शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

fake university

ना के पहिलहीं ई शिक्षा केंद्र बवाल के जड़ बन गइल बा. पार्टियन अउर नेता लोग में आपसी खींच-तान अउर जूतम पैजार जारी बा. एहिजा शानदार शैक्षिक अतीत के भग्नावशेष प भविष्य के एगो नया इबारत लिखल जाये के बा.
इहे वजह बा कि अमेरिका समेत दर्जन भर के देश एकरा में रुचि देखावत वित्तीय सहायता के घोषणा कइले बाड़े. मेंटर ग्रुप  प्रस्तावित विश्वविद्यालय के चेयरमैन, जानल-मानल अर्थशास्त्री एवं नोबेल पुरस्कार विजेता अमत्र्य सेन के सहमति से गोपा सब्बरवाल के एकर कुलपति नियुक्त कइले बा. बाकिर स्थानीय विद्वानन के ई फैसला रास नइखे आ रहल. पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर अउर अर्थशास्त्री एनके चौधरी त गोपा सब्बरवाल के नियुक्तिये प सवाल खड़ा क देले बाड़े. उनका मोताबिक गोपा के नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकन के खेलाफ बा.
टीएसआई से बातचीत में गोपा कहलीं, 'हमरा नइखे पता कि बिहार में विवाद काहे हो रहल बा. हमार नियुक्ति त मेंटर ग्रुप द्वारा भइल बा. नालंदा यूनिवर्सिटी इंटरनेशनल ह. ऊ स्थानीय नियम ना अंतरराष्ट्रीय मानक अपनावेले. हम दुनियाभर के विद्वानन से नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ावे खातिर बातचीत क रहल बानी. हमार पूरा कोशिश बा कि पढ़ावे वालन के मानक सूची बने.
अबहीं तक विश्वविद्यालय के चहारदीवारी बनावे के काम भी शुरू ना हो पवलस अउर मेंटर ग्रुप एहिजा 2013 में पढ़ाई शुरू करावे के लेके गंभीर बा. नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के लेके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी खासा उत्साहित बाड़े.असल में, उनकरे इलाका में अतना बड़ पहल होखे जा रहल बा. ई अलग बात बिया कि विश्वविद्यालय के सूत्रधार डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के विजिटर पद से हट जाये से ऊ  दुखी भी बाड़े.
डॉ. कलाम सबसे पहिले नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरोद्धार के प्रस्ताव देत सूबा के विधायकन अउर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहले रहले कि अंतरराष्ट्रीय मानक के वजह से बिहार के शैक्षिक अउर दार्शनिक ताकत के अहसास देश-दुनिया के होई. ऊ  एकरा पहिला विजिटर त बनले, बाकिर बाई-लॉज बनते पद से खुद हट गइले. बाई-लॉज के मोताबिक, राष्ट्रपति ही विजिटर बन सकेलन चाहे केहू के नॉमिनेट क सकेलन.
डॉ. कलाम  नालंदा विश्वविद्यालय के लेके कवनो टिप्पणी त ना कइलन, बाकिर सूत्र बतावेलन कि ऊ खास तौर प गोपा सब्बरवाल के नियुक्ति अउर विजिटर पद के लेके नाराज बाड़े. हाले में डॉ. कलाम पटना आइल रहले. अपना स्वाभाविक मासूमियत आ दार्शनिक अंदाज में विधानसभा में ऊ विधायकन के क्लास लेले अउर जिनगी में बेहतर करे के गुर सिखा के चल गइले.
संवाददाता उनका से सवाल त कई गो पूछले, बाकिर जवाब में कुछ कहे के बजाए मुस्कुरा के टाल दिहले. नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय प विरोध के सुर बा त अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शाखा खोले के लेके भी कम खीचतान नइखे. एन सिन्हा इंस्टीट्यूट में चल रहल अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में देश-विदेश के लगभग 300 इस्लामिक विद्वान मौजूद रहन. ओही बीच कटिहार मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन अहमद अशफॉक करीम  कहले, 'सरकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शाखा के बेवजह किशनगंज में अटकवले बिया.
एकरा से सच्चर कमेटी के सपना अधूरा लउकत बा. ऊ मुख्यमंत्री से एह मामला के प्राथमिकता के आधार प निपटावे के आग्रह कइले. ओहिजा मौजूद राज्यसभा सांसद अली अनवर मंच प आ गइले अउर कहले कि, 'मेडिकल कॉलेजन में बतौर डोनेशन 50-60 लाख रुपया छात्रन से लीहल जा रहल बा. छात्रहित अउर सूबा के भलाई खातिर एकरा प रोक लगे के चाहीं. फेर का रहे, करीम के समर्थक सभागार में ही अली अनवर के खेलाफ नारेबाजी करे लगले.
हंगामा देख मौजूद तमाम विदेशी मेहमान हक्का-बक्का रह गइले. आखिरकार मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप करे के पड़ल, शांति के अपील करे के पड़ल. इस्लामिक विद्वानन के सामने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शाखा के लेके आपनी स्थिति सफ करत नीतीश कुमार कहले, 'हम कटिहार के बदले किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शाखा खोले के बात कहले रही.
किशनगंज में तीन जगह प कुल करीब 300 एकड़ भूमि के अधिग्रहण कइल गइल, बाकिर विश्वविद्यालय प्रबंधन ओकरा लेवे से साफ इंकार क देलस. एकरा बाद प्रबंधन के ही स्थल चयन खातिर अधिकृत क दीहल गइल. ऊ भू-दान के जमीन चुनले, बाकिर ओकरा कइसे दीहल जा सकेला? एह दुनो शिक्षा केंद्रन जइसन केंद्रीय विश्वविद्यालयो के लेके भी मामला खटाई में पड़त लउकत बा.
एकरा खातिर अबहीं तक जमीन ना दीहल जाये से केंद्रीय विश्वविद्यालय पटना में किराया के एगो मकान में चल रहल बा. राज्य सरकार एकरा मोतिहारी में स्थानांतरित करे के बारे में सोच रहल बिया. एह सिलसिला में ओहिजा चार चरण में भूखंड के निरीक्षणो कइल गइल, बाकिर कुलपति जनक पांडेय मोतिहारी में विश्वविद्यालय खोले के प्रस्ताव ठुकरा देलन. 
टीएसआई से बातचीत में जनक पांडेय कहले, 'जवना भी राज्य में केंद्रीय विश्वविद्यालय राजधानी के अलावा कवनो अउर जगह खोलल गइल, ओहिजा शिक्षा के गुणवत्ता में कमी देखल गइल. मोतिहारी में भौतिक सुविधा के जबरदस्त कमी बा. एकरा अलावा पटना उतरला के बाद, ओहिजा से मोतिहारी जाये में फैकल्टी के अनावश्यक विलंब होई, काहेंकि दुनो शहर के बीच के दूरी करीब 300 किलोमीटर बा. जबकि एकरा उलटा मोतिहारी में केंद्रीय विश्वविद्यालय खोले के बारे में राज्य सरकार के तर्क बा कि एहिजा लंबा अरसा से महात्मा गांधी के नाम प विश्वविद्यालय खोले के मांग होत रहल बा.
एह सिलसिला में आंदोलनो भइल. एगो स्थानीय नेता कहेलन, 'नीतीश कुमार मोतिहारी में राजनीतिक लाभ खातिर विश्वविद्यालय खोलवावल चाहत बाड़े. नीतीश कुमार के ओहिजा से लगाव बा अउर उनकर ओहिजा जनाधारो बा. विश्वविद्यालय खुलला के स्थिति में उनका सीधा लाभ होई.
बहरहाल, सूबा में उच्च शिक्षकन के लेके खींचतान के आलम ई बा कि कुलपति लोग के नियुक्ति के लेके मामला राज्यपाल याने कुलाधिपति अउर राज्य सरकार के बीच फंसत रहेला. अगर सलट भी जाव, त बिल के लेके नोक-झोंक हो जाला.
हालही में, जब सरकार आठ बिल के राजभवन भेजलस त छव गो के ओहिजा से ई कहत लौटा दीहल गइल कि ई 'मनी बिल ह. संविधान के मोताबिक राज्य सरकार एकरा सीधा तौर प चुनौती ना दे सकत रहे. सो, वापस अइला प बिल के पहिले विधानसभा अध्यक्ष के पास भेजल गइल, फेर पुनर्विचार खातिर राजभवन. एकरा से भला केहू के नइखे हो रहल बलुक दूरगामी तौर प देखीं त एकरा में सबकर नोकसान बा.

विद्यार्थिये ना, पूंजियो के पलायन
आईआईटी होखे चाहे यूपीएससी के परीक्षा-अकसर बिहार के छात्र बाजी मारेलन बाकिर पिछला दू दशक में राज्य से बाहर जाके पढ़े वाला छात्रन के संख्या में बेतहाशा वृद्धि भइल बा. एकर वजह बा राज्य के शैक्षिक माहौल में बिखराव. अइसे में उच्च शिक्षा के ललक रखे वाला छात्रन खातिर ई राज्य माकूल नइखे रह गइल. जाहिर बा ई स्थिति से ना सिर्फ एहिजा से बड़ संख्या में छात्र पलायन कइलन बलुक पूंजी के भी बाहर जाये के वजह बनल.
जेएनयू, दिल्ली विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग-मेडिकल के प्रवेश-परीक्षा खातिर कोचिंग करावे वाला कोटा स्थित संस्थान में बिहार के छात्र भरल रहेलन. राज्य में सुपर-30 जइसन संस्थान के बहुत कमी बा, जबकि प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होखे के हसरत रखे वाला छात्रन के संख्या लाखन में बा. हं, राजधानी पटना में कोचिंग इंस्टीट्यूट सब के मेला जरूर लागल बा.
बिहार में बच्चा सब के ऊंच शिक्षा दिआवल शौक के साथे सोशल स्टेटस भी बा. एही वजह से मांई-बाप जमीन-जायदाद बेच के भी बच्चन के पढ़ावल चाहेलन. बेंगलुरु, मुंबई, कोलकाता अउर दिल्ली ही ना, देश के करीब सब हिस्सा में स्थित प्रोफशनल कॉलेजन में बिहार के छात्र मिल जइहें, अउर त अउर नेपाल के कॉलेज भी बिहार के छात्रन से गुलजार बा. राज्य में अगर छात्रन के अनुपात में प्रोफेशनल कॉलेज होते त ना त मनमानी चलत अउर ना ही डोनेशन के लफड़ा होत.  



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