रविवार, 15 जनवरी 2012

 
बड़ी खबर


भारत ने कहा- माफ़ी मांगे बीबीसी PDF Print E-mail
Written by मीडिया सरकार on Friday, 13 January 2012 07:44   


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लंदन : भारतने क्रिसमस पर प्रसारित विशेष कार्यक्रम के लिए देश भ्रमण के दौरान बीबीसी प्रस्तोता जेरमी क्लार्कसन के भारतीय संस्कृति का उपहास उड़ाने को समझौते काउल्लंघनकरार देते हुए माफी मांगने को कहा है। सबसे अधिक वेतन वाले बीबीसी प्रस्तोताओं में से एक क्लार्कसन को विवादास्पद टिप्पणियों के लिए जाना जाता है।
क्लार्कसन नेटॉपगीयरकार्यक्रम प्रस्तुत किया था। कार्यक्रम के प्रसारणके बाद से ही इसके खिलाफ नस्ली सहित कई अन्य शिकायतें मिली हैं। भारतीय उच्चयोग ने गत छह जनवरी को कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता क्रिस हेलऔर बीबीसी के महानिदेशक मार्क थामसन पर उस समझौते का उल्लंघन किया जो आपने किया था।
पत्र में कहा गया है,‘इस कार्यक्रम में घटिया ताने और बेस्वाद हास्य होने के साथ ही सांस्कृतिक संवेदनशीलता की कमी थी। यह स्पष्ट रूप से वैसा नहीं है जो हम बीबीसी से उम्मीद करते हैं। मैं उस वृत्तचित्र की सामग्री और उसकी प्रस्तुति के लहजे को लेकर अपनी गहरी निराशा जताता हूं।’  उस कार्यक्रम में क्लार्कसन ने कथित रूप से भारत की ट्रेनों, शौचालयों, पहनावे, खानपान और इतिहास को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की थी। बीबीसी ने उस कार्यक्रम को लेकर 23 शिकायतें मिलने की पुष्टि की है। उसने कहा कि वह भारतीय उच्चायोग के पत्र का सीधा जवाब देगा। साभार: (एजेंसी

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केवल टीवी का डिजिटलीकरण शुरू PDF Print E-mail
Written by मीडिया सरकार on Thursday, 12 January 2012 10:44   


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सूचना व प्रसारण मंत्रालय शीघ्र ही देश के उन चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखने वाला है जहां पहले चरण में केबल इंडस्ट्री की कायापलट की योजना की शुरुआत होगी। इस पत्र में उनसे कहा जाएगा कि वे मुंबई, कोलकाता, दिल्ली और चेन्नई से शुरू हो रही केबल टीवी की डिजिटलीकरण की इस महत्वपूर्ण योजना को अपनी हर संभव मदद दें।
पहले चरण में ही सिर्फ इन मेट्रो शहरों के लिए एक करोड़ सेट टॉप बॉक्स की जरूरत होगी। सेट टॉप बॉक्स की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए और केबल टीवी के डिजिटलीकरण से जुड़ी इस योजना के लिए लोगों में जागरूकता लाने के लिए केन्द्र सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। केबल अधिनियम में बदलाव के जरिए केबल टीवी को एनॉलॉग मोड से डिजिटल मोड में बदलने के महत्वपूर्ण प्रस्ताव को हाल ही में संसद के दोनों सदनों ने स्वीकृति प्रदान की है। हाल में इस मुद्दे पर सूचना व प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित टास्क फोर्स की दूसरी बैठक में यह तय हुआ कि इस मामले में जागरूकता लाने के लिए प्रिंट और चैनलों के जरिए प्रभावी जागरूकता अभियान जरूरी है।
सरकार केबल इंडस्ट्री को वित्तीय प्रोत्साहन देने के लिए एक प्रस्ताव पर काम कर रही है और इस मुद्दे पर आगामी 13 जनवरी को संबंधित कंपनियों के साथ एक बैठक कर रही है जिसमेंकेबल टीवी दरों, चैनलों के साथ राजस्व बंटवारा, सभी पक्षों (चैनलों, बड़े केबल ऑपरेटर और केबल ऑपरेटर) के बीच समझौते आदि जुड़े हुए मुद्दों पर बात होगी। माना जा रहा है कि केन्द्र सरकार सेट टॉप बॉक्स की बड़ी संख्या में जरूरतों के मद्देनजर इसके आयात के लिए कस्टम ड्यूटी में भी रियायत दे सकती है।
सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने केबल टीवी के डिजिटलीकरण से जुड़े सभी मामलों में तेजी लाने के लिए छह उप समूह का गठन किया है जिसमें समयबद्ध तरीके से इसे पूरा करने, इसके बारे में जागरूकता लाने, सेट टॉप बॉक्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने, केबल इंडस्ट्री को वित्तीय प्रोत्साहन देने, इससे जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देने बढ़ाने के लिए गठित उप समूह शामिल हैं। 
इन विशेषज्ञ समूहों में बड़े केबल ऑपरेटरों इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन के प्रतिनिधियों और केबल ऑपरेटरों की प्रतिनिधि संस्थाओं को शामिल किया गया है।
साभार : भास्कर


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दो टीवी चैनलों को क़ानूनी नोटिस PDF Print E-mail
Written by मीडिया सरकार on Thursday, 12 January 2012 06:29   


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नई दिल्‍ली :  अंडमान के आदिवासियों के शोषण का मामला गरमाता जा रहा है। अंडमान द्वीप के आदिवासियों का सनसनीखेज वीडियो सामने आने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अंडमान प्रशासन से इस मामले में स्‍टेटस रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने स्‍थानीय प्रशासन को रिपोर्ट देने के लिए 24 घंटे की मोहलत दी है।
हालांकि, अंडमान-निकोबार प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की बात कहने की बजाय उन टीवी चैनलों को नोटिस देने का फैसला किया है, जिन्होंने आदिवासी महिलाओं को डांस करते हुए दिखाया। अंडमान-निकोबार प्रशासन ने मंगलवार को कहा कि जरवा समुदाय की आदिवासी महिलाओं को डांस करते हुए दिखाने पर दिल्ली के दो टीवी चैनलों को कानूनी नोटिस दिया जाएगा। अंडमान-निकोबार प्रशासन के मुताबिक टीवी चैनलों को यह नोटिस इसलिए दी जाएगी क्योंकि उनकी तरफ से दिखाए गए वीडियो एकतरफा थे और उन्हें दिखाने से पहले प्रशासन का पक्ष नहीं लिया गया था। 

हालांकि अंडमान के डीजीपी एस बी सिंह देओल ने वीडियो को ‘आधारहीन’ और ‘अविश्‍वसनीय’ बताया है। उन्‍होंने कहा कि वीडियो को शूट किए जाने की तारीख भी नहीं सामने आ रही है और संभव है कि इसे 2002 में शूट किया गया हो। लेकिन वीडियो जारी करने वाले ब्रिटिश पत्रकार ने दावा किया है कि यह वीडियो पुराना नहीं बल्कि नया है।

अंडमान-निकोबार पुलिस का कहना है कि वीडियो शूट करने वाले के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। अंडमान-निकोबार प्रशासन ने मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि वीडियो में जिस व्यक्ति ने जरवा महिलाओं को डांस करने के लिए कहा है, वह पुलिस वाला नहीं है। उस व्यक्ति को पुलिस वाला बता रही रिपोर्ट गलत हैं। केंद्र शासित राज्य की पुलिस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, 'यह साफ हो चुका है कि जिस समय यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया उस समय जरवा समुदाय के लोग कपड़े नहीं पहनते थे। यहां तक आज भी जंगलों में रहने वाले जरवा बिना कपड़ों के हैं। वीडियो को शूट करने वाला वीडियोग्राफर और महिलाओं को डांस के लिए उकसाने वाले ने कानून तोड़ा है।' 

यह विवाद ब्रिटिश मीडिया में एक वीडियो जारी होने के बाद सामने आया है। वीडियो में दिखाया गया है कि किस तरह अंडमान के आदिवासियों की मजबूरी का फायदा उठाया जाता है। वीडियो में यहां मौज-मस्‍ती के लिए आने वाले विदेशी सैलानियों के सामने गरीब आदिवासियों को नाचते हुए दिखाया गया है। जरावा समुदाय के ये आदिवासी आमतौर पर नंगे या कम कपड़े पहने होते हैं।
'द ऑब्‍जर्वर' के पत्रकार गेथिन चैम्‍बरलेन ने दावा किया है कि स्‍थानीय पुलिसकर्मियों ने जरावा समुदाय के आदिवासियों को खाने के लिए कुछ बिस्किट और चंद सिक्‍कों का लालच देकर सैलानियों के सामने नाचने को कहा। ब्रिटिश पत्रकार का यहां तक कहना है कि जरावा आदिवासियों तक पहुंचने के लिए स्‍थानीय पुलिसवालों को 15 हजार रुपये की रिश्‍वत देनी पड़ी थी।

गौरतलब है कि जरावा आदिवासी भारत में अंडमान द्वीप पर ही पाए जाते हैं। अब इनकी तादाद कुछ सौ तक सिमट कर रह गई है। सुप्रीम कोर्ट ने जरावा आदिवासियों के संरक्षण को लेकर पहले ही कई कदम उठाने के आदेश दे रखे हैं। जरावा आदिवासियों के संरक्षण के लिए अदालत का साफ निर्देश है कि उनके रिहायशी इलाके तक जाने वाली सड़क पर आम लोगों को न जाने दिया जाए। लेकिन स्‍थानीय पुलिसकर्मी सैलानियों से कुछ पैसे लेकर उन्‍हें आदिवासियों के इलाके तक जाने की छूट देते हैं। साभार: भास्कर 


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इंडिया टुडे के पब्लिशिंग डायरेक्टर का इस्तीफा PDF Print E-mail
Written by मीडिया सरकार on Tuesday, 10 January 2012 10:24   


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इंडिया टुडे’ में सीनियर मैनेजमेंट लेवल पर कुछ परिवर्तन किए गए हैं। ‘इंडिया टुडे’ समूह में 11 वर्षों के लंबे कार्यकाल के बाद से मैल्कम मिस्त्री, पब्लिशिंग डायरेक्टर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मिस्त्री जल्द ही एक नया वेंचर शुरू करने वाले हैं। फिलहाल मार्च के आखिर तक वे संस्थान के साथ बनें रहेंगे। एक और बदलाव के तहत मनोज शर्मा को अब ग्रुप बिजनेस हेड बनाया गया है।
बदलाव के इसी क्रम में एक और बड़ा बदलाव करते हुए। इस समय ‘इंडिया टुडे इंटाइटी  के तहत ‘इंडिया टुडे’ का प्रकाशन , विभिन्न भाषाओं में किया जाता है। इसके अलावा, ‘बिजनेस पब्लिकेशन’ और ‘रीडर्स डाइजेस्ट’ का भी प्रकाशन किया जाता है। अब इस पोर्टफोलियो में  मेल टुडेको भी शामिल किया जा रहा है। मनोज शर्मा अब इस संयुक्तो फोलियो का बिजनेस देखेंगे।
वरुण कोहली, ‘मेल टुडे’ के एड सेल्स देखेंगे। वे, ‘मेल टुडे’ के एसोसिएट पब्लिशर के तौर पर कार्य करेंगे और मनोज शर्मा को रिपोर्ट करेंगे। और  मनोज शर्मा, 'इंडिया टुडे’ समूह के सीईओ, आशीष बग्गा को रिपोर्ट करते रहेंगे।
इन बदलावों के बारे में बात करते हुए आशीष बग्गा ने कहा, “समूह में यह बदलाव,‘आईटीएमई’ की संरचना को देखते हुए किया गया है। हमने महसूस किया है कि 70 प्रतिशत से अधिक एजेंसीज और विज्ञापनदाता, ‘इंडिया टुडे मेगा ब्रांड’, ‘बिजनेस प्रकाशन’ औररीडर्स डाइजेस्ट’ के एक समान हैं। इसे देखते हुए हमने इन तीनों को एक जगह कर दिया। इसकी सफलता को देखते हुए, हम ‘मेल टुडे’ को भी इसके तहत ला रहे हैं।
इसके अलावा, समूह में एक और परिवर्तन जल्द ही किया जाएगा। इसके तहत, ‘आईटीएमई’ के पब्लिशिंग हेडक्वार्टर को मुंबई से दिल्ली लाया जाएगा।



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डूब जाएं कल से रंगमंच के महाकुंभ में PDF Print E-mail
Written by मीडिया सरकार on Saturday, 07 January 2012 09:29   


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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा 14वें भारतीय रंग महोत्सव (भारंगम) के शुभारंभ की घोषणा कर दी गई है। यदि आप रंगमंच में दिलचस्पी रखते हैं तो कल से शुरू हो रहे इस महोत्सव में शामिल किसी भी नाटक को देखने से ना चूकें। जी हां, पंद्रह दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में विभिन्न तरह के नाटकों का आप भी भरपूर मजा ले सकेंगे।
इस वर्ष यह प्रतिष्ठित महोत्सव 8-22 जनवरी तक एनएसडी सहित राजधानी के विभिन्न सभागारों में आयोजित किया जाएगा। 15 दिनों तक चलने वाला यह नाट्य महोत्सव इस वर्ष गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर को समर्पित होगा। एशियाई रंगमंच का महाकुंभ माने जाने वाले इस महोत्सव में देसी-विदेशी कुल 26भाषाओं के 96 नाटकों का मंचन किया जाएगा। इसमें 16विदेशी नाटक भी शामिल हैं। कुल नाटकों में से 17 नाटक रविंद्रनाथ टैगोर की जबकि 6 नाटक शेक्सपियर की कृतियों पर आधारित होंगे। पोलैंड को इस वर्ष महोत्सव में फोकस कंट्री के तौर पर शामिल किया गया है।
एनएसडी की चेयरपर्सन अमाल अलाना के मुताबिक टैगोर के 150वें जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में भारंगम को गुरुदेव के दूरदर्शी नाटक लेखन और आधुनिक भारतीय थियेटर में उनके योगदान को समर्पित किया गया है। महोत्सव की शुरुआत आठ जनवरी को रतन थियम के नाटक 'किंग ऑफ द डार्क चेंबर' के साथ होगी। इसके अतिरिक्त उनके लघु कथाओं पर आाधारित एकल नाटक 'स्त्री पत्र' (सीमा विश्वास) और 'पत्नी का पत्र' (गीता गुहा) का मंचन शामिल हैं। इसके अलावा महोत्सव में टैगोर की 'चंडालिका' (उषा गांगुी) और नृत्य नाटिका 'अवनी' (अनीता रत्नम) का मंचन प्रमुख है। चित्र प्रदर्शनी 'वेयर द माइंड इज विदाउट फियर' के तहत टैगोर के रचित उन नाटकों के दुर्लभ फोटोग्राफ को शामिल किया गया है, जिन्हें गुरुदेव ने स्वयं निर्देशित किया। अनुराधा कपूर ने बताया कि इस बार पोलैंड को फोकस कंट्री तौर पर शामिल किया गया है। महोत्सव के दौरान पोलैंड के तीन नाटकों का का मंचन होगा। पिछले वर्ष दक्षिण अफ्रीका बतौर फोकस कंट्री शामिल हुआ था। उन्होंने बताया कि महोत्सव में 26भाषाओं के नाटकों का मंचन होगा, जिसमें संथाली और तुलु भाषा को पहली बार शामिल किया गया। इस बार 16 देशों के 16 नाटकों का मंचन किया जाएगा, जिनमें पहली बार टर्की को शामिल किया गया है। अनुराधा कपूर ने बताया कि अभी तक भारंगम के तहत 11 सौ नाटकों का मंचन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इस बार भारंगम के आयोजन पर साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। अनुराधा ने बताया कि नाटकों के अंग्रेजी में उपशीर्षक होंगे और अंतरराष्ट्रीय खंड में ब्रिटेन, इटली, तुर्की,पोलैंड और दक्षिण अफ्रीका सहित 16 देशों के नाटकों की भी प्रस्तुति होगी। इसके अलावा उत्सव में छह प्रदर्शनियां भी शामिल हैं। महोत्सव के दूसरे शहर के तौर पर अमृतसर को शामिल किया गया है, जहां मुख्य आयोजन के अलावा 11 भारतीय और सात अंतरराष्ट्रीय नाटकों का मंचन किया जाएगा।
टिकट और बुकिंग
इन नाटकों का आनन्द आप तभी ले पाएंगे जब आप पसंदीदा शो के टिकट ले पाएं। एनएसडी ने अपने परिसर में तो कई काउंटर बनाए ही हैं
, वेबसाइट बुक माई शोपर भी टिकट उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। टिकट की कीमत इस बार 50, 100 और 200 रुपए रखी गई है।





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