बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

रेडियो प्रोग्राम का फार्मेट

Programm Formats
रेडियो प्रोग्राम फार्मेट


रेडियो प्रसारण की विभिन्न विधाएँ 
रेडियो उद्घोषणा- रेडियो आन होते ही हमारे घर में हमारे साथ एक और व्यक्ति उपस्थित हो जाता है, जिसे हमने देखा नहीं होता। जिससे हमारा कोई प्रत्यक्ष परिचय नहीं होता, पर फिर भी वह हमें अपरिचित नहीं लगता। वह हमसे बातचीत नहीं कर रहा होता, पर फिर भी लगता है जैसे बात-चीत हमसे हो रही हो। वह व्यक्ति उद्घोषक होता है। उद्घोषक प्रसारण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है जो सारे प्रसारण तंत्र को श्रोताओं से जोड़े रखती है। एक सफल उद्घोषक में निम्न अर्हताएँ होनी चाहिए-
   1.  उपयुक्त स्वर
   2.  भाषा का ज्ञान
   3.  भाषा प्रयोग एवं लेखन में कुशलता
   4.  उच्चारण की शुद्धता
   5.  विभिन्न विषयों में ज्ञान एवं रुचि
   6.  पूर्वाभ्यास
   7.  परिचर्चा
   8.  प्रतिभागी
   9.  संचालक
2. कॉम्पेयरिंग
कॉम्पेयर का मतलब प्रस्तुतकर्ता होता है जो कार्यक्रम में अनौपचारिकता एवं आत्मियता भरने का कार्य करता है। कम्पोजिट कार्यक्रमों में वार्ता, भेंटवार्ता और संगीत जैसे कई प्रोग्राम होते हैं। कम्पेयर में निम्न गुण होने चाहिए-
   1.  कार्यक्रम के स्वरूप और लक्षित श्रोता से परिचय
   2.  प्रस्तुत करने वाले कार्यक्रम की सम्पूर्ण जानकारी
   3.  कार्यक्रम में रोचकता लाने का प्रयास
   4.  कार्यक्रम की समयावधि में प्रोग्राम समाप्त करने की क्षमता
   5.  कम्पेयर को अचानक उत्पन्न स्थितियों को संभालने की कला आनी चाहिए।
3. वार्ता
रेडियो प्रसारण में उपयोग होने वाली विधाओं में वार्ता सबसे प्रचलित विधा है। यह विधा सबसे नीरस मानी जाती है इसीलिए इसमें लेखन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वार्ता का अर्थ लेख या भाषण नहीं बल्कि संवाद और बातचीत होता है। रेडियो प्रसारण की इस विधा में दो पक्ष होते हैं एक वार्ताकार और दूसरा श्रोता। वार्तालेखन में निम्न बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए-
   1.  लेखन में बातचीत की भाषा का उपयोग होना चाहिए।
   2.  वार्ता पढ़ने वाले को स्वयं लिखना चाहिए।
   3.  विषय की प्रस्तुति सरल होनी चाहिए।
   4.  सामान्यतः वार्ता 8 से 10 मिनिट की होती है। अतः लिखते वक्त समय का ध्यान रखना चाहिए।
   5.  लेखन में तारतम्यता और क्रमबद्धता होनी चाहिए।
4. रूपक या फीचर
पाश्चात्य विद्वान गिलगुड के अनुसार ‘कोई कार्यक्रम जो मूलतः नाटक नहीं हैं पर श्रोताओं के लिए प्रस्तुती में नाटक जैसी तकनीक का प्रयोग करता है, रूपक है। अंग्रेजी में फीचर के लिए डॉक्यूमेंट्री शब्द का प्रयोग किया जाता है। रूपक निम्न प्रकार के होते हैं-
   1. संगीत रूपक- इसमें आलेख पद्य में होता है तथा उसे संगीत में निबद्ध कर उसकी प्रस्तुति की जाती है या फिर आलेख गद्य में होता है, जिसमें काव्य के अंश भी होेते हैं।
   2. सोदाहरण रूपक- इस तरह के रूपक में, आलेख में विभिन्न तरह के उद्धरणों का प्रयोग होता है। ये उद्धरण कविता,लोकगीत या किसी के कथन के रूप में हो सकते हैं। विषय के  अनुसार उपयुक्त स्थान पर आलेख में इनका समावेश कर लिया जाता है।
   3.  इति वृत्तात्मक रूपक- इस तरह के रूपक व्यक्ति विशेष पर आधारित रहते हैं। इसमें व्यक्ति के कृतित्व, व्यक्तित्व, संस्मरण,घटनाओं आदि का समावेश रहता है।
   4.  विषय रूपक- सामयिक घटनाओं पर आधारित रहते हैं।
   5.  काल्पनिक रूपक- इसमें कल्पना एवं फेंटेसी की प्रधानता रहती है।
   6.  वृत्त रूपक- यह तथ्यों तथा प्रमाणों पर आधारित कोई सामयिक विषय या मुद्दा हो सकता है।
 5. रेडियो नाटक
रेडियो नाटक प्रसारण की एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं लोकप्रिय विधा है। रेडियो एक श्रव्य माध्यम है, जबकि नाटक दृश्य प्रधान विधा है। रेडियो नाटक में मंच पर कोई घटना नहीं घटती, जिसे देखा जा सके बल्कि संवादों को कुछ इस तरह से लिखा और बोला जाता है कि श्रोताओं को सुनते समय ऐसा लगे कि उनके समक्ष कोई रंगमंच पर नाटक खेला जा रहा है। रेडियो नाटक में अच्छा आलेख, कुशल निर्देशक, अच्छा कलाकार और उत्कृष्ट तकनीकी सुविधाएँ प्रस्तुति के लिए आवश्यक हैं।

   1.  रेडियो नाटक के विषय असीमित हैं लेकिन पौराड़िक, ऐतिहासिक,  मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, पारिवारिक, सामयिक और मानवीय विषयों पर कई नाटक रेडियो पर प्रसारित किए जाते हैं।
   2  रेडियो नाटक लेखन के लिए लेखक के मस्तिष्क में श्रव्य माध्यम की समझ होनी चाहिए।
   3.  आलेख तैयार करने से पहले लेखक को प्रस्तुतकर्ता के साथ संवाद कायम करना चाहिए।
   4.  पात्रों का चित्रण विश्वसनीय तरीके से होना चाहिए।
   5.  संवाद की भाषा में प्रवाह होना चाहिए।
   6.  संवाद छोटे एवं नाटकीयता की संभावना से परिपूर्ण होना चाहिए।
   7.  नाटक विधा में ध्वनि का विशेष महत्व होता है। अतः इसका चयन सोच-समझ कर किया जाना चाहिए।
6. खेल कार्यक्रम
खेलों की लोकप्रियता बढ़ाने में रेडियो की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रेडियो से प्रसारित खेल कमेंट्री एवं समाचार काफी सुने जाते हैं। रेडियो प्रसारण के अधिकांश केन्द्र खेलों पर विशेष कार्यक्रम खेल-पत्रिका के रूप में प्रसारित करते हैं। इन कार्यक्रमों में खिलाड़ियों, विशेषज्ञों से भेंटवार्ता, किसी विशेष खेल की जानकारी, खेल-प्रश्नोत्तरी से श्रोताओं को रूबरू करवाया जाता है।
7. आँखों देखा विवरण
रेडियो प्रसारण के विकास ने रेडियो की विधाओं मेंे नए-नए आयाम जोड़े हैं। आरंभिक दिनों में प्रसारण स्टूडियो से होता था तथा घटनाएँ समाचार के रूप में श्रोता तक पहुँचती थी। कॉमेंट्री या आँखों देखा विवरण ऐसी विधा है, जो श्रोता को उस स्थान पर उपस्थित रहने जैसा आनंद देती है। यह जीवंत प्रसारण होता है जिसमें पल-पल नया घटित होता है, दृश्य बदलता है, नए विवरण जुड़ते हैं, अतः इसमें सामान्य प्रसारण सेे भिन्न तरह की परिस्थितियाँ तथा आवश्यकताएँ होती हैं-

      किसी घटना, समारोह या खेल का आँखों देखा विवरण देते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए-
   1.  समारोह का अधिकारिक क्रमवार विवरण प्राप्त करें
   2.  समारोह या आयोजन का पिछला इतिहास, आयोजन के उद्देश्य आदि की जानकारी।
   3.  प्रतिभागियों तथा आयोजकों के संबंध में विस्तृत एवं तथ्यात्मक जानकारी।
   4.  सहायक स्रोतों, समाचार-पत्र तथा अन्य संदर्भ स्रोतों से आयोजन  का पूर्व तथा वर्तमान विवरण।
   5.  समारोह स्थल तथा आस-पास के क्षेत्र का विवरण एकत्र करें। आयोजन सथल से जुड़े ऐतिहासिक या भौगोलिक तथ्य यदि कोई हों तो उसके संबंध में सूचना प्राप्त करें। संभव हो तो स्वयं आयोजन स्थल पर कार्यक्रम से पूर्व पहुँच जाएँ।
   6.  कार्यक्रम से जुड़े विस्तृत विवरण, जैसे- संगीत, वक्ता, विभिन्न, प्रस्तुतियो या अगर खेल की कमेंट्री हो तो खिलाड़ियों के विवरण, पुराने रिकॉर्ड आदि की जानकारी प्राप्त करें।
   7.  अपने स्तर पर सभी बातों की समुचित तैयारी कर लें।
   8.  सूचनाओं एवं जानकारी का एक व्यवस्थित क्रम बनाएँ।
   9.  खेल की कमेंट्री में खिलाड़ियों के विवरण, उनके नाम के अनुसार वर्णमाला के क्रम में लगाए जा सकते हैं।
      कमेंटेटर को भाषा पर पूर्ण  अधिकार होना चाहिए। अभिव्यक्ति स्पष्ट होनी चाहिए तथा बोलने में प्रवाह होना चाहिए। उसे हमेशा पूर्व  निर्धारित विषय तथा क्रम में नहीं बोलना होता। विशेषकर खेलों में हर पल दृश्य बदलता है। शब्दों का चयन उपयुक्त होना चाहिए तथा वाक्य संरचना सीधी होनी चाहिए। अभिव्यक्ति भाव एवं शब्द चयन अवसर के अनुकूल होना चाहिए।
      समारोह या घटना के पूर्व समारोह स्थल, आयोजन, आयोजकों आदि की जानकारी श्रोताओं को दे देनी चाहिए। उपयुक्त अवसर पर चुप रहकर, अंतराल देकर घटनास्थल की गतिविधियों को, हलचल को श्रोता तक ध्वनियों के माध्यम से विवरण देते समय सलामी का आदेश, किसी लोक नर्तक जत्थे का संगीत के साथ गुजरना, संगीत के साथ बच्चों का नृत्य, आकाश में विमान का उड़ना।
      विभिन्न अवसरों का आँखों देखा हाल रिकॉर्ड किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे त्रुटियों को दूर किया जा सकता है। महत्वपूर्ण अवसरों की रिकॉर्डिंग का आर्काइब्ज के लिए भी महत्व है।

3 टिप्‍पणियां:

  1. 1. उपयुक्त स्वर
    2. भाषा का ज्ञान
    3. भाषा प्रयोग एवं लेखन में कुशलता
    4. उच्चारण की शुद्धता
    5. विभिन्न विषयों में ज्ञान एवं रुचि
    6. पूर्वाभ्यास
    7. परिचर्चा
    8. प्रतिभागी
    9. संचालक
    इनके बारे में विस्तार से बताये ...

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  2. आदरणीय श्री उपयोगी जानकारी के लिए धन्यवाद स्वीकारें ! प्रसारण से जुड़े ऐसे ही अन्य आलेख नवांकुरों के लिए निसंदेह उपयोगी होंगे आपको साधुवाद !!

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  3. मै rideo jockey का कोर्स मराठी मै कर सकता हु क्या?

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