गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

टेलीविज़न मीडिया"


काश, भारत में भी कोई अल जज़ीरा होता !
आनंद प्रधान 18.03.2010 11.35Am
लोग दुनिया के बारे में देखना-जानना चाहते हैं, लेकिन चैनलों के स्वामित्व का ढाँचा और उनका कारोबारी मॉडल ज़िम्मेदार है। उदारीकरण और भूमंडलीकरण के गर्भ से निकले अधिकांश निजी चैनल शेयर बाज़ार में लिस्टेड कंपनियाँ हैं, जिनमें बड़ी देशी और विदेशी (मुख्यतः अमेरिकी) पूँजी लगी हुई है। इन कंपनियों का मुनाफ़ा विज्ञापन से आता है और अधिकांश विज्ञापनदाता कंपनिय


अमेरिकी चश्मे से दुनिया को देखते हैं भारत के चैनल
(पैराशूट रिपोर्टिंग से पूर्णकालिक रिपोर्टर की भरपाई की कोशिश)
आनंद प्रधान 18.03.2010 11.30Am

शुरुआत में अधिकांश चैनलों ने कहीं न कहीं मिस्र के जन उभार को एक ऐसी समस्या की तरह देखा जिसके कारण वहाँ काम करने वाले और घूमने गए भारतीय पर्यटक फँस गए हैं। इस कारण उनकी शुरुआती कवरेज में फ़ोकस उन भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने और कुछ हद तक अरब जगत की उथल-पुथल की वजह


हमारे चैनलों के भूगोल में भारत से बाहर दुनिया नहीं है
आनंद प्रधान 18.03.2010 11.00Am
पिछले दिनों दुनिया भर के समाचार मीडिया में समूचे अरब जगत, ख़ासकर मिस्र में तानाशाही के ख़िलाफ़ जनतंत्र की बहाली के लिए लाखों लोगों के सड़क पर उतरने की ख़बरें सुर्ख़ियों में छाई रहीं। पूरी दुनिया ने देखा कि कोई अठारह दिनों तक मिस्र की राजधानी काहिरा में लाखों लोग तब तक डटे रहे, जब तक 30 वर्षों से आतंक और दमन के ज़रिए राज कर रहे राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने इस्त&#


17 फ़रवरी से इंडिया टीवी कलेजा ठोककर बिग टॉस नाम से वर्ल्ड कप पर सबसे बड़ा रियलिटी शो प्रसारित कर रहा है, लेकिन उससे कोई पूछनेवाला नहीं है कि न्यूज़ चैनल पर रियलिटी शो प्रसारित करने की अनुमति किसने दी है? चैनल के ख़ुराफ़ात दिमाग़ एक के बाद एक स्टंट करने में सक्रिय हैं। सूचना एवं प्रसार

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