 लाख लोगों ने देखा। दर्शकों ने इस घटना को देखने के लिए टेलीविजन सेट खरीदे या फिर पड़ोसियों के घर जाकर टेलीविजन देखा। दरअसलए यह टेलीविजन युग की शुरूआत कही जा सकती है। जैसे.जैसे टेलीविजन के सितारे लोकप्रिय होने लगे। इनमें डेविड एटनब्रोए इमोन एंड्रयूज और जैक वार्नर प्रमुख थे।
 सन् 1954 में बनाए गए द टेलीविजन एक्ट ने इंडिपेंडेंट टेलीविजन यप्ज्टद्ध नामक विज्ञापन पोषित सेवा शुरूकरने की अनुमति दे दी। सितंबर 1955 में शुरूहुए आईण्टीण्वी ने बीण्बीण्सी  को कड़ी टक्कर देना शुरूकर दिया। आईण्टीण्वीण् देश भर की विभिन्न कंपनियों का एक मिला.जुला चैनल था। इसने पहली बार विभिन्न विशयों और पसंदो को पहचानना शुरूकर दिया। इसकी प्रस्तुति का अंदाज भी बीण्बीण्सीण् की तुलना में अधिक अनौपचारिक था। यही कारण था कि इसे आम लोगों का चैनल कहा जाने लगा। सन् 1957 के दर्शक आँकड़े बताते हैं कि आईण्टीण्वी के कारण बीण्बीण्सी के दर्शकों में 28 प्रतिशत तक की कमी आ  गई थी। इसी दशक के अंत में वीडियो टेप के कारण घटनाओं की विडियो रिकॉर्डिग संभव हो पाई। इस सुविधा ने टेलीविजन प्रोडक्शन को बदलकर रख दिया।
 सन् 1967 में बीण्बीण्सी ने अपना दूसरा चैनल बीण्बीण्सी.2 ;21 अप्रैलद्ध आरंभ किया। 2 दिसंबर 1967 को पहली बार बीण्बीण्सी ने रंगीन प्रसारण शुरूकिया। 60 का दशक ब्रटेन में नए किस्म के टेलीविजन के लिए जाना जाता है। अब बँधे.बँधाए नियमों को तोड़करए लीक से थोड़ा हटकर कार्यकम बनने लगे। आधुनिकता की बहस में परंपरागत सीमाओं और मर्यादाओं की आलोचना की जाने लगी। टेलीविजन पर सच्चाई को दिखाने का दबाव बढ़ा। नतीजे में गहरे राजनीतिक व्यंग्य लिए और बनाए गए।  बेघर और विस्थापित लोगों के दुःख को दरषानेवाले नाटक  के अलावा भी दर्शकों द्वारा खूब पसंद किए गए। इसी दशक में लोगों ने राजघराने के लोगों को टेलीविजन पर साक्षात्कार देते हुए देखा। सन् 1969 में दर्शकों ने चंद्रमा पर पहले व्यक्ति के पहुँचने की तसवीर भी टेलीविजन पर देखी।
 70 के दशक को ब्रिटिश टेलीविजन का स्वर्णिम काल कहा जा सकता है। इस दौरान टेलीविजन सेटों की संख्या तेजी से बढ़ी और इसी के साथ ही विज्ञापनों एवं लाइसेंस फीस से टेलीविजन की आय में भी बढ़ोतरी हुई। यह दशक अपने षानदार वृत्तचित्रों के लिए जाना जाता है।   रोमियो जूलियट ;1974द्ध पहला रीयलिटी षो कहा जाता है। वैरायटी षोज के अलावा इस दशक में रोमियो और जूलियट;1978द्ध  से शुरूकरके षेक्सपीयर के अनेक नाटकों का टेलीविजन रूपांतरण दिखाया गयाए जो काफी लोकप्रिय भी रहा।
 ष्80 के दशक में बीण्बीण्सी को सरकार की ओर से अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अन्नान कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बीण्बीत्रसी पर मानसिक संतुलन बिगड़ने और सांगठनिक धुंध बढ़ने का आरोप लगाया। कमेटी की रिपोर्ट के बाद सन् 1982 में चैनल.4 आरंभ किया। चैनल.4 संसद् में कानून पारित करक शुरूकिया गया थाय लेकिन सरकार की ओर से इसे कोई पदद नही मिलतीए बल्कि व्यावसायिक गतिविधयों से ही इसकी आमदानी होती है। इस चैनल के कार्यक्रमों का  फोकस ब्रिटेन में रह रहे एशियाई और अफ्रीकी अल्पसंख्यकों की सांस्कृतिक पहचान को बनाया गया। यह चैनल लगभग 300 स्वतंत्र टेलीविजन निर्माताओं से कार्यक्रम बनवाता है। चैनल.4 समूह अनेक मनोरंजक चैनल चलाता है।
 ष्80 का दशक बीण्बीण्सी के रिपोर्टरों के लिए काफी चुनौती भरा रहा इस दौरान दुनिया भर में अनेक ऐसे संकट आएए जिनकी रिपोर्टिंग करने के लिए बीण्बीण्सी ने अपने संवाददाता घटनास्थल पर भेजे। उत्तरी आयरलैंड की घटना ए चीन के थ्येन आनमान चौक पर छात्र आंदोलनए पूर्वी यूरोप के कम्युनिस्ट देशों और सोवियत संघ का विघटनए कोयला खनिकों की हड़ताल ऐसे घटनाक्रम थे तब बीण्बीण्सी के रिपोर्टरों ने षानदार रिपोर्टिंग की। इस दशक में अनेक लोकप्रिय समाचार और समसामयिक घटनाओं पर आधारित कार्यक्रम शुरूहुए।  इसके अलावा मनोरंजक कार्यक्रम काफी लंबे समय तक चर्चित रहे।
 ष्80 के दशक में ही ब्रिटेन के तीसरे प्रमुख चैनल ने अपने पैर पसारे। रूपर्ट मर्डोक ने 1983 में लंदन स्थित एक कंपनी सैटेलाइट टेलीविजन लिमिटेड के 65 प्रतिशत षेयर खरीद लिए।यह कंपनी यूरोप के पहले सैटेनाइट चैनल को एक साल पहले से ही पश्चिमी यूरोप में प्रसारित कर रही थी मर्डोक ने जनवरी 1984 में इसे स्काई चैनल के रूप में पुनः लॉन्च कर दिया। उस समय तक ब्रिटेन में केवल 10000 के करीब घर ऐसे थे जिनमें केबल अेलीविजन का कनेक्षन था। लेकिन सन् 1987 तक आते.आते स्काई टीण्वी ने लगभग 11 प्रतिशत घरों में अपनी पहुँच बना ली। ब्रिटिश सरकार ने मर्डोक को जब सैटेलाइट से प्रसारण करने की अनुमति नहीं दी तो उसने बाहर के एक उपग्रह से तीन चैनलों का एक पैकेज ब्रिटेन में प्रसारित करना शुरूकर दिया। 
 ग्रैनेडा टीण्वी भी ब्रिटेन का एक प्रमुख टेलीविजन समूह है। इसने अपना प्रसारण 5 मईए 1956 को ष्षुरू किया। पहले यह समुह सिनेमा और थिएटर चलाता था। इसे ब्रिटेन के पहले सोप ओपेरा  प्रसारित करने का श्रेय प्राप्त है। इसके अलावा काफी लोकप्रिय समसामयिक मुद्दों का कार्यक्रम भी ग्रेनेडा टेलीविजन पर ही दिखाया गया था। इंडिपेंडेंट टेलीविजन न्यूज पहले एक न्यूज कंपनी के रूप में स्थापित की  गई थी। इसने अपना पहला बुलेटिन 22 सितंबरए 1955 को प्रसारित किया। 90 के दशक में ब्रिटेन ने अपने आपको नई डिजिटल तकनीक के अनुरूप ढाना शुरूकर दिया। कार्यक्रम निर्माण ही नहींए प्रसारण में  डिजिटल तकनीक को अपना लिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि पिक्चर और साउंड की क्वालिटी बढ़ी। साथ ही एनीमेशन आधारित कार्यक्रमों के जरिए  बनाना संभव नहीं था। इनमें विज्ञापन और प्राकृतिक इतिहास संबंधी कार्यक्रम काफी लोकप्रिय हुए। सन् 2000 के बाद बीण्बीण्सी ने अपने विशेष दर्शकों के लिए कुछ चैनल ष्षुरू किएय  इसके अलावा विंबल्डन 2001  के दौरान इंटरएक्टिव टेलीविजन सेवा भी आरंभ की गई।
 मई 2003 में बीण्बीण्सी सरकार केसाथ एक विवाद में उलझ गई। बीण्बीण्सी ने इराक युद्ध के बाद एक खबर दिखाईए जिसके अनुसार इराक में व्यापकता संहार हथियार होने के तथ्य के  साथ ब्रिटिश सरकार ने खिलवाड़ किया है। प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने बीण्बीण्सी से खबर का खंडन करनने को कहाए जिसे बीण्बीण्सी क बोर्ड ऑफ गवर्नर ने नकार दिया। जुलाई महीने में सरकार के प्रमुख ष्षस्त्र सलाहकार डेविड केली ने कथित रूप से आत्महत्या कर लीं इसको लेकर सरकार ने लार्ड हट्टन की अध्यक्षता में एक जाँच समिति गठित की।
 जाँच की रिपोर्ट अपने के बाद बीण्बीण्सी चेयरमैन गैविन डवीस ने 28 जनवरीए 2004 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस सारे मामले में भले ही सरकार की जीत हुई होए लेकिन उस दौरान के सर्वेक्षण बताते हैं कि लोगों ने बीण्बीण्सी की खबर पर अधिक भरोसा जताया। अमेरिका . न्यूयॉर्क में आयोजित विश्व व्यापार मेले में पहली बार 13 अप्रैलए 1939  को आम जनता के लिए टेलीविजन का प्रदर्षन किया गया। उसके बाद कोलंबिया ब्रॉडकास्ट कॉरपोरेशन यब्ठैद्ध ने अमेरिका में दो घंटे का प्रसारण शुरूकर दिया । ब्लैक एंड व्हाइट टीण्वीण् पर आरंभ में खाना बनानें की विधियाँए हास्यएवं कठपुतली जैसे रोचक कार्यक्रम दिखाए गए। मेले में रेडियो कॉरपोरेशन ऑफ अमेरिका यत्ब्।द्ध  के स्टॉल से लागों को 5 इंच स्क्रीनवाला टेलीविजन सेट 600 डॉलर में मिलने लगा। दो  साल बाद अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन  ने टेलीविजन  कॉमर्षियल स्टेशन खोलने की अनुमति दे दी। लेकिन टेलीविजन को लेकर सारा उत्साह द्वितीय विश्व युद्ध के कारण ठंडा पड़ गया युद्ध के समय टेलीविजन की सभी विस्तार योजनाएँ रोक दी गई। अमेरिका की सबसे पुरानी टेलीविजन कंपनीयों में कोलंबिया ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम  एनेशनल ब्रॉडकास्टिग कंपनी और अमेरिका ब्रॉडकास्टिग कंपनी  प्रमुख हैं। इ्रन्हीं तीन प्रमुख कंपनीयों का अमेरिका टेलीविजन जगत् पर काफी लंबे समय तक कब्जा रहा। सन् 1952 में जब टेलीविजन दोबारा शुरू किया गया तो इसका विस्तार तेजी से हुआ और निजी कंपनियों के अलावा सरकार ने भी इसमें विशेष रूचि दिखाई। ष्50 के दशक ने अमेरिकी टेलीविजन में कुछ ऐसे कार्यक्रम दिए जिन्होंने लोकप्रियता का इतिहास रचा। बच्चा के षो भी काफी लोकप्रिय हुए। इनमें से अधिकांश कार्यक्रम निजी प्रोडक्शन हाउस से बनवाए गए थे। ष्आई लव लूसीष् नामक सिचुएशनल कॉमेडी तो इतनी लोकप्रिय हुई कि इसे दुनिया के अनेक देशों में निर्यातभी किया गसा। फिलिप मोरिस द्वारा प्रायोजित इस कॉमेडी श्रृखला के प्रमुख पात्र घर.घर में पहचाने जाने लगे।यह श्रृखला कई दशकों तक चली। इसी दौरान दोनों पात्रों ने असली जीवन में भी विवाह कर लिया। सन् 1953 में फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन ने रंगीन टेलीविजन के प्रसारण की अनुमति दी। ळनदेउवाम नामक वेस्टर्न सीरीज 1955 में शुरूहुई। यह श्रृखला अगले  बीस सालों तक दर्शकों का मनोरंजन करती रही। इसके अलावा रेवलोन कंपनी द्वारा प्रायोजित अमेरिकी टेलीविजन का पहला गेम षो 64000$ इसी साल जून में ब्ठै  पर आरंभ हुआ।  50 के दशक में टेलीविजन न्यूज को कुछ पहचान मिलनी शुरूहो गई। विशेषकर सीनेटर जोसेफ मैकार्थी ने जिस प्रकार कार्यक्रम का इस्तेमाल करके पूरे अमेरिका में कम्युनिस्ट समर्थकों के खिलाफ प्रचार कियाए उससे पहली बार टेलीविजन न्यूज के प्रभाव का अहसास हुआ। मैकार्थी के भाशण के बाद एक दक्षिण पंथी पत्रिका ष्रेड चैनलष् ने 151 ऐसे लोगों की सूची छापीए जो कम्युनिस्ट समर्थक कहे गए और ऐसे लोग अनेक मीडिया संस्थानों में काम भी कर रहे थे। एक साथ अनेक ऐसे लोगों की अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इसी दौरान अमेरिकी टेलीविजन पत्रकारिता इतिहास में एडवर्ड मूरो को सदा के लिए चर्चित बना दिया। 60 का दशक अमेरिका में टेलीविजन पत्रकारिता की दृष्टि से काफी महत्वपुर्ण रहा। सन् 1960 में कैनेडी और निक्सन के बीच की टेलीविजन बहस को पूरे देश ने देखा। 1963 में तीनों प्रमुख नेटपर्कों पर नियमित समाचारों की शुरूआत हुई। सन् 1963 में तीनों प्रमुख नेटवर्कों पर नियमित समाचारों की शुरूआत हुई। सन् 1963 में ही डॉण् मार्टिन लूथर किंग ने टेलीविजन पर अपना चर्चित भाशण  दियाए  जिसे सारे अमेरिका ने देखा था। इसी साल 2 नवंबर को राष्ट्रपति कैनेडी की हम्या की घटना की चार दिन तक की गई टेलीविजन कवरेज ने सारे राष्ट्र को टेलिविजन  के और करीब ला दिया। इसी प्रकार की कवरेज नागरिक अधिकारों के लिए लड़नेवाले नेता मार्टिन लूथर किंग की हत्या के समय भी की गई। इसी दौरान वियतमान युद्ध में अमेरिकी सेना और उसके विरोध में षांति  आंदोलनों  ने टेलीविजन के लिए भरपूर समाचार उपलब्ध कराए। ष्60 के दशक के अंत में अमेरिका के 92 प्रतिशत घरों में टेलीविजन अपनी पैठ बना सचुका था।
 सन् 1973 में वाटरगेट मामले की सुनवाई शुरूहोने के बाद  इस मामले की 300 घंटों की कुल कवरेज की गई। वाटरगेट मामले के बाद निक्सन का इसतीफा और उसके बाद  जिम्मी कार्टन का चुनाव.ये सब घटनाएँ बड़ी खबर बनीं। वैसे तो ष्60 के दशक में भी अमेरिकी जनता में टेलीविजन पर बढ़ती हिंसा के खिलाफ सुगबुगाहट होनी ष्षुरू हो गई थी। लेकिन ष्70 के दशक में यह विरोध मुखर होकर दिखने लगा। अनेक संस्थानों और उनके शोधों ने यह खुलासा किया कि बड़ी संख्या में विज्ञापन कंपनियाँ बच्चों को निषाना बना रही हैं। साथ ही प्राइम टाइम में भी टेलीविजन चैनल आपत्तिजनक सामग्री दिखाने से बाज नहीं आते। इसीलिए आचार.संहिताा यह तय किया गया कि रात नौ बजे से पहले के समय में पूरा परिवार टेलीविजन देखता हैए इसलिए इसे ष्पारिवारिक समयष् माना जाएगा। इस दोरान टेलीविजन प्रसारक कार्यक्रमों का चयन करने में ध्यान रखेंगें। 23 जनवरीए 1977 को ।ठब् ने अपनी अत्याधिक लोकप्रियता श्रृंखला त्ववजे  की पहली कड़ी का प्रसारण कर ली थी। 80 के दशक में दो बड़े चैनल. शुरूहुए। दोनों ही चैनलों ने आनेवाले वर्षों में अपने आपको फैलाकर विश्वव्यापी ब्रांड बना लिया। अगस्त 1987 में रूपर्ट मर्डोक ने अमेरिका में अपने कारोबार को विस्तार देते हुए फॉक्स ब्रॉकास्टिंग कंपनी की शुरूआत की । इसी साल ।ब् छपमसेमद ब्वउचंदल ने दर्शकता को मापने के लिए पहली बार दशकों पुराने डायरी सिस्टम के स्थान पर पीपुल मीटर का उपयोग आरंभ किया। इसने टेलीविजन रेटिंग की दुनिया को पहले से अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बना दिया। बाद में पीपुल मीटर का यह छोटी सी मषीन पूरी दुनिया में उपयोग लाई गई। सन 1989 में ष्टाइम मैगजीनष् की मालिक टाइप इंक औ अमेरिका की शुरूआती फिल्म निर्माण कंपनी वार्नर कम्युनिकेषंस ने विलय की घोशणा की। बाद में इसी समूह ने पहले अमेरिका ऑन लाइन की बड़ी इंटरनेट कंपनी ;2000द्धऔर  फिर टेड टर्नर के सीण्एनण्एन को अपने अंदर समाहित कर लिया था।ष्90 के दशक की शुरूआत में खाड़ी युद्ध की लाइव कवरेज के कारण सीण्एनण्एनण् चैनल पूरी दुनिया में चर्चित हो गया। हालाँकि इस दौरान अनेक प्रायोज्कों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए थेए इस कारण चैनल को काफी घाटा उढाना पड़ा था।

ऑस्ट्रेलिया
 सन् 1950 में कंजर्वेटिव फेडरल सरकार ने सत्ता सँभालते ही सोशलिस्ट सरकार  की नितियों को पलटते हुए देश में व्यावसायिक आधार से ही पब्लिक सर्विस और व्यावसायिक टेलीविजन ने साथ.साथ अपना विस्तार किया है। ऑस्ट्रेलिया में टेलीविजन प्रसारण की शुरूआत 16 सितंबरए 1956 को हुई। टेलीविजन का आरंभ ऑस्ट्रेलिया के दो प्रमुख शहरा सिडनी और मेलबोर्न में एक साथ हुआ। जबकि ब्रिसबेन और एडिलेड टेलीविजन प्रसारण सन् 1959 में शुरूहो पाया। वैसे तो सन् 1932 में ही ऑस्ट्रेलिया ब्रॉडकास्टिंग कमीशन बना दिया गया थाए लेकिन ऑस्ट्रेलिया को ब्रॉडकास्टिंग कमीशन को अपना टेलीविजन भी शुरूकरने में काफी देर हो गई। सन् 1953 में रॉयल कमीशन ने सिफारिश की कि देश में ब्रॉडकास्टिंग कमीशन को अपनी टेलीविजन सेवा भी शुरू करनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन य।ठब्द्ध नाम से एक पब्लिक सर्विस टेलीविजन भी ष्षुरू किया गयाए लेकिन रेडियो का ही एक हिस्सा होने के कारण इसे कोई विशेष महत्व तब तक नहीं दिया गया जब तक कि ।ठब् के   जनरल मैनेजर सर चार्ल्स मोसेस अपने पद से सेवानिवृत नहीं हो गए।
 सन् 1956 में बडे शहरों ;सिडनीए मेलबोर्नए ब्रिसबेनए एडिलेडए पर्थए होबर्ट और कैनबराद्ध के दर्शकों के पास दो व्यावसायिक और एक पब्लिक सर्विस चैनल उपलब्ध थे और छोटे ष्षहरों में एक.एक कॉमर्षियल चैनल को प्रसारण की अनुमति दी गई। इस प्रकार के प्रसारण की अनुमति ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कंट्रोल बोर्डय।ठब्ठद्ध द्वारा दी जाती थी। यह सिलसिला लगभग एक दशक तक चला। सन् 1965 में ऑस्ट्रेलिया की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या टेलीविजन प्रसारण के अंतर्गत आ गई थी। ऑस्ट्रेलिया में प्रसारण के शुरूआती दिनों में बड़ी संख्ण्या में अमेरिका से टेलीविजन कार्यक्रमों का आयात किया जाता था। इनमें ड्रामा  की अधिकता थी।  दूसरी किस्म के कार्यक्रम  ब्रिटेन से आयात किए जाते थेए जिनमें बीण्बीण्सी द्वारा बनाए गए प्रसिद्ध  साहित्यिक रचनाओं पर
आधारित नाटक शामिल थे। इनके अलावा कई स्टेज शो आदि कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण भी किया जाता था। ऑस्ट्रेलिया में उस समय वैराइटी शो और पहेली कार्यक्रमों का निर्माण अधिक किया जाता था। ये कार्यक्रम गुणवत्ता की दृष्टि से अमेरिकी और ब्रिटिश कार्यक्रमों की तुलना में काफी फीके लगते थे।  इनके अलावा कुछ नोकप्रिय रेडियो कार्यक्रमों का टेलीविजन रूपांतरण   भी किया गया।
 सन् 1958 मे सिडनी में पहला वीडियो रिकार्डर आयात किया गया। केबल सुविधा ना होने  के कारण एक शहर में प्रसारित कार्यक्रम को दूसरे ष्षहर तक नहीं पहुँचाया जा सकता था और इस प्रकार सन् 1964 तक ऑस्ट्रेलिया में टेलीविजन की विशय.वस्तु काफी क्षेत्रीय और अलग.थलग थी निजी चैनल निरंतर एण्बीण्सीण् को चुनौती देते रहे हैं। लेकिन बावजूद इसके एण्बीण्सीण् लंबे समय तक अपने सभी कार्यक्रम स्वमं बनाता रहा है जबकि निजी चैनलों ने जल्द ही बाहर के टेलीविजन  निर्माताओं की सेवाएँ लेनी शुरूकर दी थी। निजी चैनलों ने टेलीविजन कार्यक्रमों के फॉर्मेटों में भी काफी प्रयोग किए। सन 1964 में क्रॉफर्ड प्रोडक्शन्स द्वारा बनाई गई एक पुलिस सीरीज काफी हिट रही। यह श्रृंखला निर्माण की दृष्टि से बिलकुल नए किस्म का कार्यक्रम था। इसने दर्शकों को पहले से अधिक सच्चाई दिखाने के लिए बिलकुल अलग पृष्ठभूमिवाली सामग्री दिखाई। सन् 1967 में बीण्बीण्सी ने कार्यक्रम राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित यह पत्रकारिता आधारित कार्यक्रम काफी लोकप्रिय रहा।
 सन् 1965 में   ने ऑस्ट्रेलिया की विषय.वस्तुवाले कार्यक्रमों के लिए कोटा सिस्टम लागू कर दियाए जसके तहत सभी निजी चैनलों द्वारा भी हर हफते तीन घंटे ऑस्ट्रेलियाई कार्यक्रम दिखाना आवश्यक बना दिया गया। बाद के दिनों में यह अवधि बढ़ाकर और अधिक कर दी गइ। इसका परिणाम यह निकला कि सभी चैनल निरंतर ऑस्ट्रेलियाई कंटेंट पर जोर देने लगे। इससे सही मायने में टेलीविजन ऑस्टेलिया के आम समाज का आईना बन गया। इतना ही नहीं 80 के दशक तक आतं.आते ऑस्टेलिया टेलीविजन काय्रक्रमों का निर्यातक देश बन गया।
 सन् 1975 में ऑस्टेलिया में रंगीन प्रसारण शुरू हुआ। रंगीन टेलीविजन ने विज्ञापनदाताओं को लुभाया और परिणामस्वरूप टेलीविजन की आय में वृद्धि हुई। सन् 1976 में  ।ठब्ठ  को समाप्त करके इसके स्थान पर ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग ट्रिब्यूनल का गठन किया गया। इो न केवल सलाह देने का अधिकार था बल्कि रेडियो और टेलीविजन लाइसेंस के वितरण का काम भी सौंप दिया गया।
 सन् 1986 में आस्ट्रेलिया छोड़ा गया। उपग्रहों के विस्तार के बाद देश में चैनलों की संख्या निरंतर बढ़ी और पे चैनलों की संभावना का भी विस्तार हुआ। सन् 1987 में ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज ऐक्ट बनाया गया। बाद में 1992 में  ऑस्ट्रेलिया  ब्रॉडकास्टिंग ऑथोरिटी का गठन किया गयाए जिसने नए प्रकार की नियंत्रण व्यवस्था को जन्म दिया। सन् 1992.93 के दौरान ऑस्ट्रेलिया के बड़े ष्षहरों में कम्युनिटी टेलीविजन स्टेशनों को अनुमति दी गई।
 ऑस्टेलिया के प्रमुख चैनलों में सबसे पहला नाम आता है दि ऑस्ट्रेलियन  ब्रॉडकास्टिंग  का।  ष्70 का दशक एण्बीण्सी का स्वर्णकाल माना जाता है।

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