गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

मीडिया विमर्श के वार्षिकांक का लोकार्पण


मीडिया विमर्श के वार्षिकांक का लोकार्पण 5 जनवरी को


रायपुर। जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका मीडिया विमर्श के पांच साल पूरे होने पर रायपुर में मीडिया और लोकतंत्र विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। इस अवसर मीडिया विमर्श के वार्षिकांक का विमोचन भी होगा तथा राज्य के कई वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित भी किया जाएगा।
कार्यक्रम का आयोजन 5 जनवरी को सिविल लाइंस स्थित वृंदावन हाल में सांय चार बजे किया गया है। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि सांसद और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर होंगें तथा मुख्यवक्ता माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला होंगें। यह जानकारी देते हुए पत्रिका के प्रबंध संपादक प्रभात मिश्र ने बताया कि आयोजन के विशिष्ट अतिथि के रूप में गृहमंत्री ननकीराम कंवर, कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डा. सच्चिदानंद जोशी और हिंदी की प्रख्यात साहित्यकार श्रीमती जया जादवानी संगोष्ठी में लेंगें। आयोजन छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के अनेक साहित्यकार, पत्रकार, मीडिया शिक्षक और शोधार्थी हिस्सा लेगें।
मीडिया विमर्श का वार्षिकांक

इस बार जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका मीडिया विमर्श के पांच साल पूरे होने पर निकाला गया वार्षिकांक सोशल नेटवर्किंग साइट्स और उनके सामाजिक प्रभावों पर केंद्रित है। इस आवरण कथा का प्रथम लेख माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने लिखा है, जिसमें उन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट्स के सकारात्मक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए इसके सार्थक उपयोग की चर्चा की है।
पत्रिका के सोशल नेटवर्किंग साइट्स , चर्चा में शामिल होकर अनेक वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया प्राध्यापकों, चिंतकों एवं शोध छात्रों ने अलग-अलग विषय उठाए हैं। जिनमें प्रमुख रूप से प्रकाश दुबे, मधुसूदन आनंद, कमल दीक्षित, वर्तिका नंदा, विजय कुमार, प्रकाश हिंदुस्तानी, राजकुमार भारद्वाज,डा.सुशील त्रिवेदी,विनीत उत्पल, शिखा वाष्णेय, धनंजय चोपड़ा, संजय कुमार, अंकुर विजयवर्गीय, संजना चतुर्वेदी, कीर्ति सिंह, संजय द्विवेदी, आशीष कुमार अंशू, सी. जयशंकर बाबू ,बबिता अग्रवाल, रानू तोमर, अनुराधा आर्य, शिल्पा अग्रवाल, जूनी कुमारी, एस.स्नेहा, तृषा गौर के नाम शामिल हैं।
इसके अलावा इस अंक में भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू के बयानों से उत्पन्न विवाद पर एनके सिंह और डा. श्रीकांत सिंह की महत्वपूर्ण टिप्पणी प्रकाशित की गयी है। हिंदी को सरल बनाने के भारत सरकार के गृहमंत्रालय की पहल पर प्रभु जोशी की एक विचारोत्तेजक टिप्पणी भी इस अंक की उपलब्धि है, जो सरलता के बहाने हिंदी पर अंग्रेजी के हमले की वास्तविकता को उजागर करती है।
पत्रिका के कार्यकारी संपादक संजय द्विवेदी है । पत्रिका का मूल्य 50 रूपए है ।

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