गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

नेपाल की हिन्दी पत्रकारिता -- राजेश्‍वर नेपाली













नेपाल में हिन्दी पत्रकारिता का इतिहास बहुत पुराना नहीं हैं फिर भी नेपाल के प्रजातांत्रिक इतिहास से जुड़ी हुई है । भारत में प्रथम हिन्दी साप्ताहिक कलकत्ता से पं० युगल किशोर शुक्ल के सम्पादन में 30 मई, 1826 की प्रकाशित हुआ था और उसके पाँच वर्ष बाद कलकत्ता से ही 18 जनवरी 1831 को श्याम्सुन्दर सेन के संपादन में हिन्दी का प्रथम दैनिक प्रकाशित हुआ था । नेपाल और भारत दो निकटतम पड़ोसी ही नहीं बल्कि एक दूसरे क्वे अभाव में अस्तित्वहीन है । यही कारण है कि नेपाल का न सिर्फ हिन्दी पत्रकारिता बल्कि नेपाली पत्रकारिता का शुभारंभ भी बनारस में हुआ था ।
सन्‌ 1826 में नेपाली में युवा कवि मोतीराम भट्‌ट के बनारस प्रवास काल में सहयोग से रामकृषण वर्मा के सम्पादन में प्रथम नेपाली मासिक ‘गोरखा भारत जीवन’ पत्रिका का प्रकाशन हुआ था और नेपाल की राजधानी काठमाण्डु में पं. मोतीकृष्ण नरदेव शर्मा द्वारा 1826 में निजी स्तर के प्रेस की स्थापना के पांच वर्ष बाद सन्‌ 1898 की जुलाई (1955 साल श्रावण) से उन्होंने प्रथम नेपाली मासिक ‘सुधा सागर’ का प्रकाशन आरंभ किया था । उसके 3 वर्ष बाद ही नेपाल में सरकारी स्तर पर सन्‌ 1901 की मई 7, (24 बैशाख) 1958 से गोरखापत्र साप्ताहिक का प्रकाशन आरंभ हुआ था जो क्रमशः अर्द्ध साप्ताहिक और सप्तान में तीन बार होते हुए साढे तीन दशक पूर्व 18 फरवरी 1969 (2017 फाल्गुण 7 गते) से नेपाल का सर्वश्रेष्ठ नेपाली दैनिक के रूप में सरकारी प्रकाशन है फिर भी पचास हजार से अधिक प्रतियां नहीं छप रही है ।




नेपाल में एकतंत्रीय राणा शासन की समाप्ति के लिए सन्‌ 1947 की जनवरी 26 को कलकत्ता में नेपाली कांग्रेस की स्थापना विश्‍वेश्‍वर प्रसाद कोईराला, डॉ. डिल्लीरमण रेग्मी, महेन्द्र विक्रम शाह, महावीर शमसेर आदि द्वारा किया गया और नेपाली कांग्रेस का मुख पत्र ‘नेकार पुकार’ नेपाली साप्ताहिक वी. लाल मोक्‍तान के सम्पादन में पहले कलकत्ता से और फिर 1949 की दिसम्बर में पटना से हिन्दी साप्ताहिक के रूप में प्रकाशित कर सन्‌ 1950 की जनक्रान्ति के लिए नेपाल में जन जागरण लाने का काम किया गया । उधर बनारस में रह गये नेपालियों द्वारा ‘युगवाणी’ नेपाली साप्ताहिक का प्रकाशन 1948 की जनवरी 26 से लक्ष्मी प्रसाद देवकोटा, बालचन्द्र शर्मा, कृष्ण प्रसाद उपाध्याय (भट्‌टराई), नारायण प्रसाद उपाध्याय के संयुक्‍त६ सम्पादकत्व में किया गया, जो नेपाली जनक्रान्ति का एक कारक तत्व साबित हुआ ।




उसी समय 1850 के अगस्त में बनारस से बालचन्द्र शर्मा के सम्पादन में नेपाल का प्रथम हिन्दी साप्ताहिक ‘नव नेपाल’ का प्रकाशन किया गया जो सन्‌ पचास की नम्वबर क्रान्ति में आग उगलने का काम किया । नवबंर क्रान्ति सफल हो जाने पर १८ फरवरी १९५१ को एकतंत्रीय राणा शासन की समाप्ति के बाद नेपाल में प्रजातंत्र की स्थापना हुई फिर प्रवास से प्रकाशित पत्र-पत्रिकाओं का स्थान देश के भीतर से प्रकाशित पत्र-पत्रिकाओं ने ले लिया । उसी क्रम में काठमाण्डू से १५ फरवरी १९५१ जिस दिन साढ़े तीन महिनों के दिल्ली निर्वासन के बाद राजा त्रिभुवन सपरिवार युवराज महेन्द्र और तत्कालीन राजा वीरेन्द्र के साथ स्वदेश लौटे थे, हृदय चन्द्र सिंह प्रधान के सम्पादन में जनस्तर का प्रथम नेपाली साप्ताहिक ‘जागरण’ का प्रकाशन और प्रजातंत्र घोषणा के दूसरे दिन १९ फरवरी १९५१ से नेपाल का प्रथम नेपाली दैनिक ‘आवाज’ का प्रकाशन कविवर सिद्धिचरण श्रेष्ठ के सम्पादन में हुआ था ।




नेपाली के भीतर हिन्दी पत्रकारिता का आरंभ प्रजातंत्र स्थापना के बाद सन्‌ 1951 की जुलाई 3 (15 श्रावण 2008) से राजधानी काठमाण्डू मे भोजराज सिंह न्यौपाने के सम्पादन में तरंग साप्ताहिक के साथ हुआ । उसके अगले वर्ष 26 मई से जनकपुरधाम से ‘सात दिन’ साप्ताहिक गिरीन्द्र मोहन भट्‍६ट के सम्पादन में और फिर 15 अक्टूबर से युगेश्‍वर प्रसाद वर्मा और बद्री परासर मिश्र के सम्पादन तथा रामस्वरूप प्रसाद बी.ए. के प्रकाशनत्व में ‘मुक्‍त नेपाल’ साप्ताहिक का प्रकाश हुआ था ।
उन दिनों सम्पूर्ण नेपाल तराई का सम्पर्क स्थल पटना होने के कारण वहाँ से 23 अक्टूबर 1852 में ‘नया नेपाल’ साप्ताहिक जन कांग्रेस के मुख पत्र के रूप में अयोध्या प्रसाद के सम्पादन मे प्रकाशित हुआ । प्रजातंत्र पूर्व बनारस से प्रकाशित ‘नव नेपाल’ साप्ताहिक बाद में राजधानी काठमाण्डू से गणेश प्रसाद शर्मा के सम्पादन में 1 नवम्बर 952 से और 24 अप्रैल 1953 से मणिराज उपाध्याय के सम्पादन में ‘सही रास्ता’ साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ हुआ । इसी तरह 20 जुलाई 1955 से कैलाशपति बी. ए. के सम्पादन में ‘नया जमाना’ साप्ताहिक प्रकाशित हुआ । किन्तु सभी बाद में सभी बन्द होते गये ।




नेपाल से प्रथम हिन्दी दैनिक ‘जय नेपाल’ का प्रकाशन काठमाण्डू से 24 जुलाई 1955 से इन्द्रचन्द्र जैन के सम्पादन में हुआ उसके कुछ ही महीनों के बाद 15 जनवरी 1953 से राम सिंह के सम्पादन में वहीं से दूसरे दैनिक ‘नेपाल टाइम्स’ का प्रकाशन हुआ और 20 दिसम्बर 1958 से उमाकान्त दास के सम्पादन में ‘नेपाली’ नाम से तीसरे हिन्दी दैनिक का प्रकाशन काण्डमाडू में हुआ जो आज तक निर्बाध रूप से जारी है । प्रथम दैनिक क अप्रकाशन बन्द हो गया और दूसरे दैनिक नेपाल टाइम्स का प्रकाशन भी परिवर्तित परिस्थिति (प्रजातंत्र खत्म किए जाने के बाद) में बन्द हो जाने पर (1 जून 1964 से अंग्रेजी में और दो वर्ष बाद 1966 की सितम्बर 20 से चन्द्रलाल झा के सम्पादन में नेपाली में) प्रकाशन होकर ख्याति प्राप्त करता रहा किन्तु अब बन्द है । राजधानी काठमाण्डू के बाहर जकनपुरधाम से सात दिन और ‘मुक्‍त नेपाल’ साप्ताहिको के प्रकाशन के साथ ही विराटनगर से लक्ष्मण शास्त्री के सम्पादन में ‘आर्दशवाणी’ नेपाली+हिन्दी मासिक 1952 की अगस्त (श्रावण से कार्तिक तक) से नवम्बर तक चार अंक प्रकाशित हुआ था । उसी समय वीरगंज से कृष्ण प्रसाद मानंधर के सम्पादन में ‘नया नेपाल’ त्रैमासिक का प्रकाशन हुआ था, जिसका तीसरा अंक 20 जनवरी 1953 को प्रकाशित हुआ था । विराटनगर से नवम्बर १९५५ में आनन्द लाल श्रेष्ठ के सम्पादन में ‘ज्योति नेपाली’, हिन्दी मासिक प्रकाशन हुआ था । काठमाडू में नेपाली, नेवारी, हिन्दी और अंग्रेजी चतुर्भाशिक पाक्षिक कमर्स 17 सितम्बर 1958 को प्रकाशित हुआ । किन्तु, उससे तीन महीने पूर्व वहीं से केशवराम जोशी के सम्पादन में ‘ज्ञान विकास’ चतुर्भाषिक मासिक 12 जून से प्रकाशित हुआ था ।
नेपालगंज से 1955 में स्व. महावीर प्रसाद गुप्ता के सम्पादन में ‘नया संदेश’ मासिक का प्रकाशन हुआ और विराटनगर से रद्युनाथ ठाकुर के सम्पादन में 1957 के दिसम्बर 16 को ‘राजहंस’ साप्ताहिक प्रकाशित हुआ । साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में जनकपुरधाम से हिन्दी, नेपाली और मैथिली का त्रैमासिक नवोनाथ झा के सम्पादन में अप्रैल १९५७ में छपा था । परन्तु, दूसरे अंक नही छपा सका । आनन्द कुटी विद्यापीठ का मुखपत्र ‘आनन्द’, ‘नेपाली’, तिवारी, हिन्दी और अंग्रेजी त्रैमासिक नवम्बर 1961 मे छपा था । काठमाडू से ‘नया समाज’ साप्ताहिक शिवहर सिंह प्रधान पागल के सम्पादन में जून 1962 में प्रकाशित हुआ था । सन्‌ 1960 की दिसम्बर 16 में प्रजातन्त्र की हत्या से पूर्व नेपाल में हिन्दी दूसरी भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त रहने से हिन्दी पत्रों के साथ ही पत्रिकाओं के भी विकास हुए । इस क्रम में प्रथमतः काठमाडू से ‘कारवां’ मासिक और फिर श्री अटेर के सम्पादन में हिन्दी नेपाली मासिक पिटारी हस्तलिखित1954 अप्रैल में प्रकाशित किया गया था ।




काठमाडू से ही ‘लोकमंच’ साप्ताहिक युगेश्‍वर प्रसाद वर्मा के सम्पादन में 20 अक्टूबर 1958 से और सत्यनारायण झा के सम्पादन में नेपाल प्रजापरिषद्‌ का मुखपत्र ‘जनवाणी’ साप्ताहिक उसी वर्ष २० नवम्बर से प्रकाशित हुआ था । किन्तु ही अंकों के बाद बन्द हो गये । आनन्द प्रसाद पाठक के सम्पादन मे प्रकाशित ‘अग्रदूत’ साप्ताहिक का प्रकाशन १९६१ की जुलाई ३० को रद्द कर दिया गया । उसी अवधि में अखिल नेपाल किसान संध द्वारा किसान बुलेटिन और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा ‘जनमत’ साप्ताहिक का प्रकाशित किया गया था ।
नेपालगंज से योगेश्‍वर मिश्र के सम्पादन में 2016 फाल्गुण 7 (18 फरवरी 1960) ‘मातृभूमि’ साप्ताहिक तथा उसी वर्ष वहीं से महावीर प्रसाद गुप्ता और इन्द्रमणि मानव के संयुक्‍त सम्पादन में प्रकाशित मासिक ‘अनुराधा’ जो निकटवर्ती भारतीय क्षेत्रों में भी ख्याति प्राप्त था किन्तु 16 दिसम्बर से प्रजातंत्र की हत्या के बाद सभी बन्द कर दिया गया । नेपाल में सन्‌ 1960 के दिसम्बर १६ को संसदीय प्रजातंत्र को खत्म कर दिये जाने के बाद हिन्दी के प्रति सरकारी स्तर पर घृणा फैलायी गयी और क्रमशः सभी हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं को बन्द कर दिया गया सम्पूर्ण ताआई क्षेत्र में हिन्दी-पत्रिकाओं को बन्द कर दिया गया तथा सम्पूर्ण तरआई क्षेत्र में हिन्दी माध्यम से की जा रही पढ़आई को खत्म का राष्ट्र भाषा नेपाली को एक मात्र शिक्षा का माध्यम बनाकर भाषाई साम्राज्य फैलाया गया ।
सन्‌ 1990 की जन‍आन्दोलन द्वारा 8 अप्रैल को प्रजातंत्र की घोषणा के पूर्व तक हिन्दी को दुश्मन भाषा माना गया और हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन रोक रखा गया । जनकपुरधाम से राजेश्‍वर नेपाली द्वारा हिन्दी साप्ताहिक ‘जनमत’ प्रकाशन के लिए 1979 अक्टूबर 11 में स्थानीय प्रकाशन से सिफारिश कराकर संचार मंत्रालय को भेजा गया आवेदन बेकार हो जाने पर एक साहित्यिक मासिक ‘विदेह भूमि’ प्रकाशन के लिए फिर 1979 को फरवरी 18 को आवेदन किया गया तो सूचना विभाग द्वारा पुनः भाषा परिवर्तन कर भेजने को जिला प्रशासन कार्यालय धनुषा को लौटा दिया गया था । विगत तीस वर्षों की निरंकुश पंचायती शासन में सन्‌ १९५८ से प्रकाशित एक मात्र हिन्दी दैनिक ‘नेपाली’ जो राजधानी की चारदिवारी से बाहर तराई क्षेत्र में पहुँच ही नहीं पाता है, इसके अलावा कोई पत्र-पत्रिका प्रकाशित नहीं हुई ।
जनकपुर धाम से प्रकाशित ‘लोकमत’ नियमित साप्ताहिक है और तराई के सभी जिलों में पहुंचती है । इसके साथ ही राजधानी काठमान्डू से शुकेश्‍वर पाठक के सम्पादन मे ‘विश्लेषण’ और वीरगंज से गणेश साह के सम्पादन में ‘सन्डे टाइम्स’ दोनो साप्ताहिक प्रकाशित हो रहे हैं । सन्‌ 1952 मे प्रकाशित हो कर बन्द पड़े ‘मुक्‍त नेपाल’ साप्ताहिक जलेश्‍वर से रामस्वरूप प्रसाद बी.ए. के सम्पादन में पिछले पांच वर्षों से तथा नेपालगंज से सन्‌ १९६० में प्रकाशित होकर बन्द पड़ा मातृभूमि साप्तहैक परमानन्द मिश्रा के सम्पादन में प्रकाशित होने लगा है ।


प्रजातंत्र पुनर्स्थापना के बाद सन्‌1990 की दिसम्बर से ‘नव नेपाल’ मासिक का प्रकाशन डॉ कृष्णचन्द्र मिश्र के सम्पादन में आरम्भ हुआ था । किन्तु चार अंक प्रकाशन के बाद ही बन्द हुआ तो बन्द ही रह गया । उसी तरह गजेन्द्र प्रसाद सिंह के सम्पादन में प्रकाशित ‘इनकलाब’ साप्ताहिक कुछ ही अंकों के बन्द रहने के बाद श्रावण से पुनः नमिता सिंह के सम्पादन में मासिक रूप में प्रकाशित होने लगा है । नेपाल सद्‌भावना पार्टी का मुख पत्र ‘सद्‌भावना’ संदेश ६ वर्ष पूर्व माक्षिक रूप में प्रकाशित हुआ । किन्तु, वह भी कोई नियमितता नहीं प्राप्त कर बन्द पड़ा है । सम्प्रति राजधानी काठमाडू से हिन्दी की एकमात्र दैनिक ‘नेपाली’ और साप्ताहिक ‘विश्लेषण’ मासिक ‘इनकलाब’ तथा त्रिभुवन विश्‍वविद्यालय के हिन्दी विभाग का वार्षिक मुख-पत्र ‘साहित्य लोक’ के बाद जनकपुरधाम से साप्ताहिक लोकमत तथा एकमात्र मासिक ‘विदेह भूमि’ श्रीनारायण साह के सम्पादन में प्रकाशित हो रहा है तो साप्ताहिक ‘मुक्‍त नेपाल’ कई महीनों से बन्द है । इसी तरह परमहंस प्रभा रामचन्द्र झा रमण के सम्पादन में कई अंक प्रकाशित होकर बन्द है ।


इसके साथ ही वीरगंज से सण्डे टाइम्स और नेपालगंज का मातृभूमि तथा जलेश्‍वर का समाचार सौरभ हिन्दी का छठा साप्ताहिक है । डॉ० कृष्णचन्द्र अकादमी द्वारा त्रैमासिक ‘हिमालिनी’ और राष्ट्रीय हिन्दी प्रतिष्ठान का मुख-पत्र दो मासिक नव ‘प्रतिबिम्ब’ जनवरी से प्रकाशन आरम्भ हुआ है । इसी प्रकार नेपाल हिन्दी साहित्यकला संगम का मुख-पत्र ‘साहित्यलोक’ वार्षिक अंक के रूप में प्रकाशित किया गया है ।




नेपाल में हिन्दी पत्रकारिता के लिए बहुत ही अच्छी स्थिति होने के बावजूद भी हिन्दी पत्रकारिता के विकास में सरकारी अथवा गैर सरकारी स्तर की लगानी के अभाव से उसका समुचित उत्थान नहीं हो सका है । इसलिए आवश्‍यक है, इस क्षेत्र में निजी निवेशकर्ताओं की अन्यथा एक ही साथ आरम्भ हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन आज पांच दशक बाद नेपाली पत्र-पत्रिकाओं से आकाश-पाताल की दूरी पर नहीं रहता जबकि निकटवर्ती भारतीय क्षेत्र से करोड़ों रूपये मूल्य के हिन्दी पत्र-पत्रिकायें नेपाल में खपत होती है तो फिर नेपाल से प्रकाशित पत्र-पत्रिकाओं का उत्थान क्यों नहीं होगा? किन्तु उस दैनिक को छोड़कर किसी के पास लेटर प्रेस तक नहीं है फिर ऑफसेट प्रेस की बात तो दूर होने पर नेपाल के हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं के विकास कब और कैसे होंगे । अतः इस ओर नेपाल की सरकार तथा अन्य राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय धातृ संस्थाओं को भी समुचित ध्यान देना आवश्यक है ।

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